China 高一 Mathematics
अध्याय: 11
1. Ch.1 Sets and logic
Sets, relations, operations · Necessary and sufficient conditions · Universal and existential quantifiers; negation
- समुच्चय: निरूपण, प्रकार, उपसमुच्चय, वेन आरेख और संक्रियाएँ – समुच्चय (set) अलग-अलग वस्तुओं का सुपरिभाषित संग्रह है। इसे रोस्टर रूप {2, 4, 6} या समुच्चय-निर्माण रूप {x : x सम है} में लिखते हैं। समुच्चय रिक्त, परिमित, अपरिमित या समान हो सकते हैं। B का हर अवयव A में हो तो B ⊂ A। n अवयवों वाले समुच्चय के 2ⁿ उपसमुच्चय होते हैं। (a, b), [a, b] जैसे अंतराल वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय हैं। वेन आरेख से सम्मिलन A ∪ B, सर्वनिष्ठ A ∩ B, अंतर A − B और पूरक A′ = U − A साफ़ दिखते हैं।
- प्रस्ताव और प्रतिबंध: गणित के पीछे का तर्क – प्रस्ताव (कथन) वह वाक्य है जो या तो सत्य हो या असत्य। प्रस्तावों को NOT, AND, OR, यदि…तो और यदि और केवल यदि से जोड़ते हैं। 'यदि p तो q' सिर्फ़ तब असत्य है जब p सत्य और q असत्य हो। इसका प्रतिधनात्मक 'यदि q नहीं तो p नहीं' हमेशा उसी सत्य-मान का होता है। p ⇒ q हो तो p पर्याप्त और q आवश्यक है। 'x > 3' जैसा विधेय (predicate) तब प्रस्ताव बनता है जब x तय हो या 'सभी के लिए' / 'कोई है' जोड़ा जाए।
2. Ch.2 Quadratic functions, equations, inequalities
Properties of equalities and inequalities · AM–GM inequality · Quadratic inequalities
- असमिकाएँ: नियम, अंतराल और हल करने का तरीका – असमिका बताती है कि एक मात्रा दूसरी से बड़ी है या छोटी, इसके लिए <, >, ≤ या ≥ लगाते हैं। संख्या रेखा पर छोटी संख्या बाईं ओर होती है। दोनों पक्षों में एक ही संख्या जोड़ो-घटाओ, या एक ही धनात्मक संख्या से गुणा-भाग करो, तो चिह्न नहीं बदलता। ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग करो तो चिह्न पलट जाता है। उत्तर अक्सर संख्याओं का पूरा समूह होता है, जिसे (−∞, 4] जैसे अंतराल में लिखते हैं। द्विघात असमिका मूलों और ग्राफ़ के आकार से हल होती है। |x| < a का अर्थ है −a < x < a। कुछ असमिकाएँ हर संख्या के लिए सत्य हैं, जैसे x² ≥ 0 और AM–GM असमिका।
- AM–GM असमिका – दो धनात्मक संख्याओं a और b के लिए समांतर माध्य (a+b)/2 कभी भी गुणोत्तर माध्य √(ab) से छोटा नहीं होता। दोनों तभी बराबर होते हैं जब a = b। इससे जोड़ तय हो तो गुणनफल का अधिकतम और गुणनफल तय हो तो जोड़ का न्यूनतम मान मिलता है।
- द्विघात असमिकाएँ – द्विघात असमिका पूछती है कि ax² + bx + c कहाँ शून्य से ऊपर (> 0) या नीचे (< 0) है। मूल निकालें, परवलय की कल्पना करें और ग्राफ़ से उत्तर पढ़ें। a > 0 हो तो वक्र मूलों के बीच शून्य से नीचे और बाहर शून्य से ऊपर होता है। वास्तविक मूल न हों (D < 0) तो वक्र हमेशा x-अक्ष के एक ही ओर रहता है।
3. Ch.3 Functions
Definition and representation · Monotonicity, extrema, parity · Power functions · Applications
- संबंध एवं फलन: कार्तीय गुणन, प्रांत, परिसर और ग्राफ़ – क्रमित युग्म (a, b) में पहला और दूसरा स्थान तय है, इसलिए (1, 2) ≠ (2, 1)। कार्तीय गुणन A × B उन सब युग्मों (a, b) का समुच्चय है जिनमें a ∈ A, b ∈ B; n(A × B) = n(A) × n(B)। A × B का कोई भी उपसमुच्चय A से B में संबंध है। पहले अवयवों का समुच्चय प्रांत, दूसरे अवयवों का परिसर, और पूरा B सहप्रांत है। फलन ऐसा संबंध है जिसमें A के हर अवयव का ठीक एक प्रतिबिंब हो। हम अचर, तत्समक, बहुपद, परिमेय, मापांक, चिह्न, घातांकी, लघुगणकीय और महत्तम पूर्णांक फलन और उनके ग्राफ़ पढ़ते हैं, और फलनों को जोड़ना, घटाना, गुणा और भाग करना सीखते हैं।
