📘 CodingMarble Learn

आण्विक कक्षक सिद्धांत

आण्विक कक्षक (MO) सिद्धांत में जुड़ने वाले परमाणुओं के परमाणु कक्षक मिलकर आण्विक कक्षक बनाते हैं, जो पूरे अणु के होते हैं। LCAO से दो परमाणु कक्षक जोड़ने पर कम ऊर्जा वाला आबंधी MO और घटाने पर ज़्यादा ऊर्जा वाला प्रतिआबंधी MO बनता है। इलेक्ट्रॉन आउफ़बाऊ, पाउली और हुंड नियम से भरते हैं। आबंध कोटि = ½ (Nb − Na)। धनात्मक आबंध कोटि = अणु का अस्तित्व; अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = अनुचुंबकीय। यह सिद्धांत बताता है कि He₂ क्यों नहीं बनता और O₂ अनुचुंबकीय क्यों है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो 1s कक्षक मिलते हैं। एक ही कला में जुड़ें तो नाभिकों के बीच आवेश बढ़ता है: आबंधी कक्षक (नीला)। घटें तो बीच में कट जाते हैं और नोड बचता है: प्रतिआबंधी कक्षक (लाल)।
  2. H₂ की ऊर्जा सीढ़ी: नीली पट्टियाँ (आबंधी) नीचे, लाल (प्रतिआबंधी) ऊपर। दोनों इलेक्ट्रॉन σ1s में जाते हैं। आबंध कोटि = (2 − 0) ÷ 2 = 1।
  3. He₂ में 4 इलेक्ट्रॉन। दो आबंधी σ1s में, दो प्रतिआबंधी σ*1s में। फ़ायदा और नुकसान बराबर: आबंध कोटि 0। He₂ बनता ही नहीं।
  4. N₂ में 10 संयोजी इलेक्ट्रॉन। ये σ2p तक भरते हैं। 8 आबंधी, 2 प्रतिआबंधी: आबंध कोटि 3। सब युग्मित, इसलिए N₂ प्रतिचुंबकीय।
  5. O₂ में 12 संयोजी इलेक्ट्रॉन। आख़िरी दो, दोनों π* कक्षकों में एक-एक जाते हैं, अयुग्मित। आबंध कोटि 2, और O₂ अनुचुंबकीय: चुंबक इसे खींचता है।
  6. अब तुम्हारी बारी: कोई भी अणु या आयन चुनो। तीर भरते देखो, फिर आबंध कोटि और चुंबकीय गुण पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कक्षक घटाने से नोड क्यों बनता है?

बीच में दोनों तरंगों के चिह्न उलटे हैं, इसलिए ठीक आधे पर कट जाती हैं। वहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व नहीं, तो नाभिक एक-दूसरे को धकेलते हैं: ऊर्जा ज़्यादा।

H₂ के दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही MO में कैसे?

हर कक्षक में उलटे चक्रण वाले दो इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं (पाउली)। कदम 2 के ऊपर-नीचे तीर यही दिखाते हैं।

He₂ में आबंधी इलेक्ट्रॉन हैं, तो आबंध क्यों नहीं?

दो प्रतिआबंधी इलेक्ट्रॉन ऊर्जा उतनी ही बढ़ाते हैं जितनी दो आबंधी घटाते हैं। कुल फ़ायदा शून्य, कोटि शून्य।

N₂ में π2p, σ2p से नीचे क्यों है, O₂ में क्यों नहीं?

B, C, N में 2s और 2p की ऊर्जा पास है, वे मिलते हैं और σ2p को π2p से ऊपर धकेलते हैं। O और F में अंतर बड़ा है, इसलिए σ2p नीचे रहता है।

O₂ के दोनों π* इलेक्ट्रॉन जोड़ा क्यों नहीं बनाते?

दोनों π* कक्षकों की ऊर्जा बराबर है। हुंड नियम: जोड़ा बनाने से पहले हर कक्षक में एक-एक, क्योंकि जोड़ा बनाने में प्रतिकर्षण ऊर्जा लगती है।

क्या 0.5 आबंध कोटि वाला अणु बन सकता है?

