फ़िज़िकल कंप्यूटिंग क्या है?
फ़िज़िकल कंप्यूटिंग में ऐसे सिस्टम बनते हैं जिनमें प्रोग्राम असली दुनिया को महसूस करता है और उस पर काम करता है। इसमें छोटे बोर्ड, माइक्रोकंट्रोलर (जैसे micro:bit, Arduino, Raspberry Pi Pico), लगते हैं। इनमें एक चिप पर प्रोसेसर, थोड़ी मेमोरी और इनपुट/आउटपुट पिन होते हैं।
हर सिस्टम इनपुट → प्रोसेस → आउटपुट पर चलता है, एक लूप में जो सेकंड में कई बार दोहराता है।
सेंसर और एक्चुएटर
- सेंसर (इनपुट): बटन, रोशनी सेंसर (LDR), तापमान सेंसर, अल्ट्रासोनिक दूरी सेंसर, एक्सेलेरोमीटर, मिट्टी की नमी सेंसर, माइक्रोफ़ोन।
- एक्चुएटर (आउटपुट): LED, बज़र, सर्वो या DC मोटर, रिले, डिस्प्ले, स्पीकर।
डिजिटल और एनालॉग सिग्नल
डिजिटल इनपुट के केवल दो मान: 0 या 1। एनालॉग इनपुट के बहुत से मान; बोर्ड वोल्टेज को संख्या में बदलता है, अक्सर 0–1023 (10-बिट)। आउटपुट डिजिटल (चालू/बंद) हो सकता है या PWM (तेज़ी से चालू-बंद) से LED मद्धम या मोटर धीमी की जा सकती है।
व्यवहार का प्रोग्राम बनाना
एक सामान्य प्रोग्राम:
हमेशा:
रोशनी = सेंसर पढ़ो
अगर रोशनी < 400:
LED चालू
वरना:
LED बंद
100 ms रुकोमुख्य बातें: वेरिएबल रीडिंग रखते हैं, शर्तें उसे सीमा (threshold) से मिलाती हैं, लूप जाँचता रहता है। असली सेंसर की रीडिंग थोड़ी उछलती है, इसलिए औसत लेते हैं या दो सीमाएँ (हिस्टैरिसिस) रखते हैं। फ़ीडबैक लूप में काम का नतीजा अगला इनपुट बनता है – जैसे कमरा ठंडा होने पर पंखा धीमा होना।
डिज़ाइन चक्र
समस्या तय करो → सेंसर और एक्चुएटर चुनो → सर्किट और फ़्लोचार्ट बनाओ → बनाओ और कोड लिखो → असली हालात में जाँचो → सुधारो।
प्रोजेक्ट, वियरेबल और कला
- स्मार्ट घर: नाइट लाइट, पौधों को अपने-आप पानी, दरवाज़े का अलार्म।
- वियरेबल: कदम गिनने वाले बैंड, चमकते कपड़े, हृदय-गति बैंड; इनमें छोटे बोर्ड, बैटरी और सुरक्षित लचीली तारें लगती हैं।
- इंटरैक्टिव कला: आवाज़, हलचल या छूने पर प्रतिक्रिया देने वाली मूर्तियाँ।
सुरक्षा (कम वोल्टेज), बैटरी, निजता (सेंसर कौन-सा डेटा लेते हैं) और सबके लिए सुलभता पर ध्यान दें।
करके देखें
बोर्ड नहीं है? खुद माइक्रोकंट्रोलर बनिए: दोस्त टॉर्च ढकता-खोलता है (सेंसर), आप नियम मानते हैं "अंधेरा हो तो ताली" (प्रोसेस), आपकी ताली एक्चुएटर है। फिर सीमा बदलिए: "बहुत अंधेरा हो तभी ताली"।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- इनपुट → प्रोसेस → आउटपुट, लूप के अंदर
- सेंसर: भौतिक राशि को विद्युत संकेत/संख्या में बदलता है
- एक्चुएटर: विद्युत संकेत को काम (रोशनी, आवाज़, गति) में बदलता है
- एनालॉग रीडिंग (10-बिट): 0 से 1023 (2¹⁰ = 1024 मान)
- डिजिटल: 0 / 1; PWM औसत शक्ति तय करता है
- सीमा नियम: अगर रीडिंग < सीमा तो काम करो
हल किए गए उदाहरण
1. अपने-आप जलने वाली नाइट लाइट के इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट बताइए।
इनपुट: रोशनी सेंसर। प्रोसेस: रीडिंग सीमा से कम हो तो चालू। आउटपुट: LED या लैंप।
2. 10-बिट सेंसर 512 पढ़ता है। यह पूरे पैमाने का लगभग कितना भाग है?
512/1023 ≈ 0.5, यानी लगभग आधा।
3. शाम को रीडिंग 395 और 405 के बीच उछलती है और 400 सीमा पर लैंप टिमटिमाता है। हल?
दो सीमाएँ: 380 से नीचे चालू, 420 से ऊपर बंद (हिस्टैरिसिस), या पहले कई रीडिंग का औसत।
4. पौधों को पानी देने वाला सिस्टम डिज़ाइन कीजिए।
इनपुट: मिट्टी नमी सेंसर। प्रोसेस: नमी < 30% हो तो पंप 3 s चालू, फिर रुको। आउटपुट: रिले से पानी का पंप।
5. PWM 25% ड्यूटी साइकिल पर LED कितनी चमकीली दिखेगी?
यह चौथाई समय चालू है, इसलिए लगभग एक-चौथाई चमक।
आम गलतियाँ
- सेंसर और एक्चुएटर को उलट देना – मोटर आउटपुट है, बटन इनपुट।
- लूप भूल जाना, जिससे सेंसर केवल एक बार पढ़ा जाए।
- उछलती रीडिंग पर एक ही तीखी सीमा रखना, जिससे टिमटिमाहट हो।
- मोटर को सीधे डेटा पिन से चलाना, ड्राइवर या रिले के बिना।