South 중학교 3학년 Informatics
अध्याय: 5
1. Information culture
IT and software in society · Protecting personal information · Information ethics
- डिजिटल समाज: सूचना तकनीक हमारी ज़िंदगी कैसे बदलती है – डिजिटल समाज (सूचना समाज) वह समाज है जहाँ कंप्यूटर और नेटवर्क से जानकारी बनाना, बाँटना और इस्तेमाल करना ज़िंदगी, काम और सरकार का मुख्य हिस्सा है। जानकारी तेज़ चलती है, हर जगह पहुँचती है और लगभग मुफ़्त में कॉपी हो जाती है। सॉफ़्टवेयर ने ख़रीदारी, बैंकिंग, इलाज, पढ़ाई और दोस्ती बदल दी। नई नौकरियाँ आईं (ऐप डेवलपर, डेटा विश्लेषक), कुछ पुरानी घटीं। हर ऑनलाइन काम डेटा छोड़ता है, इसलिए निजता ज़रूरी है। सब लोग जुड़े नहीं हैं (डिजिटल खाई), और ज़्यादा स्क्रीन या गेमिंग सेहत बिगाड़ सकती है। अच्छा डिजिटल नागरिक फ़ायदे लेता है और ख़तरे सँभालता है।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
2. Data and information
Digital information · Collecting information · Structuring information
- संख्या पद्धति और कूटन (Encoding) – संख्या पद्धति अंकों और आधार से संख्याएँ लिखने का तरीका है। दशमलव (आधार 10) में 0–9, बाइनरी (आधार 2) में 0 और 1, ऑक्टल (आधार 8) में 0–7, और हेक्साडेसिमल (आधार 16) में 0–9 और A–F। दशमलव से किसी आधार में: आधार से बार-बार भाग देकर शेष नीचे से ऊपर पढ़ें; भिन्न भाग के लिए आधार से गुणा करके पूर्णांक ऊपर से नीचे पढ़ें। दशमलव में: हर अंक × स्थानीय मान, फिर जोड़ें। बाइनरी ↔ ऑक्टल में 3 बिट के समूह, बाइनरी ↔ हेक्स में 4 बिट के। टेक्स्ट कूटन से रखा जाता है: ASCII (7 बिट, 128 अक्षर), ISCII (8 बिट, भारतीय लिपियाँ) और यूनिकोड (हर लिपि), जो UTF-8 (1–4 बाइट) या UTF-32 (4 बाइट) में सहेजा जाता है।
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
- आँकड़ों का प्रबंधन: इकट्ठा करो, व्यवस्थित करो, दिखाओ – आँकड़े (डेटा) तथ्यों का समूह हैं, जैसे जवाब, गिनती या माप। आँकड़े गुणात्मक (शब्द) या मात्रात्मक (संख्या) होते हैं; संख्याएँ असतत (गिनी हुई) या सतत (नापी हुई) होती हैं। हम सर्वे, अवलोकन, प्रयोग या पहले से मौजूद स्रोतों से आँकड़े इकट्ठा करते हैं, फिर मिलान चिह्नों से बारंबारता सारणी बनाते हैं। सही आलेख चुनते हैं: तुलना के लिए दंड आलेख, पूरे के हिस्सों के लिए पाई चार्ट, समय के साथ बदलाव के लिए रेखा आलेख, दो चीज़ों के रिश्ते के लिए बिंदु आलेख। कंप्यूटर डेटा को संरचित सारणी या असंरचित पाठ, चित्र और आवाज़ के रूप में रखते हैं।
3. Abstraction and algorithms
Problem states · Abstraction · Algorithms · Comparing algorithms
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
4. Programming
Programming environment · Input and output · Variables and operators · Sequence, selection, repetition · Software for real problems
- प्रोग्रामिंग की मूल बातें: अनुक्रम, चयन, लूप और फ़ंक्शन – प्रोग्राम सटीक निर्देशों का समूह है जिसे कंप्यूटर मानता है। हर प्रोग्राम तीन संरचनाओं से बनता है: अनुक्रम (क्रम से कदम), चयन (if/else से चुनाव) और पुनरावृत्ति (लूप)। चर मान संभालकर रखते हैं। फ़ंक्शन कोड को नाम वाले, दोबारा इस्तेमाल होने वाले खंडों में बाँटते हैं, जिससे प्रोग्राम मॉड्यूलर बनता है और उसे जाँचना, सुधारना और सँभालना आसान होता है।
5. Computing systems
Hardware and software · Sensors and physical computing
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- फ़िज़िकल कंप्यूटिंग: कोड से महसूस करना और हिलाना – फ़िज़िकल कंप्यूटिंग कोड को असली दुनिया से जोड़ती है। सेंसर कुछ मापते हैं (रोशनी, तापमान, दूरी, बटन) और उसे संख्या बनाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि उस संख्या का क्या करना है। एक्चुएटर (LED, बज़र, मोटर, स्क्रीन) दुनिया में कुछ करते हैं। यह इनपुट–प्रोसेस–आउटपुट चक्र लूप में बार-बार चलता है।