South 고등학교 2학년 Ecology and Environment
अध्याय: 5
1. Environment and humans
Meanings of environment · Views of the environment · Ethical conflicts over environment · My local environment
- पर्यावरण नीतिशास्त्र: किसकी परवाह करें? – पर्यावरण नीतिशास्त्र पूछता है कि प्रकृति, जानवरों और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है। नैतिक परवाह का एक घेरा सोचिए। मानव-केंद्रित दृष्टि में सिर्फ़ इंसान अंदर हैं; प्रकृति का साधन-मूल्य है। संवेदनवाद (बेंथम, सिंगर) दर्द महसूस करने वाले जानवर जोड़ता है: पशु कल्याण कहता है दुख घटाओ, पशु अधिकार (रीगन) कहता है जानवरों को सिर्फ़ साधन मत बनाओ। जीव-केंद्रित दृष्टि (श्वाइत्ज़र, टेलर) हर जीव को मूल्य देती है। पारिस्थितिकी-केंद्रित दृष्टि (लियोपोल्ड की भूमि नैतिकता, गहन पारिस्थितिकी) पूरे तंत्र को महत्व देती है। कई पूर्वी और आदिवासी परंपराएँ इंसान को प्रकृति का हिस्सा मानती हैं। पीढ़ियों के बीच न्याय और सतत विकास भावी लोगों को जोड़ते हैं।
- स्थानीय भूगोल: अपने इलाक़े का अध्ययन – स्थानीय भूगोल उस जगह का अध्ययन है जहाँ आप रहते हैं: आपका कस्बा, ज़िला या गृह-क्षेत्र। पूरा विवरण छह सवालों के जवाब देता है: यह कहाँ है (स्थिति), प्रकृति इसे क्या देती है (उच्चावच, जलवायु, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, संरक्षित क्षेत्र), यहाँ कौन और कैसे रहता है (जनसंख्या और बस्तियाँ), लोग कैसे कमाते हैं (अर्थव्यवस्था, रोज़गार, सेवाएँ), पर्यावरण कैसा है और उसकी निगरानी कैसे होती है, और समय के साथ यह सब कैसे बदला। भूगोलवेत्ता ये जवाब क्षेत्र-अध्ययन से ढूँढते हैं: सवाल पूछो, देखकर, नापकर और बातचीत करके आँकड़े जुटाओ, उन्हें नक्शे-चित्र और ग्राफ़ में दिखाओ, और ताक़त, समस्याएँ और सुझाव लिखो।
2. Environmental systems
Earth and social systems · Water and air cycles · Soil and its links · Parts and wholes in ecosystems
- पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा – पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।
- मृदा: कैसे बनती है, उसकी परतें और उसे कैसे बचाएँ – मृदा (मिट्टी) ज़मीन की ऊपरी, ढीली और पतली परत है जिसमें पौधे उगते हैं। इसमें लगभग 45% चट्टान के कण, 5% जैविक पदार्थ (ह्यूमस), 25% पानी और 25% हवा होती है। जब अपक्षय जनक चट्टान को तोड़ता है और जीव ह्यूमस जोड़ते हैं, तब बहुत धीरे-धीरे मृदा बनती है। इसके पाँच कारक हैं: जनक चट्टान, जलवायु, जीव, उच्चावच (ढाल) और समय। ज़मीन को काटकर देखें तो परतें दिखती हैं, जिन्हें संस्तर कहते हैं: O (पत्तियाँ और ह्यूमस), A (ऊपरी मृदा), B (अवमृदा), C (टूटी चट्टान) और R (आधार शैल)। मृदा का गठन रेत, गाद और चिकनी मिट्टी के हिस्से पर निर्भर है। मृदा भोजन उगाती है, पानी जमा और साफ़ करती है, कार्बन रखती है और अनगिनत जीवों का घर है, पर अपरदन, लवण और प्रदूषण इसे बनने से कहीं तेज़ी से नष्ट कर सकते हैं।
3. Environmental problems and issues
Water and air problems · Soil and biodiversity problems · Resources, energy, waste · Politics, economy and law of environment · Local and global issues
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
- जैव विविधता और पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव – जैव विविधता यानी धरती पर या एक पारितंत्र में अलग-अलग प्रजातियों की विविधता। ज़्यादा जैव विविधता पारितंत्र को स्थिर बनाती है, क्योंकि जीव भोजन, आश्रय और स्थिर पर्यावरण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और हमें भोजन, दवाएँ, साफ़ हवा-पानी देती है। बढ़ती आबादी ज़्यादा संसाधन लेती है और ज़्यादा कचरा बनाती है। पानी, ज़मीन और हवा का प्रदूषण, निर्माण-खेती-खदान-कचरा स्थल के लिए ज़मीन, पीट खुदाई, वनों की कटाई और वैश्विक तापन जैव विविधता घटाते हैं। प्रजनन कार्यक्रम, आवास की बहाली, खेतों की बाड़ और किनारे, कम कटाई व कम CO₂, और रीसाइक्लिंग से इसे बचा सकते हैं।
