रोग से बचाव और जल्दी पहचान
बचाव (रोकथाम) का मतलब है रोग को शुरू होने से पहले रोकना। इसके तीन स्तर हैं:
- प्राथमिक रोकथाम: कारण को आप तक पहुँचने ही न दो। जैसे टीके, साफ़ पानी, हाथ धोना, संतुलित भोजन, धूम्रपान न करना, कसरत।
- द्वितीयक रोकथाम (जल्दी पहचान): रोग को शुरू में ही पकड़ लो, अकसर लक्षण आने से पहले। जैसे रक्तचाप की जाँच, शुगर की जाँच, आँख की जाँच, कैंसर की स्क्रीनिंग।
- तृतीयक रोकथाम: जो रोग हो चुका है उसे बिगड़ने से रोको। जैसे दवा, फिज़ियोथेरेपी, दिल के दौरे के बाद परहेज़।
जल्दी पहचान क्यों ज़रूरी है? छोटी समस्या सस्ती, सुरक्षित और आसानी से ठीक होती है। शुरू में पकड़ी गई छोटी गाँठ अकसर पूरी निकाली जा सकती है। देर से पकड़ी गई वही गाँठ फैल चुकी हो सकती है।
जोखिम कारक
जोखिम कारक वह चीज़ है जो रोग की संभावना बढ़ाती है, जैसे धूम्रपान, ज़्यादा नमक, कम कसरत या परिवार में रोग का इतिहास। जोखिम कारक संभावना बढ़ाते हैं, रोग पक्का नहीं करते।
रोग के कारण
कारणों को दो समूहों में बाँटते हैं। ज़्यादातर रोगों के एक से अधिक कारण साथ काम करते हैं।
बाहरी कारण
- जीवित जीव: जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटिस्ट, कृमि।
- भौतिक: चोट, जलना, गर्मी, ठंड, तेज़ विकिरण, शोर।
- रासायनिक: ज़हर, ज़्यादा शराब, कुछ नशीली दवाएँ, प्रदूषित हवा।
- पोषक तत्वों की कमी या अधिकता: आयरन कम हो तो एनीमिया; नमक ज़्यादा हो तो रक्तचाप बढ़ सकता है।
- मानसिक और सामाजिक तनाव: लंबी चिंता, अकेलापन।
भीतरी कारण
- जीन: कुछ रोग परिवार में चलते हैं (जैसे सिकल सेल रोग)।
- उम्र: बुढ़ापे में शरीर घिसता है।
- प्रतिरक्षा की गड़बड़ी: रक्षा बहुत कमज़ोर है या शरीर पर ही हमला कर देती है।
- शरीर की प्रक्रियाओं में गड़बड़: खून का रुकना, कोशिकाओं का बेकाबू बँटना, हार्मोन की समस्या।
मेज़बान (व्यक्ति), कारण और वातावरण मिलकर काम करते हैं। मज़बूत शरीर और साफ़ जगह होने पर ताकतवर कीटाणु भी बीमार नहीं कर पाता।
शरीर का स्वस्थ होना
शरीर में मरम्मत के अपने तरीके हैं। स्वस्थ होना आमतौर पर इन चरणों में होता है:
- कारण रोकना: कीटाणु मरते हैं, ज़हर निकलता है, घाव साफ़ होता है।
- सूजन (शोथ): खून रक्षक कोशिकाएँ और पोषण लाता है। जगह लाल, गर्म और सूजी हो जाती है। थोड़े समय के लिए यह अच्छी है।
- मरम्मत: नई कोशिकाएँ खाली जगह भरती हैं। कट में पहले थक्का बनता है और उसके नीचे नई त्वचा आती है।
- मज़बूत बनना: नया ऊतक और मज़बूत और सुव्यवस्थित हो जाता है।
ठीक होने के दो तरीके
- पुनर्जनन: उसी तरह की कोशिकाएँ वापस उग आती हैं (त्वचा, यकृत, आँत की परत)।
