रेडियोन्यूक्लाइड से इमेजिंग की तकनीकें
रेडियोन्यूक्लाइड एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है। इमेजिंग के लिए इसे ऐसे रसायन से जोड़ते हैं जिसे शरीर उपयोग करता है (रेडियोफ़ार्मास्यूटिकल), ताकि वह मनचाहे अंग तक जाए: जैसे आयोडीन थायरॉइड तक, या फ़ॉस्फ़ेट हड्डियों तक। चित्र अंग का कार्य दिखाता है (अंग कैसे काम कर रहा है), केवल आकार नहीं।
अच्छा ट्रेसर
- केवल गामा उत्सर्जक: गामा शरीर से बाहर निकलकर पकड़ी जाती है; अल्फ़ा या बीटा केवल कोशिकाओं को नुक़सान करते।
- सही ऊर्जा: लगभग 100–200 keV — शरीर से निकल जाए पर क्रिस्टल में रुक जाए।
- कुछ घंटे की अर्ध-आयु: स्कैन के लिए काफ़ी, पर मात्रा (dose) कम रहे।
- अस्पताल में आसानी से बने और कई रसायनों से जुड़े।
टेक्नीशियम-99m इन सब पर खरा है: 140 keV गामा, Tp = 6 h। अस्पताल में मॉलिब्डेनम-99 (अर्ध-आयु 66 h) से "टेक्नीशियम जनरेटर" में बनता है। m का अर्थ मितस्थायी (metastable): उत्तेजित नाभिक जो गामा देकर ऊर्जा छोड़ता है।
PET (पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफ़ी)
फ़्लोरीन-18 वाली शक्कर (FDG) जैसा ट्रेसर पॉज़िट्रॉन देता है। हर पॉज़िट्रॉन एक मिलीमीटर के अंदर किसी इलेक्ट्रॉन से मिलकर विलोपन (annihilation) करता है और 511 keV के दो गामा फ़ोटॉन उल्टी दिशाओं में निकलते हैं। डिटेक्टरों की अंगूठी दोनों को एक साथ पकड़ती है; स्रोत उन्हें जोड़ने वाली रेखा पर है। ज़्यादा सक्रिय ऊतक, जैसे कई ट्यूमर, ज़्यादा शक्कर लेते हैं और चमकीले दिखते हैं।
अर्ध-आयु: भौतिक, जैविक और प्रभावी
- भौतिक अर्ध-आयु TP: आधे रेडियोधर्मी नाभिकों के क्षय होने का समय।
- जैविक अर्ध-आयु TB: शरीर द्वारा आधा पदार्थ बाहर निकालने का समय (मूत्र, पसीना, साँस)।
- प्रभावी अर्ध-आयु TE: दोनों के साथ होने पर शरीर में सक्रियता आधी होने का समय।
1/TE = 1/TP + 1/TB, यानी TE = TPTB ÷ (TP + TB)। TE हमेशा दोनों से छोटी। शरीर में सक्रियता: A = A₀ (½)^(t / TE)।
गामा कैमरा
- कोलिमेटर: सीसे की मोटी प्लेट जिसमें बहुत से लंबे समानांतर छेद। केवल छेदों की दिशा में चलती गामा किरणें निकलती हैं, तो क्रिस्टल का हर बिंदु केवल ठीक नीचे से आई किरणें पाता है। इसके बिना चित्र धुँधला होता।
- सिंटिलेटर: सोडियम आयोडाइड का बड़ा क्रिस्टल। हर अवशोषित गामा फ़ोटॉन से दृश्य प्रकाश की एक छोटी चमक।
- फ़ोटोमल्टीप्लायर ट्यूब (PMT): क्रिस्टल के पीछे कई ट्यूब। हर ट्यूब प्रकाश को विद्युत पल्स बनाती है जिसे डाइनोडों की श्रृंखला कई गुना बढ़ाती है। चमक के सबसे पास की ट्यूब को सबसे ज़्यादा प्रकाश।
- कंप्यूटर: ट्यूबों की पल्सों की तुलना करके चमक की जगह निकालता है और कई मिनटों में चित्र बनाता है। पल्स की ऊँचाई से ऊर्जा जाँचकर बिखरी किरणें हटाता है।
लंबे छेद = तीखा चित्र पर कम गिनती; यह विभेदन (resolution) और संवेदनशीलता के बीच का सौदा है।
उपचार: उच्च-ऊर्जा X-किरणें और रेडियोधर्मी इम्प्लांट
उच्च-ऊर्जा X-किरणें
