प्रावस्था आरेख क्या है?
प्रावस्था (फेज़) किसी पदार्थ का एक रूप है, जैसे बर्फ़, पानी या भाप। खनिजों की भी प्रावस्थाएँ होती हैं। कुछ खनिजों का रासायनिक सूत्र एक होता है, पर क्रिस्टल की बनावट अलग। इन्हें बहुरूप (पॉलीमॉर्फ़) कहते हैं।
प्रावस्था आरेख एक नक्शा है। नीचे ताप है और बगल में दाब, जो गहराई के साथ बढ़ता है। नक्शे का हर बिंदु एक हालत है, और वह जिस क्षेत्र में पड़ता है, वहाँ का रूप स्थायी है। स्थायी यानी छोड़ देने पर बदलेगा नहीं।
- दाब ऊपर की चट्टान के भार से आता है। लगभग 33 किमी की गहराई पर दाब करीब 1 GPa होता है, यानी हर किमी पर 0.03 GPa।
- गहराई के साथ तापमान भी बढ़ता है। गर्म मैग्मा के पास या टकराव वाले इलाक़े में यह और तेज़ी से बढ़ता है।
Al₂SiO₅ का आरेख पढ़ना: एंडालुसाइट, कायनाइट, सिलिमेनाइट
सबसे मशहूर खनिज प्रावस्था आरेख Al₂SiO₅ का है। इसके तीन बहुरूप हैं। हमारे बोर्ड की संख्याएँ आसान की गई हैं ताकि पैटर्न दिखे; असली अध्ययनों में मान थोड़े अलग मिलते हैं, पर आकार वही रहता है।
- एंडालुसाइट: कम दाब (लगभग 0.4 GPa तक, यानी करीब 13 किमी तक)। अक्सर मोटा, चौकोर सिरे वाला क्रिस्टल।
- कायनाइट: ज़्यादा दाब। नीला, चपटा ब्लेड। जहाँ पहाड़ बनते हैं और चट्टान गहरी दब जाती है, वहाँ मिलता है।
- सिलिमेनाइट: ज़्यादा ताप। पतली सुई या रेशा। बड़े मैग्मा पिंडों के पास और बहुत गर्म चट्टानों में मिलता है।
पढ़ने का तरीका: नीचे की धुरी पर ताप ढूँढिए, बगल की धुरी पर दाब ढूँढिए और देखिए कि दोनों किस रंग के क्षेत्र में मिलते हैं।
भूवैज्ञानिक इस तिकड़ी को तापमापी और दाबमापी की तरह इस्तेमाल करते हैं: रूपांतरित चट्टान में कौन-सा खनिज है, इससे पता चलता है कि उसने कितनी गर्मी और दबाव झेला।
सीमा रेखाएँ और त्रिक बिंदु
काली रेखाएँ वहाँ हैं जहाँ दो रूप बराबर स्थायी हैं, इसलिए दोनों साथ-साथ संतुलन में रह सकते हैं। रेखा पार करते ही एक रूप स्थायी नहीं रहता और दूसरे में बदलने लगता है।
जहाँ तीन रेखाएँ मिलती हैं, वह त्रिक बिंदु है। हमारे बोर्ड पर यह लगभग 500 °C और 0.4 GPa (करीब 13 किमी गहराई) पर है। सिर्फ़ यहीं एंडालुसाइट, कायनाइट और सिलिमेनाइट तीनों साथ रह सकते हैं।
- एंडालुसाइट–कायनाइट रेखा दाईं ओर ऊपर चढ़ती है: ज़्यादा गर्मी में कायनाइट बनाए रखने के लिए ज़्यादा दाब चाहिए।
- कायनाइट–सिलिमेनाइट रेखा भी दाईं ओर ऊपर चढ़ती है और सिलिमेनाइट की ऊँचे दाब वाली सीमा है।
- एंडालुसाइट–सिलिमेनाइट रेखा उलटी तरफ़ झुकी है: ज़्यादा गर्मी हो तो कम दाब पर भी सिलिमेनाइट जीतता है।
असली चट्टानों में खनिज कैसे बदलते हैं
जब चट्टान दबती, गर्म होती या भिंचती है, तो उसके खनिज पिघलते नहीं। वे ठोस अवस्था में ही बदलते हैं: परमाणु थोड़ा खिसकते हैं और नए क्रिस्टल उगते हैं। इसे रूपांतरण (मेटामॉर्फ़िज़्म) कहते हैं। आरेख में जो चट्टान किसी रेखा को पार कर जाती है, क्योंकि वह और गहरी चली गई या मैग्मा ने उसे गर्म कर दिया, उसमें नया खनिज बन जाता है।
- धीमा बदलाव: ठोस चट्टान में परमाणु बहुत धीरे चलते हैं। खनिज अपने स्थायी क्षेत्र के बाहर लाखों साल टिका रह सकता है। सतह पर मिला कायनाइट गहराई में बना था और ऊपर आ गया। इसे मेटास्टेबल (अर्ध-स्थायी) कहते हैं।
- दूसरे खनिज भी: ग्रेफाइट बहुत ऊँचे दाब (लगभग 4 GPa से ज़्यादा, यानी 130 किमी से गहरे) पर हीरा बन जाता है। क्वार्ट्ज़ उल्कापिंड के टकराव जैसे भारी दाब पर ज़्यादा सघन रूप कोसाइट बन जाता है। मैंटल में ओलिवीन गहराई के साथ और सघन बनावट में बदलता है, जिससे भूकंप-तरंगों की चाल अचानक बदलती है।
