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धातुकर्म: धात्विक बंध से अयस्क से धातु निकालने तक

धातुएँ मुक्त इलेक्ट्रॉनों के समुद्र में बँधे धनायनों से बनी हैं। यही धात्विक बंध बताता है कि वे क्यों चमकती, चालन करती और मुड़ती हैं। ज़्यादातर धातुएँ चट्टानों में यौगिकों के रूप में मिलती हैं, जिन्हें अयस्क कहते हैं। धातुकर्म अयस्क से शुद्ध धातु निकालने का विज्ञान है: पहले अयस्क का सांद्रण, फिर यौगिक को गर्मी (उत्ताप धातुकर्म), विलयन (जल धातुकर्म) या बिजली (विद्युत धातुकर्म) से धातु में बदलना, फिर शोधन। धातु जितनी ज़्यादा सक्रिय, उसे निकालना उतना कठिन और उसका संक्षारण उतना तेज़।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. धातु के अंदर: मुक्त इलेक्ट्रॉनों के समुद्र में धनायन। यही धात्विक बंध है।
  2. अयस्क में थोड़ा धातु यौगिक होता है। उसे पीसो और बुलबुलों से अयस्क कण ऊपर तैराओ।
  3. गर्मी से: कार्बन मोनोऑक्साइड आयरन ऑक्साइड की ऑक्सीजन छीनती है। पिघला लोहा नीचे बहता है।
  4. विलयन से: लोहा कॉपर सल्फ़ेट से ताँबे को बाहर धकेलता है। नीला रंग फीका पड़ता है।
  5. बिजली से: पिघले लवण में धातु आयन ऋण प्लेट पर जाकर धातु बनते हैं।
  6. आपकी बारी: एक धातु चुनो। देखो कौन-सी विधि उसे निकालती है और वह कितनी जल्दी संक्षारित होती है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर धातुएँ धनायनों से बनी हैं तो वे एक-दूसरे को धकेलती क्यों नहीं?

ऋण इलेक्ट्रॉनों का समुद्र आयनों के बीच रहकर सबको खींचता है। यही साझा खिंचाव पूरे जालक को जोड़े रखता है।

तेल अयस्क कणों से चिपकता है पर रेत से क्यों नहीं?

सल्फ़ाइड अयस्क की सतह पानी से दूर भागती है और तेल को पकड़ती है; रेत पानी से भीग जाती है। इसलिए तेल लगे अयस्क कण बुलबुलों से चिपककर तैरते हैं।

ऐलुमिनियम निकालने में कार्बन क्यों नहीं लेते?

ऐलुमिनियम ऑक्सीजन को कार्बन से भी कसकर पकड़ता है, इसलिए उचित ताप पर कार्बन उसे नहीं हटा पाता। इसलिए बिजली लगती है।

कॉपर सल्फ़ेट विलयन का रंग क्यों बदलता है?

नीले Cu²⁺ आयन लोहे पर ताँबा धातु बन जाते हैं, और विलयन में उनकी जगह हल्के हरे Fe²⁺ आयन आ जाते हैं।

वात्या भट्टी नीचे इतनी गर्म क्यों होती है?

अंदर फूँकी गर्म हवा कोक जलाती है (C + O₂ → CO₂), जिससे बहुत ऊष्मा निकलती है। फिर CO₂ + C → 2CO अपचायक गैस बनाता है।

ऐलुमिनियम सक्रिय होकर भी मुश्किल से संक्षारित क्यों होता है?

उसकी सतह पर तुरंत ऐलुमिनियम ऑक्साइड की पतली, मज़बूत परत बनती है जो हवा और पानी को धातु तक पहुँचने नहीं देती।

धात्विक बंध और धातुओं के गुण

धातु परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन आसानी से छोड़ते हैं। धातु के टुकड़े में परमाणु धनायन बनकर साफ़ पैटर्न (जालक) में सजे रहते हैं, और छूटे इलेक्ट्रॉन उनके बीच समुद्र की तरह घूमते हैं। धनायनों और इलेक्ट्रॉन समुद्र के बीच का खिंचाव ही धात्विक बंध है।

