पर्यावरण के तत्व
फसल का पर्यावरण वह सब कुछ है जो उसके जीवन पर असर डालता है। इसे पाँच भागों में सोचो।
- रोशनी: भोजन बनाने (प्रकाश संश्लेषण) के लिए ऊर्जा देती है। दिन की लंबाई कुछ पौधों को बताती है कि फूल कब देना है।
- तापमान: हर फसल की एक सही सीमा होती है। धान को गर्मी पसंद है, गेहूँ को ठंड। बहुत गर्म या बहुत ठंडा हो तो पौधा धीमा पड़ जाता है।
- पानी: जड़ें इसे पीती हैं; यह भोजन को ऊपर ले जाता है और पत्तों को ठंडा रखता है।
- हवा: पत्ते कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं; जड़ों को मिट्टी के छेदों से ऑक्सीजन चाहिए।
- मिट्टी और जीव: मिट्टी सहारा, पानी और खनिज (पोषक तत्व) देती है। केंचुए, सूक्ष्मजीव, कीट और खरपतवार भी वहीं रहते हैं।
कुछ कारक निर्जीव हैं (रोशनी, तापमान, पानी, हवा, मिट्टी) और कुछ सजीव (सूक्ष्मजीव, कीट, खरपतवार)। अच्छा किसान सबको साथ देखता है।
सबसे कमज़ोर कारक वृद्धि तय करता है
पौधे को सभी कारक एक साथ चाहिए। एक भी कम हो तो पौधा उससे आगे नहीं बढ़ सकता, चाहे बाकी सब बढ़िया हों। इसे सीमाकारी कारक का नियम कहते हैं। 3D में पानी 1 पर और बाकी 6 पर रखो: वृद्धि कम रहेगी। पानी ठीक करो तो वृद्धि उछल जाती है।
ज़्यादा भी बुरा है। बहुत पानी से जड़ें डूब जाती हैं (हवा नहीं मिलती)। बहुत खाद से जड़ें जल जाती हैं। इसलिए हर कारक की एक सही सीमा होती है, "जितना ज़्यादा उतना अच्छा" नहीं।
पदार्थ का चक्र (Cycling of matter)
खेत में पदार्थ ख़त्म नहीं होता; वह घूमता रहता है।
- कार्बन: पत्ते हवा से CO2 लेकर शर्करा बनाते हैं। पौधे-जानवर श्वसन करें या मरा पदार्थ सड़े तो CO2 हवा में लौट जाती है।
- पानी: बारिश गिरती है, जड़ें पीती हैं, पत्ते भाप छोड़ते हैं (वाष्पोत्सर्जन), फिर बादल बनते हैं।
- पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटैशियम आदि): जड़ें इन्हें मिट्टी से लेती हैं। गिरे पत्ते, फसल के ठूँठ और गोबर सड़ते हैं और सूक्ष्मजीव पोषक तत्व मिट्टी में वापस डालते हैं।
कटाई करके फसल बाहर ले जाएँ तो पोषक तत्व भी खेत से चले जाते हैं। कुछ वापस न दें तो मिट्टी कमज़ोर हो जाती है। इसीलिए किसान कम्पोस्ट, गोबर की खाद या उर्वरक डालते हैं और फसल-चक्र अपनाते हैं (दलहन नाइट्रोजन लौटाती है)।
खेती की तकनीकें और पर्यावरण
किसान सूरज नहीं बदल सकते, पर फसल के आसपास का छोटा-सा वातावरण बदल सकते हैं।
- जुताई: मिट्टी ढीली करती है ताकि जड़ों को हवा और पानी मिले।
- सिंचाई: बारिश कम हो तो पानी देती है। ड्रिप पाइप सीधे जड़ों तक पानी देते हैं और कम बर्बाद करते हैं।
- मल्चिंग: भूसे या पत्तों की परत मिट्टी को ठंडा और नम रखती है और खरपतवार रोकती है।
- दूरी और बुवाई का समय: पौधे बहुत पास हों तो रोशनी के लिए लड़ते हैं; सही मौसम में बोने से सही तापमान मिलता है।
- छाया-जाल, वायुरोधी, ग्रीनहाउस: गर्मी, हवा और ठंड को कम करते हैं।
- कम्पोस्ट और फसल-चक्र: मिट्टी के भोजन का चक्र चलाते रहते हैं।
हर तकनीक एक या अधिक कारक बदलती है। चुनते समय पूछो: मेरा सबसे कमज़ोर कारक कौन-सा है?
करके देखो: चने/सेम के गमले का परीक्षण
एक जैसी मिट्टी के 3 छोटे गमले लो और हर में 3 बीज डालो। सबको रोशनी में रखो। अंकुर निकलने के बाद गमला A को पानी मत दो, B को रोज़ एक कप, C को रोज़ बाल्टी भर (बिना निकासी)। 7 दिन बाद स्केल से ऊँचाई नापो। पहले अनुमान लगाओ कि कौन सबसे ऊँचा होगा, फिर जाँचो। B जीतना चाहिए क्योंकि पानी की एक सही सीमा होती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वृद्धि सबसे कमज़ोर कारक से तय होती है (सीमाकारी कारक का नियम)
- कारक: रोशनी, पानी, पोषक तत्व, तापमान, हवा
- प्रति हेक्टेयर पौधे = 10 000 m² ÷ (कतार की दूरी × पौधे की दूरी, मीटर में)
- पानी का आयतन (m³) = क्षेत्रफल (m²) × गहराई (m)
हल किए गए उदाहरण
1. एक पौधे में रोशनी 8/10, पानी 3/10, पोषक 7/10, तापमान 9/10 है। कौन-सा कारक उसे रोक रहा है?
पानी सबसे कम (3/10) है, इसलिए पानी वृद्धि रोक रहा है। रोशनी या पोषक ठीक करने से फ़ायदा नहीं; पहले पानी दो।
2. कतारों में 50 cm और पौधों में 20 cm की दूरी है। 1 हेक्टेयर (10 000 m²) में कितने पौधे लगेंगे?
हर पौधे को 0.5 × 0.2 = 0.1 m² जगह चाहिए। पौधे = 10 000 ÷ 0.1 = 1 00 000।
3. किसान 2 हेक्टेयर में 50 mm सिंचाई करता है। यह कितने घन मीटर पानी है?
2 हेक्टेयर = 20 000 m²। 50 mm = 0.05 m। आयतन = 20 000 × 0.05 = 1000 m³।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि किसी भी चीज़ का ज़्यादा होना हमेशा अच्छा है। बहुत पानी या खाद पौधे को नुकसान देती है।
- ग़लत कारक ठीक करना। पानी की कमी वाले पौधे में खाद डालने से कुछ नहीं होता।
- यह भूल जाना कि कटाई से पोषक तत्व बाहर चले जाते हैं, इसलिए मिट्टी को वापस खिलाना ज़रूरी है।
- निर्जीव (रोशनी, पानी, मिट्टी) और सजीव (सूक्ष्मजीव, कीट, खरपतवार) कारकों को आपस में मिला देना।