South 고등학교 2학년 Informatics
अध्याय: 5
1. Computing systems
Wired and wireless networks · Internet of Things · Physical computing systems
- नेटवर्क कैसे बढ़े और डेटा कैसे चलता है – कंप्यूटर नेटवर्क जुड़े हुए उपकरणों का समूह है जो डेटा साझा करते हैं। नेटवर्किंग ARPANET (1969) से शुरू हुई, 1980 के दशक में विश्वविद्यालयों के लिए NSFNET बना, और दूसरे नेटवर्कों से जुड़कर इंटरनेट बना — नेटवर्कों का नेटवर्क। हर डेटा संचार के पाँच भाग हैं: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश, संचार माध्यम और प्रोटोकॉल। बैंडविड्थ वह आवृत्ति-सीमा है जो चैनल ले जा सकता है (Hz में); डेटा दर प्रति सेकंड जाने वाले बिट (bps) हैं। नेटवर्क के हर उपकरण का IP एड्रेस होता है। डेटा सर्किट स्विचिंग (पहले पक्का रास्ता बुक) या पैकेट स्विचिंग (डेटा पैकेटों में कटकर अलग-अलग चलता है) से जाता है।
- इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) – इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) रोज़मर्रा की चीज़ों का ऐसा नेटवर्क है जिनमें सेंसर, छोटा कंप्यूटर और नेटवर्क कनेक्शन होता है, ताकि वे डेटा इकट्ठा करें, इंटरनेट पर भेजें और उस पर काम करें. सेंसर भौतिक बदलाव को डेटा बनाता है, माइक्रोकंट्रोलर उसे संसाधित करता है, नेटवर्क (Wi-Fi, ब्लूटूथ, ज़िगबी, 4G/5G, LoRa) उसे क्लाउड या ऐप तक ले जाता है, और एक्चुएटर आदेश को काम में बदलता है. IoT को तीन परतों में समझते हैं: संवेदन, नेटवर्क और ऐप्लिकेशन. यह सुविधा और ऊर्जा बचत देता है, पर मज़बूत गोपनीयता और सुरक्षा चाहिए.
- फ़िज़िकल कंप्यूटिंग: कोड से महसूस करना और हिलाना – फ़िज़िकल कंप्यूटिंग कोड को असली दुनिया से जोड़ती है। सेंसर कुछ मापते हैं (रोशनी, तापमान, दूरी, बटन) और उसे संख्या बनाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि उस संख्या का क्या करना है। एक्चुएटर (LED, बज़र, मोटर, स्क्रीन) दुनिया में कुछ करते हैं। यह इनपुट–प्रोसेस–आउटपुट चक्र लूप में बार-बार चलता है।
2. Data
Data compression · Encryption · Big data · Analysing big data
- डेटा कंप्रेशन (Data Compression) – कंप्रेशन फ़ाइल को छोटा करता है, ताकि वह कम जगह ले और जल्दी भेजी जा सके। लॉसलेस कंप्रेशन (RLE, हफ़मैन, डिक्शनरी तरीके, ZIP, PNG) बिल्कुल वही मूल डेटा वापस देता है। लॉसी कंप्रेशन (JPEG, MP3, MP4) वह बारीकी हटाता है जो हमें मुश्किल से दिखती-सुनाई देती है; फ़ाइल बहुत छोटी होती है पर हटी बारीकी वापस नहीं आती। कंप्रेशन अनुपात = मूल साइज़ ÷ कंप्रेस्ड साइज़।
- क्रिप्टोग्राफी: गुप्त संदेश हमारे डेटा को कैसे बचाते हैं – क्रिप्टोग्राफी संदेशों को गुप्त और भरोसेमंद रखने का विज्ञान है. सादा संदेश (प्लेनटेक्स्ट) कुंजी (की) से मिलकर गुप्त संदेश (सिफ़रटेक्स्ट) बनता है, इसे एन्क्रिप्शन कहते हैं. सही कुंजी से वापस पढ़ना डिक्रिप्शन है. पुराना सीज़र सिफ़र अक्षरों को आगे खिसकाता है. आज सममित एन्क्रिप्शन (एक साझा कुंजी) और असममित यानी पब्लिक-की एन्क्रिप्शन (ताला लगाने को पब्लिक की, खोलने को प्राइवेट की) चलते हैं. हैशिंग डेटा की तय लंबाई वाली उँगली-छाप बनाती है, और डिजिटल हस्ताक्षर बताता है कि संदेश किसने भेजा. https वाली साइट खोलते या UPI से पैसे भेजते समय आपका फ़ोन ये सब इस्तेमाल करता है.
