सवाल: निर्देश कौन रखता है?
बच्चे माता-पिता जैसे दिखते हैं क्योंकि जीन माता-पिता से बच्चों को जाते हैं। 1900 तक वैज्ञानिक जान गए थे कि जीन गुणसूत्रों पर होते हैं। गुणसूत्र दो मुख्य पदार्थों से बने हैं: प्रोटीन और DNA।
प्रोटीन बेहतर विकल्प लगता था क्योंकि वह 20 अलग इकाइयों से बनता है, जबकि DNA में केवल 4 क्षार दिखते थे। तो आनुवंशिक पदार्थ कौन-सा है? तीन प्रयोगों ने जवाब दिया।
ग्रिफ़िथ का प्रयोग (1928): कोई पदार्थ जीवाणु को बदल देता है
फ़्रेडरिक ग्रिफ़िथ ने निमोनिया करने वाले जीवाणु पर काम किया। इसके दो प्रकार हैं:
- S प्रकार: चिकना, लसलसा खोल है और रोग करता है (चूहे को मारता है)।
- R प्रकार: खोल नहीं, खुरदरी कॉलोनी, हानिरहित।
| चूहे में डाला | नतीजा |
|---|---|
| जीवित R | चूहा जीता है |
| जीवित S | चूहा मरता है |
| गर्म करके मारे S | चूहा जीता है |
| मरे S + जीवित R | चूहा मरता है |
अंतिम समूह में ग्रिफ़िथ को मरे चूहे में जीवित S जीवाणु मिले। मरे S जीवाणुओं का कोई पदार्थ हानिरहित R जीवाणुओं में घुसा और उन्हें घातक S बना दिया। इस बदलाव को रूपांतरण (transformation) कहते हैं और उस पदार्थ को रूपांतरण कारक (transforming principle) नाम दिया गया। ग्रिफ़िथ को पता नहीं था कि वह पदार्थ क्या है।
एवरी, मैकलियोड और मैकार्टी (1944): पदार्थ DNA है
इन वैज्ञानिकों ने मरे S जीवाणुओं का अर्क लिया और पता लगाया कि कौन-सा रसायन रूपांतरण करता है। उन्होंने एंज़ाइमों से एक-एक रसायन तोड़ा और अर्क को जीवित R जीवाणुओं से मिलाया:
- प्रोटीन नष्ट करने वाला एंज़ाइम: रूपांतरण फिर भी हुआ।
- RNA नष्ट करने वाला एंज़ाइम: रूपांतरण फिर भी हुआ।
- DNA नष्ट करने वाला एंज़ाइम (DNase): रूपांतरण नहीं हुआ।
इसलिए रूपांतरण कारक DNA है। फिर भी कई वैज्ञानिक पूरी तरह निश्चित नहीं थे, इसलिए एक और प्रयोग चाहिए था।
हर्शी और चेज़ (1952): फ़ेज पर निशान लगाने का प्रयोग
बैक्टीरियोफ़ेज (फ़ेज) वह विषाणु है जो जीवाणु को संक्रमित करता है। उसके पास प्रोटीन का खोल है और अंदर DNA। अल्फ़्रेड हर्शी और मार्था चेज़ ने चतुर तरीका अपनाया। उन्होंने दो विशेष रेडियोधर्मी परमाणुओं से अलग-अलग हिस्सों को चमकदार बनाया:
- रेडियोधर्मी सल्फ़र (³⁵S) प्रोटीन में जाता है, क्योंकि प्रोटीन में सल्फ़र होता है पर DNA में नहीं।
- रेडियोधर्मी फ़ॉस्फ़ोरस (³²P) DNA में जाता है, क्योंकि DNA में फ़ॉस्फ़ोरस होता है पर प्रोटीन में लगभग नहीं।
- फ़ेजों के दो समूह बनाए: एक में प्रोटीन पर निशान, दूसरे में DNA पर।
- हर समूह ने जीवाणुओं को संक्रमित किया।
- थोड़ी देर बाद मिश्रण को मिक्सर में चलाकर खाली खोल जीवाणुओं से झटक दिए।
- अपकेंद्रित्र (सेंट्रीफ़्यूज) में घुमाने पर भारी जीवाणु नीचे बैठे (तलछट) और हल्के खोल द्रव में रहे।
| निशान | चमक कहाँ मिली |
|---|---|
| ³⁵S (प्रोटीन) | द्रव में (बाहर) |
| ³²P (DNA) | जीवाणुओं की तलछट में (अंदर) |
निष्कर्ष: केवल DNA जीवाणु में गया और नए विषाणु बनाए। इसलिए फ़ेज का आनुवंशिक पदार्थ DNA है।
इन प्रयोगों से क्या पता चला
- ग्रिफ़िथ: कोई पदार्थ एक कोशिका का गुण दूसरी में पहुँचा सकता है।
