Russia 8 класс Physics (advanced)
अध्याय: 2
1. Thermal phenomena
Molecular kinetic theory · Solids, liquids, gases · Temperature · Internal energy and heat transfer · Heat and heat balance · Phase changes · Heat engines
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- ताप (तापमान) – ताप बताता है कि कोई चीज़ कितनी गरम या ठंडी है। हर वस्तु के छोटे-छोटे कण हमेशा हिलते रहते हैं; ताप उनकी औसत गतिज ऊर्जा का माप है (वे औसतन कितनी तेज़ी से हिलते हैं)। इसे थर्मामीटर से डिग्री सेल्सियस (°C), केल्विन (K, SI मात्रक) या डिग्री फ़ारेनहाइट (°F) में मापते हैं। K = °C + 273 और °F = 9/5 × °C + 32। सबसे कम संभव ताप परम शून्य है: 0 K = −273 °C। गरम और ठंडी वस्तु छूने पर ऊष्मा गरम से ठंडी की ओर बहती है, जब तक दोनों का ताप बराबर न हो (तापीय साम्य)।
- तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, कैलोरीमिति और गुप्त ऊष्मा – ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम है; ऊष्मा वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण बहती है। ज़्यादातर चीज़ें गरम होकर फैलती हैं: ΔL = αLΔT, ΔA = βAΔT, ΔV = γVΔT, जहाँ β = 2α और γ = 3α। पानी 0 °C से 4 °C के बीच अपवाद है: गरम करने पर सिकुड़ता है, इसलिए 4 °C पर सबसे घना। किसी वस्तु को गरम करने की ऊष्मा Q = mcΔT, जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा है; गैसों की दो होती हैं, Cp > Cv, और प्रति मोल Cp − Cv = R। कैलोरीमिति में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। पिघलते या उबलते समय ताप स्थिर रहता है और ऊष्मा Q = mL अवस्था बदलने में लगती है।
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता और ऊष्मा संतुलन – हर पदार्थ को गर्म होने के लिए अलग-अलग ऊर्जा चाहिए। किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c) वह ऊर्जा है जो उसके 1 kg का ताप 1 °C (या 1 K) बढ़ाती है। इसका मात्रक J/(kg·°C) है। किसी भी मात्रा को गर्म करने की ऊर्जा Q = m × c × ΔT होती है। पानी की c बहुत बड़ी है (लगभग 4200 J/(kg·°C)), इसलिए वह धीरे गर्म होता है और धीरे ठंडा होता है। जब गर्म और ठंडी चीज़ मिलती हैं और ऊष्मा बाहर नहीं जाती, तो गर्म चीज़ द्वारा दी गई ऊष्मा = ठंडी चीज़ द्वारा ली गई ऊष्मा। इसे ऊष्मा संतुलन कहते हैं और कैलोरीमीटर इसी पर काम करता है।
- अवस्था परिवर्तन: पिघलना, उबलना, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन – कोई पदार्थ गरम या ठंडा करने पर ठोस, द्रव और गैस के बीच बदल सकता है। पिघलने, उबलने, वाष्पीकरण और ऊर्ध्वपातन में ऊष्मा लगती है। जमने, संघनन और निक्षेपण में ऊष्मा बाहर निकलती है। जब अवस्था बदल रही होती है तब तापमान नहीं बदलता, क्योंकि ऊष्मा कणों के बीच का खिंचाव तोड़ने में लगती है। इस छिपी ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। वाष्पीकरण हर तापमान पर, सिर्फ़ सतह से होता है और ठंडक देता है। अवस्था परिवर्तन भौतिक परिवर्तन है: कोई नया पदार्थ नहीं बनता और द्रव्यमान वही रहता है।
- ऊष्मा इंजन – ऊष्मा इंजन वह मशीन है जो ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलती है। ईंधन जलकर ऊष्मा Q = q × m देता है, जहाँ q ईंधन का ऊष्मीय मान (दहन की ऊष्मा) और m उसका द्रव्यमान है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है या टरबाइन घुमाती है। चार स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति और निष्कासन दोहराता है। ऊष्मा का केवल कुछ भाग उपयोगी कार्य बनता है, बाक़ी बेकार ऊष्मा बनकर निकल जाता है। दक्षता η = W ÷ Q × 100%। इंजन CO₂ और दूसरी गैसें भी छोड़ते हैं जो हवा को गंदा और धरती को गर्म करती हैं।
2. Electric and magnetic phenomena
Electric charge and Coulomb's law · Electric field · Conductors, insulators, semiconductors · Electric current and circuits · EMF and full-circuit Ohm's law · Work and power of current · Magnetic field · Ampère force and motor · Electromagnetic induction
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
- विद्युत क्षेत्र और उसकी तीव्रता – आवेश अपने चारों ओर के स्थान को ऐसा बदल देता है कि वहाँ रखा हर दूसरा आवेश बल महसूस करता है। यही विद्युत क्षेत्र है। किसी बिंदु पर इसकी तीव्रता = छोटे धन परीक्षण आवेश पर बल ÷ वह आवेश: E = F/q, मात्रक N/C (= V/m)। बिंदु आवेश के लिए E = kQ/r², k = 9 × 10⁹ N m²/C²। E सदिश है: + आवेश से दूर और − आवेश की ओर। क्षेत्र रेखाएँ दिशा दिखाती हैं और घनत्व से तीव्रता। कई आवेशों के क्षेत्र सदिश रूप से जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
- विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव – जिस तार में विद्युत धारा बहती है, उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है। सीधे तार के चारों ओर यह वृत्तों में होता है, वृत्ताकार लूप के केंद्र पर लगभग सीधा होता है, और परिनालिका के अंदर एकसमान होता है, जिससे परिनालिका छड़ चुंबक जैसी बन जाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- विद्युतचुंबकीय प्रेरण: चुंबक से बिजली बनाना – जब किसी कुंडली से गुज़रने वाला चुंबकीय क्षेत्र बदलता है, तो कुंडली के सिरों पर वोल्टेज (विभवांतर) पैदा होता है। इसे विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहते हैं। परिपथ बंद हो तो धारा बहती है। तेज़ बदलाव, ज़्यादा फेरे या ताक़तवर चुंबक से वोल्टेज बढ़ता है। जनित्र, माइक्रोफ़ोन और ट्रांसफ़ॉर्मर इसी पर चलते हैं, और ट्रांसफ़ॉर्मर की मदद से ग्रिड बिजली को दूर तक कम बर्बादी के साथ भेजता है।