- फलन के गुण: ग्राफ़ को कहानी की तरह पढ़ें – फलन हर इनपुट x के लिए ठीक एक आउटपुट f(x) देता है। ग्राफ़ से हम प्रांत (कौन-से x चल सकते हैं), परिसर (कौन-से y मिलते हैं), शून्यक (जहाँ f(x) = 0), धनात्मक-ऋणात्मक अंतराल, वर्धमान-ह्रासमान भाग, अधिकतम-न्यूनतम मान और यह पढ़ते हैं कि फलन सम है (y-अक्ष पर दर्पण) या विषम (मूलबिंदु पर आधा घुमाव)।
- घात फलन: y = a·xⁿ – घात फलन का रूप y = a·xⁿ है, जहाँ a एक संख्या और n एक स्थिर घातांक है। सम पूर्ण घातें (x², x⁴) U आकार बनाती हैं जो y-अक्ष के प्रति सममित है। विषम घातें (x³, x⁵) S आकार बनाती हैं जो मूलबिंदु के प्रति सममित है। n > 0 वाले सभी y = xⁿ (0, 0) और (1, 1) से गुज़रते हैं। ऋणात्मक घात (x⁻¹ = 1/x) में अनंतस्पर्शी होते हैं और x = 0 पर फलन परिभाषित नहीं। भिन्न घात मूल हैं: x^(1/2) = √x, x^(1/3) = ∛x. मूल फलन मिलती घात का प्रतिलोम है।
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।
4. Ch.4 Exponential and logarithmic functions
Rational and real exponents · Exponential functions · Logarithms; logarithmic functions · Zeros; bisection; function models
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।
5. Ch.5 Trigonometric functions
Any angle; radians · Trig functions of any angle · Reduction formulae · Graphs and properties of sin, cos, tan · Sum, difference, double-angle identities · y = A sin(ωx+φ); applications
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- ज्या तरंग y = A sin(ωx + φ) – y = A sin(ωx + φ) का ग्राफ एक चिकनी लहर है। A आयाम (ऊँचाई) है, आवर्तकाल T = 2π/ω है, और लहर φ/ω दूरी खिसकती है (φ धनात्मक हो तो बाईं ओर)। इससे झूला, ज्वार, ध्वनि और AC धारा जैसी दोहराने वाली चीज़ों का मॉडल बनता है।
6. Ch.6 Plane vectors
Vectors and linear operations · Dot product · Basis theorem and coordinates · Law of cosines and sines
- समतल में गति के लिए अदिश और सदिश (कक्षा 11) – अदिश में सिर्फ परिमाण होता है; सदिश में परिमाण और दिशा दोनों। परिमाण और दिशा समान हों तो सदिश बराबर। किसी संख्या से गुणा करने पर लंबाई बदलती है (ऋणात्मक संख्या दिशा उल्टी कर देती है)। सदिश पूँछ-से-सिर जुड़ते हैं; A − B = A + (−B)। समतल का हर सदिश A = Ax î + Ay ĵ, जहाँ Ax = A cos θ, Ay = A sin θ। A·B = AB cos θ एक अदिश है; A×B का परिमाण AB sin θ और दिशा दोनों के लंबवत।
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- ज्या नियम (Law of Sines) – किसी भी त्रिभुज में हर भुजा को उसके सामने वाले कोण के sin से भाग दो, तो एक ही संख्या मिलती है: a/sinA = b/sinB = c/sinC = 2R। यहाँ R उस वृत्त की त्रिज्या है जो तीनों शीर्षों से होकर जाता है। जब दो कोण और एक भुजा पता हो (AAS, ASA), या दो भुजाएँ और ऐसा कोण जो उनके बीच न हो (SSA), तब यह नियम लगाओ। SSA में दो, एक या शून्य त्रिभुज बन सकते हैं।
7. Ch.7 Complex numbers
Extending the number system · Arithmetic and geometric meaning · Trigonometric form (optional)
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
