धात्विक बंध और धातुओं के गुण
धातु परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन आसानी से छोड़ते हैं। धातु के टुकड़े में परमाणु धनायन बनकर साफ़ पैटर्न (जालक) में सजे रहते हैं, और छूटे इलेक्ट्रॉन उनके बीच समुद्र की तरह घूमते हैं। धनायनों और इलेक्ट्रॉन समुद्र के बीच का खिंचाव ही धात्विक बंध है।
- बिजली और ऊष्मा के सुचालक: मुक्त इलेक्ट्रॉन आवेश और ऊर्जा ले जाते हैं।
- धात्विक चमक: मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रकाश लौटाते हैं।
- आघातवर्ध्य और तन्य: आयनों की परतें बंध तोड़े बिना खिसक सकती हैं, इसलिए धातुएँ पीटकर चादर और खींचकर तार बनती हैं।
- ज़्यादातर धातुओं के ऊँचे गलनांक और मज़बूती; पारा द्रव है, सोडियम और पोटैशियम नरम।
रासायनिक व्यवहार: धातुएँ इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं। ये ऑक्सीजन (क्षारीय ऑक्साइड), पानी (बहुत सक्रिय धातुएँ हाइड्रोजन और क्षार देती हैं), तनु अम्लों (लवण + हाइड्रोजन) और कम सक्रिय धातुओं के लवण विलयनों (विस्थापन) से क्रिया करती हैं। सक्रियता श्रेणी: K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, (H), Cu, Ag, Au।
अयस्क और सांद्रण
खनिज पृथ्वी में प्राकृतिक यौगिक है। अयस्क वह खनिज है जिससे धातु लाभ के साथ निकाली जा सके, जैसे हेमेटाइट (Fe₂O₃), बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O), ज़िंक ब्लेंड (ZnS) और कॉपर पाइराइट (CuFeS₂)। अनचाही रेत और चट्टान गैंग (आधात्री) है।
सांद्रण गैंग हटाता है:
- गुरुत्व (द्रवचालित) धुलाई: पानी हल्का गैंग बहा देता है; भारी अयस्क रुकता है।
- झाग प्लवन: सल्फ़ाइड अयस्कों के लिए। तेल अयस्क कणों से चिपकता है, हवा के बुलबुले उन्हें झाग में ऊपर लाते हैं; गीला गैंग नीचे बैठता है।
- चुंबकीय पृथक्करण: मैग्नेटाइट जैसे चुंबकीय अयस्कों के लिए।
- निक्षालन (लीचिंग): अयस्क को रसायन में घोलना, जैसे बॉक्साइट को सोडियम हाइड्रॉक्साइड में, सोने को साइनाइड में।
धातु पाने के तीन तरीके: उत्ताप, जल, विद्युत
यौगिक से धातु पाना अपचयन है (धातु आयन इलेक्ट्रॉन लेता है, या ऑक्साइड ऑक्सीजन खोता है)।
1. उत्ताप धातुकर्म (गर्मी): सल्फ़ाइड अयस्क पहले हवा में भर्जित (रोस्ट) होते हैं: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂। कार्बोनेट अयस्कों का निस्तापन (कम हवा में गर्म) होता है: ZnCO₃ → ZnO + CO₂। फिर ऑक्साइड को कार्बन या कार्बन मोनोऑक्साइड से अपचयित करते हैं: ZnO + C → Zn + CO। वात्या भट्टी में: Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂; चूना पत्थर रेत को धातुमल बनाकर हटाता है, CaO + SiO₂ → CaSiO₃। बहुत सक्रिय धातुएँ भी ऑक्साइड अपचयित कर सकती हैं: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ (थर्मिट, रेल पटरी जोड़ने में)।
2. जल धातुकर्म (विलयन): अयस्क घोलते हैं, फिर ज़्यादा सक्रिय धातु उसे बाहर धकेलती है: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। सोना: साइनाइड में घोलकर ज़िंक से विस्थापित। कम श्रेणी के अयस्कों के लिए अच्छा।
3. विद्युत धातुकर्म (बिजली): सबसे सक्रिय धातुओं (K, Na, Ca, Mg, Al) के लिए। कार्बन इनकी ऑक्सीजन नहीं छुड़ा पाता। पिघले यौगिक का विद्युत अपघटन: कैथोड पर Na⁺ + e⁻ → Na; ऐनोड पर 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻। ऐलुमिनियम: पिघले क्रायोलाइट में घुली ऐलुमिना (गलनांक घटता है)। जलीय विलयन में कैथोड पर सोडियम की जगह हाइड्रोजन बनेगी, इसलिए पिघला लवण चाहिए। कम सक्रिय धातुएँ (Cu, Zn) विलयनों से भी मिल सकती हैं।
शोधन, गैल्वेनी सेल और संक्षारण
शोधन धातु को शुद्ध करता है। ताँबे के विद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध ताँबा ऐनोड, शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी कैथोड और कॉपर सल्फ़ेट विद्युत अपघट्य होता है। शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है; अशुद्धियाँ ऐनोड पंक बनकर गिरती हैं (इसमें चाँदी और सोना होता है)। अन्य विधियाँ: आसवन (ज़िंक, पारा), द्रवण (टिन), मंडल परिष्करण (बहुत शुद्ध सिलिकॉन)।
