न्यूटनी यांत्रिकी की सीमाएँ और माइकलसन-मोर्ले प्रयोग
न्यूटन की यांत्रिकी मानती है कि समय और लंबाई सबके लिए एक-सी हैं और चालें सीधे जुड़ती हैं। कार और ग्रहों के लिए यह ठीक है, पर प्रकाश ने यह नियम तोड़ा।
वैज्ञानिक सोचते थे प्रकाश एक अदृश्य 'ईथर' में चलता है। धरती उसमें चले तो प्रकाश एक दिशा में तेज़ होना चाहिए। 1887 में माइकलसन और मोर्ले ने प्रकाश किरण को दो लंबवत रास्तों में बाँटा और फिर मिलाया, और यंत्र घुमाकर व्यतिकरण फ्रिंजों में खिसकाव ढूँढा। उन्हें कोई खिसकाव नहीं मिला। प्रकाश की चाल धरती की गति पर निर्भर नहीं थी।
आइंस्टीन की दो अभिधारणाएँ
- आपेक्षिकता का सिद्धांत: हर जड़त्वीय निर्देश-तंत्र (स्थिर वेग से चलता तंत्र) में भौतिकी के नियम एक-से हैं। कोई प्रयोग नहीं बता सकता कि तुम 'सच में' चल रहे हो।
- c की स्थिरता: निर्वात में प्रकाश सभी प्रेक्षकों के लिए c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s से चलता है, स्रोत या प्रेक्षक कैसे भी चलें।
अगर c तय है, तो समय और दूरी को बदलना पड़ता है। कितना, यह लोरेंट्ज़ गुणांक γ = 1/√(1 − v²/c²) बताता है।
समय विस्फारण
प्रकाश घड़ी में दर्पण L दूरी पर हैं। विराम में एक चक्कर t₀ = 2L/c लेता है। यह उचित समय (proper time) है: घटना के साथ विराम में रखी घड़ी का समय।
ज़मीन से चलती घड़ी का प्रकाश तिरछे रास्ते पर जाता है। पाइथागोरस से (ct/2)² = L² + (vt/2)², जिससे t = γ t₀। चलती घड़ी धीमी चलती है।
प्रमाण: म्यूऑन विराम में लगभग 2.2 μs जीते हैं। 0.99c पर भी वे सिर्फ़ ~650 m जाते, फिर भी 10 km ऊपर से बहुत सारे ज़मीन तक पहुँचते हैं, क्योंकि उनकी आयु γ ≈ 7 गुना फैल जाती है।
लंबाई संकुचन
उचित लंबाई L₀ वस्तु के साथ विराम में रहने वाला मापता है। जो उसे v से चलते देखे, वह L = L₀ / γ मापता है, सिर्फ़ गति की दिशा में छोटी। म्यूऑन की नज़र से 10 km हवा सिकुड़कर ~1.4 km रह जाती है, इसलिए वह अपनी छोटी उम्र में पार कर लेता है। दोनों नज़रिए एक ही नतीजा देते हैं।
द्रव्यमान और ऊर्जा: E = mc²
द्रव्यमान ऊर्जा का एक रूप है। m द्रव्यमान की विराम ऊर्जा E₀ = mc² है। चलते कण की कुल ऊर्जा E = γmc² और गतिज ऊर्जा (γ − 1)mc² है। v → c पर γ → ∞, तो अनंत ऊर्जा चाहिए: द्रव्यमान वाली कोई चीज़ c तक नहीं पहुँच सकती।
सूरज और परमाणु रिएक्टर में द्रव्यमान की छोटी कमी बड़ी ऊर्जा बनती है। कण भौतिकी में ऊर्जा अक्सर MeV में (1 eV = 1.60 × 10⁻¹⁹ J)।
आगे: सामान्य आपेक्षिकता की झलक
विशेष आपेक्षिकता स्थिर वेग वाले तंत्रों की बात करती है। आइंस्टीन की सामान्य आपेक्षिकता (1915) गुरुत्व जोड़ती है: द्रव्यमान दिक्-काल को मोड़ता है, इसलिए सूरज के पास प्रकाश मुड़ता है और तेज़ गुरुत्व में घड़ियाँ धीमी चलती हैं। GPS दोनों असर सुधारता है।
करके देखो: स्लाइडर पर वह चाल ढूँढो जहाँ γ = 2 हो। (उत्तर: v ≈ 0.87c।) फिर सूत्र से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- γ = 1 / √(1 − v²/c²)
- t = γ t₀ (समय विस्फारण, t₀ = उचित समय)
- L = L₀ / γ (लंबाई संकुचन, L₀ = उचित लंबाई)
- E₀ = mc²; E = γmc²; Eₖ = (γ − 1)mc²
- c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s
हल किए गए उदाहरण
1. v = 0.6c के लिए γ निकालो।
v²/c² = 0.36; 1 − 0.36 = 0.64; √0.64 = 0.8; γ = 1/0.8 = 1.25।
2. यान 0.8c से चल रहा है। उसकी घड़ी 1.0 s की टिक देती है। धरती से यह टिक कितनी लंबी है?
γ = 1/√(1 − 0.64) = 1/0.6 = 1.67। t = γt₀ = 1.67 s।
3. विराम में 5.0 m की छड़ अपनी लंबाई की दिशा में 0.8c से चलती है। मापी लंबाई?
γ = 1.67। L = 5.0/1.667 = 3.0 m।
4. 1.0 g द्रव्यमान में कितनी ऊर्जा है?
E = mc² = 0.001 × 9.0 × 10¹⁶ = 9.0 × 10¹³ J।
5. म्यूऑन की उचित आयु 2.2 μs है और वह 0.995c से चलता है। ज़मीन से देखने पर एक आयु में कितनी दूरी तय करेगा?
γ = 1/√(1 − 0.990) ≈ 10.0। फैली आयु = 22 μs। दूरी = 0.995 × 3.0 × 10⁸ × 22 × 10⁻⁶ ≈ 6.6 km (आपेक्षिकता बिना सिर्फ़ 0.66 km)।
6. इलेक्ट्रॉन (m = 9.11 × 10⁻³¹ kg) γ = 3 से चल रहा है। गतिज ऊर्जा?
Eₖ = (γ − 1)mc² = 2 × 9.11 × 10⁻³¹ × 9.0 × 10¹⁶ = 1.64 × 10⁻¹³ J (लगभग 1.02 MeV)।
आम गलतियाँ
- एक ही सूत्र में v को m/s में और c को 1 लेना। v/c अनुपात लो, या दोनों m/s में।
- उचित और फैले समय को उलट देना। उचित समय t₀ घटना के साथ चलती घड़ी का है, और सबसे छोटा है।
- सोचना कि लंबाई हर दिशा में घटती है। सिर्फ़ गति की दिशा वाली लंबाई घटती है।
- न्यूटन की तरह चालें जोड़ना: आमने-सामने आती दो प्रकाश किरणें 2c से नहीं मिलतीं। हर प्रेक्षक c ही मापता है।