United Grade 12 Precalculus
अध्याय: 9
1. Functions and their inverses
Composition and inverses · Logarithm and exponent inverses
- संबंध एवं फलन (कक्षा 12) – समुच्चय A पर संबंध R, A × A से चुनी गई जोड़ियों (a, b) का कोई भी समूह है। अगर हर तत्व खुद से संबंधित हो तो R स्वतुल्य है। अगर (a, b) के साथ हमेशा (b, a) भी हो तो सममित है। अगर (a, b) और (b, c) के साथ हमेशा (a, c) भी हो तो संक्रामक है। तीनों गुण हों तो तुल्यता संबंध; यह A को अलग-अलग तुल्यता वर्गों में बाँट देता है। फलन f: A → B, A के हर तत्व को B का ठीक एक तत्व देता है। अलग इनपुट का अलग आउटपुट हो तो एकैकी, B का हर तत्व आउटपुट बने तो आच्छादक, और दोनों हों तो एकैकी आच्छादी (bijective)।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
2. Polynomial and rational functions
Rational functions with asymptotes and end behavior · Rational expressions as a field (+)
- परिमेय फलन: ग्राफ़, अनंतस्पर्शी और स्केच बनाना – परिमेय फलन एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग देकर बनता है, जैसे y = (2x + 1)/(x − 1)। जहाँ हर (नीचे वाला) शून्य हो, वहाँ फलन परिभाषित नहीं। वहाँ ग्राफ़ ऊर्ध्वाधर अनंतस्पर्शी के साथ ऊपर-नीचे भागता है। दूर जाकर वह क्षैतिज या तिरछे अनंतस्पर्शी के पास टिक जाता है।
3. Trigonometry
Unit circle symmetry and periodicity (+) · Inverse trigonometric functions (+) · Sum and difference identities (+) · Trigonometry of general triangles
- इकाई वृत्त: सममिति और आवर्तता – इकाई वृत्त की त्रिज्या 1 है और केंद्र मूल बिंदु पर है। कोण θ पर बिंदु के निर्देशांक (cos θ, sin θ) होते हैं। इस बिंदु के दर्पण प्रतिबिंब π − θ, π + θ और −θ के नियम देते हैं। एक पूरा चक्कर (2π) लगाने पर हम वापस वहीं आते हैं, इसलिए sin और cos हर 2π पर और tan हर π पर दोहराते हैं।
- प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन (कक्षा 12) – sin x, cos x जैसे फलन बार-बार दोहराते हैं, इसलिए पूरे R पर एकैकी नहीं हैं और उनका प्रतिलोम नहीं बनता। हम हर फलन का एक टुकड़ा (मुख्य मान शाखा) चुनते हैं जहाँ वह एकैकी और आच्छादक हो। उस टुकड़े पर प्रतिलोम बनता है: y = sin⁻¹x यानी sin y = x, जहाँ y ∈ [−π/2, π/2]। प्रतिलोम का ग्राफ शाखा का रेखा y = x में दर्पण प्रतिबिंब है। मुख्य परिसर: sin⁻¹ [−π/2, π/2], cos⁻¹ [0, π], tan⁻¹ (−π/2, π/2), cot⁻¹ (0, π), sec⁻¹ [0, π] − {π/2}, cosec⁻¹ [−π/2, π/2] − {0}।
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- ज्या नियम (Law of Sines) – किसी भी त्रिभुज में हर भुजा को उसके सामने वाले कोण के sin से भाग दो, तो एक ही संख्या मिलती है: a/sinA = b/sinB = c/sinC = 2R। यहाँ R उस वृत्त की त्रिज्या है जो तीनों शीर्षों से होकर जाता है। जब दो कोण और एक भुजा पता हो (AAS, ASA), या दो भुजाएँ और ऐसा कोण जो उनके बीच न हो (SSA), तब यह नियम लगाओ। SSA में दो, एक या शून्य त्रिभुज बन सकते हैं।
4. Complex numbers
Complex plane · Polynomial identities in complex numbers (+)
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
