China 高三 Information Technology
अध्याय: 4
1. Sel.4 Introduction to AI
AI overview and history · Knowledge representation, heuristic search, Bayes, expert systems · Regression, decision trees, K-means · Neural networks and deep learning · Computer vision, NLP, reasoning, game playing · AI ethics and safety
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मशीनें सोचना कैसे सीखती हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) कंप्यूटर प्रणाली की वह क्षमता है जिससे वह ऐसे काम करती है जिनमें आम तौर पर इंसानी दिमाग़ लगता है: देखना, बोली समझना, फ़ैसला करना और सीखना। AI प्रणाली एक एजेंट है जो महसूस करती है, सोचती है और काम करती है। पुरानी AI इंसानों के लिखे नियमों पर चलती थी। आज की AI ज़्यादातर मशीन लर्निंग से चलती है: वह ढेर सारे लेबल वाले उदाहरणों (डेटा) से ख़ुद नियम ढूँढती है। न्यूरल नेटवर्क सरल इकाइयों की परतें हैं जिनकी कड़ियों की ताकत (भार) प्रशिक्षण में बदलती है। AI नक्शों, अनुवाद, स्वास्थ्य, खेती और खेलों में काम आती है। एकतरफ़ा डेटा से यह ग़लत या पक्षपाती हो सकती है, इसलिए इंसान को इसे जाँचना, निजता बचाना और ज़िम्मेदार रहना चाहिए।
- ज्ञान-निरूपण, ह्यूरिस्टिक खोज, बेज़ और विशेषज्ञ प्रणाली – क्लासिक AI चार विचारों पर चलता है। ज्ञान-निरूपण तथ्यों और नियमों को ऐसे रखता है कि कंप्यूटर उन्हें इस्तेमाल कर सके। ह्यूरिस्टिक खोज लक्ष्य के बारे में एक संकेत लेकर अंधी खोज से बहुत कम विकल्प जाँचती है। बेज़ तर्क नए सबूत आने पर भरोसा बदलता है। विशेषज्ञ प्रणाली नियमों के ज्ञान-भंडार को अनुमान-इंजन से जोड़कर विशेषज्ञ जैसा उत्तर देती है।
- मशीन लर्निंग (Machine Learning) – मशीन लर्निंग (ML) में कंप्यूटर को नियम बताया नहीं जाता; वह उदाहरणों से नियम ख़ुद सीखता है. हम डेटा देते हैं: फ़ीचर (इनपुट) और, सुपरवाइज़्ड लर्निंग में, लेबल (उत्तर). मशीन एक मॉडल बनाती है: रिग्रेशन संख्या का अनुमान लगाता है, डिसीज़न ट्री हाँ/नहीं प्रश्नों से वर्ग चुनता है, और k-means बिना लेबल वाले डेटा को समूहों में बाँटता है. ज़्यादातर डेटा पर सिखाते हैं, अनदेखे डेटा पर परखते हैं और सटीकता नापते हैं. सिर्फ़ रटने वाला मॉडल (ओवरफ़िटिंग) नए डेटा पर फेल होता है.
- न्यूरल नेटवर्क और डीप लर्निंग – न्यूरल नेटवर्क कंप्यूटर का एक मॉडल है जो बहुत सारे छोटे हिस्सों से बना है, जिन्हें कृत्रिम न्यूरॉन कहते हैं। हर न्यूरॉन अपने इनपुट को भार (weight) से गुणा करता है, जोड़ता है, बायस जोड़ता है और जोड़ को सक्रियण फलन (activation function) से गुज़ारता है। न्यूरॉन परतों में लगे होते हैं: इनपुट, छिपी (hidden) और आउटपुट परत। नेटवर्क प्रशिक्षण (training) से सीखता है: अंदाज़ा लगाता है, गलती (loss) मापता है और पीछे की ओर भार सुधारता है (बैकप्रोपेगेशन और ग्रेडिएंट डिसेंट)। बहुत सारी छिपी परतों वाले नेटवर्क को डीप लर्निंग कहते हैं। CNN चित्रों के लिए और RNN क्रम (जैसे वाक्य, आवाज़) के लिए अच्छे हैं।
- AI के हुनर: कंप्यूटर विज़न, भाषा, तर्क और गेम खेलना – AI के चार क्लासिक हुनर हैं। विज़न पिक्सेल को किनारों, आकारों और नामों में बदलता है। भाषा-संसाधन पाठ को टोकन में काटता है, शब्दों को टैग देता है और अर्थ खोजता है। तर्क तथ्यों और नियमों से नया तथ्य निकालता है, पर सिर्फ़ वैध क़दम सुरक्षित हैं। गेम खेलने में चालों का पेड़ बनता है और नीचे से ऊपर स्कोर करके (मिनिमैक्स) सबसे अच्छी चाल चुनी जाती है।
