चपटे कृमि (प्लैटीहेल्मिंथीज़) और प्लेनेरिया
चपटे कृमि का शरीर नरम, चपटा और फीते जैसा होता है। इनमें तीन कोशिका परतें (त्रिस्तरीय), द्विपार्श्व सममिति और देह-गुहा नहीं (अगुहीय) होती है। चपटे होने से ऑक्सीजन हर कोशिका तक विसरण से पहुँच जाती है।
प्लेनेरिया पत्थरों के नीचे साफ़ मीठे पानी में रहता है। यह छोटे रोमों पर फिसलता है। सिर पर दो आँख-बिंदु हैं जो प्रकाश पहचानते हैं और तंत्रिका कोशिकाओं का छोटा गुच्छा मस्तिष्क जैसा काम करता है। मुँह नीचे की ओर है और एक नली (ग्रसनी) बाहर निकलकर खाना पकड़ती है। आँत शाखाओं वाली, एक छिद्र की है, इसलिए गुदा नहीं होती। ज्वाला कोशिकाएँ पानी का नियंत्रण करती हैं।
प्लेनेरिया में पुनर्जनन की ज़बरदस्त शक्ति है: कटा टुकड़ा पूरा नया कृमि बन सकता है। यकृत कृमि (लिवर फ्लूक) और फीताकृमि जैसे कई चपटे कृमि परजीवी हैं, जिनमें हुक या चूषक होते हैं।
गोल कृमि (नेमैटोडा) और एस्केरिस
गोल कृमि पतले, बिना खंड के बेलन हैं जिनके सिरे नुकीले हैं। बाहर कड़ी परत (क्यूटिकल) और झूठी देह-गुहा (कूटगुहा) होती है। इनमें पूरी आँत है: मुँह, नली, गुदा। सिर्फ़ लंबाई की मांसपेशियाँ होने से ये बगल-बगल छटपटाकर चलते हैं।
एस्केरिस मनुष्य की छोटी आँत का परजीवी है। यह 15 से 35 सेमी लंबा होता है; मादा नर से बड़ी है (अलग लिंग)। यह मेज़बान का पचा भोजन खाता है और बच्चे को कमज़ोर कर सकता है। अंडे मल के साथ निकलते हैं और गंदे हाथ, मिट्टी या खाने से दूसरे व्यक्ति में पहुँचते हैं। बचाव: हाथ-खाना धोना, साफ़ पानी पीना, शौचालय का उपयोग और सलाह पर कृमिनाशक गोली।
एनेलिड (ऐनेलिडा) और केंचुआ
एनेलिडों का शरीर बाहर और अंदर दोहराए गए छल्लों यानी खंडों से बना होता है। ये त्रिस्तरीय हैं, इनमें असली प्रगुहा, द्विपार्श्व सममिति और पूरी आँत होती है।
केंचुआ (लगभग 100 से 150 खंड) नम मिट्टी में रहता है। उसकी त्वचा गीली और चिपचिपी है और उसमें बहुत रक्त नलिकाएँ हैं, इसलिए वह त्वचा से साँस लेता है। पहले और आख़िरी को छोड़कर हर खंड में छोटे बाल जैसे सीटी (setae) मिट्टी को पकड़ते हैं। आगे के पास फूली पट्टी क्लाइटेलम अंडों का कोश बनाती है। कृमि में नर और मादा दोनों अंग होते हैं (उभयलिंगी), पर दो कृमि शुक्राणु बदलते हैं।
इसमें बंद रक्त परिसंचरण है, लाल रक्त और कई जोड़ी हृदय जैसी नलिकाएँ। ज़्यादातर खंडों में कीप-नली वाला वृक्कक अपशिष्ट निकालता है। आँत में मांसल पेषणी (gizzard) मिट्टी पीसती है। केंचुए की बीट मिट्टी को उपजाऊ बनाती है।
तीनों की तुलना
| प्लेनेरिया | एस्केरिस | केंचुआ | |
|---|---|---|---|
| आकार | चपटा | गोल | गोल, छल्लों में |
| देह-गुहा | नहीं | झूठी | असली |
| आँत | शाखाओं वाली, एक छिद्र | सीधी, मुँह + गुदा | सीधी, मुँह + गुदा |
| रक्त | नहीं | नहीं | बंद |
| उत्सर्जन | ज्वाला कोशिकाएँ | नलिकाएँ | वृक्कक |
| जीवन-शैली | पानी में स्वतंत्र | परजीवी | मिट्टी में स्वतंत्र |
करके देखो
3D में: आख़िरी कदम पर जाओ। हर कृमि के लिए अनुमान लगाओ कि कितने टुकड़े बचेंगे, फिर समय का स्लाइडर चलाकर जाँचो।
घर पर (सुरक्षित): बारिश के बाद बगीचे में पत्थर के नीचे देखो। केंचुआ मिले तो उसके छल्ले गिनो और उसे नम मिट्टी में धीरे से वापस रख दो। देखो कि उसकी त्वचा गीली रहती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चपटा कृमि (प्लेनेरिया): चपटा, गुहा नहीं, शाखाओं वाली एक छिद्र की आँत, ज्वाला कोशिकाएँ
- गोल कृमि (एस्केरिस): गोल, झूठी गुहा, सीधी आँत, परजीवी
- एनेलिड (केंचुआ): खंडित, असली प्रगुहा, बंद परिसंचरण, वृक्कक, क्लाइटेलम
- तीनों: त्रिस्तरीय और द्विपार्श्व सममित
हल किए गए उदाहरण
1. तीनों में किसमें गुदा नहीं है?
प्लेनेरिया में। उसकी शाखाओं वाली आँत का एक ही छिद्र है, मुँह, इसलिए अपशिष्ट भी उसी रास्ते निकलता है।
2. केंचुआ और एस्केरिस दोनों लंबी नली जैसे दिखते हैं, फिर भी अलग समूह के क्यों हैं?
केंचुआ छल्लों में बँटा है और उसमें असली प्रगुहा और रक्त नलिकाएँ हैं। एस्केरिस में खंड नहीं हैं और सिर्फ़ झूठी गुहा है।
3. प्लेनेरिया और एस्केरिस इंसानों के लिए अलग तरह की समस्या कैसे हैं?
प्लेनेरिया तालाब में रहता है और हानिरहित है। एस्केरिस मनुष्य की आँत में परजीवी बनकर मेज़बान का भोजन लेता है।
4. केंचुए को क्लाइटेलम के पीछे दो टुकड़ों में काटा गया। कौन-सा टुकड़ा बचने की ज़्यादा संभावना रखता है?
आगे का टुकड़ा, जिसमें सिर और क्लाइटेलम है, पूँछ फिर उगा सकता है। पूँछ वाला टुकड़ा नया सिर नहीं बना पाता, इसलिए आमतौर पर मर जाता है।
आम गलतियाँ
- सब कृमियों को "एनेलिड" कह देना। सिर्फ़ केंचुए जैसे खंडित कृमि एनेलिड हैं।
- कहना कि प्लेनेरिया में गुदा है। उसमें नहीं है।
- सोचना कि केंचुए को काटने से दो केंचुए बन जाते हैं। आमतौर पर सिर वाला हिस्सा ही बचता है।
- गुहा के प्रकार मिला देना: प्लेनेरिया नहीं, एस्केरिस झूठी, केंचुआ असली।