कृषि की उत्पत्ति और प्रसार
कृषि का अर्थ है भोजन, रेशे या दूसरे उपयोगों के लिए जानबूझकर पौधे उगाना और पशु पालना। इससे पहले लोग शिकारी-संग्राहक थे।
पहली कृषि क्रांति (नवपाषाण, लगभग 10,000–12,000 साल पहले) कई उद्गम-केंद्रों में अलग-अलग शुरू हुई: दक्षिण-पश्चिम एशिया का उपजाऊ अर्धचंद्र (गेहूँ, जौ, बकरी), चीन की नदी घाटियाँ (धान, बाजरा), मेसोअमेरिका (मक्का, सेम, कद्दू), एंडीज़ (आलू), पश्चिम अफ़्रीका (ज्वार, रतालू) और सिंधु क्षेत्र (कपास, तिल)। लोग पसंदीदा पौधों के बीज चुनते थे; पीढ़ियों में इस पालतूकरण (domestication) से फ़सलें बड़ी और काटने में आसान हुईं।
फिर खेती प्रसार (diffusion) से फैली: लोग बीज और पशु लेकर गए, पड़ोसियों ने नक़ल की। बाद में 1492 के बाद कोलंबियाई विनिमय ने फ़सलों को महासागरों के पार पहुँचाया: मक्का, आलू, मिर्च एशिया-अफ़्रीका आए; गेहूँ, धान, मवेशी अमेरिका गए।
उगाए जाने वाले पौधे
मुख्य समूह: अनाज (धान, गेहूँ, मक्का), दालें (मसूर, सेम), तिलहन, सब्ज़ी-फल, रेशे (कपास, जूट), पेय (चाय, कॉफ़ी) और मसाले।
दूसरी कृषि क्रांति और हरित क्रांति
दूसरी कृषि क्रांति (लगभग 1700–1900, पश्चिमी यूरोप से) औद्योगिक क्रांति के साथ चली। बदलाव: बीज-ड्रिल और लोहे का हल, चार-खेत फ़सल-चक्र, पशुओं का चयनात्मक प्रजनन, ज़मीन की घेराबंदी, फिर भाप और बाद में पेट्रोल की मशीनें। नतीजा: प्रति मज़दूर ज़्यादा अनाज, तो ज़्यादा लोग कारख़ानों में काम करने शहर गए।
हरित क्रांति (तीसरी कृषि क्रांति, 1960 के दशक से) ने गेहूँ-धान की अधिक उपज वाली किस्में (HYV) सिंचाई, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और मशीनों के साथ फैलाईं। मेक्सिको, भारत (पंजाब, हरियाणा) और फ़िलीपींस में पैदावार दो-तीन गुना बढ़ी और अकाल घटे। नुक़सान: भूजल का भारी दोहन, मिट्टी-पानी का प्रदूषण, देसी बीजों का खोना, और फ़ायदा मुख्यतः उन किसानों को जो ख़र्च उठा सकते थे।
आज जैव-प्रौद्योगिकी (GM फ़सलें), GPS-ड्रोन वाली सटीक खेती और जैविक खेती ये बदलाव आगे बढ़ा रही हैं।
खेती के प्रकार और कृषि उत्पादन क्षेत्र
- निर्वाह: मुख्यतः परिवार के लिए; छोटे खेत, हाथ के औज़ार, पारिवारिक श्रम। उदाहरण: उष्ण वनों में झूम (स्थानांतरी) खेती, मानसूनी एशिया में सघन धान, सूखे इलाक़ों में चलवासी पशुपालन।
- वाणिज्यिक: बिक्री के लिए; बड़े खेत, मशीनें, मज़दूरी पर श्रम। उदाहरण: शीतोष्ण मैदानों में अनाज खेती, बाग़ान (चाय, कॉफ़ी, रबर, ताड़ तेल), मिश्रित फ़सल-पशु खेती, डेयरी, बाज़ार-बाग़बानी, पशु-फ़ार्म (रैंचिंग)।
