CBSE कक्षा 12 अनुप्रयुक्त गणित
अध्याय: 8
1. संख्याएँ, परिमाणन और संख्यात्मक अनुप्रयोग
मॉड्यूलो अंकगणित और सर्वांगसमता · एलीगेशन और मिश्रण · संख्यात्मक समस्याएँ · संख्यात्मक असमिकाएँ
- मॉड्यूलर अंकगणित: शेषफल और सर्वांगसमता – यूक्लिड विभाजन किसी भी पूर्णांक a को a = n × q + r लिखता है, जहाँ 0 ≤ r < n। शेषफल r को "a mod n" कहते हैं। दो संख्याएँ मॉड्यूलो n सर्वांगसम (a ≡ b mod n) हैं जब उनका शेषफल समान हो, यानी n, a − b को विभाजित करे। सर्वांगसमताओं को जोड़, घटा, गुणा और घात कर सकते हैं, इसलिए बड़ी संख्याओं का शेषफल छोटी संख्याओं से निकलता है। घातों के शेषफल चक्र में दोहराते हैं।
- एलीगेशन (मिश्रण का नियम) और मिश्रण – जब c और d मूल्य (या सांद्रता) वाली दो चीज़ें मिलाई जाती हैं, तो मिश्रण का माध्य मूल्य m इन दोनों के बीच होता है। एलीगेशन का नियम कहता है कि मात्राएँ (सस्ती : महँगी) = (d − m) : (m − c) के अनुपात में होंगी। यह भारित औसत m = (q₁c + q₂d) ÷ (q₁ + q₂) का छोटा तरीका है। बार-बार प्रतिस्थापन में, V इकाई के बर्तन से x इकाई निकालकर n बार पानी भरा जाए, तो बचा मूल द्रव = V(1 − x/V)ⁿ।
- चाल, दूरी और समय (समय और कार्य सहित) – चाल = दूरी ÷ समय। km/h को m/s में बदलने के लिए 5/18 से गुणा करो। औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय। आमने-सामने चलने पर दूरी दोनों चालों के जोड़ से घटती है, एक दिशा में अंतर से। ट्रेन को अपनी लंबाई भी तय करनी पड़ती है। धारा के साथ चाल = नाव + धारा; विरुद्ध = नाव − धारा। काम और नल भी दर हैं: दरें जोड़ो, रिसाव घटाओ।
2. बीजगणित
आव्यूह · सारणिक और व्युत्क्रम · युगपत समीकरणों का हल
- आव्यूह (Matrices): कोटि, प्रकार, परिवर्त, संक्रियाएँ और व्युत्क्रम – आव्यूह संख्याओं का एक डिब्बा है जिसमें संख्याएँ पंक्तियों और स्तंभों में रखी होती हैं। इसकी कोटि = पंक्तियाँ × स्तंभ। शून्य, तत्समक, विकर्ण, अदिश, पंक्ति, स्तंभ और वर्ग आव्यूह इसके खास प्रकार हैं। परिवर्त में पंक्तियाँ स्तंभ बन जाती हैं। Aᵀ = A हो तो सममित, Aᵀ = −A हो तो विषम-सममित। योग जगह-जगह करते हैं, गुणन पंक्ति × स्तंभ से। आव्यूह गुणन क्रमविनिमेय नहीं है (AB प्रायः BA नहीं)। यदि AB = BA = I हो तो B, A का व्युत्क्रम है और वह एक ही (अद्वितीय) होता है।
- सारणिक (Determinants): उपसारणिक, सहखंड, सहखंडज, व्युत्क्रम और समीकरण निकाय – सारणिक एक वर्ग आव्यूह से बनी एक संख्या है, जिसे |A| लिखते हैं। 2 × 2 के लिए यह ad − bc है और स्तंभों से बने समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर है। 3 × 3 में हम उपसारणिक और सहखंड से एक पंक्ति पर प्रसार करते हैं। |A| = 0 हो तो A अव्युत्क्रमणीय है, उसका व्युत्क्रम नहीं होता। सारणिक का आधा त्रिभुज का क्षेत्रफल देता है। सहखंडज (सहखंड आव्यूह का परिवर्त) से A⁻¹ = (adj A)/|A| मिलता है, फिर AX = B का हल X = A⁻¹B। |A| और (adj A)B से पता चलता है कि निकाय संगत है या नहीं।
3. कलन
अवकलज और अनुप्रयोग · समाकलन और अनुप्रयोग · अवकल समीकरण और मॉडलिंग
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