- AI नैतिकता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निष्पक्ष और सुरक्षित उपयोग – AI डेटा से पैटर्न सीखकर फ़ैसले करता है। AI नैतिकता पूछती है: क्या ये फ़ैसले निष्पक्ष, सुरक्षित और सम्मानजनक हैं? मुख्य मुद्दे: पक्षपात (अनुचित डेटा से अनुचित नतीजे), निजता (निजी डेटा के लिए सहमति और सुरक्षा), पारदर्शिता (AI ने क्यों तय किया, यह पता हो), जवाबदेही (इंसान ज़िम्मेदार रहे), सुरक्षा और दुरुपयोग (डीपफ़ेक, झूठी ख़बरें), और सामाजिक असर (नौकरियाँ, डिजिटल खाई, पर्यावरण)। ज़िम्मेदार AI का मतलब है इन सबकी जाँच उपयोग से पहले और बाद में।
2. Sel.5 3D design and creativity
3D design basics and technologies (modelling, rendering, VR, 3D printing) · Building and assembling 3D models · Designing creative 3D works
- 3D मॉडलिंग: घन से छपी हुई वस्तु तक – 3D मॉडल कंप्यूटर में रखी एक आकृति है: बिंदु (शीर्ष, vertices) किनारों (edges) से जुड़कर सपाट फलक (faces) बनाते हैं – इसे मेश कहते हैं। हम सरल आकृतियों (primitives) से शुरू करते हैं, उन्हें खिसकाते, घुमाते और बड़ा-छोटा करते हैं, और फलक बाहर खींचते (extrude) हैं। फिर पदार्थ और रोशनी देकर कंप्यूटर तस्वीर रेंडर करता है। वही मॉडल पतली परतों में काटकर 3D प्रिंटर से बनाया जा सकता है।
- 3D मॉडल बनाना और जोड़ना – 3D मॉडल तीन तरह से बनता है। प्रिमिटिव मॉडलिंग में डिब्बा, गोला, बेलन और शंकु जैसे सरल ठोस जोड़े जाते हैं। प्रोफ़ाइल मॉडलिंग में एक सपाट आकृति बनाकर उसे एक्सट्रूड (खींचना) या रिवॉल्व (घुमाना) किया जाता है। असेंबली में तैयार पुर्ज़े अपनी जगह जोड़े जाते हैं, और एक्सप्लोडेड व्यू उन्हें सीधी रेखाओं में अलग करके दिखाता है कि वे कैसे बैठते हैं।
- रचनात्मक 3D कार्य: योजना, डिज़ाइन के नियम, एनिमेशन और AR – रचनात्मक 3D काम योजना से शुरू होता है: कौन देखेगा और उसे क्या महसूस होना चाहिए? मॉडल सरल आकारों से बनता है। फिर संतुलन, अनुपात, कंट्रास्ट और फ़ोकस जैसे डिज़ाइन के नियम लगाते हैं। एनिमेशन में हम कुछ ख़ास पोज़ (कीफ़्रेम) बनाते हैं और बीच के फ़्रेम कंप्यूटर भरता है। ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) में फ़ोन का कैमरा मार्कर या समतल सतह पहचानता है और 3D मॉडल को वहीं टिकाए रखता है।
3. Sel.6 Open-source hardware projects
Open-source hardware features · Input/output modules, communication, project workflow · Creative design and hardware choice · Making, testing, sharing
- फ़िज़िकल कंप्यूटिंग: कोड से महसूस करना और हिलाना – फ़िज़िकल कंप्यूटिंग कोड को असली दुनिया से जोड़ती है। सेंसर कुछ मापते हैं (रोशनी, तापमान, दूरी, बटन) और उसे संख्या बनाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि उस संख्या का क्या करना है। एक्चुएटर (LED, बज़र, मोटर, स्क्रीन) दुनिया में कुछ करते हैं। यह इनपुट–प्रोसेस–आउटपुट चक्र लूप में बार-बार चलता है।
- ओपन-सोर्स हार्डवेयर प्रोजेक्ट: पिन, इनपुट-आउटपुट मॉड्यूल, संचार और कार्य-क्रम – ओपन-सोर्स हार्डवेयर बोर्ड पिनों वाला एक छोटा कंप्यूटर है। डिजिटल पिन ON/OFF (HIGH या LOW) पढ़ते या लिखते हैं। एनालॉग पिन बदलता स्तर संख्या में पढ़ते हैं, आम तौर पर 0 से 1023। पावर पिन 5 V, 3.3 V और ग्राउंड देते हैं। इनपुट मॉड्यूल (बटन, सेंसर) जानकारी अंदर भेजते हैं और आउटपुट मॉड्यूल (LED, बज़र, मोटर) काम करते हैं। बोर्ड TX और RX से सीरियल संचार करके कंप्यूटर या दूसरे बोर्ड से बात करता है। प्रोजेक्ट में setup एक बार चलता है, फिर लूप दोहराता है: पढ़ो, तय करो, करो और बताओ।
