नैदानिक X-किरणों की भौतिकी
X-किरणें प्रकाश जैसी विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, पर इनकी तरंगदैर्ध्य बहुत छोटी है (लगभग 10⁻¹¹ से 10⁻⁸ m)। छोटी तरंगदैर्ध्य का मतलब है हर फ़ोटॉन में बहुत ऊर्जा।
X-किरण ट्यूब
- फिलामेंट (कैथोड) गरम किया जाता है। उससे इलेक्ट्रॉन निकलते हैं — इसे तापायनिक उत्सर्जन कहते हैं।
- ऊँची वोल्टता (लगभग 30–150 kV) इलेक्ट्रॉनों को टंगस्टन ऐनोड की ओर तेज़ करती है।
- इलेक्ट्रॉन अचानक रुकता है तो X-फ़ोटॉन निकलता है — ब्रेकिंग विकिरण (bremsstrahlung)। इसमें हर तरह की ऊर्जा मिलती है।
- कुछ इलेक्ट्रॉन टंगस्टन के भीतरी इलेक्ट्रॉन बाहर निकाल देते हैं। बाहरी इलेक्ट्रॉन नीचे कूदते हैं और तय ऊर्जा की अभिलाक्षणिक X-किरणें देते हैं।
केवल लगभग 1% ऊर्जा X-किरण बनती है, बाकी गरमी। इसलिए ऐनोड घूमता है और तेल से ठंडा होता है।
सबसे बड़ी फ़ोटॉन ऊर्जा: Emax = eV। 100 kV पर यह 100 keV है।
एल्युमिनियम फ़िल्टर कम ऊर्जा वाली किरणें हटाता है, जो सिर्फ़ त्वचा में सोखी जातीं और चित्र में मदद नहीं करतीं।
X-किरणों का अवशोषण (क्षीणन)
X-किरणें पदार्थ से गुज़रती हैं तो तीव्रता घटती है। हर अतिरिक्त सेंटीमीटर उतना ही भाग हटाता है। इसलिए:
I = I₀ e−μx
- I₀ = अंदर जाने वाली तीव्रता, I = बाहर आने वाली, x = मोटाई।
- μ = रैखिक क्षीणन गुणांक (cm⁻¹ या m⁻¹)। बड़ा μ = पदार्थ अच्छा रोकता है।
अर्ध-मान मोटाई
जिस मोटाई से तीव्रता आधी हो जाए: x½ = ln 2 / μ।
द्रव्यमान क्षीणन गुणांक
μm = μ / ρ, जहाँ ρ घनत्व है।
अवशोषण परमाणु क्रमांक Z पर बहुत निर्भर है (लगभग Z³)। हड्डी (कैल्शियम, Z = 20) मांस (H, C, O) से कहीं ज़्यादा रोकती है।
चित्र पकड़ना और साफ़ करना
- फ़ोटोग्राफ़िक फ़िल्म: जहाँ X-किरण पड़े, काली हो जाती है। हड्डी किरणें रोकती है, इसलिए सफ़ेद रहती है।
- तीव्रकारी पर्दे (intensifying screen): एक X-फ़ोटॉन से कई प्रकाश-फ़ोटॉन बनते हैं, तो कम मात्रा (डोज़) काफ़ी है।
- डिजिटल फ़्लैट-पैनल डिटेक्टर: X-किरण को विद्युत संकेत में बदलता है, चित्र तुरंत स्क्रीन पर।
- इमेज इंटेंसिफ़ायर: चलते अंगों का लाइव चित्र (फ़्लोरोस्कोपी)।
- कंट्रास्ट माध्यम: नरम अंग एक जैसे दिखते हैं। मरीज़ बेरियम सल्फ़ेट पीता है (बेरियम मील) या आयोडीन का इंजेक्शन लगता है। बड़ा Z होने से आँत या नसें साफ़ दिखती हैं।
CT स्कैनर
साधारण X-रे पूरे शरीर को एक चपटी छाया में दबा देता है। CT (कंप्यूटेड टोमोग्राफ़ी) इसे ठीक करता है।
- ट्यूब और डिटेक्टरों का छल्ला मरीज़ के चारों ओर घूमता है।
- बिस्तर धीरे-धीरे छल्ले से सरकता है।
- कंप्यूटर हर छोटे घन (वॉक्सेल) का μ निकालकर परतें और 3D मॉडल बनाता है।
फ़ायदा: नरम ऊतकों का फ़र्क दिखता है, 3D दृश्य। नुकसान: साधारण X-रे से कहीं ज़्यादा डोज़, महँगी मशीन।
सुरक्षा: X-किरणें आयनकारी हैं। कर्मचारी सीसे की दीवार के पीछे रहते हैं और डोज़ जितना हो सके कम रखा जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = I₀ e^(−μx)
- x½ = ln 2 / μ
- μm = μ / ρ
- Emax = eV
- λmin = hc / (eV)
हल किए गए उदाहरण
1. ट्यूब 80 kV पर चलती है। सबसे बड़ी फ़ोटॉन ऊर्जा जूल में?
E = eV = 1.6×10⁻¹⁹ × 80 000 = 1.28×10⁻¹⁴ J (80 keV)।
2. μ = 0.5 cm⁻¹ है। 2 cm से कितना भाग पार होगा?
I/I₀ = e^(−1) = 0.37, यानी लगभग 37%।
3. μ = 0.35 cm⁻¹ हो तो अर्ध-मान मोटाई?
x½ = 0.693 / 0.35 ≈ 2.0 cm।
4. एल्युमिनियम का x½ = 1.2 cm। 3.6 cm से कितना पार होगा?
3.6/1.2 = 3 अर्ध-मोटाई। (½)³ = 12.5%।
5. 100 kV ट्यूब से न्यूनतम तरंगदैर्ध्य?
λ = hc/(eV) = 1.989×10⁻²⁵ / 1.6×10⁻¹⁴ = 1.24×10⁻¹¹ m।
6. सीसे का μ = 50 cm⁻¹। तीव्रता 1% करने को कितनी मोटाई?
x = ln 100 / 50 = 0.092 cm ≈ 0.9 mm।
आम गलतियाँ
- सोचना कि तीव्रता सीधी रेखा में घटती है। वह घातांकी घटती है: हर cm में उतना ही भाग।
- cm और m मिला देना: μ cm⁻¹ में हो तो x भी cm में लो।
- कहना कि हड्डी X-किरणें “परावर्तित” करती है। वह सोखती है।
- मानना कि CT में साधारण X-रे से कम विकिरण है। आमतौर पर बहुत ज़्यादा होता है।