विद्युतचुंबकीय प्रेरण क्या है?
प्रेरण का मतलब है बिना छुए कुछ करवा देना। विद्युतचुंबकीय प्रेरण में चुंबक तार को छुए बिना उसमें वोल्टेज पैदा करता है।
नियम आसान है: जब कुंडली से गुज़रने वाला चुंबकीय क्षेत्र बदलता है, तो कुंडली में वोल्टेज प्रेरित होता है। इसे प्रेरित विभवांतर (या प्रेरित emf) कहते हैं।
अगर कुंडली पूरे परिपथ का हिस्सा है, तो यह वोल्टेज धारा बहाता है। यह प्रेरित धारा है। परिपथ खुला हो तो वोल्टेज रहता है, धारा नहीं।
क्षेत्र तीन तरह से बदल सकता है:
- चुंबक को कुंडली के पास या दूर ले जाओ;
- कुंडली को चुंबक के पास हिलाओ या घुमाओ;
- पास की दूसरी कुंडली की धारा चालू-बंद करो या AC चलाओ।
कुंडली के अंदर रुका चुंबक कुछ नहीं बनाता। क्षेत्र है, पर बदल नहीं रहा।
प्रेरित वोल्टेज कैसे बढ़ता है?
तीन चीज़ें प्रेरित वोल्टेज बढ़ाती हैं:
- तेज़ बदलाव: चुंबक तेज़ हिलाओ या कुंडली तेज़ घुमाओ।
- ज़्यादा फेरे: हर फेरा अपना थोड़ा वोल्टेज जोड़ता है।
- ताक़तवर चुंबक (या कुंडली में लोहे का क्रोड, जो क्षेत्र को मज़बूत करता है)।
धारा की दिशा गति की दिशा और ध्रुव पर निर्भर है। उत्तरी ध्रुव अंदर धकेलो तो धारा एक तरफ़; बाहर खींचो तो दूसरी तरफ़। चुंबक को पलट दो, तो भी धारा पलट जाती है।
प्रेरित धारा हमेशा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जो बदलाव का विरोध करे। इसलिए चुंबक धकेलने में मेहनत लगती है। यही मेहनत विद्युत ऊर्जा बनती है। ऊर्जा मुफ़्त नहीं मिलती।
जनित्र: डायनमो और प्रत्यावर्तित्र (अल्टरनेटर)
विद्युत जनित्र गति (गतिज ऊर्जा) को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली घूमती है (या कुंडलियों के बीच चुंबक घूमता है)।
- AC जनित्र (अल्टरनेटर): कुंडली घूमते समय उसकी हर भुजा कभी ऊपर, कभी नीचे जाती है, इसलिए हर आधे चक्कर में धारा की दिशा बदलती है। यह प्रत्यावर्ती धारा (AC) है। वोल्टेज-समय ग्राफ़ पर यह तरंग जैसी दिखती है।
- डायनमो (DC जनित्र): विभक्त वलय दिक्परिवर्तक (स्प्लिट रिंग कम्यूटेटर) हर आधे चक्कर में जोड़ बदल देता है, तो धारा एक ही दिशा में बहती है। यह दिष्ट धारा (DC) है जो घटती-बढ़ती है पर ऋणात्मक नहीं होती।
तेज़ घुमाओ तो शिखर वोल्टेज भी बढ़ता है और हर सेकंड ज़्यादा तरंगें (ज़्यादा आवृत्ति) बनती हैं।
माइक्रोफ़ोन भी प्रेरण से चलता है: आवाज़ की तरंगें चुंबक पर लगी छोटी कुंडली को हिलाती हैं, जिससे आवाज़ जैसा बदलता छोटा वोल्टेज बनता है। लाउडस्पीकर उलटा काम करता है (मोटर प्रभाव)।
ट्रांसफ़ॉर्मर
ट्रांसफ़ॉर्मर AC वोल्टेज का मान बदलता है। इसमें एक प्राथमिक कुंडली और एक द्वितीयक कुंडली एक ही लोहे के क्रोड पर लिपटी होती हैं।
- प्राथमिक कुंडली की AC लगातार बदलता चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।
- नर्म लोहे का क्रोड यह बदलता क्षेत्र द्वितीयक कुंडली तक ले जाता है।
- बदलता क्षेत्र द्वितीयक कुंडली में AC वोल्टेज प्रेरित करता है।
ट्रांसफ़ॉर्मर सिर्फ़ AC पर चलता है। स्थिर DC स्थिर क्षेत्र बनाती है, और स्थिर क्षेत्र कुछ प्रेरित नहीं करता।
फेरों का नियम: Vp ÷ Vs = Np ÷ Ns
- स्टेप-अप (उच्चायी): द्वितीयक में ज़्यादा फेरे (Ns > Np), तो Vs > Vp।
- स्टेप-डाउन (अपचायी): द्वितीयक में कम फेरे (Ns < Np), तो Vs < Vp।
आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर ऊर्जा बर्बाद नहीं करता, इसलिए इनपुट शक्ति = आउटपुट शक्ति: Vp × Ip = Vs × Is। वोल्टेज जितने गुना बढ़े, धारा उतने गुना घटती है।
पावर ग्रिड: वोल्टेज बढ़ाना और घटाना क्यों?