- बिग डेटा (Big Data) – बिग डेटा वह डेटा है जो एक साधारण कंप्यूटर और साधारण सॉफ़्टवेयर के लिए बहुत बड़ा, बहुत तेज़ या बहुत मिला-जुला हो। इसे तीन V से समझते हैं: मात्रा (Volume), वेग (Velocity) और विविधता (Variety)। इसे संभालने के लिए काम कई मशीनों में एक साथ बाँटा जाता है (वितरित प्रोसेसिंग, जैसे MapReduce)। बिग डेटा को अक्सर तथ्यों (facts) या ग्राफ (नोड और लिंक) के रूप में रखा जाता है। मौसम, नक्शे, स्वास्थ्य, खरीदारी और AI में इसका उपयोग होता है, पर निजता और निष्पक्षता के सवाल भी उठते हैं।
- डेटा विश्लेषण – डेटा विश्लेषण यानी कच्चे आँकड़ों को जवाब में बदलना। इसका एक चक्र है: सवाल पूछो, डेटा इकट्ठा करो, साफ़ करो (ग़लती, दोहराव और खाली जवाब हटाओ), व्यवस्थित करो, माध्य, माध्यिका, परास और पैटर्न से विश्लेषण करो, सही चार्ट बनाओ और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। बाहरी मान, छोटे नमूने और पक्षपात पर नज़र रखो, और याद रखो कि दो चीज़ों का साथ बढ़ना (सहसंबंध) यह साबित नहीं करता कि एक दूसरे का कारण है। डेटा को सुरक्षित रखना और अनुमति से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
3. Algorithms and programming
Decomposing complex problems · Sorting algorithms · Searching algorithms · Data types · Standard and file input/output · Multidimensional data structures · Complex control structures · Classes and objects · Programs for real problems · Program performance
- सॉर्टिंग एल्गोरिदम (छाँटने के तरीक़े) – सॉर्टिंग एल्गोरिदम किसी सूची को क्रम में लगाता है। बबल सॉर्ट पड़ोसियों की अदला-बदली करता है, इंसर्शन सॉर्ट हर चीज़ को छँटे हिस्से में सही जगह खिसकाता है, सिलेक्शन सॉर्ट हर बार सबसे छोटा चुनता है, और मर्ज सॉर्ट सूची को तोड़कर छँटे हिस्से जोड़ता है। लंबी सूची पर मर्ज सॉर्ट बहुत कम तुलनाएँ करता है (लगभग n²/2 की जगह n log₂ n)।
- खोज (Searching) और छँटाई (Sorting) एल्गोरिदम – खोज एल्गोरिदम सूची में कोई चीज़ ढूँढता है; छँटाई एल्गोरिदम सूची को क्रम में लगाता है। रेखीय खोज एक-एक करके देखती है और किसी भी सूची पर चलती है। द्विआधारी खोज छँटी सूची को हर बार आधा करती है और बहुत तेज़ है। बबल सॉर्ट पड़ोसियों की अदला-बदली करता है; मर्ज सॉर्ट सूची तोड़कर छँटे टुकड़े जोड़ता है, जो बड़ी सूचियों में तेज़ है।
- पायथन की मूल बातें: मोड, वेरिएबल, डेटा प्रकार और ऑपरेटर – पायथन इंटरैक्टिव मोड (एक-एक पंक्ति) या स्क्रिप्ट मोड (सहेजी गई .py फ़ाइल) में चलता है। ब्लॉक इंडेंटेशन से पहचाने जाते हैं। वेरिएबल मान से बँधे नाम हैं; हर मान का एक डेटा प्रकार होता है, और कुछ प्रकार परिवर्तनशील हैं। ऑपरेटर व्यंजक बनाते हैं जिन्हें पायथन प्राथमिकता के क्रम से हल करता है। input() टेक्स्ट पढ़ता है, int()/float()/str() प्रकार बदलते हैं, और डिबगिंग से सिंटैक्स, रनटाइम और तार्किक त्रुटियाँ ठीक होती हैं।