- रचनात्मक हार्डवेयर डिज़ाइन: ज़रूरत विश्लेषण, काम और रूप, बोर्ड का चुनाव – अच्छा हार्डवेयर प्रोजेक्ट किसी गैजेट से नहीं, असली उपयोगकर्ता की असली ज़रूरत से शुरू होता है। हम ज़रूरत एक वाक्य में लिखते हैं, उसे कामों (फ़ंक्शन) में बाँटते हैं, रूप डिज़ाइन करते हैं और फिर बोर्ड चुनते हैं। बोर्ड इस आधार पर चुनते हैं कि मॉड्यूलों को कितने पिन चाहिए, वाई-फ़ाई या ब्लूटूथ चाहिए या नहीं, आकार, बिजली की खपत और दाम। सबसे छोटा और सस्ता बोर्ड चुनो जो ठीक बैठे, थोड़ी बढ़ने की जगह के साथ।
- हार्डवेयर प्रोजेक्ट बनाना, परखना और साझा करना: निर्माण, परीक्षण, साझा करना और बौद्धिक संपदा – हार्डवेयर प्रोजेक्ट बनाने के लिए एक-एक मॉड्यूल जोड़ो और अगला जोड़ने से पहले उसे जाँचो (निर्माण)। फिर पूरे प्रोजेक्ट को टेस्ट केस से परखो, असली हालात में भी, जैसे अँधेरा कमरा या बहुत तेज़ दबाना। टेस्ट फ़ेल हो तो बग मिला: कारण ढूँढो, ठीक करो और फिर परखो। आख़िर में कोड, सर्किट चित्र, पुर्ज़ों की सूची और README ऑनलाइन भंडार में साझा करो, एक लाइसेंस के साथ जो बताता है कि दूसरे क्या कर सकते हैं। बौद्धिक संपदा (IP) रचनाकार का अधिकार है; ओपन-सोर्स लाइसेंस दूसरों को श्रेय देने की शर्त पर काम इस्तेमाल और बेहतर करने देते हैं।
4. Electives (选修)
Introduction to algorithms: greedy, divide and conquer, DP, backtracking; complexity · Mobile app design: sensors, storage, networking, security
- एल्गोरिदम डिज़ाइन की तकनीकें – एल्गोरिदम बनाने के लिए पहले समस्या स्पष्ट करो: इनपुट डेटा, अपेक्षित आउटपुट और शर्तें। फिर साफ़, सीमित चरण लिखो: सामान्य भाषा में, सूची में, स्यूडोकोड या फ़्लोचार्ट में। बड़ी समस्या को ऊपर से नीचे (top-down) छोटे भागों में बाँटा जाता है या नीचे से ऊपर (bottom-up) छोटे जाँचे हुए टुकड़ों से बनाया जाता है। मुख्य तकनीकें: ब्रूट फ़ोर्स (सब आज़माओ), विभाजन और विजय (बाँटो, हल करो, जोड़ो; बाइनरी सर्च और मर्ज सॉर्ट जैसा आधा करना), लालची (हर बार अभी सबसे अच्छा दिखने वाला चुनाव; तेज़ पर हमेशा सबसे अच्छा नहीं), डायनेमिक प्रोग्रामिंग (हर छोटी उप-समस्या एक बार हल करके तालिका में सहेजो) और बैकट्रैकिंग (चुनाव आज़माओ, बंद गली पर वापस लो)। तकनीक और डेटा संरचना (ऐरे, स्टैक, बाइनरी ट्री) सही होने और दक्षता (समय जटिलता) देखकर चुनो।
- मोबाइल ऐप डिज़ाइन: मोबाइल टर्मिनल, ऐप संरचना, सेंसर, स्टोरेज और नेटवर्क, सुरक्षा – फ़ोन एक छोटा कंप्यूटर है जिसमें टच स्क्रीन, सेंसर, स्टोरेज और नेटवर्क के रेडियो होते हैं। मोबाइल ऐप आम तौर पर तीन परतों में बनती है: स्क्रीन (UI), तर्क (नियम) और डेटा। ऐप एक्सेलेरोमीटर, GPS और कैमरा जैसे सेंसर पढ़ती है। वह डेटा फ़ोन के स्थानीय स्टोरेज में रखती है और इंटरनेट पर अनुरोध व उत्तर के ज़रिए सर्वर से बात करती है। अच्छी ऐप ऑफ़लाइन भी चलती है और बाद में सिंक करती है। सुरक्षा के लिए ऐप सेंसर या फ़ाइल इस्तेमाल करने से पहले अनुमति माँगती है, निजी डेटा को लॉक (एन्क्रिप्ट) करती है और सुरक्षित कनेक्शन से ही भेजती है।