- निशान के साथ मरम्मत: जब नुकसान गहरा हो या कोशिकाएँ बँट न सकें (हृदय की माँसपेशी, तंत्रिका कोशिकाएँ), तो खाली जगह कड़े निशान-ऊतक से भरती है जो पुराना काम नहीं कर पाता।
क्या ठीक होना तेज़ या धीमा करता है
- तेज़: अच्छा पोषण, आराम और नींद, साफ़ घाव, सही तरह से दवा लेना, कम उम्र।
- धीमा: खराब भोजन, धूम्रपान, मधुमेह, बुढ़ापा, तनाव, संक्रमण, आराम न करना।
पूर्ण स्वास्थ्य-लाभ का मतलब है शरीर सामान्य हो गया। कभी रोग दीर्घकालिक (लंबा चलने वाला) बन जाता है या स्थायी कमज़ोरी छोड़ जाता है।
करके देखें: अपना कवच खोजिए
घर में रोग रोकने के तीन तरीके लिखिए (जैसे उबला पानी, हाथ धोना, नींद)। फिर घाव भरने के चार चरण क्रम से लिखिए। 3D में कारण "ज़हर" चुनिए और कवच चालू कीजिए। नुकसान कितना घटा? फिर आराम के दिन 10 कर दीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रोग = ऐसा बदलाव जिससे शरीर का अंग या मन ठीक से काम नहीं करता
- प्राथमिक = कारण रोको · द्वितीयक = जल्दी पकड़ो · तृतीयक = बिगड़ने से रोको
- कारण: बाहरी (कीटाणु, चोट, ज़हर, विकिरण) + भीतरी (जीन, उम्र, प्रतिरक्षा, शरीर की प्रक्रियाएँ)
- ठीक होने के चरण: कारण हटाना → सूजन → मरम्मत → मज़बूत बनना
- पुनर्जनन = वही कोशिकाएँ वापस उगना; निशान = कड़ा ऊतक खाली जगह भरता है
हल किए गए उदाहरण
1. स्कूल में मुफ़्त पोलियो की बूँदें और साफ़ पीने का पानी मिलता है। यह रोकथाम का कौन-सा स्तर है?
प्राथमिक रोकथाम। ये बच्चों के बीमार होने से पहले ही कारण (कीटाणु) को रोकते हैं।
2. 45 साल के आदमी की नियमित शुगर जाँच में कोई लक्षण आने से पहले ही शुगर ज़्यादा निकलती है। यह कौन-सा स्तर है? इससे क्या फ़ायदा?
द्वितीयक रोकथाम (जल्दी पहचान)। वह अंग खराब होने से पहले खान-पान बदलकर इलाज शुरू कर सकता है।
3. उँगली का कट एक हफ़्ते में बिना निशान ठीक हो जाता है, पर दिल के दौरे में दिल में निशान रह जाता है। अंतर समझाइए।
त्वचा की कोशिकाएँ आसानी से बँटती हैं, इसलिए त्वचा फिर उग आती है। हृदय की माँसपेशी की कोशिकाएँ पर्याप्त नहीं बँटतीं, इसलिए खाली जगह निशान-ऊतक से भरती है जो पंप नहीं कर सकता।
4. इन्हें बाहरी या भीतरी कारण में बाँटिए: साँप का काटना, सिकल सेल रोग, विषाणु, बुढ़ापा।
बाहरी: साँप का काटना (ज़हर), विषाणु। भीतरी: सिकल सेल रोग (जीन), बुढ़ापा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि एक कारण से हमेशा एक ही रोग होता है। ज़्यादातर रोगों में कई कारण साथ काम करते हैं।
- सूजन को हमेशा बुरा मानना। थोड़ी देर की सूजन मरम्मत की शुरुआत है।
- रोकथाम के स्तर गड़बड़ाना। टीका प्राथमिक है, जाँच द्वितीयक है, पुनर्वास तृतीयक है।
- यह मानना कि जोखिम कारक होने से रोग पक्का है। वह सिर्फ़ संभावना बढ़ाता है।