ऊष्मा और ताप
ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम या ठंडी है। यही ऊष्मा के बहाव की दिशा तय करता है: हमेशा ज़्यादा ताप से कम ताप की ओर। ऊष्मा वह ऊर्जा है जो सिर्फ़ ताप के अंतर के कारण एक वस्तु से दूसरी में बहती है। मात्रक: जूल (J); पुराना मात्रक कैलोरी (1 cal = 4.186 J)।
ताप के पैमाने: सेल्सियस (बर्फ़ 0, भाप 100), फ़ारेनहाइट (बर्फ़ 32, भाप 212) और केल्विन (परम पैमाना)। संबंध: tF = (9/5) tC + 32 और T = tC + 273.15। परम शून्य (0 K = −273.15 °C) सबसे कम संभव ताप है।
आदर्श गैस PV = μRT मानती है। नियत आयतन गैस थर्मामीटर इस तथ्य पर चलता है कि दाब ∝ T; परम पैमाना इसी से परिभाषित है।
ठोस, द्रव और गैस का तापीय प्रसार
गरम करने पर कण ज़्यादा ज़ोर से कंपन करते हैं और एक-दूसरे को थोड़ा दूर धकेलते हैं, इसलिए ज़्यादातर वस्तुएँ बढ़ती हैं।
- रैखिक: ΔL/L = α ΔT
- क्षेत्रीय: ΔA/A = β ΔT
- आयतन: ΔV/V = γ ΔT
ठोस के लिए β = 2α और γ = 3α। γ का प्रमाण: भुजा l का घन लो। नई भुजा = l(1 + αΔT)। नया आयतन = l³(1 + αΔT)³ ≈ l³(1 + 3αΔT), क्योंकि αΔT बहुत छोटा है। इसलिए ΔV/V = 3αΔT।
धातुएँ काँच से ज़्यादा फैलती हैं। ताँबा: α ≈ 1.7 × 10⁻⁵ K⁻¹; काँच ≈ 0.9 × 10⁻⁵ K⁻¹। द्रव ठोस से ज़्यादा, गैसें सबसे ज़्यादा फैलती हैं। नियत दाब पर आदर्श गैस के लिए γ = 1/T (0 °C पर 1/273 K⁻¹)।
तापीय प्रतिबल: दोनों सिरों से बँधी छड़ गरम हो तो फैल नहीं पाती, इसलिए प्रतिबल Y α ΔT बनता है। इसीलिए पटरियों, पुलों और पाइपलाइनों में प्रसार के लिए जगह छोड़ी जाती है।
जल का असंगत प्रसार
0 °C से 4 °C के बीच पानी अलग व्यवहार करता है: गरम करने पर सिकुड़ता है। 4 °C के ऊपर सामान्य रूप से फैलता है। इसलिए 4 °C पर पानी का घनत्व अधिकतम है।
सर्दी में झील का ऊपरी पानी ठंडा होता है। 4 °C का पानी सबसे घना होकर तल में बैठ जाता है। उससे ठंडा पानी ऊपर रहता है और जमकर बर्फ़ बनता है, जो तैरती है। बर्फ़ ऊष्मा की कुचालक है, इसलिए नीचे का पानी लगभग 4 °C पर रहता है और मछलियाँ जीवित रहती हैं।
जमने पर पानी लगभग 9% फैलता है, इसलिए बहुत ठंडी जगहों पर पानी के पाइप फट सकते हैं।
विशिष्ट ऊष्मा धारिता
ऊष्मा धारिता S = ΔQ/ΔT: पूरी वस्तु का ताप 1 K बढ़ाने की ऊष्मा।
विशिष्ट ऊष्मा धारिता c = ΔQ/(m ΔT): 1 kg का ताप 1 K बढ़ाने की ऊष्मा। मात्रक: J kg⁻¹ K⁻¹। इसलिए Q = m c ΔT।
मोलर विशिष्ट ऊष्मा C = ΔQ/(μ ΔT), μ मोल के लिए। मात्रक: J mol⁻¹ K⁻¹।
पानी की विशिष्ट ऊष्मा बहुत बड़ी (4186 J/kg K) है। लोहा: लगभग 450; ऐलुमिनियम: लगभग 900। इसीलिए कार रेडिएटर और गरम पानी की थैली में पानी भरते हैं, और समुद्री हवा चलती है।
गैसों के लिए Cp और Cv
ठोस और द्रव का आयतन मुश्किल से बदलता है, इसलिए एक ही विशिष्ट ऊष्मा। गैस के लिए यह मायने रखता है कि कैसे गरम किया:
- Cv: नियत आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा। सारी ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा बढ़ाती है।
- Cp: नियत दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा। गैस फैलकर कार्य भी करती है, इसलिए अतिरिक्त ऊष्मा चाहिए।
