खतरा, संवेदनशीलता, जोखिम और आपदा
खतरा (hazard) वह है जो नुकसान कर सकता है: बाढ़, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन, आग, रसायन रिसाव या महामारी। खतरे प्राकृतिक या मानव-निर्मित हो सकते हैं।
संवेदनशीलता (vulnerability) यानी लोग कितनी आसानी से चोट खाते हैं: कमज़ोर घर, बाढ़ के मैदान में घर, कोई चेतावनी नहीं, गरीबी। क्षमता (capacity) इसका उल्टा है: कौशल, पैसा और योजना।
जोखिम = खतरा × संवेदनशीलता ÷ क्षमता। आपदा तब होती है जब खतरा आए और समुदाय अपने साधनों से न संभाल सके। एक ही भूकंप तैयार शहर में छोटी घटना और बिना तैयारी वाले शहर में आपदा बन सकता है।
आपदा प्रबंधन चक्र
- शमन (बहुत पहले): खतरा घटाना। भूकंप-रोधी घर, तटबंध और नालियाँ बनाना; बाढ़ के मैदान में घर न बनाना; तट पर मैंग्रोव लगाना।
- तैयारी (पहले): योजना, अभ्यास (ड्रिल), चेतावनी प्रणाली, आश्रय, प्रशिक्षित स्वयंसेवक और इमरजेंसी किट: पानी (हर व्यक्ति के लिए रोज़ लगभग 3 लीटर, 3 दिन), सूखा खाना, टॉर्च, रेडियो, बैटरी, फ़र्स्ट-एड, दवाइयाँ, ज़रूरी काग़ज़ों की कॉपी, सीटी, पावर बैंक।
- प्रतिक्रिया (दौरान और तुरंत बाद): चेतावनी, निकासी, खोज और बचाव, प्राथमिक उपचार, आश्रय, खाना-पानी।
- पुनर्वास (बाद में): घर, स्कूल, सड़क ठीक करना, काम फिर शुरू करना, मानसिक सहारा, और "पहले से बेहतर बनाना" ताकि अगली बार नुकसान कम हो।
कई लोग मिलकर काम करते हैं: सरकारी आपदा एजेंसियाँ (भारत में NDMA, NDRF), दमकल, पुलिस, सेना, अस्पताल, रेड क्रॉस, स्कूल और आम नागरिक।
चेतावनी और निकासी
पूर्व चेतावनी सायरन, फ़ोन अलर्ट, रेडियो, टीवी और लाउडस्पीकर से मिलती है। अपने इलाके के संकेत सीखो; कई जगह ऊँची-नीची आवाज़ वाला सायरन खतरा और लगातार आवाज़ 'सब ठीक' बताती है।
निकलने को कहा जाए तो:
- शांत रहो, सिर्फ़ सरकारी निर्देश मानो, अफ़वाह नहीं।
- इमरजेंसी किट लो; सुरक्षित हो तो गैस और बिजली बंद करो।
- तय निकासी मार्ग से एकत्र होने की जगह या आश्रय तक जाओ; बच्चों, बुज़ुर्गों और दिव्यांगों की मदद करो।
- अधिकारी न कहें तब तक वापस मत जाओ।
निकल न सको तो जहाँ हो वहीं सुरक्षित रहो: बाढ़ में ऊपरी मंज़िल, रसायन रिसाव में खिड़कियाँ बंद करके अंदर का कमरा।
आपातकालीन नंबर: भारत और यूरोप में 112; कई देशों में 911 या 999।
अलग-अलग खतरों में क्या करें
- बाढ़: ऊँची जगह जाओ। 15 cm तेज़ पानी तुम्हें गिरा सकता है; 30 cm कार बहा सकता है। उसमें न चलो, न गाड़ी चलाओ। बिजली के तारों से दूर रहो।
- भूकंप: मज़बूत मेज़ के नीचे झुको, ढको, पकड़ो; खिड़कियों से दूर। बाहर हो तो इमारतों और तारों से दूर खुली जगह। बाद के झटकों के लिए तैयार रहो।
- आग: शोर मचाओ, मदद बुलाओ, धुएँ के नीचे झुककर चलो, दरवाज़ा खोलने से पहले हाथ के पिछले हिस्से से छूकर देखो, लिफ़्ट नहीं सीढ़ी। कपड़ों में आग: रुको, लेटो, लुढ़को। छोटी आग पर सही अग्निशामक, अगर सीखा हो।
- चक्रवात/तूफ़ान: खिड़कियों से दूर अंदर रहो या चक्रवात आश्रय में जाओ; ढीली चीज़ें बाँधो।
- रसायन रिसाव: अंदर जाओ, खिड़कियाँ-रोशनदान बंद करो, रेडियो सुनो।
- सुनामी: तट के पास ज़ोर का भूकंप हो या समुद्र पीछे हटे, तो तुरंत ऊँची जगह भागो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जोखिम = खतरा × संवेदनशीलता ÷ क्षमता
- चक्र: शमन → तैयारी → प्रतिक्रिया → पुनर्वास
- भूकंप: झुको, ढको, पकड़ो
- कपड़ों में आग: रुको, लेटो, लुढ़को
- किट में पानी: हर व्यक्ति रोज़ लगभग 3 L, कम से कम 3 दिन
- आपातकालीन नंबर 112 (भारत, यूरोप)
हल किए गए उदाहरण
1. 4 लोगों का परिवार किट में 3 दिन का पानी रखना चाहता है। कितना पानी चाहिए?
3 L × 4 लोग × 3 दिन = 36 लीटर।
2. दो कस्बों पर बाढ़ का खतरा बराबर है। कस्बा A में तटबंध, चेतावनी और आश्रय है; B में कुछ नहीं। किसका जोखिम ज़्यादा?
कस्बा B। खतरा बराबर, पर संवेदनशीलता ज़्यादा और क्षमता कम, इसलिए जोखिम ज़्यादा।
3. सही चरण बताओ: समुद्री दीवार बनाना, स्कूल में फ़ायर ड्रिल, छतों से लोगों को बचाना, पुल दोबारा बनाना।
दीवार = शमन; ड्रिल = तैयारी; बचाव = प्रतिक्रिया; पुल बनाना = पुनर्वास।
आम गलतियाँ
- खतरे और आपदा को एक मानना। खतरा तभी आपदा बनता है जब लोग संभाल न सकें।
- तेज़ भूकंप के दौरान बाहर भागना। पहले झुको, ढको, पकड़ो।
- पानी कम लगे तो भी बाढ़ में चलना या गाड़ी चलाना।
- निकासी के समय सामान लेने वापस जाना, या आग में लिफ़्ट लेना।