पौधों की आनुवंशिक जानकारी का उपयोग
जीनोम किसी जीव के सभी जीनों का पूरा सेट है। वैज्ञानिक अब धान, गेहूँ, मक्का और कई पौधों का पूरा जीनोम पढ़ सकते हैं। इससे पता लगाना आसान होता है कि कौन सा जीन कौन सा गुण देता है।
- DNA मार्कर उपयोगी जीन के पास का छोटा, जाना-पहचाना DNA खंड है। प्रजनक पूरा पौधा बड़ा होने का इंतज़ार किए बिना अंकुर का DNA जाँच लेते हैं। इसे मार्कर-सहायित प्रजनन कहते हैं।
- आनुवंशिक इंजीनियरिंग एक जीव का जीन दूसरे में डालती है (जैसे Bt जीन, जो कुछ कीटों के लिए विषैला प्रोटीन बनवाता है)।
- जीनोम संपादन (जैसे CRISPR) पौधे के अपने DNA में सही जगह कुछ अक्षर बदलता है।
- लक्ष्य: अधिक उपज, सूखा और खारापन सहना, कीट-रोग प्रतिरोध, अतिरिक्त पोषण (विटामिन A, आयरन), लंबी भंडारण अवधि।
अच्छा तरीका: सुरक्षा जाँच, लेबल, प्रकृति और किसानों की रक्षा, और जनता की चिंताएँ सुनना। नियम हर देश में अलग होते हैं।
बायोमास ऊर्जा का उपयोग
बायोमास पौधों या जानवरों की वह सामग्री है जो ऊर्जा के लिए काम आती है: फ़सल का भूसा, छिलका, लकड़ी के टुकड़े, खोई (गन्ना पेरने के बाद बचा भाग), गोबर और भोजन का कचरा।
- बायोगैस: बंद टंकी में हवा के बिना सूक्ष्मजीव गीले कचरे को तोड़कर मीथेन गैस देते हैं, जो खाना पकाने या बिजली में काम आती है।
- बायो-इथेनॉल: यीस्ट चीनी या स्टार्च (गन्ना, मक्का) को किण्वित करके अल्कोहल बनाता है, जिसे पेट्रोल में मिलाते हैं।
- बायोडीज़ल: पौधों के तेल (जैसे जेट्रोफ़ा, पाम, इस्तेमाल हुआ खाने का तेल) रासायनिक रूप से डीज़ल जैसा ईंधन बनते हैं।
- सीधा जलाना या गोलियाँ: सूखे कचरे को दबाकर बॉयलर में जलाते हैं।
इसे नवीकरणीय क्यों कहते हैं: निकली कार्बन डाइऑक्साइड हाल ही में पौधों ने ली थी, इसलिए पूरे चक्र में संतुलन लगभग बन सकता है। यह अपने आप नहीं होता: ज़मीन का उपयोग, खाद और परिवहन भी मायने रखते हैं। खाने की ज़मीन पर ईंधन उगाने से खाद्य क़ीमतें बढ़ सकती हैं, इसलिए कचरे और ग़ैर-खाद्य फ़सलों को प्राथमिकता मिलती है।
उद्योग में जैव-प्रौद्योगिकी के रुझान
- भोजन और खेती: तेज़ प्रजनन, ऊतक संवर्धन से रोग-मुक्त रोपण सामग्री, घर के अंदर वर्टिकल फ़ार्म।
- दवाएँ: टंकियों में उगाए पौधे या पादप कोशिकाएँ टीके, प्रतिरक्षी और दवाएँ बनाती हैं (जैसे यू वृक्ष में पहले मिली एक कैंसर-दवा अब कोशिका कल्चर से बन सकती है)।
- सामग्री: स्टार्च या चीनी से बायोप्लास्टिक, पौधों के रेशे, प्राकृतिक रंग।
- हरित रसायन: कागज़, डिटर्जेंट और कपड़े बनाने में कठोर रसायनों की जगह एंज़ाइम।
- डेटा और AI: कंप्यूटर बड़े जीन और खेत-डेटा से सबसे अच्छी फ़सल चुनने में मदद करते हैं।
हर नए उत्पाद के लिए सवाल: क्या यह लोगों और प्रकृति के लिए सुरक्षित है? क्या यह किसानों और समुदायों के लिए निष्पक्ष है? क्या यह सचमुच कचरा और कार्बन घटाता है? करियर: पादप प्रजनक, लैब तकनीशियन, बायोप्रोसेस इंजीनियर और नियामक वैज्ञानिक।
करके देखिए: लाभ-जोखिम तालिका
कोई फ़सल चुनिए (जैसे धान)। कागज़ पर तीन स्तंभ बनाइए: लाभ, जोखिम, कौन तय करे। सूखा सहने वाले धान, पराली से बायोगैस और धान के स्टार्च से बने बायोप्लास्टिक के लिए इन्हें भरिए। आप देखेंगे कि हर तकनीक में लाभ भी है और एक सवाल भी। विशेषज्ञ भी ऐसे ही सोचते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: जीनोम = किसी जीव के सभी जीनों का पूरा सेट
- मुख्य शब्द: बायोमास = ऊर्जा के लिए प्रयुक्त पादप या जंतु सामग्री
- मुख्य शब्द: जैव ईंधन = बायोमास से बना ईंधन (बायोगैस, बायो-इथेनॉल, बायोडीज़ल)
- मुख्य शब्द: जीनोम संपादन = जीव के अपने DNA के सही अक्षर बदलना
- विचार: नवीकरणीय = निकला कार्बन हाल ही में पौधों ने लिया था
- बायोगैस मुख्यतः मीथेन (CH4) है
हल किए गए उदाहरण
1. एक खेत में 10 टन धान की पराली है। 1 टन पराली से 300 m³ बायोगैस मिले तो कुल कितनी बायोगैस संभव है?
10 × 300 = 3,000 m³ बायोगैस (सरल, गोल संख्या वाला उदाहरण)।
2. एक प्रजनक रोग-प्रतिरोध जीन के लिए DNA मार्कर से अंकुर जाँचता है। 200 में से 40 अंकुरों में जीन है। कितने प्रतिशत में है, और अंकुर क्यों जाँचे?
40 / 200 × 100 = 20%। अंकुर जाँचने से समय और खेत की जगह बचती है, क्योंकि केवल 20% को पूरा बड़ा करना है।
3. पेट्रोल मिश्रण में 10% इथेनॉल है। 50 लीटर मिश्रण में कितना इथेनॉल है?
50 का 10% = 0.10 × 50 = 5 लीटर इथेनॉल।
4. खेती की ज़मीन पर ईंधन-फ़सल उगाने का एक लाभ और एक जोखिम बताइए।
लाभ: नवीकरणीय ईंधन और किसानों की आमदनी। जोखिम: वह ज़मीन और पानी लगता है जिस पर भोजन उग सकता था, जिससे खाद्य क़ीमतें बढ़ सकती हैं।
आम गलतियाँ
- "जैव ईंधन हमेशा कार्बन-मुक्त है" सोचना। उगाने, खाद और परिवहन में भी कार्बन निकलता है।
- आनुवंशिक इंजीनियरिंग (जीन जोड़ना, अक्सर दूसरी प्रजाति का) और जीनोम संपादन (पौधे के अपने जीन के अक्षर बदलना) को मिला देना।
- यह मानना कि गुण वाला जीन हर फ़सल और जगह में एक जैसा काम करता है। पर्यावरण भी मायने रखता है।
- भूल जाना कि सुरक्षा जाँच, लेबल और जनता का भरोसा भी जैव-प्रौद्योगिकी का हिस्सा हैं।