पावर ग्रिड पूरे देश के बिजलीघरों को घरों से जोड़ता है। लंबे तारों में प्रतिरोध होता है और धारा उन्हें गरम करती है: ऊष्मा में नष्ट शक्ति = I² × R। यह ऊर्जा की बर्बादी है।
बर्बादी घटाने के लिए बिजलीघर पर स्टेप-अप ट्रांसफ़ॉर्मर वोल्टेज बहुत बढ़ा देता है (जैसे 4,00,000 V)। उतनी ही शक्ति के लिए ज़्यादा वोल्टेज का मतलब बहुत कम धारा, तो बहुत कम ऊष्मा। धारा आधी, तो नुकसान एक-चौथाई।
शहरों के पास स्टेप-डाउन ट्रांसफ़ॉर्मर वोल्टेज को चरणों में घटाकर घरों के लिए सुरक्षित करते हैं (भारत और यूरोप में लगभग 230 V, उत्तरी अमेरिका में 120 V)।
करके देखो: एक प्रयोग
3D में: चुंबक को पहले धीरे, फिर तेज़ अंदर धकेलो। पहले अनुमान लगाओ: कब सुई ज़्यादा घूमेगी? फिर फेरे 2 से 12 करो और दोबारा जाँचो। ट्रांसफ़ॉर्मर में Np = 10 और Ns = 5 रखो और देखने से पहले आउटपुट का अनुमान लगाओ।
स्कूल या घर पर (किसी बड़े के साथ): टॉयलेट-रोल की नली पर पतले इंसुलेटेड ताँबे के तार के 50-100 फेरे लपेटो। दोनों खुले सिरे किसी संवेदी मीटर (गैल्वेनोमीटर, या सबसे छोटे mV रेंज पर मल्टीमीटर) से जोड़ो। ताक़तवर चुंबक अंदर-बाहर करो। रीडिंग का चिह्न पलटते देखो। धीरे और तेज़, और 20 फेरे बनाम 100 फेरे आज़माओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रेरित वोल्टेज बढ़ता है: तेज़ बदलाव, ज़्यादा फेरे, ताक़तवर क्षेत्र से
- Vp ÷ Vs = Np ÷ Ns
- Vp × Ip = Vs × Is (आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर: इनपुट शक्ति = आउटपुट शक्ति)
- तारों में नष्ट शक्ति = I² × R
- शक्ति P = V × I
हल किए गए उदाहरण
1. एक चुंबक मीटर से जुड़ी कुंडली के अंदर रुका है। मीटर क्या दिखाएगा? क्यों?
शून्य। कुंडली से गुज़रता क्षेत्र नहीं बदल रहा, इसलिए वोल्टेज प्रेरित नहीं होता।
2. ट्रांसफ़ॉर्मर की प्राथमिक कुंडली में 100 और द्वितीयक में 500 फेरे हैं। इनपुट 12 V AC है। आउटपुट वोल्टेज? स्टेप-अप या स्टेप-डाउन?
Vs = Vp × Ns ÷ Np = 12 × 500 ÷ 100 = 60 V। Ns > Np, इसलिए स्टेप-अप।
3. फ़ोन चार्जर 230 V को 5 V करता है। प्राथमिक में 2300 फेरे हैं। द्वितीयक में कितने फेरे?
Ns = Np × Vs ÷ Vp = 2300 × 5 ÷ 230 = 50 फेरे।
4. आदर्श ट्रांसफ़ॉर्मर की प्राथमिक में 230 V, 0.5 A है और आउटपुट 23 V है। द्वितीयक धारा?
इनपुट शक्ति = 230 × 0.5 = 115 W। Is = 115 ÷ 23 = 5 A। वोल्टेज 10 गुना घटा, धारा 10 गुना बढ़ी।
5. बिजलीघर 10,00,000 W भेजता है। 10,000 V और 4,00,000 V पर तार की धारा निकालो।
I = P ÷ V। 10,000 V पर I = 100 A। 4,00,000 V पर I = 2.5 A। धारा 40 गुना कम।
6. पिछले उदाहरण में तारों का प्रतिरोध 10 Ω है। ऊष्मा नुकसान की तुलना करो।
100 A पर: I²R = 100² × 10 = 1,00,000 W। 2.5 A पर: 2.5² × 10 = 62.5 W। स्टेप-अप करने से लगभग पूरी बर्बादी बच जाती है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कुंडली में रुका चुंबक धारा बनाता है। सिर्फ़ बदलता क्षेत्र वोल्टेज प्रेरित करता है।
- ट्रांसफ़ॉर्मर को DC पर चलाना। स्थिर DC से स्थिर क्षेत्र बनता है, द्वितीयक को कुछ नहीं मिलता।
- यह सोचना कि स्टेप-अप ट्रांसफ़ॉर्मर मुफ़्त ऊर्जा देता है। वोल्टेज बढ़ता है तो धारा घटती है; आउटपुट शक्ति इनपुट से ज़्यादा नहीं होती।
- फेरों का अनुपात उलट देना: Vs ÷ Vp = Ns ÷ Np, यानी द्वितीयक में ज़्यादा फेरे = ज़्यादा वोल्ट।