- पायथन में फ़ाइल प्रबंधन: ऐसा डेटा सहेजें जो टिके – प्रोग्राम ख़त्म होते ही वेरिएबल मिट जाते हैं; फ़ाइलें डेटा डिस्क पर रखती हैं। टेक्स्ट फ़ाइल पंक्तियों में अक्षर रखती है, बाइनरी फ़ाइल कच्चे बाइट (जैसे pickle किए पायथन ऑब्जेक्ट), और CSV फ़ाइल अल्पविराम से अलग तालिका की पंक्तियाँ। फ़ाइल open(path, mode) से खुलती है; पाथ absolute या relative, मोड r, w, a, r+, rb, wb आदि। with फ़ाइल को अपने-आप बंद करता है। टेक्स्ट फ़ाइल में write, writelines, read, readline, readlines। seek फ़ाइल पॉइंटर खिसकाता है, tell उसकी जगह बताता है। pickle.dump और pickle.load से ऑब्जेक्ट सहेजते-पढ़ते हैं, जिससे रिकॉर्ड खोजना, जोड़ना और बदलना होता है। csv मॉड्यूल का writer (writerow, writerows) और reader CSV सँभालते हैं।
- डेटा संरचना: ऐरे, लिस्ट, स्टैक, क्यू और ट्री – डेटा संरचना मेमोरी में डेटा को ऐसे जमाने का तरीका है कि प्रोग्राम उसे अच्छे से इस्तेमाल कर सके। ऐरे चीज़ों को क्रमांकित डिब्बों में रखता है ताकि सूचकांक से तुरंत पहुँच हो। लिंक्ड लिस्ट नोड्स को पॉइंटर से जोड़ती है, इसलिए बीच में डालना आसान है। स्टैक LIFO (अंतिम आया, पहले गया) और क्यू FIFO (पहले आया, पहले गया) पर चलते हैं। डिक्शनरी कुंजी (key) से मान खोजती है और ट्री डेटा को स्तरों में रखता है ताकि खोज तेज़ हो।
- Python में नियंत्रण प्रवाह – नियंत्रण प्रवाह वह क्रम है जिसमें कथन चलते हैं। Python में तीन प्रकार: क्रमिक (ऊपर से नीचे), चयन (if, if-else, if-elif-else) और पुनरावृत्ति (for और while लूप)। ब्लॉक इंडेंटेशन से बनते हैं (कोलन के बाद आमतौर पर 4 स्पेस)। range(start, stop, step) start से stop तक, पर stop शामिल नहीं। while तब तक दोहराता है जब तक शर्त सत्य है। break लूप तुरंत छोड़ता है; continue अगली बारी पर जाता है। लूप के अंदर लूप नेस्टेड लूप है, जो पैटर्न में काम आता है; जोड़ने वाले चर (accumulator) से श्रेणी का योग निकलता है।
- पायथन में नियंत्रण कथन: if-else, while और for – सामान्यतः पायथन पंक्तियाँ एक के बाद एक चलाता है (क्रम)। नियंत्रण कथन यह बहाव बदलते हैं। if-else दो में से एक रास्ता चुनता है; if-elif-else कई में से पहली सच्ची शर्त चुनता है। while शर्त सच रहने तक ब्लॉक दोहराता है; for किसी क्रम, जैसे range(start, stop, step), के हर आइटम के लिए एक बार चलता है।
- ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग (OOP) – ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में प्रोग्राम ऑब्जेक्ट्स से बनता है। क्लास एक ब्लूप्रिंट है जो बताता है कि उसके ऑब्जेक्ट्स के पास कौन-सा डेटा (एट्रिब्यूट) और कौन-से काम (मेथड) होंगे। हर ऑब्जेक्ट क्लास से बनता है और अपना डेटा ख़ुद रखता है। चार बड़े विचार हैं: एनकैप्सुलेशन (डेटा को मेथड के पीछे छिपाना), इनहेरिटेंस (नई क्लास पुरानी को दोबारा इस्तेमाल करे), पॉलीमॉर्फ़िज़्म (एक ही मेथड हर ऑब्जेक्ट के लिए सही ढंग से चले) और एब्स्ट्रैक्शन (ज़रूरी चीज़ ही दिखाना)।
- प्रोग्रामिंग की मूल बातें: अनुक्रम, चयन, लूप और फ़ंक्शन – प्रोग्राम सटीक निर्देशों का समूह है जिसे कंप्यूटर मानता है। हर प्रोग्राम तीन संरचनाओं से बनता है: अनुक्रम (क्रम से कदम), चयन (if/else से चुनाव) और पुनरावृत्ति (लूप)। चर मान संभालकर रखते हैं। फ़ंक्शन कोड को नाम वाले, दोबारा इस्तेमाल होने वाले खंडों में बाँटते हैं, जिससे प्रोग्राम मॉड्यूलर बनता है और उसे जाँचना, सुधारना और सँभालना आसान होता है।
