National Year 13 Mathematics
अध्याय: 16
1. A Proof
Proof by contradiction
- तर्क और उपपत्ति: गणितज्ञ कैसे दिखाते हैं कि कोई बात हमेशा सत्य है – उपपत्ति (proof) सही कारणों की ऐसी कड़ी है जो दिखाती है कि कथन हर स्थिति में सत्य है। कथन सत्य या असत्य होता है; 'यदि P तो Q' (P ⇒ Q) का अर्थ है P होने पर Q ज़रूर होगा, पर उसका विलोम Q ⇒ P ग़लत भी हो सकता है। P ⇔ Q का अर्थ दोनों दिशाएँ सही। मुख्य विधियाँ: प्रत्यक्ष उपपत्ति (ज्ञात तथ्यों से क़दम-दर-क़दम, जैसे विषम संख्या 2n + 1); सभी स्थितियाँ जाँचकर उपपत्ति; प्रति-उदाहरण से खंडन (एक असफल स्थिति दावे को गिरा देती है); विरोधाभास से उपपत्ति (उल्टा मानकर असंभव तक पहुँचना)। ज्यामितीय उपपत्ति में हर पंक्ति का कारण लिखा जाता है (समांतर रेखाएँ, सर्वांगसम और समरूप त्रिभुज)। विश्लेषणात्मक उपपत्ति निर्देशांक लेती है; संश्लेषणात्मक उपपत्ति शुद्ध ज्यामिति।
2. B Algebra and functions
Functions · Partial fractions · Modelling with functions
- संबंध एवं फलन (कक्षा 12) – समुच्चय A पर संबंध R, A × A से चुनी गई जोड़ियों (a, b) का कोई भी समूह है। अगर हर तत्व खुद से संबंधित हो तो R स्वतुल्य है। अगर (a, b) के साथ हमेशा (b, a) भी हो तो सममित है। अगर (a, b) और (b, c) के साथ हमेशा (a, c) भी हो तो संक्रामक है। तीनों गुण हों तो तुल्यता संबंध; यह A को अलग-अलग तुल्यता वर्गों में बाँट देता है। फलन f: A → B, A के हर तत्व को B का ठीक एक तत्व देता है। अलग इनपुट का अलग आउटपुट हो तो एकैकी, B का हर तत्व आउटपुट बने तो आच्छादक, और दोनों हों तो एकैकी आच्छादी (bijective)।
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।
3. C Parametric equations
Parametric curves
- प्राचलिक समीकरण: वक्र, ढाल और चाप लंबाई – प्राचलिक रूप में x और y दोनों को एक तीसरे चर t से लिखा जाता है, जिसे प्राचल (parameter) कहते हैं। t के हर मान से एक बिंदु मिलता है, और t बदलने पर बिंदु एक वक्र बनाता है। t हटाकर कार्तीय समीकरण मिलता है, dy/dx = (dy/dt)/(dx/dt) से ढाल, और t समय हो तो चाल और चाप लंबाई।
4. D Sequences and series
Sequences · Arithmetic and geometric series · General binomial expansion
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- किसी भी परिमेय घात के लिए व्यापक द्विपद प्रसार – किसी भी परिमेय n के लिए (1 + x)^n = 1 + nx + n(n−1)x²/2! + n(n−1)(n−2)x³/3! + … अगर n धनात्मक पूर्ण संख्या है तो श्रेणी रुक जाती है। वरना यह कभी नहीं रुकती, और तभी सही है जब |x| < 1. (a + bx)^n में पहले a^n बाहर निकालो: a^n(1 + bx/a)^n, जो |bx/a| < 1 के लिए मान्य है। छोटे x पर कुछ पद ही बहुत अच्छा सन्निकट मान देते हैं।
5. E Trigonometry
Radians and small angles · Further trig functions and identities
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
6. F Exponentials and logarithms
Exponential modelling
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
7. G Differentiation
Further differentiation
- सांतत्य तथा अवकलनीयता – किसी बिंदु पर फलन सतत तब है जब वहाँ ग्राफ़ टूटता नहीं: बायीं सीमा, दायीं सीमा और फलन का मान तीनों बराबर हों। अवकलज स्पर्श रेखा की ढाल है। शृंखला नियम, अस्पष्ट अवकलन, eˣ, ln x और प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के सूत्र, लघुगणकीय अवकलन और प्राचलिक रूप से कक्षा 12 का लगभग हर फलन अवकलित हो जाता है। द्वितीय अवकलज बताता है कि ढाल खुद कैसे बदल रही है, यानी वक्र कैसे मुड़ रहा है।
8. H Integration
Further integration
- समाकलन – समाकलन अवकलन को उलट देता है: अगर F′(x) = f(x), तो ∫f(x) dx = F(x) + C। हम मानक सूत्रों, प्रतिस्थापन (अंदर वाले हिस्से को u मानना), आंशिक भिन्न (भिन्न को तोड़ना) और खंडशः समाकलन (∫u dv = uv − ∫v du) से समाकलन करते हैं। निश्चित समाकल ∫ₐᵇ f(x) dx, a से b तक वक्र के नीचे का चिह्नित क्षेत्रफल है, और मूल प्रमेय के अनुसार यह F(b) − F(a) के बराबर है।
