Russia 11 класс Algebra and Elements of Calculus (basic)
अध्याय: 4
1. Numbers and calculations
Integers and divisibility · Rational exponents and logarithms
- विभाज्यता: गुणज, भाजक, म.स. और ल.स. – a, b से विभाज्य है जब a = b × k हो (k पूर्ण संख्या): तब b, a का भाजक (गुणनखंड) है और a, b का गुणज। हर पूर्ण संख्या a = b × q + r लिखी जा सकती है, जहाँ 0 ≤ r < b (शेषफल सहित भाग); r = 0 हो तो b, a को पूरा बाँटता है। अंकों को देखकर 2, 3, 4, 5, 6, 8, 9, 10 और 11 से विभाज्यता जाँच सकते हैं। म.स. (महत्तम समापवर्तक, HCF/GCD) अभाज्य गुणनखंडों या यूक्लिड विधि से निकलता है; ल.स. (लघुत्तम समापवर्त्य, LCM) सबसे छोटा साझा गुणज है, और म.स. × ल.स. = a × b। जिनका म.स. 1 हो, वे सहअभाज्य हैं।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
2. Equations and inequalities
Exponential and logarithmic equations · Systems
- चरघातांकी समीकरण और असमिकाएँ – चरघातांकी समीकरण में अज्ञात x घात में होता है, जैसे 2^x = 8। इसे हल करने के तीन तरीके हैं: आधार समान बनाओ, छिपा द्विघात हो तो प्रतिस्थापन करो, या लघुगणक लो। असमिका में आधार 1 से बड़ा हो तो चिह्न वही रहता है, 0 और 1 के बीच हो तो पलट जाता है।
- युगपत समीकरण – युगपत समीकरण वे दो या ज़्यादा समीकरण हैं जो एक ही समय पर सही होने चाहिए। उनका हल वे मान हैं जो हर समीकरण में ठीक बैठें। ग्राफ़ पर हर हल वह बिंदु है जहाँ ग्राफ़ मिलते हैं। एक रेखा और एक वक्र हो तो रेखा को वक्र में रखें (प्रतिस्थापन); द्विघात समीकरण बनेगा, जिसका विविक्तकर बताएगा कि 2, 1 या 0 हल हैं। तीन रैखिक समीकरणों में एक-एक करके चर हटाएँ।
3. Functions and graphs
Function study · Trigonometric, exponential, logarithmic functions
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
4. Elements of calculus
Continuity · Derivative · Applications of derivative · Antiderivative and integral
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।