रासायनिक व्यवहार: धातुएँ इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं। ये ऑक्सीजन (क्षारीय ऑक्साइड), पानी (बहुत सक्रिय धातुएँ हाइड्रोजन और क्षार देती हैं), तनु अम्लों (लवण + हाइड्रोजन) और कम सक्रिय धातुओं के लवण विलयनों (विस्थापन) से क्रिया करती हैं। सक्रियता श्रेणी: K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, (H), Cu, Ag, Au।

अयस्क और सांद्रण

खनिज पृथ्वी में प्राकृतिक यौगिक है। अयस्क वह खनिज है जिससे धातु लाभ के साथ निकाली जा सके, जैसे हेमेटाइट (Fe₂O₃), बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O), ज़िंक ब्लेंड (ZnS) और कॉपर पाइराइट (CuFeS₂)। अनचाही रेत और चट्टान गैंग (आधात्री) है।

सांद्रण गैंग हटाता है:

धातु पाने के तीन तरीके: उत्ताप, जल, विद्युत

यौगिक से धातु पाना अपचयन है (धातु आयन इलेक्ट्रॉन लेता है, या ऑक्साइड ऑक्सीजन खोता है)।

1. उत्ताप धातुकर्म (गर्मी): सल्फ़ाइड अयस्क पहले हवा में भर्जित (रोस्ट) होते हैं: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂। कार्बोनेट अयस्कों का निस्तापन (कम हवा में गर्म) होता है: ZnCO₃ → ZnO + CO₂। फिर ऑक्साइड को कार्बन या कार्बन मोनोऑक्साइड से अपचयित करते हैं: ZnO + C → Zn + CO। वात्या भट्टी में: Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂; चूना पत्थर रेत को धातुमल बनाकर हटाता है, CaO + SiO₂ → CaSiO₃। बहुत सक्रिय धातुएँ भी ऑक्साइड अपचयित कर सकती हैं: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ (थर्मिट, रेल पटरी जोड़ने में)।

2. जल धातुकर्म (विलयन): अयस्क घोलते हैं, फिर ज़्यादा सक्रिय धातु उसे बाहर धकेलती है: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। सोना: साइनाइड में घोलकर ज़िंक से विस्थापित। कम श्रेणी के अयस्कों के लिए अच्छा।

3. विद्युत धातुकर्म (बिजली): सबसे सक्रिय धातुओं (K, Na, Ca, Mg, Al) के लिए। कार्बन इनकी ऑक्सीजन नहीं छुड़ा पाता। पिघले यौगिक का विद्युत अपघटन: कैथोड पर Na⁺ + e⁻ → Na; ऐनोड पर 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻। ऐलुमिनियम: पिघले क्रायोलाइट में घुली ऐलुमिना (गलनांक घटता है)। जलीय विलयन में कैथोड पर सोडियम की जगह हाइड्रोजन बनेगी, इसलिए पिघला लवण चाहिए। कम सक्रिय धातुएँ (Cu, Zn) विलयनों से भी मिल सकती हैं।

शोधन, गैल्वेनी सेल और संक्षारण

शोधन धातु को शुद्ध करता है। ताँबे के विद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध ताँबा ऐनोड, शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी कैथोड और कॉपर सल्फ़ेट विद्युत अपघट्य होता है। शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है; अशुद्धियाँ ऐनोड पंक बनकर गिरती हैं (इसमें चाँदी और सोना होता है)। अन्य विधियाँ: आसवन (ज़िंक, पारा), द्रवण (टिन), मंडल परिष्करण (बहुत शुद्ध सिलिकॉन)।

गैल्वेनी सेल: लवण विलयनों में दो अलग धातुएँ, तार से जुड़ी, बिजली बनाती हैं। ज़्यादा सक्रिय धातु (जैसे ज़िंक) इलेक्ट्रॉन खोती है (ऐनोड, −) और कम सक्रिय (ताँबा) लेती है (कैथोड, +)। Zn–Cu सेल लगभग 1.1 V देता है।