इसलिए Cp > Cv, और आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R (मेयर संबंध, R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹)। अनुपात γ = Cp/Cv एकपरमाणुक गैस के लिए 5/3 और हवा जैसी द्विपरमाणुक गैस के लिए 7/5।
कैलोरीमिति
कैलोरीमिति = ऊष्मा का मापन। कैलोरीमीटर ताँबे या ऐलुमिनियम का बर्तन है, विलोडक (stirrer) के साथ, लकड़ी के आवरण और कुचालक परत में, ताकि ऊष्मा बाहर न जाए।
कैलोरीमिति का सिद्धांत: पृथक निकाय में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। यह ऊर्जा संरक्षण ही है।
मिश्रण विधि से धातु का c: द्रव्यमान m₁ की धातु को T₁ तक गरम करो, कैलोरीमीटर (द्रव्यमान m₃, विशिष्ट ऊष्मा c₃) में T₂ ताप वाले पानी (m₂) में डालो। अंतिम ताप T नापो। तब m₁c₁(T₁ − T) = (m₂cw + m₃c₃)(T − T₂)। इससे c₁ निकालो।
अवस्था परिवर्तन और गुप्त ऊष्मा
ठोस ⇄ द्रव ⇄ गैस = अवस्था परिवर्तन। पिघलना (गलन) गलनांक पर; उबलना क्वथनांक पर। इन बिंदुओं पर ऊष्मा ली जाती है पर परिवर्तन पूरा होने तक ताप नहीं बढ़ता। दोनों अवस्थाएँ साथ रहती हैं।
गुप्त ऊष्मा L = ताप बदले बिना प्रति एकांक द्रव्यमान अवस्था बदलने की ऊष्मा: Q = m L। मात्रक: J/kg।
- बर्फ़ की गलन की गुप्त ऊष्मा: Lf = 3.34 × 10⁵ J/kg
- पानी की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा: Lv = 22.6 × 10⁵ J/kg
बर्फ़ के तापन वक्र (ताप बनाम ऊष्मा) में ढलान वाले भाग (गरम होना) और सपाट भाग (0 °C पर पिघलना, 100 °C पर उबलना) होते हैं। उबलने का सपाट भाग बहुत लंबा है, क्योंकि Lv बड़ी है।
क्वथनांक दाब बढ़ने पर बढ़ता है (प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पकता है) और कम दाब पर घटता है (पहाड़ों पर पानी 100 °C से नीचे उबलता है)। दाब से बर्फ़ का गलनांक थोड़ा घटता है: भार लटका तार बर्फ़ की सिल्ली से धीरे निकल जाता है और ऊपर बर्फ़ फिर जम जाती है (पुनर्हिमायन)। ऊर्ध्वपातन: ठोस से सीधे गैस (कपूर, सूखी बर्फ़)। पानी का त्रिक बिंदु (273.16 K, 0.006 atm) वह है जहाँ तीनों अवस्थाएँ साथ रहती हैं।
करके देखो: पिघलती बर्फ़ की घड़ी
स्टील के गिलास में कुटी बर्फ़ डालो, हिलाओ और हर मिनट रसोई थर्मामीटर पढ़ो। पढ़ाइयाँ लिखो। आख़िरी बर्फ़ पिघलने तक अंक 0 °C के पास रहता है, फिर बढ़ता है। वह सपाट भाग गलन की गुप्त ऊष्मा का काम है। 3D के चरण 6 में Q को 42 kJ और फिर 376 kJ तक खिसकाओ: पूरे रास्ते ताप 0 °C रहता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- t_F = (9/5) t_C + 32; T = t_C + 273.15
- ΔL = α L ΔT; ΔA = β A ΔT; ΔV = γ V ΔT
- β = 2α; γ = 3α; आदर्श गैस γ = 1/T
- तापीय प्रतिबल = Y α ΔT
- Q = m c ΔT; ऊष्मा धारिता S = m c
- Cp − Cv = R (प्रति मोल)
- खोई ऊष्मा = पाई ऊष्मा
- Q = m L
हल किए गए उदाहरण
1. 37 °C को °F और K में बदलो।
चरण 1: t_F = (9/5) × 37 + 32 = 98.6 °F। चरण 2: T = 37 + 273.15 = 310.15 K। उत्तर: 98.6 °F, 310.15 K।
2. 20 °C पर ताँबे की छड़ 1 m लंबी है। 320 °C पर कितनी लंबी होगी? (α = 1.7 × 10⁻⁵ K⁻¹)
चरण 1: ΔT = 300 K। चरण 2: ΔL = 1.7 × 10⁻⁵ × 1 × 300। उत्तर: 5.1 mm अधिक।
3. पीतल की चादर (α = 1.9 × 10⁻⁵ K⁻¹) का क्षेत्रफल 0.5 m² है। 100 K ताप बढ़ने पर क्षेत्रफल में वृद्धि?