हाँ। शून्य से ज़्यादा कोई भी कोटि मतलब कुल आबंधन। H₂⁺ और He₂⁺ (0.5) बनते हैं। खेल में देखो।

आण्विक कक्षक सिद्धांत की मुख्य बातें

मुलिकन और हुंड ने MO सिद्धांत दिया। मुख्य बातें:

LCAO: आण्विक कक्षक बनाना

LCAO = परमाणु कक्षकों का रैखिक संयोजन। परमाणु A और B के लिए:

σ = ψA + ψB (तरंगें जुड़ती हैं, नाभिकों के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है → आबंधी MO)

σ* = ψA − ψB (तरंगें बीच में कटती हैं, नोड बनता है → प्रतिआबंधी MO)

आबंधी MO जितना नीचे जाता है, प्रतिआबंधी लगभग उतना ही ऊपर। दोनों भरे हों तो कोई फ़ायदा नहीं।

संयोजन की शर्तें

  1. मिलती-जुलती ऊर्जा (1s, 1s से मिलता है, 2p से नहीं)।
  2. आण्विक अक्ष के चारों ओर एक जैसी सममिति (2pz, 2pz से; 2px, 2pz से नहीं)।
  3. अच्छा अतिव्यापन।

MO के प्रकार

σ MO आबंध अक्ष के चारों ओर सममित हैं (s या आमने-सामने 2pz से)। π MO बगल से मिले 2px या 2py से बनते हैं; इनका इलेक्ट्रॉन घनत्व अक्ष के ऊपर-नीचे होता है। π2px और π2py की ऊर्जा बराबर है।

ऊर्जा क्रम और आबंध कोटि

Li₂, Be₂, B₂, C₂, N₂ के लिए (2s–2p मिश्रण σ2p को ऊपर धकेलता है):
σ1s < σ*1s < σ2s < σ*2s < (π2px = π2py) < σ2pz < (π*2px = π*2py) < σ*2pz

O₂, F₂, Ne₂ के लिए:
σ1s < σ*1s < σ2s < σ*2s < σ2pz < (π2px = π2py) < (π*2px = π*2py) < σ*2pz

आबंध कोटि = ½ (Nb − Na)। Nb = आबंधी MO के इलेक्ट्रॉन, Na = प्रतिआबंधी MO के इलेक्ट्रॉन।

समनाभिकीय द्विपरमाणुक अणुओं में आबंधन

अणुइलेक्ट्रॉनआबंध कोटिचुंबकीय गुण
H₂21प्रतिचुंबकीय
He₂40 (अस्तित्व नहीं)—
Li₂61प्रतिचुंबकीय
Be₂80 (स्थायी नहीं)—
B₂101अनुचुंबकीय (π में 2 अयुग्मित)
C₂122प्रतिचुंबकीय
N₂143प्रतिचुंबकीय
O₂162अनुचुंबकीय (π* में 2 अयुग्मित)
F₂181प्रतिचुंबकीय
Ne₂200 (अस्तित्व नहीं)—

C₂ अनोखा है: उसकी आबंध कोटि 2 दो π आबंधों से है, σ2p से नहीं।

ऑक्सीजन आयन: O₂⁺ (2.5) > O₂ (2) > O₂⁻ (1.5) > O₂²⁻ (1)। आबंध लंबाई उलटे क्रम में।

करके देखो: सीढ़ी खुद भरो

कागज़ पर O₂ की MO सीढ़ी बनाओ। इलेक्ट्रॉन के लिए छोटे तीर लो। 12 संयोजी इलेक्ट्रॉन भरो: हर स्तर में दो, पर π* में पहले एक-एक। आबंधी और प्रतिआबंधी इलेक्ट्रॉन गिनकर आबंध कोटि निकालो। अब O₂⁻ का अनुमान लगाओ (एक तीर और)। दोनों को खेल वाले कदम में जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. H₂ और H₂⁺ की आबंध कोटि निकालो।

कदम 1: H₂: σ1s² → Nb = 2, Na = 0 → ½(2 − 0) = 1। कदम 2: H₂⁺: σ1s¹ → ½(1 − 0) = 0.5। उत्तर: H₂ 1, H₂⁺ 0.5। दोनों का अस्तित्व है; H₂ ज़्यादा स्थायी।