- द मुआवर प्रमेय और इकाई के मूल – सम्मिश्र संख्या को उसकी लंबाई r और कोण θ से लिख सकते हैं: z = r(cos θ + i sin θ) = re^{iθ}। गुणा करने पर लंबाइयाँ गुणा होती हैं और कोण जुड़ते हैं। इसलिए zⁿ = rⁿ(cos nθ + i sin nθ) — यही द मुआवर प्रमेय है। इससे घात जल्दी निकलती है, cos nθ और sin nθ के सूत्र मिलते हैं, और किसी भी संख्या के n मूल मिलते हैं। 1 के n मूल इकाई वृत्त पर बराबर दूरी पर, सम बहुभुज के कोनों पर बैठते हैं।
8. Ch.8 Solid geometry
Basic solids; intuitive drawings · Surface area and volume · Points, lines, planes · Parallelism · Perpendicularity
- घनाभ, बेलन, शंकु, पिरामिड और गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन – पृष्ठीय क्षेत्रफल किसी ठोस की बाहरी सतह का कुल क्षेत्रफल है — जैसे उसे लपेटने के लिए कितना कागज़ लगेगा। आयतन अंदर की जगह है — जैसे उसमें कितना पानी आएगा। घनाभ का आयतन = उसमें आने वाले 1 सेमी के घनों की गिनती। शंकु में उसी आधार और ऊँचाई वाले बेलन का एक-तिहाई आता है, और पिरामिड में अपने प्रिज़्म का एक-तिहाई।
- पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन: ठोसों का संयोजन – बहुत सी चीज़ें दो सरल ठोसों को जोड़कर बनती हैं, जैसे बेलन के ऊपर शंकु। पृष्ठीय क्षेत्रफल सिर्फ़ बाहर की सतह है, इसलिए जोड़ वाला छिपा हिस्सा नहीं गिनते। आयतन अंदर की जगह है, इसलिए हिस्सों के आयतन सीधे जोड़ देते हैं।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
9. Ch.9 Statistics
Random sampling (simple, stratified) · Estimating the population: percentiles, central tendency, spread · Case study
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
- सांख्यिकी: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यक और बहुलक – जब आँकड़े वर्गों में बँटे हों (जैसे अंक 20–30), तो हर एक मान नहीं दिखता। माध्य के लिए हर वर्ग का बीच का मान लेते हैं, माध्यक के लिए चलता जोड़ (संचयी बारंबारता), और बहुलक के लिए सबसे ऊँचा खंभा। तीनों अलग तरीके से आँकड़ों का 'केंद्र' बताते हैं।
10. Ch.10 Probability
Sample space; events; classical probability · Independent events · Frequency and probability; simulation
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम और स्वतंत्र घटनाएँ – सप्रतिबंध प्रायिकता का मतलब है: जब हमें पहले से पता हो कि घटना B हो चुकी है, तब A का मौका। B के बाहर के सारे परिणाम हटाओ और फिर से गिनो: P(A|B) = P(A ∩ B) ÷ P(B)। इसी से गुणन नियम मिलता है: P(A ∩ B) = P(B)·P(A|B)। अगर B जानकर A का मौका न बदले, तो घटनाएँ स्वतंत्र हैं और P(A ∩ B) = P(A)·P(B)।
- प्रायिकता का परिचय: पैमाना, प्रयोग, प्रतिदर्श समष्टि और वृक्ष आरेख – प्रायिकता 0 से 1 के बीच की एक संख्या है जो बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है। 0 मतलब कभी नहीं होगी, 1 मतलब ज़रूर होगी। इसे हम प्रयोग कई बार करके (आनुभविक प्रायिकता) या सारे संभव परिणाम लिखकर (प्रतिदर्श समष्टि) और चाहे गए परिणाम गिनकर निकाल सकते हैं। जब दो चीज़ें साथ हों, तो वृक्ष आरेख और सारणी परिणाम लिखने में मदद करते हैं।
11. Modelling and inquiry
Mathematical modelling project
- गणितीय निदर्शन: गणित से असली दुनिया को समझना – गणितीय मॉडल (mathematical model) एक समीकरण, ग्राफ़ या तालिका है जो किसी असली स्थिति को सरल तरीके से बताती है। मॉडलिंग चक्र: असली समस्या समझो → चर चुनो और मान्यताएँ बनाओ → मॉडल बनाओ (जैसे रैखिक, द्विघात या चरघातांकी) → हल करो और अनुमान लगाओ → असली आँकड़ों से जाँचो → मॉडल सुधारो या उसकी सीमा बताओ। कोई मॉडल पूरी तरह सही नहीं होता; अच्छा मॉडल सरल होता है और काम लायक सही होता है।