- द मुआवर प्रमेय और इकाई के मूल – सम्मिश्र संख्या को उसकी लंबाई r और कोण θ से लिख सकते हैं: z = r(cos θ + i sin θ) = re^{iθ}। गुणा करने पर लंबाइयाँ गुणा होती हैं और कोण जुड़ते हैं। इसलिए zⁿ = rⁿ(cos nθ + i sin nθ) — यही द मुआवर प्रमेय है। इससे घात जल्दी निकलती है, cos nθ और sin nθ के सूत्र मिलते हैं, और किसी भी संख्या के n मूल मिलते हैं। 1 के n मूल इकाई वृत्त पर बराबर दूरी पर, सम बहुभुज के कोनों पर बैठते हैं।
5. Vectors and matrices
Vector quantities · Vector operations · Matrices and their applications · Matrices for systems of equations (+)
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम – आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।
- सारणिक (Determinants): उपसारणिक, सहखंड, सहखंडज, व्युत्क्रम और समीकरण निकाय – सारणिक एक वर्ग आव्यूह से बनी एक संख्या है, जिसे |A| लिखते हैं। 2 × 2 के लिए यह ad − bc है और स्तंभों से बने समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर है। 3 × 3 में हम उपसारणिक और सहखंड से एक पंक्ति पर प्रसार करते हैं। |A| = 0 हो तो A अव्युत्क्रमणीय है, उसका व्युत्क्रम नहीं होता। सारणिक का आधा त्रिभुज का क्षेत्रफल देता है। सहखंडज (सहखंड आव्यूह का परिवर्त) से A⁻¹ = (adj A)/|A| मिलता है, फिर AX = B का हल X = A⁻¹B। |A| और (adj A)B से पता चलता है कि निकाय संगत है या नहीं।
6. Conic sections
Ellipses and hyperbolas from foci (+)
- शंकु परिच्छेद (कक्षा 11): वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त और अतिपरवलय – द्वि-शंकु को समतल से काटने पर वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय या अतिपरवलय बनता है; शीर्ष से कटे तो बिंदु, रेखा या रेखा-युग्म (अपभ्रष्ट)। वृत्त: (x − h)² + (y − k)² = r²। परवलय y² = 4ax: नाभि (a, 0), नियता x = −a, नाभिलंब 4a, e = 1। दीर्घवृत्त x²/a² + y²/b² = 1: c² = a² − b², e = c/a < 1, नाभिलंब 2b²/a, PF₁ + PF₂ = 2a। अतिपरवलय x²/a² − y²/b² = 1: c² = a² + b², e > 1, |PF₁ − PF₂| = 2a।
7. Polar and parametric
Polar coordinates and graphs · Parametric equations
- ध्रुवीय निर्देशांक (Polar Coordinates) – ध्रुवीय निर्देशांक में बिंदु की स्थिति एक स्थिर बिंदु (ध्रुव) से दूरी r और एक स्थिर किरण (आरंभिक रेखा) से वामावर्त घूमे कोण θ से बताई जाती है। बदलने के लिए x = r cosθ, y = r sinθ, और वापस r² = x² + y², tanθ = y/x (चतुर्थांश देखकर)। r = f(θ) से वृत्त, कार्डियॉइड, गुलाब और सर्पिल बनते हैं। ढाल dy/dx = (dy/dθ)/(dx/dθ), क्षेत्रफल = ½∫r²dθ।
- प्राचलिक समीकरण: वक्र, ढाल और चाप लंबाई – प्राचलिक रूप में x और y दोनों को एक तीसरे चर t से लिखा जाता है, जिसे प्राचल (parameter) कहते हैं। t के हर मान से एक बिंदु मिलता है, और t बदलने पर बिंदु एक वक्र बनाता है। t हटाकर कार्तीय समीकरण मिलता है, dy/dx = (dy/dt)/(dx/dt) से ढाल, और t समय हो तो चाल और चाप लंबाई।
8. Probability for decisions
Expected value · Using probability for decisions
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
9. Sequences, series and limits
Series and sigma notation · Intro to limits
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।