Ukraine 10 клас Physics (profile level)
अध्याय: 5
1. Introduction
Physics, mathematics and measurement
- सार्थक अंक और मापन में त्रुटियाँ – कोई भी मापन पूरी तरह सही नहीं होता। सार्थक अंक = पक्के अंक + पहला अनिश्चित अंक। त्रुटि बताती है कि पाठ्यांक असली मान से कितना दूर हो सकता है: निरपेक्ष त्रुटि Δa, आपेक्षिक त्रुटि Δa/a और प्रतिशत त्रुटि (Δa/a) × 100. जोड़ या घटाने में निरपेक्ष त्रुटियाँ जुड़ती हैं। गुणा या भाग में प्रतिशत त्रुटियाँ जुड़ती हैं। घात n हो तो प्रतिशत त्रुटि n गुना।
2. Mechanics
Kinematics · Circular motion · Dynamics and gravitation · Rigid body and non-inertial frames · Conservation laws and fluids · Oscillations and waves
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- जड़त्व आघूर्ण, घूर्णन त्रिज्या और घूर्णी गति – सीधी रेखा की गति की हर राशि का एक घूमने वाला जुड़वाँ है: x का θ, v का ω, a का α, m का I, F का τ, p का L = Iω। जड़त्व आघूर्ण I = Σmr² बताता है कि पिंड का घूमना बदलना कितना कठिन है; अक्ष से दूर का द्रव्यमान इसे बहुत बढ़ाता है। घूर्णन त्रिज्या k वह दूरी है जहाँ सारा द्रव्यमान रख दें तो I वही रहे: I = Mk²। मानक मान: वलय MR², चकती ½MR², ठोस गोला ⅖MR², छड़ (बीच से) ML²/12। स्थिर α पर: ω = ω₀ + αt, θ = ω₀t + ½αt², ω² = ω₀² + 2αθ, और τ = Iα।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- सरल आवर्त गति (SHM) – जो गति तय समय के बाद बार-बार दोहराती है, वह आवर्ती गति है। अगर वस्तु बीच की जगह के इधर-उधर आती-जाती है और वापस खींचने वाला बल दूरी के अनुपात में है (F = −kx), तो वह सरल आवर्त गति है। इसकी स्थिति x = A sin(ωt + φ) है, जहाँ ω = 2π/T = 2πf। बीच में चाल सबसे ज़्यादा, सिरों पर त्वरण सबसे ज़्यादा, और कुल ऊर्जा ½kA² हमेशा वही रहती है।
3. Special relativity
Special relativity
- विशेष आपेक्षिकता (Special Relativity) – विशेष आपेक्षिकता (आइंस्टीन, 1905) दो अभिधारणाओं पर टिकी है: सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में भौतिकी के नियम एक-से हैं, और निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s हर प्रेक्षक के लिए एक-सी है। इससे निकलता है कि चलती घड़ी धीमी चलती है (t = γt₀), चलती वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है (L = L₀/γ), और द्रव्यमान ऊर्जा का रूप है (E = mc²), जहाँ γ = 1/√(1 − v²/c²)। रोज़ की चाल पर γ ≈ 1, इसलिए न्यूटन की यांत्रिकी काम करती है; c के पास वह असफल होती है।
4. Molecular physics and thermodynamics
Molecular-kinetic theory of gases · Phase transitions · Liquids and solids · Thermodynamics
- गैसों का अणुगति सिद्धांत: दाब, ताप और वर्ग-माध्य-मूल चाल – अणुगति सिद्धांत गैस को बहुत छोटे, तेज़, बेतरतीब चलते अणुओं का समूह मानता है, जो प्रत्यास्थ रूप से टकराते हैं और एक-दूसरे को खींचते नहीं। दीवार से टकराने पर अणु का वेग उलटता है और दीवार को 2mvₓ संवेग मिलता है। सब अणुओं की टक्करें जोड़ने पर दाब P = ⅓ n m v̄² = ⅓ ρ v̄² आता है। इसे PV = N k T से मिलाने पर एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा (3/2) k T मिलती है: ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। वर्ग-माध्य-मूल चाल v_rms = √(3RT/M) है, इसलिए समान ताप पर हल्की गैस तेज़ चलती है।
- तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, कैलोरीमिति और गुप्त ऊष्मा – ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम है; ऊष्मा वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण बहती है। ज़्यादातर चीज़ें गरम होकर फैलती हैं: ΔL = αLΔT, ΔA = βAΔT, ΔV = γVΔT, जहाँ β = 2α और γ = 3α। पानी 0 °C से 4 °C के बीच अपवाद है: गरम करने पर सिकुड़ता है, इसलिए 4 °C पर सबसे घना। किसी वस्तु को गरम करने की ऊष्मा Q = mcΔT, जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा है; गैसों की दो होती हैं, Cp > Cv, और प्रति मोल Cp − Cv = R। कैलोरीमिति में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। पिघलते या उबलते समय ताप स्थिर रहता है और ऊष्मा Q = mL अवस्था बदलने में लगती है।
- ठोसों के यांत्रिक गुण: प्रतिबल, विकृति और प्रत्यास्थता – किसी ठोस को खींचो, दबाओ या मरोड़ो तो उसका आकार थोड़ा बदलता है। बल हटाने पर वह वापस आ जाए तो वह प्रत्यास्थ (elastic) है। अंदर का प्रत्यानयन बल ÷ क्षेत्रफल = प्रतिबल (stress)। आकार में भिन्नात्मक बदलाव (जैसे ΔL/L) = विकृति (strain)। प्रत्यास्थ सीमा तक प्रतिबल ∝ विकृति — यही हुक का नियम है। इनका अनुपात गुणांक कहलाता है: लंबाई के लिए यंग गुणांक Y, चारों ओर से दबाने पर आयतन गुणांक B, सतह खिसकाने पर दृढ़ता गुणांक G। खिंचा तार पतला भी होता है (पॉयसन अनुपात) और उसमें ऊर्जा = ½ × प्रतिबल × विकृति × आयतन जमा रहती है।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
5. Electric field
Electrostatic field · Potential and energy · Capacitance
- विद्युत क्षेत्र और उसकी तीव्रता – आवेश अपने चारों ओर के स्थान को ऐसा बदल देता है कि वहाँ रखा हर दूसरा आवेश बल महसूस करता है। यही विद्युत क्षेत्र है। किसी बिंदु पर इसकी तीव्रता = छोटे धन परीक्षण आवेश पर बल ÷ वह आवेश: E = F/q, मात्रक N/C (= V/m)। बिंदु आवेश के लिए E = kQ/r², k = 9 × 10⁹ N m²/C²। E सदिश है: + आवेश से दूर और − आवेश की ओर। क्षेत्र रेखाएँ दिशा दिखाती हैं और घनत्व से तीव्रता। कई आवेशों के क्षेत्र सदिश रूप से जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।