- पर्यावरण नीति: समाज प्रकृति की रक्षा कैसे करता है – पर्यावरण नीति वे क़ानून, कर, नियम और समझौते हैं जिनसे समाज हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों की रक्षा करता है। इसकी ज़रूरत इसलिए है क्योंकि प्रदूषण एक बाहरी लागत है: प्रदूषक दूसरों को हुए नुक़सान का पैसा नहीं देता, और साझा संसाधन (हवा, नदियाँ, समुद्र) ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं। मुख्य उपाय: विनियमन (सीमाएँ, मानक, प्रतिबंध, पर्यावरण प्रभाव आकलन), बाज़ार उपाय (प्रदूषण कर, सीमा और व्यापार परमिट, साफ़ विकल्पों पर सब्सिडी), संरक्षित क्षेत्र और जानकारी (लेबल, रिपोर्ट)। मुख्य सिद्धांत: प्रदूषक भुगतान करे, रोकथाम, एहतियात और सतत विकास। लोगों को स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार है और उसकी रक्षा का कर्तव्य भी। नीति स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर चलती है, क्योंकि प्रदूषण हर सीमा पार करता है। समाज तीन रास्तों में संतुलन बनाता है: दोहन, परिरक्षण या संरक्षण (समझदारी से उपयोग)।
4. Climate crisis and action
Climate change as a crisis · Biodiversity and wellbeing · Greenhouse emissions by activity · Future scenarios · Korea's climate response
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- जैव विविधता और पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव – जैव विविधता यानी धरती पर या एक पारितंत्र में अलग-अलग प्रजातियों की विविधता। ज़्यादा जैव विविधता पारितंत्र को स्थिर बनाती है, क्योंकि जीव भोजन, आश्रय और स्थिर पर्यावरण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और हमें भोजन, दवाएँ, साफ़ हवा-पानी देती है। बढ़ती आबादी ज़्यादा संसाधन लेती है और ज़्यादा कचरा बनाती है। पानी, ज़मीन और हवा का प्रदूषण, निर्माण-खेती-खदान-कचरा स्थल के लिए ज़मीन, पीट खुदाई, वनों की कटाई और वैश्विक तापन जैव विविधता घटाते हैं। प्रजनन कार्यक्रम, आवास की बहाली, खेतों की बाड़ और किनारे, कम कटाई व कम CO₂, और रीसाइक्लिंग से इसे बचा सकते हैं।
- जलवायु मॉडल और भविष्य के परिदृश्य – जलवायु मॉडल एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो पृथ्वी को डिब्बों की जाली में काटकर हवा, समुद्र, बर्फ़ और ज़मीन के भौतिकी नियमों को समय के साथ दोहराता है। वैज्ञानिक उसे अलग-अलग "अगर ऐसा हुआ तो" उत्सर्जन कहानियों, यानी परिदृश्यों, के साथ चलाते हैं ताकि संभावित भविष्य दिखें। मॉडल को अतीत पर परखा जाता है, और अलग-अलग रनों का फैलाव अनिश्चितता बताता है।
- जलवायु नीति: दुनिया जलवायु परिवर्तन पर कैसे कदम उठाती है – जलवायु नीति वे समझौते, कानून और योजनाएँ हैं जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाती हैं (शमन, mitigation) और लोगों को बदलती जलवायु से निपटने में मदद करती हैं (अनुकूलन, adaptation)। वायुमंडल सबका साझा है, इसलिए कोई देश अकेले यह समस्या हल नहीं कर सकता। देश संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा सम्मेलन (UNFCCC, 1992), क्योटो प्रोटोकॉल (1997) और पेरिस समझौते (2015) से मिलकर काम करते हैं। पेरिस में हर देश अपना लक्ष्य (NDC) तय करता है और हर पाँच साल में उसे बढ़ाता है, ताकि गर्मी 2 °C से काफ़ी नीचे रहे और 1.5 °C की कोशिश हो। देश के भीतर सरकारें कार्बन टैक्स, कैप-एंड-ट्रेड, नियम-मानक और स्वच्छ ऊर्जा को सहायता देती हैं। कई देशों ने नेट ज़ीरो (कार्बन तटस्थता) का लक्ष्य रखा है। न्याय ज़रूरी है: अमीर देशों ने इतिहास में ज़्यादा उत्सर्जन किया, इसलिए "साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व", जलवायु वित्त और तकनीक साझा करना ज़रूरी है।
5. Sustainability and participation
SDGs · Ecological citizenship · Sustainable food, housing, transport
- सतत विकास लक्ष्य (SDGs): 2030 तक के 17 लक्ष्य – 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने 2030 का एजेंडा अपनाया जिसमें 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 उप-लक्ष्य हैं। ये लोग (गरीबी, भूख, स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता), धरती (पानी, जलवायु, महासागर, भूमि), समृद्धि (ऊर्जा, काम, उद्योग, शहर), शांति और साझेदारी को छूते हैं। सभी 17 जुड़े हुए हैं: एक में प्रगति दूसरों की मदद करती है।
- वैश्विक नागरिकता – वैश्विक नागरिक एक साथ स्थानीय, राष्ट्रीय और विश्व समुदाय का हिस्सा होता है। दुनिया आपस में जुड़ी है और ग़रीबी, भूख, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ साझा हैं। वैश्विक नागरिक अपने अधिकार और कर्तव्य जानता है, दूर के लोगों की परवाह करता है, अपना पारिस्थितिक पदचिह्न घटाता है और सोचता वैश्विक, करता स्थानीय है।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।