आण्विक कक्षक सिद्धांत की मुख्य बातें
मुलिकन और हुंड ने MO सिद्धांत दिया। मुख्य बातें:
- अणु में इलेक्ट्रॉन आण्विक कक्षकों में रहते हैं, जो पूरे अणु पर फैले हैं, किसी एक परमाणु पर नहीं।
- सिर्फ़ मिलती-जुलती ऊर्जा और सही सममिति वाले परमाणु कक्षक मिलते हैं।
- बने MO की संख्या = मिले परमाणु कक्षकों की संख्या। आधे आबंधी, आधे प्रतिआबंधी।
- आबंधी MO की ऊर्जा परमाणु कक्षकों से कम, प्रतिआबंधी की ज़्यादा।
- MO भी परमाणु कक्षकों की तरह भरते हैं: पहले सबसे कम ऊर्जा (आउफ़बाऊ), अधिकतम दो उलटे चक्रण वाले इलेक्ट्रॉन (पाउली), बराबर कक्षकों में पहले एक-एक (हुंड)।
LCAO: आण्विक कक्षक बनाना
LCAO = परमाणु कक्षकों का रैखिक संयोजन। परमाणु A और B के लिए:
σ = ψA + ψB (तरंगें जुड़ती हैं, नाभिकों के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है → आबंधी MO)
σ* = ψA − ψB (तरंगें बीच में कटती हैं, नोड बनता है → प्रतिआबंधी MO)
आबंधी MO जितना नीचे जाता है, प्रतिआबंधी लगभग उतना ही ऊपर। दोनों भरे हों तो कोई फ़ायदा नहीं।
संयोजन की शर्तें
- मिलती-जुलती ऊर्जा (1s, 1s से मिलता है, 2p से नहीं)।
- आण्विक अक्ष के चारों ओर एक जैसी सममिति (2pz, 2pz से; 2px, 2pz से नहीं)।
- अच्छा अतिव्यापन।
MO के प्रकार
σ MO आबंध अक्ष के चारों ओर सममित हैं (s या आमने-सामने 2pz से)। π MO बगल से मिले 2px या 2py से बनते हैं; इनका इलेक्ट्रॉन घनत्व अक्ष के ऊपर-नीचे होता है। π2px और π2py की ऊर्जा बराबर है।
ऊर्जा क्रम और आबंध कोटि
Li₂, Be₂, B₂, C₂, N₂ के लिए (2s–2p मिश्रण σ2p को ऊपर धकेलता है):
σ1s < σ*1s < σ2s < σ*2s < (π2px = π2py) < σ2pz < (π*2px = π*2py) < σ*2pz
O₂, F₂, Ne₂ के लिए:
σ1s < σ*1s < σ2s < σ*2s < σ2pz < (π2px = π2py) < (π*2px = π*2py) < σ*2pz
आबंध कोटि = ½ (Nb − Na)। Nb = आबंधी MO के इलेक्ट्रॉन, Na = प्रतिआबंधी MO के इलेक्ट्रॉन।
- आबंध कोटि > 0: अणु स्थायी। 0: अस्तित्व नहीं।
- ज़्यादा आबंध कोटि → ज़्यादा आबंध एन्थैल्पी, छोटी आबंध लंबाई।
- कोई भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन → अनुचुंबकीय; सब युग्मित → प्रतिचुंबकीय।
समनाभिकीय द्विपरमाणुक अणुओं में आबंधन
| अणु | इलेक्ट्रॉन | आबंध कोटि | चुंबकीय गुण |
|---|---|---|---|
| H₂ | 2 | 1 | प्रतिचुंबकीय |
| He₂ | 4 | 0 (अस्तित्व नहीं) | — |
| Li₂ | 6 | 1 | प्रतिचुंबकीय |
| Be₂ | 8 | 0 (स्थायी नहीं) | — |
| B₂ | 10 | 1 | अनुचुंबकीय (π में 2 अयुग्मित) |
| C₂ | 12 | 2 | प्रतिचुंबकीय |
| N₂ | 14 | 3 | प्रतिचुंबकीय |
| O₂ | 16 | 2 | अनुचुंबकीय (π* में 2 अयुग्मित) |
| F₂ | 18 | 1 | प्रतिचुंबकीय |
| Ne₂ | 20 | 0 (अस्तित्व नहीं) | — |
C₂ अनोखा है: उसकी आबंध कोटि 2 दो π आबंधों से है, σ2p से नहीं।
ऑक्सीजन आयन: O₂⁺ (2.5) > O₂ (2) > O₂⁻ (1.5) > O₂²⁻ (1)। आबंध लंबाई उलटे क्रम में।
करके देखो: सीढ़ी खुद भरो