9. I Numerical methods
Numerical methods
- संख्यात्मक विधियाँ: मूल और क्षेत्रफल कदम-दर-कदम – कुछ समीकरण और क्षेत्रफल किसी आसान सूत्र से नहीं निकलते। संख्यात्मक विधियाँ आसान कदमों को बार-बार दोहराकर उत्तर के जितना चाहो उतना पास पहुँचती हैं: चिह्न परिवर्तन जाँचो, अंतराल आधा करो (समद्विभाजन), स्पर्शरेखा पर फिसलो (न्यूटन-रैफ़सन), x = g(x) दोहराओ (स्थिर-बिंदु पुनरावृत्ति), क्षेत्रफल के लिए समलंब जोड़ो, और ढलान पर छोटे कदम चलो (ऑयलर)।
10. J Vectors (3D)
Vectors in three dimensions
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
11. L-M Data and conditional probability
Conditional probability · Correlation
- सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम और स्वतंत्र घटनाएँ – सप्रतिबंध प्रायिकता का मतलब है: जब हमें पहले से पता हो कि घटना B हो चुकी है, तब A का मौका। B के बाहर के सारे परिणाम हटाओ और फिर से गिनो: P(A|B) = P(A ∩ B) ÷ P(B)। इसी से गुणन नियम मिलता है: P(A ∩ B) = P(B)·P(A|B)। अगर B जानकर A का मौका न बदले, तो घटनाएँ स्वतंत्र हैं और P(A ∩ B) = P(A)·P(B)।
- सहसंबंध: प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियर्सन गुणांक और स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध – सहसंबंध बताता है कि दो चर साथ-साथ कैसे बदलते हैं। दोनों साथ बढ़ें तो धनात्मक, एक बढ़े और दूसरा घटे तो ऋणात्मक, और कोई सीधा पैटर्न न हो तो शून्य। प्रकीर्ण आरेख इसे चित्र में दिखाता है। कार्ल पियर्सन का गुणांक r दिशा और ताक़त नापता है और हमेशा −1 से +1 के बीच रहता है। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध R कोटियों (रैंक) से चलता है और सुंदरता या ईमानदारी जैसे गुणों पर भी काम करता है; समान कोटियों में छोटा सुधार जोड़ते हैं।
12. N Normal distribution
Normal distribution
- प्रसामान्य बंटन (Normal Distribution) – प्रसामान्य बंटन एक सतत, सममित, घंटी जैसा बंटन है जो माध्य μ (केंद्र) और मानक विचलन σ (फैलाव) से तय होता है: X ~ N(μ, σ²)। माध्य = माध्यिका = बहुलक। लगभग 68% मान μ से 1σ के भीतर, 95% 2σ के भीतर और 99.7% 3σ के भीतर होते हैं। किसी भी मान को मानक स्कोर z = (x − μ)/σ में बदलते हैं, जो N(0, 1) का पालन करता है; प्रायिकता वक्र के नीचे का क्षेत्रफल है, जिसे तालिका या कैलकुलेटर से Φ(z) के रूप में पढ़ते हैं।
13. O Hypothesis testing
Further hypothesis tests
- परिकल्पना परीक्षण (Hypothesis Testing) – परिकल्पना परीक्षण नमूने (sample) से पूरी जनसंख्या के बारे में किसी दावे को जाँचता है। शुरुआत शून्य परिकल्पना H₀ (कोई बदलाव नहीं, जैसे p = 0.5) और वैकल्पिक परिकल्पना H₁ (जो हमें शक है, जैसे p > 0.5) से होती है। सार्थकता स्तर चुनो, जैसे 5%। अगर H₀ सच हो तो हमारा नतीजा (या उससे भी चरम) कितना संभव है, यही p-मान है। p-मान स्तर से कम हो या नतीजा क्रांतिक क्षेत्र में हो, तो H₀ अस्वीकार। वरना H₀ अस्वीकार करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। टाइप I त्रुटि: सच्ची H₀ को अस्वीकार करना; टाइप II: झूठी H₀ को अस्वीकार न करना।
14. Q Kinematics (2D and projectiles)
Motion in two dimensions
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
15. R Forces and Newton's laws
Forces in two dimensions
- घर्षण: स्थैतिक, गतिज और लोटनिक घर्षण, नियम और स्नेहन – घर्षण वह बल है जो छूती सतहों के बीच आपेक्षिक गति (या उसकी शुरुआत) का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद बदलता है, पर एक अधिकतम तक: सीमांत घर्षण fs,max = μs N. फिसलना शुरू होते ही गतिज घर्षण fk = μk N लगता है, और μk < μs. घर्षण अभिलंब बल और सतहों की प्रकृति पर निर्भर है, संपर्क क्षेत्रफल पर नहीं। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम है; स्नेहक और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं।
16. S Moments
Moments
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।