फूलों के प्रकार और विशेषताएँ
फूल वाले पौधे इस आधार पर बाँटे जाते हैं कि वे कितने दिन जीते हैं।
- एकवर्षीय: एक मौसम में उगते, खिलते और खत्म हो जाते हैं, जैसे गेंदा और ज़िन्निया।
- द्विवर्षीय: दूसरे साल खिलते हैं।
- बहुवर्षीय: कई साल जीते हैं और हर साल खिलते हैं, जैसे गुलदाउदी और गुलाब।
- कंद वाले पौधे: ज़मीन के नीचे कंद में भोजन जमा करते हैं, जैसे ट्यूलिप और लिली।
उपयोग के हिसाब से भी बाँटते हैं: कट फ्लावर, गमले के पौधे और क्यारी के पौधे।
फूलों की वृद्धि और शरीर क्रिया
फूल वाला पौधा चरणों में बढ़ता है: बीज → अंकुरण → नन्हा पौधा → पत्तियों वाली वृद्धि → कली → फूल → बीज। पहले पत्तियाँ और तना बनते हैं (कायिक अवस्था)। बाद में कलियाँ बनती हैं (जनन अवस्था)।
फूल आना शुरू करने के दो बड़े इशारे हैं। प्रकाश अवधि यानी दिन की लंबाई। लंबे दिन वाले पौधे लंबे दिन में खिलते हैं, छोटे दिन वाले पौधे छोटे दिन में। तापमान भी ज़रूरी है: कुछ पौधे, जैसे ट्यूलिप, खिलने से पहले ठंड का दौर माँगते हैं।
खेती का वातावरण और वृद्धि का नियंत्रण
पौधों को सही रोशनी, तापमान, पानी, हवा और मिट्टी चाहिए। हर पौधे का एक सबसे अच्छा तापमान होता है; उससे बहुत ज़्यादा या कम पर बढ़ना धीमा होता है।
किसान ग्रीनहाउस में वृद्धि को काबू करते हैं: दिन छोटा करने को काला कपड़ा, लंबा करने को बल्ब, तापमान के लिए हीटर या पंखे, पानी के लिए ड्रिप पाइप। वे शीर्ष तोड़ना (पौधे को झाड़ीदार बनाने के लिए सिरा काटना) और वृद्धि नियामकों का सावधानी से उपयोग भी करते हैं, ताकि फूल खरीदार की ज़रूरत वाली तारीख पर खिलें।
प्रजनन और प्रवर्धन
प्रवर्धन यानी नए पौधे बनाना।
- बीज: सस्ता, पर पौधे अलग-अलग निकल सकते हैं।
- कलम: तने का टुकड़ा पानी या मिट्टी में जड़ पकड़ता है; नया पौधा माँ-पौधे की नकल होता है।
- बँटवारा: कंद या झुंड को टुकड़ों में बाँटना।
- ऊतक संवर्धन: प्रयोगशाला में छोटे टुकड़े से बहुत से नन्हे पौधे।
प्रजनन से नई किस्में बनती हैं। एक फूल का परागण दूसरे फूल पर रखा जाता है, बीज उगाए जाते हैं और सबसे अच्छे पौधे (रंग, आकार, गुलदान में ज़्यादा टिकना, रोग से बचाव) चुने जाते हैं। इससे संकर बनता है।
खुद करके देखिए
3D में दिन की लंबाई 9 घंटे और फिर 15 घंटे रखकर बीच वाला पौधा देखिए। फिर तापमान 30 से 14 पर लाकर कंद वाला पौधा देखिए। घर पर मनी प्लांट या तुलसी की कलम पानी के गिलास में रखिए और जड़ निकलने का दिन लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वृद्धि के चरण: बीज → नन्हा पौधा → पत्तियाँ → कली → फूल
- लंबे दिन वाला पौधा तब खिलता है जब दिन अपनी सीमा से लंबा हो
- छोटे दिन वाला पौधा तब खिलता है जब दिन अपनी सीमा से छोटा हो
- मुख्य शब्द: एकवर्षीय, बहुवर्षीय, कंद, प्रकाश अवधि, कलम, बँटवारा, संकर
हल किए गए उदाहरण
1. एक पौधा एक मौसम जीकर खत्म हो जाता है। वह किस प्रकार का है?
एकवर्षीय, जैसे गेंदा।
2. किसान चाहता है कि गुलदाउदी शरद में खिले, जब दिन छोटे होने लगते हैं। वह ग्रीनहाउस में क्या कर सकता है?
गुलदाउदी छोटे दिन वाला पौधा है, इसलिए किसान उसे काले कपड़े से ढककर दिन छोटा कर देता है, जिससे कलियाँ बनती हैं।
3. कौन-सा तरीका माँ-पौधे की हू-ब-हू नकल देता है?
कलम (या बँटवारा या ऊतक संवर्धन), क्योंकि बीज की मिलावट नहीं होती।
4. ट्यूलिप के कंद को लगाने से पहले ठंडे गोदाम में क्यों रखते हैं?
ट्यूलिप को खिलने से पहले ठंड का दौर चाहिए, इसलिए ठंडा गोदाम उसे तैयार करता है।
5. प्रजनक ऐसे गुलाब चाहता है जो गुलदान में ज़्यादा टिकें। चरण बताइए।
दो गुलाबों के बीच परागण कराइए, बीज बोइए, पौधे उगाइए, हर फूल के टिकने की जाँच कीजिए, सबसे अच्छे पौधे रखिए और यही दोहराइए।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सब फूलों को एक जैसा दिन चाहिए। लंबे दिन और छोटे दिन वाले पौधे अलग होते हैं।
- बहुवर्षीय और कंद को एक मानना। कंद भोजन का भंडार है; बहुवर्षीय कई साल जीने वाला पौधा है।
- यह मानना कि बीज हमेशा माँ-पौधे जैसा पौधा देता है। नकल कलम से मिलती है।
- भूल जाना कि बहुत गर्मी भी वृद्धि धीमी करती है। हर पौधे का सबसे अच्छा तापमान होता है।