Spain 1º Bachillerato General Mathematics
अध्याय: 6
1. Number sense
Counting · Sense of operations · Relationships · Financial education
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
- डेटा विश्लेषण – डेटा विश्लेषण यानी कच्चे आँकड़ों को जवाब में बदलना। इसका एक चक्र है: सवाल पूछो, डेटा इकट्ठा करो, साफ़ करो (ग़लती, दोहराव और खाली जवाब हटाओ), व्यवस्थित करो, माध्य, माध्यिका, परास और पैटर्न से विश्लेषण करो, सही चार्ट बनाओ और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। बाहरी मान, छोटे नमूने और पक्षपात पर नज़र रखो, और याद रखो कि दो चीज़ों का साथ बढ़ना (सहसंबंध) यह साबित नहीं करता कि एक दूसरे का कारण है। डेटा को सुरक्षित रखना और अनुमति से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
- अनुपात और समानुपात – अनुपात a : b एक ही तरह की दो मात्राओं की तुलना है। दोनों भागों को एक ही संख्या से भाग देकर अनुपात सरल करते हैं। किसी राशि को अनुपात में बाँटने के लिए भाग जोड़ो, एक भाग निकालो, फिर गुणा करो। y = k·x हो तो प्रत्यक्ष समानुपात (एक दोगुना, दूसरा दोगुना); x·y = k हो तो व्युत्क्रम समानुपात (एक दोगुना, दूसरा आधा)।
- वित्त प्रबंधन के स्मार्ट तरीके – मुद्रास्फीति से कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए उतना ही पैसा कम खरीदता है। बैंक में रखे पैसे पर ब्याज मिलता है: साधारण ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर मिलता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज पहले के ब्याज पर भी मिलता है, इसलिए समय के साथ तेज़ी से बढ़ता है। बजट आय को ज़रूरतों, चाहतों और बचत में बाँटता है। बचत सुरक्षित रखी जाती है; निवेश बढ़ सकता है पर उसमें जोखिम है, और ज़्यादा संभावित लाभ का मतलब ज़्यादा जोखिम। बीमा जोखिम को बहुत लोगों में बाँटता है। एक सीमा से ऊपर की आय पर आयकर लगता है, जिसकी दरें आय के साथ बढ़ती हैं।
2. Measurement sense
Measurement · Change
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
3. Spatial sense
Visualisation, reasoning and geometric modelling
- ज्यामितीय मॉडलिंग: असली चीज़ों को सरल ठोसों से समझना – ज्यामितीय मॉडलिंग का मतलब है असली चीज़ को सरल आकारों (घनाभ, बेलन, शंकु, गोला, प्रिज़्म) से बदल देना ताकि हिसाब लगा सकें। चक्र है: असली चीज़ देखो, सरल करो, नापो, आयतन या पृष्ठीय क्षेत्रफल निकालो, फिर असलियत से जाँचो और मॉडल सुधारो। पैमाना k हो तो लंबाई k गुना, क्षेत्रफल k² गुना और आयतन k³ गुना। ज्यामिति प्रकृति और कला के पैटर्न भी समझाती है, जैसे मधुमक्खी के छत्ते के षट्भुज।
4. Algebraic sense and computational thinking
Patterns · Mathematical model · Equality and inequality · Relations and functions · Computational thinking
- अनुक्रम और श्रेढ़ियाँ – अनुक्रम संख्याओं की ऐसी सूची है जिसका क्रम तय है। इसका नियम दो तरह से लिखते हैं: पुनरावर्ती (पिछले पद से अगला पद) या स्पष्ट (n-वें पद का सीधा सूत्र)। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार वही संख्या जुड़ती है। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार उसी संख्या से गुणा होता है। फ्रैक्टल और हनोई की मीनार में भी यही नियम छिपे हैं।
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
5. Stochastic sense
Data organisation and analysis · Uncertainty · Probability distributions · Inference
- सहसंबंध: प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियर्सन गुणांक और स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध – सहसंबंध बताता है कि दो चर साथ-साथ कैसे बदलते हैं। दोनों साथ बढ़ें तो धनात्मक, एक बढ़े और दूसरा घटे तो ऋणात्मक, और कोई सीधा पैटर्न न हो तो शून्य। प्रकीर्ण आरेख इसे चित्र में दिखाता है। कार्ल पियर्सन का गुणांक r दिशा और ताक़त नापता है और हमेशा −1 से +1 के बीच रहता है। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध R कोटियों (रैंक) से चलता है और सुंदरता या ईमानदारी जैसे गुणों पर भी काम करता है; समान कोटियों में छोटा सुधार जोड़ते हैं।
- सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम और स्वतंत्र घटनाएँ – सप्रतिबंध प्रायिकता का मतलब है: जब हमें पहले से पता हो कि घटना B हो चुकी है, तब A का मौका। B के बाहर के सारे परिणाम हटाओ और फिर से गिनो: P(A|B) = P(A ∩ B) ÷ P(B)। इसी से गुणन नियम मिलता है: P(A ∩ B) = P(B)·P(A|B)। अगर B जानकर A का मौका न बदले, तो घटनाएँ स्वतंत्र हैं और P(A ∩ B) = P(A)·P(B)।
- असतत यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर X किसी प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या में बदलता है। उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) की सूची है; हर P, 0 और 1 के बीच होता है और सबका जोड़ 1 होता है। माध्य E(X) = Σx·P(x) लंबे समय का औसत (संतुलन बिंदु) है। प्रसरण Var(X) = Σ(x − μ)²P(x) = E(X²) − μ² फैलाव बताता है; σ = √Var। खास मॉडल: एकसमान, द्विपद B(n, p) जिसका माध्य np और प्रसरण np(1 − p), और प्वासों जिसमें माध्य = प्रसरण = λ।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
6. Socio-emotional sense
Beliefs, attitudes and emotions · Teamwork and decision-making · Inclusion, respect and diversity
- सामाजिक-भावनात्मक कौशल और गणितीय प्रक्रियाएँ – गणित अच्छा करना सिर्फ़ संख्याओं की बात नहीं है। सामाजिक-भावनात्मक कौशल आपको अपनी भावनाएँ पहचानने, तनाव शांत करने, ग़लती के बाद भी डटे रहने, दूसरों के साथ अच्छे से काम करने और 'मैं सीख सकता हूँ' मानने में मदद करते हैं। गणितीय प्रक्रियाएँ अच्छे हल करने वालों की आदतें हैं: समस्या समझो, योजना बनाओ, करो और जाँचो; तर्क और प्रमाण दो; विचार जोड़ो; उपकरण चुनो; शब्द, तालिका, ग्राफ़ और मॉडल से दिखाओ; और साफ़ समझाओ।