चरण 1: β = 2α = 3.8 × 10⁻⁵ K⁻¹। चरण 2: ΔA = 3.8 × 10⁻⁵ × 0.5 × 100। उत्तर: 1.9 × 10⁻³ m² = 19 cm²।
4. 2 kg पानी को 25 °C से 75 °C करने में कितनी ऊष्मा? (c = 4186 J/kg K)
चरण 1: ΔT = 50 K। चरण 2: Q = 2 × 4186 × 50। उत्तर: 4.186 × 10⁵ J ≈ 419 kJ।
5. 100 °C की 0.2 kg ऐलुमिनियम गेंद 20 °C के 0.3 kg पानी में डाली। अंतिम ताप? (c_Al = 900, c_w = 4186 J/kg K, कैलोरीमीटर नगण्य)
चरण 1: Al की खोई ऊष्मा = 180(100 − T)। चरण 2: पानी की पाई ऊष्मा = 1255.8(T − 20)। चरण 3: 18000 − 180T = 1255.8T − 25116। चरण 4: 43116 = 1435.8T। उत्तर: T ≈ 30 °C।
6. दोनों सिरों पर बँधी स्टील की पटरी 40 K गरम होती है। तापीय प्रतिबल? (Y = 2 × 10¹¹ Pa, α = 1.2 × 10⁻⁵ K⁻¹)
चरण 1: प्रतिबल = YαΔT। चरण 2: = 2 × 10¹¹ × 1.2 × 10⁻⁵ × 40। उत्तर: 9.6 × 10⁷ Pa — बहुत बड़ा, इसलिए पटरियों में गैप।
7. −10 °C की 0.5 kg बर्फ़ को 20 °C का पानी बनाने में कितनी ऊष्मा? (c_ice = 2100, c_w = 4186 J/kg K, L_f = 3.34 × 10⁵ J/kg)
चरण 1: बर्फ़ −10 → 0 °C: 0.5 × 2100 × 10 = 10500 J। चरण 2: पिघलना: 0.5 × 3.34 × 10⁵ = 167000 J। चरण 3: पानी 0 → 20 °C: 0.5 × 4186 × 20 = 41860 J। चरण 4: जोड़ो। उत्तर: 219360 J ≈ 2.19 × 10⁵ J।
8. 100 °C की 10 g भाप 20 °C के 1 kg पानी में जाती है। अंतिम ताप? (L_v = 2.26 × 10⁶ J/kg, c = 4186 J/kg K)
चरण 1: भाप की दी ऊष्मा = 22600 + 41.86(100 − T)। चरण 2: पानी की ली ऊष्मा = 4186(T − 20)। चरण 3: 22600 + 4186 − 41.86T = 4186T − 83720। चरण 4: 110506 = 4227.86T। उत्तर: T ≈ 26.1 °C।
आम गलतियाँ
- ऊष्मा और ताप को एक समझना। गुनगुने पानी की बाल्टी में गरम चाय के कप से ज़्यादा ऊष्मा है, भले ताप कम हो।
- γ = α या β = α लेना। ठोस के लिए β = 2α और γ = 3α।
- बर्फ़ या भाप वाले मिश्रण प्रश्नों में गुप्त ऊष्मा वाला चरण भूलना। सपाट भागों में Q = mL लगता है।
- यह सोचना कि पानी हमेशा गरम होकर फैलता है। 0 से 4 °C के बीच वह सिकुड़ता है।