CBSE कक्षा 11 कृषि
अध्याय: 4
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. कृषि और फ़सल उत्पादन
क्षेत्र, पर्यावरण और फ़सल उत्पादन
- कृषि की मूल बातें: खेती कैसे शुरू हुई, बदली और दुनिया का पेट भरती है – कृषि का अर्थ है जानबूझकर फ़सल उगाना और पशु पालना। यह लगभग 10,000–12,000 साल पहले कई अलग-अलग उद्गम-केंद्रों में शुरू हुई, जहाँ लोगों ने जंगली पौधों और जानवरों का पालतूकरण किया; फिर यह प्रसार से फैली। दूसरी कृषि क्रांति (लगभग 1700–1900) बेहतर औज़ार, फ़सल-चक्र और मशीनें लाई, तो कम किसान ज़्यादा लोगों का पेट भरने लगे। हरित क्रांति (1960 के दशक से) ने अधिक उपज वाले बीज, सिंचाई और उर्वरक अपनाए। खेती निर्वाह या वाणिज्यिक, सघन या विस्तृत हो सकती है। फ़ॉन थ्यूनेन मॉडल बताता है कि बाज़ार के चारों ओर भूमि-उपयोग छल्ले क्यों बनाता है। आज कृषि एक वैश्विक तंत्र है जिसके सामने टिकाऊपन, जलवायु, ज़मीन, खाद्य सुरक्षा और महिलाओं की बराबर भूमिका की चुनौतियाँ हैं।
3. आनुवंशिकी और पादप प्रजनन
पादप प्रजनन
- पादप प्रजनन: बेहतर फ़सलें बनाना – पादप प्रजनन = फ़सल के जीन जान-बूझकर बदलकर बेहतर क़िस्में बनाना: अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता, रोग-कीट प्रतिरोध, और सूखा, लवण, गर्मी या ठंड सहनशीलता। सबसे पुरानी विधि कृत्रिम चयन है: पीढ़ी दर पीढ़ी केवल अच्छे पौधों के बीज रखना। संकरण दो जनकों को मिलाता है ताकि संतान को दोनों के अच्छे गुण मिलें। अंतःप्रजनन (निकट संबंधी या स्व-परागण) शुद्ध वंश बनाता है; ज़्यादा हो तो अंतःप्रजनन अवसाद। बहिःप्रजनन असंबंधित वंशों को मिलाता है; दो शुद्ध वंशों का F1 संकर अक्सर दोनों से बेहतर होता है (संकर ओज)। अंतरजातीय संकरण (गेहूँ × राई = ट्रिटिकेल) में गुणसूत्र दोगुने करने पड़ते हैं। आधुनिक औज़ार: उत्परिवर्तन, बहुगुणिता, ऊतक संवर्धन, DNA मार्कर और जीन संपादन। वाविलोव ने बताया कि फ़सलों के उत्पत्ति केंद्र होते हैं और संबंधित प्रजातियों में विविधता की समजात श्रेणी होती है।
4. पशुधन उत्पादन
पशुधन
- पशुपालन: खेत के पशुओं की देखभाल – पशुपालन खेत के पशुओं के प्रजनन, आहार, आवास और स्वास्थ्य देखभाल का विज्ञान है। पशुधन (गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, मुर्गी) से दूध, अंडे, मांस, ऊन, खेती की ताक़त और खाद मिलती है, और छोटे किसानों को रोज़ की आय। अच्छे प्रबंधन में सही नस्ल, साफ़ हवादार बाड़ा, साफ़ पानी और संतुलित आहार, समय पर टीका और कृमिनाशन, और गोबर जैसे जैव-अपशिष्ट से बायोगैस, कंपोस्ट और खाद बनाना शामिल है। सरकारें नस्ल सुधार, बीमा, ऋण और पशु-चिकित्सा सेवाओं से किसानों की मदद करती हैं।