2. दिखाओ कि He₂ नहीं बनता, पर He₂⁺ बन सकता है।

कदम 1: He₂: σ1s² σ*1s² → ½(2 − 2) = 0 → आबंध नहीं। कदम 2: He₂⁺: σ1s² σ*1s¹ → ½(2 − 1) = 0.5। उत्तर: He₂ की कोटि 0, अस्तित्व नहीं; He₂⁺ की 0.5, बन सकता है।

3. N₂ का MO विन्यास लिखो और आबंध कोटि निकालो।

कदम 1: 14 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² (π2px² = π2py²) σ2pz²। कदम 2: संयोजी Nb = 2 + 4 + 2 = 8, Na = 2। कदम 3: आबंध कोटि = ½(8 − 2) = 3। उत्तर: 3 (त्रिआबंध), प्रतिचुंबकीय।

4. O₂ का MO विन्यास लिखो और चुंबकीय गुण समझाओ।

कदम 1: 16 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² σ2pz² (π2px² = π2py²) (π*2px¹ = π*2py¹)। कदम 2: Nb = 8, Na = 4 → आबंध कोटि = 2। कदम 3: दोनों π* इलेक्ट्रॉन अलग कक्षकों में (हुंड) → 2 अयुग्मित। उत्तर: आबंध कोटि 2, अनुचुंबकीय।

5. O₂⁺, O₂⁻ और O₂²⁻ की आबंध कोटि की तुलना करो।

कदम 1: O₂⁺: एक π* इलेक्ट्रॉन कम → Nb 8, Na 3 → 2.5। कदम 2: O₂⁻: एक π* ज़्यादा → Na 5 → 1.5। कदम 3: O₂²⁻: Na 6 → 1। उत्तर: O₂⁺ 2.5 > O₂ 2 > O₂⁻ 1.5 > O₂²⁻ 1; आबंध लंबाई उलटी।

6. B₂ अनुचुंबकीय है या प्रतिचुंबकीय?

कदम 1: 10 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² (π2px¹ = π2py¹)। (B₂ में π2p, σ2p से नीचे।) कदम 2: आख़िरी दो इलेक्ट्रॉन दोनों π में एक-एक। कदम 3: आबंध कोटि = ½(4 − 2) = 1। उत्तर: अनुचुंबकीय (2 अयुग्मित), आबंध कोटि 1।

7. कौन ज़्यादा स्थायी है: N₂ या N₂⁺? और O₂ या O₂⁺?

कदम 1: N₂⁺ एक आबंधी σ2p इलेक्ट्रॉन खोता है → ½(7 − 2) = 2.5 < 3। N₂ ज़्यादा स्थायी। कदम 2: O₂⁺ एक प्रतिआबंधी π* इलेक्ट्रॉन खोता है → ½(8 − 3) = 2.5 > 2। O₂⁺ ज़्यादा स्थायी। उत्तर: N₂ > N₂⁺, पर O₂⁺ > O₂।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. LCAO का अर्थ:
2. O₂ की आबंध कोटि:
3. किस अणु का अस्तित्व नहीं (आबंध कोटि 0)?
4. O₂ अनुचुंबकीय है क्योंकि उसमें:
5. सबसे ज़्यादा आबंध कोटि किसकी?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आबंधी और प्रतिआबंधी MO में क्या अंतर है?

आबंधी MO (ψA + ψB) में नाभिकों के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व ज़्यादा और ऊर्जा कम। प्रतिआबंधी MO (ψA − ψB) में बीच में नोड और ऊर्जा ज़्यादा; इसके इलेक्ट्रॉन आबंध कमज़ोर करते हैं।

MO सिद्धांत में आबंध कोटि कैसे निकालें?

आबंध कोटि = ½ (आबंधी MO के इलेक्ट्रॉन − प्रतिआबंधी MO के इलेक्ट्रॉन)।

O₂ अनुचुंबकीय क्यों है?

उसके आख़िरी दो इलेक्ट्रॉन बराबर ऊर्जा वाले दोनों π* कक्षकों में एक-एक जाते हैं (हुंड नियम)। दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन O₂ को चुंबक की ओर खींचते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी रसायन विज्ञान पाठ