- सघन: छोटे क्षेत्र पर बहुत श्रम या पूँजी, प्रति हेक्टेयर ज़्यादा उत्पादन।
- विस्तृत: बड़े क्षेत्र पर कम लागत, प्रति हेक्टेयर कम उत्पादन (रैंचिंग, झूम खेती)।
जलवायु, मिट्टी, उच्चावच, पानी, बाज़ार और संस्कृति तय करते हैं कि कौन-सा प्रकार कहाँ मिले, जिससे बड़े कृषि उत्पादन क्षेत्र बनते हैं। खेतों के आकार भी अलग होते हैं: लंबी पट्टियाँ, चौकोर सर्वे-ग्रिड और अनियमित खेत गाँवों की बसावट (गुच्छित, बिखरी या रेखीय) तय करते हैं।
फ़ॉन थ्यूनेन मॉडल
1826 में योहान हाइनरिख़ फ़ॉन थ्यूनेन ने एक समतल, एक-सी ज़मीन वाले मैदान में एक बाज़ार-नगर की कल्पना की, जहाँ नदी-सड़क नहीं, किसान माल ख़ुद बाज़ार ले जाते हैं और दूरी के हिसाब से ढुलाई देते हैं। सवाल: हर दूरी पर कौन-सी फ़सल सबसे ज़्यादा लाभ देगी?
भूमि लगान (प्रति हेक्टेयर लाभ) = उपज × (बाज़ार भाव − उत्पादन लागत − ढुलाई दर × दूरी)। जिन चीज़ों की ढुलाई महँगी है या जो जल्दी ख़राब होती हैं, उनका लाभ दूरी के साथ तेज़ी से घटता है, तो वे नगर के पास जीतती हैं। इससे चार छल्ले बनते हैं:
- बाज़ार-बाग़बानी और डेयरी (जल्दी ख़राब, भारी)।
- वन/लकड़ी (भारी ईंधन और निर्माण सामग्री)।
- खेत की फ़सलें और अनाज (टिकाऊ, मूल्य के हिसाब से हल्की)।
- पशुपालन और चराई (पशु ख़ुद चलकर बाज़ार जाते हैं)।
असल भू-दृश्य पूरे छल्ले नहीं होते क्योंकि नदियाँ, सड़कें, उच्चावच और आज का प्रशीतित परिवहन हैं, पर दूरी-क्षय का विचार अब भी बताता है कि दूध और सब्ज़ी शहरों के पास से क्यों आते हैं।
कृषि का वैश्विक तंत्र, परिणाम और चुनौतियाँ
आज भोजन एक वैश्विक तंत्र में चलता है: वस्तु-शृंखलाएँ किसानों को व्यापारियों, प्रसंस्करण करने वालों, सुपरमार्केट और उपभोक्ताओं से महाद्वीपों के पार जोड़ती हैं। बड़ी कृषि-व्यवसाय (agribusiness) कंपनियाँ बीज, उर्वरक और प्रसंस्करण पर नियंत्रण रखती हैं। कई देश नक़दी फ़सलें निर्यात और मुख्य भोजन आयात करते हैं।
परिणाम
- अच्छे: ज़्यादा और सस्ता भोजन, गाँवों में रोज़गार, निर्यात से कमाई।
- बुरे: वन-कटाई, मिट्टी का कटाव और लवणीकरण, जल प्रदूषण (उर्वरक बहाव), जैव-विविधता का नाश, अति-चराई से मरुस्थलीकरण, धान और मवेशियों से मीथेन।
चुनौतियाँ
लगभग 8 अरब लोगों का पेट भरना, जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, शहरों में खाद्य मरुस्थल (जहाँ ताज़ा भोजन मिलना कठिन), भोजन की बर्बादी, GM फ़सलों पर बहस, उचित व्यापार और स्थानीय भोजन। टिकाऊ तरीक़े: फ़सल-चक्र, सीढ़ीदार खेत, टपक सिंचाई, कृषि-वानिकी और संरक्षण जुताई।