- ऊँचे दाब पर सघन रूप: आम तौर पर ऊँचे दाब वाले रूप में परमाणु पास-पास बैठते हैं।
करके देखिए: कागज़ और पेंसिल से
1. चौखाने वाले कागज़ पर आड़े में ताप (0 से 1000) और खड़े में दाब (0 से 1.2) बनाइए। 2. त्रिक बिंदु 500 और 0.4 पर लगाइए। 3. 3D बोर्ड की तरह वहाँ से तीन रेखाएँ खींचिए और तीनों क्षेत्र रंगिए। 4. तीन चट्टानें चुनिए, जैसे (350 °C, 0.15 GPa), (350 °C, 0.9 GPa), (750 °C, 0.35 GPa)। पहले खनिज का अंदाज़ा लगाइए, फिर 3D में स्लाइडर से जाँचिए। 5. दोस्त से कोई भी बिंदु चुनवाइए और खनिज बताइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रावस्था आरेख: x = ताप, y = दाब (गहराई); हर क्षेत्र = एक स्थायी रूप
- गहराई से दाब: P (GPa) ≈ 0.03 × गहराई (किमी); गहराई (किमी) ≈ P ÷ 0.03
- रेखा पर: दो रूप साथ स्थायी। त्रिक बिंदु पर: तीन रूप साथ
- Al₂SiO₅: एंडालुसाइट (कम दाब), कायनाइट (ज़्यादा दाब), सिलिमेनाइट (ज़्यादा ताप); त्रिक बिंदु लगभग 500 °C और 0.4 GPa (सरल मान)
- मुख्य शब्द: बहुरूप (पॉलीमॉर्फ़), स्थायी, मेटास्टेबल, त्रिक बिंदु, रूपांतरण
हल किए गए उदाहरण
1. एक चट्टान 400 °C और 0.2 GPa पर है। Al₂SiO₅ का कौन-सा खनिज स्थायी होगा? (बोर्ड पर 400 °C पर एंडालुसाइट–कायनाइट रेखा लगभग 0.33 GPa पर है।)
400 °C, 500 °C से कम है, यानी चट्टान त्रिक बिंदु के बाईं ओर है। उसका दाब 0.2 GPa रेखा के मान 0.33 GPa से नीचे है। रेखा के नीचे कम दाब वाला क्षेत्र है, इसलिए खनिज एंडालुसाइट है।
2. जहाँ दाब 0.6 GPa है, वह चट्टान कितनी गहराई पर है?
गहराई = P ÷ 0.03 = 0.6 ÷ 0.03 = 20 किमी।
3. एक चट्टान 400 °C और 0.8 GPa पर है। कौन-सा खनिज?
0.8 GPa का दाब एंडालुसाइट–कायनाइट रेखा (400 °C पर लगभग 0.33 GPa) से बहुत ऊपर है। दाब ऊँचा है, इसलिए खनिज कायनाइट (चपटा ब्लेड) है।
4. एक चट्टान 600 °C और 0.3 GPa पर है। कौन-सा खनिज? (600 °C पर कायनाइट रेखा लगभग 0.63 GPa पर है, और 0.3 GPa पर एंडालुसाइट–सिलिमेनाइट रेखा लगभग 520 °C पर।)
0.3 GPa का दाब 600 °C पर कायनाइट रेखा (0.63 GPa) से नीचे है, इसलिए कायनाइट नहीं। तापमान 600 °C, एंडालुसाइट–सिलिमेनाइट रेखा (0.3 GPa पर लगभग 520 °C) से ज़्यादा है। इसलिए खनिज सिलिमेनाइट है।
5. 300 °C और 0.2 GPa की चट्टान को मैग्मा उसी दाब पर 700 °C तक गर्म कर देता है। क्या बदलाव होगा?
300 °C और 0.2 GPa पर चट्टान एंडालुसाइट क्षेत्र में है। 0.2 GPa के स्तर पर दाईं ओर चलें तो लगभग 540 °C पर एंडालुसाइट–सिलिमेनाइट रेखा पार होती है। उसके बाद स्थायी खनिज सिलिमेनाइट है। यानी एंडालुसाइट धीरे-धीरे सिलिमेनाइट (सुई जैसे क्रिस्टल) में बदलता है, और जितनी ज़्यादा गर्मी, उतना पूरा बदलाव।
6. सतह पर पड़ी चट्टान में कायनाइट मिला। क्या इसका मतलब है कि सतह पर ऊँचा दाब है?
नहीं। कायनाइट तब उगा जब चट्टान गहराई में दबी थी, यानी ऊँचे दाब पर। बाद में चट्टान ऊपर उठी और ऊपर की परतें कट गईं। ठोस में बदलाव धीमा होता है और सतह ठंडी है, इसलिए कायनाइट वापस नहीं बदला। सतह पर वह मेटास्टेबल है। वह बताता है कि चट्टान कभी गहराई में थी।
आम गलतियाँ
- प्रावस्था आरेख को सिर्फ़ पिघलने का आरेख समझना। कई आरेख ठोस रूपों के आपसी बदलाव दिखाते हैं, बिना पिघले।
- धुरियाँ उलटी पढ़ना: दाब खड़ी धुरी पर है और उसका मतलब गहराई भी है।
- यह सोचना कि सतह पर आते ही खनिज को वापस बदल जाना चाहिए। ठोस में धीमे बदलाव मेटास्टेबल खनिज छोड़ जाते हैं।
- सोचना कि अलग खनिजों का सूत्र अलग होता है। एंडालुसाइट, कायनाइट और सिलिमेनाइट तीनों Al₂SiO₅ हैं; सिर्फ़ बनावट अलग है।