- एल्गोरिदम कॉम्प्लेक्सिटी: एल्गोरिदम कितनी तेज़ी से बढ़ता है? – एक ही सवाल को कई एल्गोरिदम हल कर सकते हैं, पर कुछ बहुत ज़्यादा कदम लेते हैं। हम घड़ी के सेकंड नहीं, बल्कि इनपुट के आकार n के साथ बढ़ते कदम गिनते हैं। बिग O इस बढ़त का नाम है: O(1) स्थिर, O(log n), O(n) रैखिक, O(n log n) और O(n²)। लीनियर सर्च O(n), बाइनरी सर्च O(log n); बबल सॉर्ट O(n²), मर्ज सॉर्ट O(n log n)। मेमोरी की बढ़त = स्पेस कॉम्प्लेक्सिटी।
4. Artificial intelligence
Intelligent agents · Machine learning types · Solving problems with ML
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मशीनें सोचना कैसे सीखती हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) कंप्यूटर प्रणाली की वह क्षमता है जिससे वह ऐसे काम करती है जिनमें आम तौर पर इंसानी दिमाग़ लगता है: देखना, बोली समझना, फ़ैसला करना और सीखना। AI प्रणाली एक एजेंट है जो महसूस करती है, सोचती है और काम करती है। पुरानी AI इंसानों के लिखे नियमों पर चलती थी। आज की AI ज़्यादातर मशीन लर्निंग से चलती है: वह ढेर सारे लेबल वाले उदाहरणों (डेटा) से ख़ुद नियम ढूँढती है। न्यूरल नेटवर्क सरल इकाइयों की परतें हैं जिनकी कड़ियों की ताकत (भार) प्रशिक्षण में बदलती है। AI नक्शों, अनुवाद, स्वास्थ्य, खेती और खेलों में काम आती है। एकतरफ़ा डेटा से यह ग़लत या पक्षपाती हो सकती है, इसलिए इंसान को इसे जाँचना, निजता बचाना और ज़िम्मेदार रहना चाहिए।
- मशीन लर्निंग (Machine Learning) – मशीन लर्निंग (ML) में कंप्यूटर को नियम बताया नहीं जाता; वह उदाहरणों से नियम ख़ुद सीखता है. हम डेटा देते हैं: फ़ीचर (इनपुट) और, सुपरवाइज़्ड लर्निंग में, लेबल (उत्तर). मशीन एक मॉडल बनाती है: रिग्रेशन संख्या का अनुमान लगाता है, डिसीज़न ट्री हाँ/नहीं प्रश्नों से वर्ग चुनता है, और k-means बिना लेबल वाले डेटा को समूहों में बाँटता है. ज़्यादातर डेटा पर सिखाते हैं, अनदेखे डेटा पर परखते हैं और सटीकता नापते हैं. सिर्फ़ रटने वाला मॉडल (ओवरफ़िटिंग) नए डेटा पर फेल होता है.
5. Digital culture
Digital technology and society · Protecting and sharing information · Information security
- डिजिटल समाज: सूचना तकनीक हमारी ज़िंदगी कैसे बदलती है – डिजिटल समाज (सूचना समाज) वह समाज है जहाँ कंप्यूटर और नेटवर्क से जानकारी बनाना, बाँटना और इस्तेमाल करना ज़िंदगी, काम और सरकार का मुख्य हिस्सा है। जानकारी तेज़ चलती है, हर जगह पहुँचती है और लगभग मुफ़्त में कॉपी हो जाती है। सॉफ़्टवेयर ने ख़रीदारी, बैंकिंग, इलाज, पढ़ाई और दोस्ती बदल दी। नई नौकरियाँ आईं (ऐप डेवलपर, डेटा विश्लेषक), कुछ पुरानी घटीं। हर ऑनलाइन काम डेटा छोड़ता है, इसलिए निजता ज़रूरी है। सब लोग जुड़े नहीं हैं (डिजिटल खाई), और ज़्यादा स्क्रीन या गेमिंग सेहत बिगाड़ सकती है। अच्छा डिजिटल नागरिक फ़ायदे लेता है और ख़तरे सँभालता है।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
- साइबर सुरक्षा: ख़तरे और उनसे बचाव – साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की रक्षा करती है। इसके लक्ष्य हैं गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता (CIA त्रिक)। आम ख़तरे: मालवेयर, फ़िशिंग व सोशल इंजीनियरिंग, ब्रूट फ़ोर्स और डिनायल ऑफ़ सर्विस। बचाव: मज़बूत प्रमाणीकरण, कूटलेखन, फ़ायरवॉल, एंटी-मालवेयर, अपडेट, पहुँच नियंत्रण और बैकअप।