चयापचय रोग क्या है?
चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) यानी शरीर के वे सब बदलाव जो भोजन को ऊर्जा और शरीर के हिस्सों में बदलते हैं। जब इनमें कुछ गड़बड़ हो जाए तो उसे चयापचय रोग कहते हैं। कारण हो सकता है कोई हार्मोन कम होना, कोई एंज़ाइम कमज़ोर होना, या खान-पान और जीवनशैली से बिगड़ा संतुलन।
उदाहरण: डायबिटीज़ (शुगर), मोटापा (चर्बी ज़्यादा जमा), ऊँचा कोलेस्ट्रॉल और गाउट (यूरिक अम्ल ज़्यादा)।
रक्त शुगर और इंसुलिन
ग्लूकोज़ वह शक्कर है जिसे कोशिकाएँ ऊर्जा के लिए जलाती हैं। खाने के बाद यह रक्त में आता है। तब अग्न्याशय हार्मोन इंसुलिन छोड़ता है। इंसुलिन मांसपेशी, यकृत और वसा की कोशिकाओं से कहता है कि ग्लूकोज़ अंदर लो। फालतू ग्लूकोज़ यकृत और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन बनकर जमा हो जाता है। इस तरह रक्त शुगर घटती है।
अगर शुगर बहुत कम हो जाए तो दूसरा हार्मोन ग्लूकागॉन यकृत से ग्लूकोज़ छुड़वाता है। दो हार्मोन, एक संतुलन।
सामान्य खाली पेट शुगर लगभग 70 से 100 mg/dL होती है।
डायबिटीज़: टाइप 1 और टाइप 2
डायबिटीज़ मेलाइटस (मधुमेह) में रक्त शुगर लंबे समय तक बहुत ऊँची रहती है।
- टाइप 1: शरीर की अपनी रक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है। इंसुलिन कम या बिल्कुल नहीं बनता। यह अक्सर बच्चों और युवाओं में शुरू होता है। इलाज: इंसुलिन के इंजेक्शन या पंप।
- टाइप 2: कोशिकाएँ इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाती हैं, यानी इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता। इसका संबंध मोटापे, कम कसरत, उम्र और परिवार के इतिहास से है। इलाज: खान-पान, कसरत, गोलियाँ और कभी-कभी इंसुलिन।
एक और रूप गर्भावस्था मधुमेह है, जो गर्भ के समय हो सकता है।
लक्षण, खतरे और बचाव
आम लक्षण: बहुत प्यास, बार-बार पेशाब, बहुत भूख, थकान, घाव देर से भरना, धुँधला दिखना।
लंबे समय का नुकसान: अगर शुगर ऊँची रहे तो आँखों, गुर्दों, नसों, हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान होता है।
बचाव: मीठा खाना-पीना कम करें, सब्ज़ी, साबुत अनाज और दालें ज़्यादा खाएँ, रोज़ 30 मिनट चलें, वज़न ठीक रखें, और लक्षण या परिवार में इतिहास हो तो जाँच कराएँ। डायबिटीज़ की पुष्टि केवल डॉक्टर करता है।
खुद करके देखिए
3D में कोशिका का जवाब 100 रखिए और इंसुलिन बढ़ाइए: दरवाज़े खुलेंगे और मीनार गिरेगी। अब इंसुलिन 0 कीजिए (टाइप 1)। फिर इंसुलिन ज़्यादा पर कोशिका का जवाब कम कीजिए (टाइप 2)। पहले अंदाज़ा लगाइए, फिर जाँचिए। घर पर दो दिन की तुलना कीजिए: रात के खाने के बाद टहलना या न टहलना। किसी बड़े से कहिए कि बस आपका हाल नोट करें, कोई जाँच खुद न करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सामान्य खाली पेट रक्त ग्लूकोज़: 70 से 100 mg/dL (3.9 से 5.6 mmol/L)
- इंसुलिन (शुगर घटाता है) और ग्लूकागॉन (शुगर बढ़ाता है) जोड़ी में काम करते हैं
- टाइप 1: इंसुलिन कम। टाइप 2: कोशिकाएँ इंसुलिन का विरोध करती हैं
- BMI = वज़न (kg) / ऊँचाई² (m²)
हल किए गए उदाहरण
1. कौन-सा हार्मोन रक्त शुगर घटाता है और कौन-सा बढ़ाता है?
इंसुलिन ग्लूकोज़ को कोशिकाओं में भेजकर और ग्लाइकोजन बनाकर शुगर घटाता है। ग्लूकागॉन यकृत से ग्लूकोज़ छुड़वाकर शुगर बढ़ाता है।
2. एक व्यक्ति की दो जाँचों में सुबह खाली पेट शुगर 160 mg/dL आई। क्या यह सामान्य है?
नहीं। सामान्य खाली पेट शुगर लगभग 70 से 100 mg/dL है। 160 ऊँची है। उसे डॉक्टर से ठीक से जाँच करानी चाहिए।
3. 14 साल की लड़की को अचानक बहुत प्यास लगती है, बार-बार पेशाब आता है और वज़न घट रहा है। इंसुलिन के इंजेक्शन से आराम मिलता है। कौन-सा प्रकार संभव है?
टाइप 1। यह कम उम्र में शुरू होता है, अग्न्याशय कम इंसुलिन बनाता है और इलाज इंसुलिन इंजेक्शन है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि डायबिटीज़ सिर्फ़ मिठाई खाने से होती है। वज़न, कसरत, परिवार का इतिहास और उम्र भी मायने रखते हैं।
- ग्लूकोज़, ग्लाइकोजन और ग्लूकागॉन को मिला देना। ग्लूकोज़ शक्कर है, ग्लाइकोजन उसका भंडार है, ग्लूकागॉन हार्मोन है।
- यह कहना कि टाइप 2 में इंसुलिन होता ही नहीं। अक्सर इंसुलिन होता है पर कोशिकाएँ ठीक से जवाब नहीं देतीं।
- मानना कि डायबिटीज़ ज़ुकाम की तरह फैलती है। यह संक्रामक नहीं है।