- अवकल समीकरण – अवकल समीकरण एक फलन y को उसके अवकलजों से जोड़ता है। इसकी कोटि सबसे ऊँचा अवकलज है और घात उस अवकलज की घात (जब समीकरण अवकलजों में बहुपद हो)। व्यापक हल में स्वेच्छ अचर होते हैं; y(0) = 1 जैसी शर्त उन्हें तय करके विशिष्ट हल देती है। कक्षा 12 में तीन प्रकार के प्रथम कोटि समीकरण हल करते हैं: चर पृथक्करणीय, समघातीय (y = vx रखो) और रैखिक dy/dx + Py = Q (समाकलन गुणक e^∫P dx से गुणा करो)।
4. प्रायिकता बंटन
यादृच्छिक चर और प्रत्याशा · द्विपद, प्वासों और प्रसामान्य बंटन
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।
- असतत यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर X किसी प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या में बदलता है। उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) की सूची है; हर P, 0 और 1 के बीच होता है और सबका जोड़ 1 होता है। माध्य E(X) = Σx·P(x) लंबे समय का औसत (संतुलन बिंदु) है। प्रसरण Var(X) = Σ(x − μ)²P(x) = E(X²) − μ² फैलाव बताता है; σ = √Var। खास मॉडल: एकसमान, द्विपद B(n, p) जिसका माध्य np और प्रसरण np(1 − p), और प्वासों जिसमें माध्य = प्रसरण = λ।
5. अनुमानिक सांख्यिकी
समष्टि और प्रतिदर्श · प्राचल, प्रतिदर्शज और अनुमान · t-परीक्षण
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
- सांख्यिकीय अनुमिति – सांख्यिकीय अनुमिति (statistical inference) का मतलब है: एक छोटे नमूने को देखकर पूरी समष्टि (population) के बारे में बात कहना। समष्टि के बारे में संख्या (जैसे असली अनुपात p या माध्य μ) प्राचल (parameter) कहलाती है। नमूने से निकली संख्या (जैसे p̂ या x̄) प्रतिदर्शज (statistic) है, और यही हमारा बिंदु आकलन है। अलग-अलग नमूने अलग उत्तर देते हैं: यह नमूना परिवर्तनशीलता है। बहुत सारे नमूनों के उत्तर मिलकर नमूना वितरण बनाते हैं, जिसका बीच असली मान पर होता है और फैलाव मानक त्रुटि (SE) कहलाता है: अनुपात के लिए √(p(1−p)/n), माध्य के लिए σ/√n। बड़ा नमूना = कम फैलाव। 95% विश्वास्यता अंतराल = आकलन ± 1.96 × SE; ऐसे 100 में से लगभग 95 अंतराल असली मान को पकड़ते हैं। सिमुलेशन से जाँचते हैं कि कोई दावा आँकड़ों से मेल खाता है या नहीं। अच्छी अनुमिति के लिए यादृच्छिक नमूना ज़रूरी है, और साथ-साथ बदलना कारण साबित नहीं करता।
- परिकल्पना परीक्षण (Hypothesis Testing) – परिकल्पना परीक्षण नमूने (sample) से पूरी जनसंख्या के बारे में किसी दावे को जाँचता है। शुरुआत शून्य परिकल्पना H₀ (कोई बदलाव नहीं, जैसे p = 0.5) और वैकल्पिक परिकल्पना H₁ (जो हमें शक है, जैसे p > 0.5) से होती है। सार्थकता स्तर चुनो, जैसे 5%। अगर H₀ सच हो तो हमारा नतीजा (या उससे भी चरम) कितना संभव है, यही p-मान है। p-मान स्तर से कम हो या नतीजा क्रांतिक क्षेत्र में हो, तो H₀ अस्वीकार। वरना H₀ अस्वीकार करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। टाइप I त्रुटि: सच्ची H₀ को अस्वीकार करना; टाइप II: झूठी H₀ को अस्वीकार न करना।
6. समय आधारित आँकड़े
काल श्रेणी