कागज़ पर O₂ की MO सीढ़ी बनाओ। इलेक्ट्रॉन के लिए छोटे तीर लो। 12 संयोजी इलेक्ट्रॉन भरो: हर स्तर में दो, पर π* में पहले एक-एक। आबंधी और प्रतिआबंधी इलेक्ट्रॉन गिनकर आबंध कोटि निकालो। अब O₂⁻ का अनुमान लगाओ (एक तीर और)। दोनों को खेल वाले कदम में जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- σ (आबंधी) = ψA + ψB; σ* (प्रतिआबंधी) = ψA − ψB
- आबंध कोटि = ½ (Nb − Na)
- MO की संख्या = मिले परमाणु कक्षकों की संख्या
- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन > 0 ⇒ अनुचुंबकीय; सब युग्मित ⇒ प्रतिचुंबकीय
- आबंध कोटि ↑ ⇒ स्थायित्व ↑, आबंध एन्थैल्पी ↑, लंबाई ↓
हल किए गए उदाहरण
1. H₂ और H₂⁺ की आबंध कोटि निकालो।
कदम 1: H₂: σ1s² → Nb = 2, Na = 0 → ½(2 − 0) = 1। कदम 2: H₂⁺: σ1s¹ → ½(1 − 0) = 0.5। उत्तर: H₂ 1, H₂⁺ 0.5। दोनों का अस्तित्व है; H₂ ज़्यादा स्थायी।
2. दिखाओ कि He₂ नहीं बनता, पर He₂⁺ बन सकता है।
कदम 1: He₂: σ1s² σ*1s² → ½(2 − 2) = 0 → आबंध नहीं। कदम 2: He₂⁺: σ1s² σ*1s¹ → ½(2 − 1) = 0.5। उत्तर: He₂ की कोटि 0, अस्तित्व नहीं; He₂⁺ की 0.5, बन सकता है।
3. N₂ का MO विन्यास लिखो और आबंध कोटि निकालो।
कदम 1: 14 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² (π2px² = π2py²) σ2pz²। कदम 2: संयोजी Nb = 2 + 4 + 2 = 8, Na = 2। कदम 3: आबंध कोटि = ½(8 − 2) = 3। उत्तर: 3 (त्रिआबंध), प्रतिचुंबकीय।
4. O₂ का MO विन्यास लिखो और चुंबकीय गुण समझाओ।
कदम 1: 16 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² σ2pz² (π2px² = π2py²) (π*2px¹ = π*2py¹)। कदम 2: Nb = 8, Na = 4 → आबंध कोटि = 2। कदम 3: दोनों π* इलेक्ट्रॉन अलग कक्षकों में (हुंड) → 2 अयुग्मित। उत्तर: आबंध कोटि 2, अनुचुंबकीय।
5. O₂⁺, O₂⁻ और O₂²⁻ की आबंध कोटि की तुलना करो।
कदम 1: O₂⁺: एक π* इलेक्ट्रॉन कम → Nb 8, Na 3 → 2.5। कदम 2: O₂⁻: एक π* ज़्यादा → Na 5 → 1.5। कदम 3: O₂²⁻: Na 6 → 1। उत्तर: O₂⁺ 2.5 > O₂ 2 > O₂⁻ 1.5 > O₂²⁻ 1; आबंध लंबाई उलटी।
6. B₂ अनुचुंबकीय है या प्रतिचुंबकीय?
कदम 1: 10 इलेक्ट्रॉन: KK σ2s² σ*2s² (π2px¹ = π2py¹)। (B₂ में π2p, σ2p से नीचे।) कदम 2: आख़िरी दो इलेक्ट्रॉन दोनों π में एक-एक। कदम 3: आबंध कोटि = ½(4 − 2) = 1। उत्तर: अनुचुंबकीय (2 अयुग्मित), आबंध कोटि 1।
7. कौन ज़्यादा स्थायी है: N₂ या N₂⁺? और O₂ या O₂⁺?
कदम 1: N₂⁺ एक आबंधी σ2p इलेक्ट्रॉन खोता है → ½(7 − 2) = 2.5 < 3। N₂ ज़्यादा स्थायी। कदम 2: O₂⁺ एक प्रतिआबंधी π* इलेक्ट्रॉन खोता है → ½(8 − 3) = 2.5 > 2। O₂⁺ ज़्यादा स्थायी। उत्तर: N₂ > N₂⁺, पर O₂⁺ > O₂।
आम गलतियाँ
- B₂, C₂, N₂ के लिए O₂ वाला ऊर्जा क्रम (σ2p पहले) लगाना। इनमें π2p पहले आता है।
- हर π* में एक-एक होने से पहले इलेक्ट्रॉन जोड़ देना। हुंड नियम से O₂ में दो अयुग्मित।
- σ*2s के प्रतिआबंधी इलेक्ट्रॉन गिनना भूल जाना। Nb और Na दोनों गिनो।
- प्रतिआबंधी कक्षक को "खाली जगह" मानना। यह असली कक्षक है; इसके इलेक्ट्रॉन आबंध कमज़ोर करते हैं।