गैल्वेनी सेल: लवण विलयनों में दो अलग धातुएँ, तार से जुड़ी, बिजली बनाती हैं। ज़्यादा सक्रिय धातु (जैसे ज़िंक) इलेक्ट्रॉन खोती है (ऐनोड, −) और कम सक्रिय (ताँबा) लेती है (कैथोड, +)। Zn–Cu सेल लगभग 1.1 V देता है।
संक्षारण यानी धातु का हवा, पानी या रसायनों से धीरे-धीरे क्रिया करना। लोहे पर जंग के लिए पानी और ऑक्सीजन दोनों चाहिए: लोहा जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड बनता है। बचाव: पेंट, तेल या ग्रीस, प्लास्टिक परत, यशदलेपन (गैल्वनीकरण) (ज़िंक की परत; खरोंच लगने पर भी ज़िंक पहले संक्षारित होकर लोहा बचाता है — बलिदानी सुरक्षा), टिन लेपन, क्रोम लेपन, और मिश्रधातु बनाना।
मिश्रधातु
मिश्रधातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ मिश्रण है, जो उन्हें साथ पिघलाकर बनता है। अलग आकार के परमाणु परतों को आसानी से खिसकने नहीं देते, इसलिए मिश्रधातु प्रायः ज़्यादा कठोर और मज़बूत होती हैं; वे संक्षारण रोक सकती हैं या कम ताप पर पिघल सकती हैं।
- स्टील: लोहा + थोड़ा कार्बन — मज़बूत।
- स्टेनलेस स्टील: लोहा + क्रोमियम + निकल — जंग नहीं (चम्मच, बर्तन)।
- पीतल: ताँबा + ज़िंक — नल, वाद्य यंत्र।
- कांसा: ताँबा + टिन — मूर्तियाँ, पदक।
- सोल्डर (टाँका): सीसा + टिन (या सीसा-रहित टिन मिश्रधातु) — तार जोड़ने को कम गलनांक।
- ड्यूरेलुमिन: ऐलुमिनियम + ताँबा + मैग्नीशियम — विमानों के लिए हल्का और मज़बूत।
- 22 कैरेट सोना: 22 भाग सोना + 2 भाग ताँबा या चाँदी — गहनों के लिए कठोर।
घर पर करके देखें
जंग की दौड़ (किसी बड़े के साथ): तीन गिलासों में तीन लोहे की कीलें रखें: एक नल के पानी में (आधी डूबी), एक उबालकर ठंडे किए पानी में ऊपर तेल की परत के साथ, एक सूखे बंद जार में नमी सोखने के लिए एक चम्मच सूखे चावल के साथ। एक हफ़्ते बाद देखें। किसमें सबसे ज़्यादा जंग लगी? पानी + हवा मिलकर जंग लाते हैं। 3D के चरण 6 में Fe और Zn चुनकर तुलना करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भर्जन: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
- निस्तापन: ZnCO₃ → ZnO + CO₂
- अपचयन: ZnO + C → Zn + CO; Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂
- धातुमल: CaO + SiO₂ → CaSiO₃
- विस्थापन: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
- पिघले NaCl का विद्युत अपघटन: Na⁺ + e⁻ → Na (कैथोड), 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻ (ऐनोड)
- थर्मिट: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃
हल किए गए उदाहरण
1. (a) सोडियम, (b) ज़िंक, (c) सोने के लिए कौन-सी विधि?
(a) सोडियम बहुत सक्रिय: पिघले NaCl का विद्युत अपघटन। (b) ज़िंक बीच में: ZnS को भूनकर ZnO, फिर कार्बन से अपचयन। (c) सोना मुक्त (प्राकृत) मिलता है: बस अलग करें, या साइनाइड में घोलकर ज़िंक से विस्थापित करें।
2. Fe₂O₃ का मोलर द्रव्यमान 160 g/mol है। 320 kg शुद्ध Fe₂O₃ से कितना लोहा बनेगा? (Fe = 56)
1 mol Fe₂O₃ (160 g) से 2 mol Fe (112 g)। 320 kg ÷ 160 = 2 kmol Fe₂O₃ → 4 kmol Fe = 4 × 56 = 224 kg लोहा।
3. सोडियम जलीय NaCl के विद्युत अपघटन से क्यों नहीं मिलता?
पानी में H⁺ (पानी से) Na⁺ से आसानी से अपचयित होता है, इसलिए कैथोड पर हाइड्रोजन गैस बनती है। पिघले NaCl में पानी नहीं, इसलिए Na⁺ सोडियम बनता है।
4. एक अयस्क में द्रव्यमान से 5% ताँबा है। 1 टन ताँबे के लिए कितने टन अयस्क (बिना हानि)?
5% यानी 100 t अयस्क में 5 t ताँबा। 1 t के लिए: 100 ÷ 5 = 20 t अयस्क।
आम गलतियाँ
- हर खनिज को अयस्क कहना। अयस्क वह खनिज है जिससे धातु लाभ के साथ निकाली जा सके।
- भर्जन और निस्तापन उलझाना: भर्जन सल्फ़ाइड अयस्क को भरपूर हवा में गर्म करना; निस्तापन कार्बोनेट अयस्क को कम या बिना हवा में।
- मानना कि ऐलुमिनियम का संक्षारण नहीं होता। होता है, पर तुरंत पतली ऑक्साइड परत बनकर नीचे की धातु को बचाती है।
- लिखना कि कैथोड पर ऑक्सीकरण होता है। कैथोड पर हमेशा अपचयन; ऐनोड पर ऑक्सीकरण।