फसलों के प्रकार और विशेषताएँ
फसलों को उनके उपयोग के हिसाब से बाँटा जाता है।
- अनाज (गेहूँ, चावल, मक्का): घास जैसे पौधे, स्टार्च वाले दाने; ऊर्जा का मुख्य भोजन।
- दलहन (चना, मूँग, अरहर): प्रोटीन वाले बीज। इनकी जड़ों में गाँठें होती हैं जिनमें मित्र बैक्टीरिया हवा की नाइट्रोजन को पौधे का भोजन बनाते हैं, इसलिए दलहन मिट्टी को उपजाऊ बनाती है।
- तिलहन (सरसों, मूँगफली, सोयाबीन): बीज जिनसे तेल निकलता है।
- जड़ और कंद वाली फसलें (गाजर, आलू): भोजन ज़मीन के नीचे जमा होता है।
- सब्ज़ियाँ और फल (टमाटर, पालक, आम): पत्ते, फूल, फल जो विटामिन और खनिज देते हैं।
- रेशा और नकदी फसलें (कपास, जूट, गन्ना): मुख्यतः बेचने के लिए।
कुछ एकवर्षी (एक मौसम की), कुछ द्विवर्षी (दो साल की) और कुछ बहुवर्षी (कई साल की, जैसे आम) होती हैं।
फसल की वृद्धि और शरीर-क्रिया
पानी, हवा और गर्मी मिलने पर बीज अंकुरित होता है। पहली जड़ और तना निकलते हैं (अंकुर)। पत्ते बढ़ते हैं, फिर फूल आते हैं जिनमें परागण होता है, और नए बीज वाले फल बनते हैं।
हर हरे पौधे के अंदर दो काम चलते हैं:
- प्रकाश संश्लेषण पत्तों में: कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + धूप से शर्करा (भोजन) और ऑक्सीजन बनती है।
- श्वसन सभी जीवित कोशिकाओं में: भोजन + ऑक्सीजन से बढ़ने की ऊर्जा मिलती है।
जड़ें पानी और खनिज सोखती हैं। पानी पत्तों के छिद्रों से भाप बनकर निकलता भी है (वाष्पोत्सर्जन), जिससे और पानी ऊपर खिंचता है और पौधा ठंडा रहता है। पौधा तब अच्छा बढ़ता है जब प्रकाश संश्लेषण से बना भोजन श्वसन में खर्च भोजन से ज़्यादा हो।
खेती का वातावरण और वृद्धि का नियमन
वृद्धि तापमान, प्रकाश, पानी, हवा, मिट्टी और पोषक तत्वों पर निर्भर है। हर फसल की एक सबसे अच्छी सीमा होती है। गेहूँ ठंडा मौसम चाहता है; धान गर्म और गीले खेत।
किसान वृद्धि को नियंत्रित करते हैं:
- सिंचाई और जल-निकास से सही पानी।
- खाद और कम्पोस्ट से पोषक तत्व।
- ग्रीनहाउस, पॉलीटनल, शेड नेट, मल्च से तापमान और प्रकाश पर नियंत्रण।
- छँटाई और विरलन: फालतू टहनियाँ या पौधे हटाए जाते हैं ताकि बाकी को ज़्यादा रोशनी और भोजन मिले।
- बुवाई का समय ऐसे चुना जाता है कि फसल को सही मौसम मिले।
प्रजनन (नई किस्में) और प्रवर्धन (नए पौधे)
प्रजनन से बेहतर किस्में बनती हैं। प्रजनक उपयोगी गुण वाले पौधों (जैसे बड़ा फल, छोटा तना, रोग-रोधकता) का मेल कराते हैं, फिर कई मौसम तक सबसे अच्छी संतान चुनते हैं। ऊतक संवर्धन जैसी आधुनिक तकनीकें इसे तेज़ कर सकती हैं।
प्रवर्धन यानी नए पौधे बनाना।
- बीज से (लैंगिक): संतान माता-पिता से थोड़ी अलग होती है।
- कायिक (अलैंगिक): कलम (गन्ना, गुलाब), ग्राफ्टिंग (आम), दाब कलम, कंद (आलू), भूस्तारी। हर नया पौधा माँ-पौधे की नकल होता है और जल्दी फल देता है।
खुद करके देखिए
कुछ चने के बीज रात भर भिगोइए, गीले कपड़े में लपेटिए और रोज़ देखिए। जड़ और तने का चित्र बनाइए। फिर 3D में तापमान 5 और 40 पर ले जाइए और देखिए कि बढ़त की रफ़्तार का क्या होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रकाश संश्लेषण: CO2 + पानी + प्रकाश → शर्करा + ऑक्सीजन
- श्वसन: शर्करा + ऑक्सीजन → ऊर्जा + CO2 + पानी
- हर कारक के सर्वोत्तम मान के पास बढ़त सबसे अच्छी होती है (3D पौधे के लिए लगभग 25 °C और 50% पानी)
- जीवन चक्र: बीज → अंकुर → फूल → फल → बीज
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण कीजिए: गेहूँ, चना, गाजर, टमाटर, सरसों।
गेहूँ: अनाज। चना: दलहन। गाजर: जड़ वाली फसल। टमाटर: फल वाली सब्ज़ी। सरसों: तिलहन।
2. दलहन को अक्सर अनाज के बाद क्यों बोया जाता है?
दलहन की जड़ों की गाँठों में बैक्टीरिया मिट्टी में नाइट्रोजन जोड़ते हैं। अगली फसल को मिट्टी में ज़्यादा भोजन मिलता है।
3. ग्रीनहाउस के अंदर 25 °C है और बाहर 38 °C। क्या अंदर बढ़त तेज़ होगी? क्यों?
हाँ। इस पौधे के लिए 25 °C सबसे अच्छा है, जबकि 38 °C बहुत गर्म है और बढ़त धीमी कर देता है।
4. माली चाहता है कि गुलाब का हर नया पौधा सबसे अच्छे पौधे जैसा ही हो। कौन-सी विधि?
कायिक प्रवर्धन, जैसे कलम। इससे माँ-पौधे की नकल मिलती है। बीज से उससे अलग पौधे बन सकते हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादा पानी या ज़्यादा गर्मी से बढ़त हमेशा तेज़ होती है। हर पौधे की एक सबसे अच्छी सीमा होती है।
- प्रकाश संश्लेषण और श्वसन को उलझाना। प्रकाश संश्लेषण रोशनी में भोजन बनाता है; श्वसन दिन-रात ऊर्जा छोड़ता है।
- कलम को बीज कहना। कलम तने, जड़ या पत्ते का टुकड़ा है और हू-ब-हू नकल देता है।
- यह मानना कि दलहन मिट्टी की नाइट्रोजन खत्म कर देती है। जड़ों की गाँठें असल में उसे बढ़ाती हैं।