रैखिक त्वरक (linac) इलेक्ट्रॉनों को कई MeV तक तेज़ करके भारी धातु के लक्ष्य पर मारता है, जिससे MeV X-किरणें बनती हैं। ये गहराई तक जाती हैं और त्वचा को कम नुक़सान करती हैं। मशीन रोगी के चारों ओर घूमती है, तो कई पुंज ट्यूमर पर मिलते हैं: ट्यूमर को पूरी मात्रा, स्वस्थ ऊतक के हर भाग को थोड़ी। आकार वाले पुंज (मल्टी-लीफ़ कोलिमेटर) ट्यूमर की रूपरेखा के अनुसार चलते हैं। मात्रा कई छोटे सत्रों में बाँटी जाती है ताकि स्वस्थ कोशिकाएँ ठीक हो सकें।
रेडियोधर्मी इम्प्लांट (ब्रैकीथेरेपी)
छोटे सीलबंद स्रोत ट्यूमर के अंदर या पास रखे जाते हैं, जैसे प्रोस्टेट में आयोडीन-125 के बीज। बीटा या कम-ऊर्जा गामा उत्सर्जक छोटे आयतन को बड़ी मात्रा देते हैं, बाक़ी को कम। मुँह से लिया गया आयोडीन-131 थायरॉइड सोख लेता है और अंदर से इलाज करता है।
इमेजिंग विधियों की तुलना
| विधि | आयनकारी? | किसके लिए सबसे अच्छी | सीमाएँ |
|---|---|---|---|
| X-किरण | हाँ (कम मात्रा) | हड्डी, छाती; जल्दी, सस्ती | कोमल ऊतक का कम अंतर; 2D |
| CT | हाँ (ज़्यादा मात्रा) | 3D स्लाइस, चोटें, ट्यूमर | ज़्यादा मात्रा; महँगी |
| अल्ट्रासाउंड | नहीं | गर्भावस्था, कोमल ऊतक, तुरंत | हड्डी या हवा के पार नहीं; कम विवरण |
| MRI | नहीं | दिमाग़, जोड़, कोमल ऊतक का विवरण | महँगी, धीमी, धातु नहीं |
| गामा कैमरा / PET | हाँ (ट्रेसर अंदर) | कार्य: रक्त प्रवाह, थायरॉइड, कैंसर का फैलाव | कम विभेदन; रोगी कुछ समय रेडियोधर्मी |
डॉक्टर मिलने वाली जानकारी को जोखिम और ख़र्च के साथ तौलते हैं; बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए जहाँ हो सके अनआयनकारी विधि चुनी जाती है।
खुद करो: दो नल, एक टंकी
एक बोतल में पानी भरो और दो छोटे छेद करो। एक छेद खोलो और पानी का स्तर आधा होने का समय नापो। फिर केवल दूसरा। फिर दोनों साथ। "दोनों" का समय हर एक से कम होगा — ठीक TE की तरह। 3D के आख़िरी चरण में TP = 6 h और TB = 24 h रखकर TE पढ़ो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1/T_E = 1/T_P + 1/T_B, यानी T_E = T_P T_B ÷ (T_P + T_B)
- सक्रियता A = A₀ (½)^(t / T)
- पॉज़िट्रॉन विलोपन: 511 keV के दो फ़ोटॉन, उल्टी दिशाओं में
- अर्ध-आयुओं की संख्या n = t ÷ T; बचा भाग = (½)ⁿ
हल किए गए उदाहरण
1. Tc-99m का T_P = 6.0 h। रोगी में T_B = 24 h। T_E?
T_E = 6 × 24 ÷ 30 = 4.8 h।
2. किसी ट्रेसर का T_E = 4.0 h। 12 h बाद कितना भाग बचेगा?
n = 3। भाग = (½)³ = 1/8 = 12.5%।
3. आयोडीन-131: T_P = 8.0 दिन, थायरॉइड में T_B = 24 दिन। T_E?
T_E = 8 × 24 ÷ 32 = 6.0 दिन।
4. इमेजिंग में Tc-99m अल्फ़ा उत्सर्जक से बेहतर क्यों?
अल्फ़ा कण कुछ कोशिकाओं में ही रुक जाते हैं, कैमरे तक नहीं पहुँचते, केवल नुक़सान करते हैं। Tc-99m की गामा किरणें बाहर निकलकर पकड़ी जाती हैं।
5. इंजेक्शन की सक्रियता 400 MBq, T_E = 5.0 h। 10 h बाद?
दो प्रभावी अर्ध-आयु: 400 → 200 → 100 MBq।
6. T_E = 3.0 h और T_P = 6.0 h। T_B?
1/T_B = 1/3 − 1/6 = 1/6, T_B = 6.0 h।
आम गलतियाँ
- अर्ध-आयु जोड़ देना (T_E = T_P + T_B)। व्युत्क्रम जुड़ते हैं, और T_E दोनों से छोटी है।
- कोलिमेटर को लेंस की तरह फ़ोकस करने वाला समझना। वह केवल छेदों के समानांतर न चलने वाली किरणें सोखता है।
- कहना कि गामा कैमरा विकिरण भेजता है। स्रोत रोगी है; कैमरा केवल पकड़ता है।
- बहुत लंबी अर्ध-आयु वाला ट्रेसर चुनना: रोगी को कई दिनों तक बेवजह विकिरण मिलता है।