कृषि में महिलाएँ
दुनिया भर में, ख़ासकर दक्षिण एशिया और अफ़्रीका में, खेती का बड़ा काम महिलाएँ करती हैं (बुआई, निराई, कटाई, पशु देखभाल, प्रसंस्करण), पर उनके पास अक्सर कम ज़मीन, कम कर्ज़, कम प्रशिक्षण और कम मशीनें होती हैं। महिलाओं को ज़मीन, कर्ज़ और प्रशिक्षण में बराबरी मिले तो खेती की पैदावार और परिवार का पोषण दोनों बढ़ते हैं।
करके देखें: थ्यूनेन बनिए
आख़िरी 3D चरण में वे दूरियाँ ढूँढिए जहाँ जीतने वाला भूमि-उपयोग बदलता है (लगभग 3, 6 और 11 km)। डेयरी नगर के पास क्यों जीतती है पर जल्दी क्यों हारती है? घर पर: रसोई में फल, सब्ज़ी, अनाज और पैक्ड सामान के लेबल देखिए। कौन सबसे दूर से आया? क्या यह छल्लों से मेल खाता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भूमि लगान = उपज × (भाव − लागत − ढुलाई दर × दूरी)
- थ्यूनेन के छल्ले: डेयरी/सब्ज़ी → वन → अनाज → पशुपालन
- पहली क्रांति: पालतूकरण (~10,000 साल पहले)
- दूसरी क्रांति: औज़ार, फ़सल-चक्र, मशीनें (~1700–1900)
- हरित क्रांति: HYV बीज + सिंचाई + उर्वरक (1960 से)
- निर्वाह बनाम वाणिज्यिक; सघन बनाम विस्तृत
हल किए गए उदाहरण
1. एक सब्ज़ी की उपज 10 t/ha, भाव 30 प्रति t, उगाने की लागत 10 प्रति t और ढुलाई 4 प्रति t प्रति km है। 2 km पर भूमि लगान निकालिए।
लगान = 10 × (30 − 10 − 4 × 2) = 10 × (30 − 10 − 8) = 10 × 12 = 120 प्रति हेक्टेयर।
2. इसी सब्ज़ी के लिए किस दूरी पर लगान शून्य हो जाएगा?
30 − 10 − 4d = 0 → 4d = 20 → d = 5 km। 5 km से आगे सब्ज़ी उगाना घाटे का सौदा है, तो दूसरा भूमि-उपयोग आ जाता है।
3. हरित क्रांति के बाद एक ज़िले में गेहूँ की उपज 1.5 t/ha से 4 t/ha हुई। कितने गुना बढ़ी, और इस बदलाव की दो क़ीमतें बताइए।
गुणक = 4 ÷ 1.5 ≈ 2.7 गुना। क़ीमतें: भारी सिंचाई से भूजल स्तर गिरा, और उर्वरक-कीटनाशक से मिट्टी व पानी प्रदूषित हुए (साथ ही देसी बीज किस्में खोईं)।
आम गलतियाँ
- सोचना कि खेती एक जगह शुरू होकर वहीं से फैली। यह कई उद्गम-केंद्रों में अलग-अलग शुरू हुई।
- सघन को वाणिज्यिक समझ लेना। छोटा निर्वाह धान खेत भी बहुत सघन हो सकता है।
- कहना कि थ्यूनेन के छल्ले मिट्टी की उर्वरता से बनते हैं। मॉडल एक-सी मिट्टी मानता है; दूरी और ढुलाई लागत तय करते हैं।
- हरित क्रांति को सिर्फ़ सफलता कहना। पैदावार बढ़ी पर पानी, मिट्टी और असमानता की समस्याएँ भी आईं।