संक्षारण यानी धातु का हवा, पानी या रसायनों से धीरे-धीरे क्रिया करना। लोहे पर जंग के लिए पानी और ऑक्सीजन दोनों चाहिए: लोहा जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड बनता है। बचाव: पेंट, तेल या ग्रीस, प्लास्टिक परत, यशदलेपन (गैल्वनीकरण) (ज़िंक की परत; खरोंच लगने पर भी ज़िंक पहले संक्षारित होकर लोहा बचाता है — बलिदानी सुरक्षा), टिन लेपन, क्रोम लेपन, और मिश्रधातु बनाना।

मिश्रधातु

मिश्रधातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ मिश्रण है, जो उन्हें साथ पिघलाकर बनता है। अलग आकार के परमाणु परतों को आसानी से खिसकने नहीं देते, इसलिए मिश्रधातु प्रायः ज़्यादा कठोर और मज़बूत होती हैं; वे संक्षारण रोक सकती हैं या कम ताप पर पिघल सकती हैं।

घर पर करके देखें

जंग की दौड़ (किसी बड़े के साथ): तीन गिलासों में तीन लोहे की कीलें रखें: एक नल के पानी में (आधी डूबी), एक उबालकर ठंडे किए पानी में ऊपर तेल की परत के साथ, एक सूखे बंद जार में नमी सोखने के लिए एक चम्मच सूखे चावल के साथ। एक हफ़्ते बाद देखें। किसमें सबसे ज़्यादा जंग लगी? पानी + हवा मिलकर जंग लाते हैं। 3D के चरण 6 में Fe और Zn चुनकर तुलना करें।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. (a) सोडियम, (b) ज़िंक, (c) सोने के लिए कौन-सी विधि?

(a) सोडियम बहुत सक्रिय: पिघले NaCl का विद्युत अपघटन। (b) ज़िंक बीच में: ZnS को भूनकर ZnO, फिर कार्बन से अपचयन। (c) सोना मुक्त (प्राकृत) मिलता है: बस अलग करें, या साइनाइड में घोलकर ज़िंक से विस्थापित करें।

2. Fe₂O₃ का मोलर द्रव्यमान 160 g/mol है। 320 kg शुद्ध Fe₂O₃ से कितना लोहा बनेगा? (Fe = 56)

1 mol Fe₂O₃ (160 g) से 2 mol Fe (112 g)। 320 kg ÷ 160 = 2 kmol Fe₂O₃ → 4 kmol Fe = 4 × 56 = 224 kg लोहा।

3. सोडियम जलीय NaCl के विद्युत अपघटन से क्यों नहीं मिलता?

पानी में H⁺ (पानी से) Na⁺ से आसानी से अपचयित होता है, इसलिए कैथोड पर हाइड्रोजन गैस बनती है। पिघले NaCl में पानी नहीं, इसलिए Na⁺ सोडियम बनता है।

4. एक अयस्क में द्रव्यमान से 5% ताँबा है। 1 टन ताँबे के लिए कितने टन अयस्क (बिना हानि)?

5% यानी 100 t अयस्क में 5 t ताँबा। 1 t के लिए: 100 ÷ 5 = 20 t अयस्क।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. धात्विक बंध किसके बीच आकर्षण है?
2. झाग प्लवन मुख्यतः किसके लिए है?
3. ऐलुमिनियम का निष्कर्षण किससे होता है?
4. Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu किसका उदाहरण है?
5. पीतल किसकी मिश्रधातु है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धातुकर्म क्या है?

अयस्क से शुद्ध धातु निकालने का विज्ञान और चरण: सांद्रण, निष्कर्षण (अपचयन) और शोधन। इसमें मिश्रधातु बनाना भी आता है।

धातुकर्म के तीन प्रकार कौन-से हैं?

उत्ताप धातुकर्म (गर्मी से), जल धातुकर्म (विलयन से) और विद्युत धातुकर्म (बिजली से)।

धातुएँ बिजली का चालन क्यों करती हैं?

धात्विक बंध के कारण: मुक्त इलेक्ट्रॉन धनायनों के जालक में घूमकर आवेश ले जाते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन11 класMetallic elements and compounds
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12केवल रचनात्मक आकलन हेतु विषय
जापान高校(専門学科)1〜3年Materials Production Technology

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