- काल श्रेणी: चल माध्य, प्रवृत्ति और मौसमी उतार-चढ़ाव – काल श्रेणी (time series) ऐसे आँकड़े हैं जो बराबर समय के अंतर पर लिखे जाते हैं, जैसे हर तिमाही की बिक्री या हर महीने की बारिश। इसे रेखा-ग्राफ़ पर बनाते हैं: समय x-अक्ष पर। असली आँकड़े मौसम के साथ ऊपर-नीचे होते हैं (मौसमी उतार-चढ़ाव), कई सालों की लंबी लहरों में (चक्रीय उतार-चढ़ाव) और थोड़े बेतरतीब ढंग से भी। लंबी दिशा (प्रवृत्ति) देखने के लिए हम चल माध्य (moving average) निकालते हैं: लगातार कुछ मानों का औसत, जैसे तिमाही आँकड़ों के लिए 4 मान। चल माध्य से होकर खींची सबसे ठीक बैठने वाली रेखा प्रवृत्ति रेखा है। मौसमी अंतर = असली मान − प्रवृत्ति मान। प्रवृत्ति में औसत मौसमी अंतर जोड़ने से अनुमान (forecast) मिलता है।
7. वित्तीय गणित
शाश्वत वार्षिकी और निक्षेप निधि · बॉन्ड का मूल्यांकन · समान मासिक किस्त · सीएजीआर और मूल्यह्रास
- वार्षिकी: बराबर किस्तें, भावी मूल्य और वर्तमान मूल्य – वार्षिकी (annuity) बराबर समय-अंतर पर दी गई बराबर किस्तों की श्रृंखला है, जैसे हर महीने की बचत या ऋण की किस्त। हर किस्त चक्रवृद्धि ब्याज कमाती है, इसलिए किस्तें गुणोत्तर श्रेणी बनाती हैं। साधारण वार्षिकी (हर अवधि के अंत में किस्त) का भावी मूल्य: FV = P[(1+i)ⁿ − 1]/i। वर्तमान मूल्य: PV = P[1 − (1+i)⁻ⁿ]/i। ऋण की राशि सभी किस्तों के वर्तमान मूल्य के बराबर होती है।
- बॉन्ड का मूल्यांकन – बॉन्ड किसी सरकार या कंपनी को दिया गया ऋण है। यह हर अवधि में तय कूपन (कूपन दर × अंकित मूल्य) देता है और परिपक्वता पर अंकित मूल्य लौटाता है। इसकी आज की उचित कीमत इन सब भुगतानों का बाज़ार प्रतिफल r पर वर्तमान मूल्य है: P = C × [1 − (1 + r)⁻ⁿ] ÷ r + F ÷ (1 + r)ⁿ। बाज़ार प्रतिफल कूपन दर से कम हो तो बॉन्ड प्रीमियम पर, बराबर हो तो सममूल्य पर, और ज़्यादा हो तो डिस्काउंट पर बिकता है। कीमत और प्रतिफल हमेशा उलटी दिशा में चलते हैं।
- EMI: समान मासिक किस्त, फ्लैट दर और घटती शेष राशि – EMI (समान मासिक किस्त) वह बराबर रकम है जो ऋण और ब्याज चुकाने के लिए हर महीने दी जाती है। फ्लैट दर विधि में पूरे समय पूरे ऋण पर ब्याज लगता है: EMI = (P + P×R×T/100) ÷ n। घटती शेष राशि विधि में ब्याज सिर्फ़ बचे बकाया पर लगता है: EMI = P·r·(1+r)^n ÷ ((1+r)^n − 1), जहाँ r मासिक दर (दशमलव में) और n महीनों की संख्या है। हर EMI में कुछ ब्याज और कुछ मूलधन होता है; ब्याज वाला हिस्सा घटता है और मूलधन वाला बढ़ता है, जब तक बकाया शून्य न हो जाए।
8. रैखिक प्रोग्रामन
रैखिक प्रोग्रामन
- रैखिक प्रोग्रामन (कक्षा 12): ग्राफ से सबसे अच्छा उत्तर खोजो – रैखिक प्रोग्रामन से हम कुछ नियम मानते हुए सबसे ज़्यादा लाभ या सबसे कम खर्च निकालते हैं। नियम सीधी रेखा वाली असमिकाएँ होती हैं, जिन्हें व्यवरोध (constraints) कहते हैं। सब व्यवरोध मिलकर अनुमत बिंदुओं का एक क्षेत्र बनाते हैं, यही सुसंगत क्षेत्र (feasible region) है। लक्ष्य Z = ax + by (उद्देश्य फलन) हमेशा इस क्षेत्र के किसी कोने पर सबसे अच्छा होता है। इसलिए: रेखाएँ खींचो, सही तरफ़ रंगो, कोने निकालो, हर कोने को Z में रखो और सबसे बड़ा या छोटा चुनो। क्षेत्र खुला (अपरिबद्ध) हो तो एक बार जाँच ज़रूर करो।