France Terminale Engineering Science
अध्याय: 2
1. Competences and content
Dynamics and energy of systems · Feedback control · Information processing and networks · Interdisciplinary project
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कैसे चलता है – नेटवर्क यानी आपस में जुड़े उपकरण जो डेटा बाँटते हैं। हर उपकरण का एक IP पता होता है। डेटा छोटे क्रमांकित पैकेटों में कटता है। राउटर हर पैकेट को एक-एक कदम उसके पते की ओर भेजते हैं, और TCP अंत में पैकेटों को क्रम से जोड़ता है। DNS वेबसाइट के नाम को IP पते में बदलता है। क्लाइंट माँगता है, सर्वर देता है। फ़ायरवॉल, पासवर्ड, अपडेट और एन्क्रिप्शन नेटवर्क को सुरक्षित रखते हैं।
- नेटवर्क कैसे बढ़े और डेटा कैसे चलता है – कंप्यूटर नेटवर्क जुड़े हुए उपकरणों का समूह है जो डेटा साझा करते हैं। नेटवर्किंग ARPANET (1969) से शुरू हुई, 1980 के दशक में विश्वविद्यालयों के लिए NSFNET बना, और दूसरे नेटवर्कों से जुड़कर इंटरनेट बना — नेटवर्कों का नेटवर्क। हर डेटा संचार के पाँच भाग हैं: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश, संचार माध्यम और प्रोटोकॉल। बैंडविड्थ वह आवृत्ति-सीमा है जो चैनल ले जा सकता है (Hz में); डेटा दर प्रति सेकंड जाने वाले बिट (bps) हैं। नेटवर्क के हर उपकरण का IP एड्रेस होता है। डेटा सर्किट स्विचिंग (पहले पक्का रास्ता बुक) या पैकेट स्विचिंग (डेटा पैकेटों में कटकर अलग-अलग चलता है) से जाता है।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
2. Physics complement
Kinematics and dynamics · Waves; light and photons · Energy: conversions and transfers · Measurement and uncertainty
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
- तरंगों के गुण: परावर्तन, अपवर्तन, विवर्तन और व्यतिकरण – हर तरंग (पानी, ध्वनि, प्रकाश) चार काम करती है। दीवार से टकराकर लौटती है (परावर्तन)। चाल बदलने पर मुड़ जाती है (अपवर्तन)। दरार या किनारे के बाद फैल जाती है (विवर्तन)। और दो तरंगें मिलें तो जुड़ जाती हैं (अध्यारोपण): शिखर + शिखर = बड़ी तरंग (संपोषी व्यतिकरण), शिखर + गर्त = शांत (विनाशी व्यतिकरण)। नियम: पथांतर = nλ हो तो तेज़, (n + ½)λ हो तो शांत। दो झिरियों के लिए फ्रिंज की दूरी Δx = λD/d।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- द्रव्य और उसका मापन – द्रव्य वह सब कुछ है जिसमें द्रव्यमान हो और जो जगह घेरे। यह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है, और तत्व, यौगिक या मिश्रण हो सकता है। रसायनज्ञ SI मात्रकों में मापते हैं। हर माप में थोड़ा संदेह होता है, इसलिए हम उसे सही सार्थक अंकों के साथ लिखते हैं, बहुत बड़ी-छोटी संख्या वैज्ञानिक संकेतन में लिखते हैं और इकाई को इकाई-गुणक से बदलते हैं।