पादप रोग की पहचान: लक्षण
लक्षण वह चीज़ है जो दिखती है और बताती है कि पौधा ठीक नहीं है। देखिए:
- रुकी हुई बढ़त: पौधा छोटा रह जाता है
- पत्तियों पर धब्बे
- सड़न वाले हिस्से
- गाँठें या उभार
- टेढ़े-मेढ़े तने या पत्तियाँ
- रंग बदलना: पीले, भूरे या फीके धब्बे
- दिखने वाले कीट
कारण: रोगाणु, कीट और खनिज की कमी
रोगाणु
रोगाणु (पैथोजन) वह सूक्ष्मजीव है जो रोग करता है। वायरस का उदाहरण: टोबैको मोज़ेक वायरस पत्तियों पर पीले-हरे धब्बे बनाता है, इसलिए प्रकाश-संश्लेषण कम और बढ़त कम। कवक का उदाहरण: गुलाब का काला धब्बा रोग, पत्तियाँ पीली होकर जल्दी गिरती हैं।
कीट
एफ़िड (माहू) छोटे कीट हैं जो फ्लोएम से मीठा रस चूसते हैं। पौधे का भोजन घटता है, और ये वायरस एक पौधे से दूसरे तक ले जाते हैं।
खनिज आयनों की कमी
- नाइट्रेट से प्रोटीन बनता है। कम हो = रुकी हुई बढ़त।
- मैग्नीशियम से क्लोरोफ़िल बनता है। कम हो = पीली पत्तियाँ, जिसे क्लोरोसिस (हरिमाहीनता) कहते हैं।
इनमें रोगाणु नहीं होता, इसलिए दवा नहीं, खाद काम आती है।
रोग का नाम पता करना
- लक्षणों को बागवानी किताब या भरोसेमंद वेबसाइट से मिलाइए।
- पौधे का नमूना लैब भेजिए ताकि रोगाणु पता चले।
- टेस्ट किट लगाइए। कई किट में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी होती हैं जो सिर्फ़ एक रोगाणु से चिपककर रंग दिखाती हैं।
पौधों के बचाव के तरीक़े
भौतिक बचाव (रोगाणुओं के लिए रुकावट)
- पत्तियों पर मोमी उपत्वचा (क्यूटिकल) रोगाणु को अंदर नहीं आने देती।
- सेलुलोज़ कोशिका भित्ति तोड़ना कठिन है।
- तने पर मृत कोशिकाओं की परत, जैसे छाल, ढाल बनती है और रोगाणुओं समेत गिर जाती है।
रासायनिक बचाव
- जीवाणुरोधी रसायन जीवाणु मारते हैं (नीम और कई जड़ी-बूटियाँ)।
- ज़हर जानवरों को खाने से रोकते हैं (जैसे तंबाकू, फ़ॉक्सग्लव)।
यांत्रिक बचाव (जानवरों के विरुद्ध)
- काँटे और रोएँ जानवरों को छूने या खाने से रोकते हैं।
- छूने पर मुड़ने वाले पत्ते कीटों को गिरा देते हैं (छुई-मुई)।
- नक़ल (मिमिक्री): कुछ और जैसा दिखकर धोखा देना, जैसे कीट के अंडों जैसे धब्बे।
करके देखिए: छुई-मुई को धीरे से छूइए और गिनिए कि पत्ते दोबारा खुलने में कितना समय लेते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रोगाणु: रोग करने वाला सूक्ष्मजीव (वायरस, जीवाणु, कवक या प्रोटिस्ट)
- नाइट्रेट आयन → प्रोटीन → बढ़त; कमी = रुकी हुई बढ़त
- मैग्नीशियम आयन → क्लोरोफ़िल; कमी = क्लोरोसिस (पीली पत्तियाँ)
- भौतिक बचाव = रुकावट; रासायनिक बचाव = पदार्थ; यांत्रिक बचाव = बनावट या हलचल जो जानवरों को रोके
- एफ़िड: रस चूसने वाला कीट जो पौधे को कमज़ोर करता और वायरस फैलाता है
हल किए गए उदाहरण
1. टमाटर के पौधे की पत्तियाँ फीकी पीली हैं, पर लंबाई सामान्य है और कीट नहीं दिखते। कारण और उपाय बताइए।
शायद मैग्नीशियम की कमी: क्लोरोफ़िल के लिए मैग्नीशियम चाहिए, इसलिए पत्तियाँ पीली (क्लोरोसिस)। मैग्नीशियम वाली खाद डालिए।
2. पत्तियों पर पीला-हरा मोज़ेक है और पौधा ठीक से नहीं बढ़ रहा। बढ़त कम क्यों?
यह टोबैको मोज़ेक वायरस जैसा है। बदरंग हिस्सों में क्लोरोफ़िल कम, तो प्रकाश-संश्लेषण कम, ग्लूकोज़ कम, इसलिए बढ़त कम।
3. वर्गीकृत कीजिए: (क) मोमी परत (ख) काँटे (ग) पत्तियों में ज़हर (घ) छूने पर मुड़ते पत्ते।
(क) भौतिक, (ख) यांत्रिक, (ग) रासायनिक, (घ) यांत्रिक।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि हर पादप रोग रोगाणु से होता है। नाइट्रेट या मैग्नीशियम की कमी से भी लक्षण आते हैं।
- दोनों आयन उलझा देना: नाइट्रेट की कमी = रुकी बढ़त; मैग्नीशियम की कमी = पीली पत्तियाँ।
- काँटों को भौतिक बचाव कहना। यहाँ काँटे यांत्रिक बचाव हैं; भौतिक बचाव क्यूटिकल, भित्ति जैसी रुकावटें हैं।
- यह कहना कि एफ़िड सिर्फ़ पत्ते खाकर नुक़सान करते हैं। वे फ्लोएम का रस चूसते और वायरस फैलाते हैं।