- एवरी: वह पदार्थ DNA है।
- हर्शी-चेज़: विषाणुओं में केवल DNA कोशिका में जाकर सब निर्देश देता है, इसलिए DNA आनुवंशिक पदार्थ है।
हम 'मुख्य' क्यों कहते हैं। अधिकतर जीवों (जीवाणु, पौधे, जंतु, मनुष्य) में DNA आनुवंशिक पदार्थ है। पर कुछ विषाणुओं, जैसे तंबाकू मोज़ेक विषाणु और फ़्लू व कोविड के विषाणुओं में आनुवंशिक पदार्थ RNA है। इसलिए DNA मुख्य आनुवंशिक पदार्थ है, एकमात्र नहीं।
आनुवंशिक पदार्थ को (1) सूचना रखना, (2) अपनी हूबहू कॉपी बनाना, (3) अगली पीढ़ी को जाना और (4) कभी-कभी बदलना (उत्परिवर्तन) आना चाहिए। DNA चारों करता है। कैसे, यह DNA की संरचना और DNA प्रतिकृति में देखो।
करके देखो: वैज्ञानिक बनो
3D में: आख़िरी चरण पर प्रोटीन पर निशान दबाओ, फिर प्रयोग चलाओ। लिखो कि चमक कहाँ पहुँची। फिर DNA पर निशान के साथ दोहराओ। पहले अनुमान लगाओ: चमक कहाँ जाएगी?
घर पर: कागज़ का मॉडल बनाओ। कार्ड पर फ़ेज बनाओ। खोल पीला और अंदर का DNA नीला रंगो। खोल और DNA अलग-अलग काटो। दो छोटे डिब्बों पर 'द्रव' और 'जीवाणु' लिखो। 'संक्रमण' के बाद कौन-सा रंग जीवाणु वाले डिब्बे में जाएगा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ग्रिफ़िथ: मरे S + जीवित R → चूहे मरते हैं (रूपांतरण)
- एवरी: प्रोटीन-नाशक एंज़ाइम → फिर भी रूपांतरण; DNase → रूपांतरण नहीं
- हर्शी-चेज़: ³⁵S प्रोटीन पर निशान; ³²P DNA पर निशान
- नतीजा: ³²P जीवाणु के अंदर मिला; ³⁵S बाहर रहा
- आनुवंशिक पदार्थ: सूचना रखे, कॉपी बने, आगे जाए, बदल सके
हल किए गए उदाहरण
1. ग्रिफ़िथ के प्रयोग में 4 समूहों के चूहों में ये डाले गए: जीवित R, जीवित S, गर्म करके मारे S, और मरे S के साथ जीवित R। कितने समूह मरते हैं?
जीवित S मारता है, और मरे S + जीवित R भी मारता है (R जीवाणु S में बदल जाते हैं)। अकेले जीवित R और अकेले मरे S नहीं मारते। इसलिए 2 समूह मरते हैं।
2. एक विद्यार्थी मरे S के अर्क में DNA नष्ट करने वाला एंज़ाइम डालकर उसे जीवित R से मिलाता है। नतीजा बताओ और कारण समझाओ।
रूपांतरण नहीं होगा, सारे जीवाणु R ही रहेंगे और चूहा जीएगा। एंज़ाइम ने रूपांतरण वाले पदार्थ DNA को नष्ट कर दिया। उसके बिना R, S में नहीं बदल सकता।
3. हर्शी-चेज़ प्रयोग में ³⁵S से चिह्नित प्रोटीन वाले फ़ेज जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और मिक्सर में चलाए जाते हैं। रेडियोधर्मिता कहाँ मिलेगी और इससे क्या पता चलता है?
द्रव में, जीवाणुओं के बाहर, क्योंकि प्रोटीन के खोल बाहर रहते हैं और झटक दिए जाते हैं। इससे पता चलता है कि प्रोटीन कोशिका में नहीं गया, इसलिए प्रोटीन आनुवंशिक पदार्थ नहीं है।
आम गलतियाँ
- कहना कि DNA में सल्फ़र होता है। सल्फ़र प्रोटीन में है, फ़ॉस्फ़ोरस DNA में।
- सोचना कि अकेले मरे S जीवाणु चूहे को मार देते हैं। नहीं मारते; रूपांतरण के लिए जीवित R चाहिए।
- किसने क्या दिखाया यह मिला देना: ग्रिफ़िथ ने रूपांतरण देखा, एवरी ने पाया कि वह DNA है, हर्शी-चेज़ ने विषाणुओं में पक्का किया।
- मानना कि हर जीव में DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है। कुछ विषाणुओं में RNA होता है।