United Grade 11 Algebra II
अध्याय: 4
1. Polynomial, rational and radical relationships
Complex number arithmetic · Complex solutions of polynomial equations · Interpreting the structure of expressions · Polynomial arithmetic · Zeros and factors of polynomials · Polynomial identities · Rewriting rational expressions · Radical and rational equations · Graphs of polynomial and rational functions
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
- बीजीय व्यंजक: चर, पद और सरलीकरण – बीजीय व्यंजक में अक्षर (चर) और संख्याएँ +, −, × और ÷ से जुड़े होते हैं, जैसे 3x + 2। चर एक ऐसी संख्या के लिए खड़ा है जो बदल सकती है। व्यंजक पदों से बनता है (3x और 2)। 3x में 3 गुणांक है; बिना अक्षर वाला पद, जैसे 2, अचर पद है। समान पदों का अक्षर वाला भाग बिल्कुल एक जैसा होता है (3x और 5x) और वे जुड़ सकते हैं; असमान पद (3x और 2, या x और x²) नहीं जुड़ते। प्रतिस्थापन यानी अक्षर की जगह संख्या रखकर मान निकालना। विस्तार कोष्ठक हटाता है: a(b + c) = ab + ac। गुणनखंडन उल्टा है: उभयनिष्ठ गुणनखंड बाहर निकालना। सूत्र एक व्यंजक है जो दूसरी राशियों से एक राशि देता है, और सर्वसमिका अक्षर के हर मान पर सही होती है।
- बहुपद: शून्यक और गुणांक – ax² + bx + c जैसे बहुपद की एक घात (सबसे बड़ी घात) होती है। शून्यक x का वह मान है जिस पर बहुपद 0 हो जाए। ग्राफ पर शून्यक वे x-निर्देशांक हैं जहाँ वक्र y = p(x), x-अक्ष से मिलता है। घात n वाले बहुपद के अधिक से अधिक n शून्यक होते हैं। ax² + bx + c के शून्यक α, β हों तो α + β = −b/a और αβ = c/a.
- बहुपद के मूल और बहुपद सर्वसमिकाएँ – बहुपद के मूल पता हों तो उसके गुणांक तय हो जाते हैं, और उलटा भी। ax³ + bx² + cx + d = 0 के मूल α, β, γ हों तो: α + β + γ = −b/a, αβ + βγ + γα = c/a और αβγ = −d/a (विएता के सूत्र)। इनसे बिना हल किए मूलों वाले व्यंजक निकलते हैं, और प्रतिस्थापन से ऐसे नए समीकरण बनते हैं जिनके मूल बदले हुए (रूपांतरित) हों। बहुपद सर्वसमिका वह समीकरण है जो चर के हर मान के लिए सच हो; इसे एक पक्ष को फैलाकर या गुणनखंड करके दूसरे पक्ष तक पहुँचाकर सिद्ध करते हैं।
- परिमेय फलन: ग्राफ़, अनंतस्पर्शी और स्केच बनाना – परिमेय फलन एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग देकर बनता है, जैसे y = (2x + 1)/(x − 1)। जहाँ हर (नीचे वाला) शून्य हो, वहाँ फलन परिभाषित नहीं। वहाँ ग्राफ़ ऊर्ध्वाधर अनंतस्पर्शी के साथ ऊपर-नीचे भागता है। दूर जाकर वह क्षैतिज या तिरछे अनंतस्पर्शी के पास टिक जाता है।
- करणी (Radicals) और n-वाँ मूल – किसी संख्या a का n-वाँ मूल वह संख्या है जिसे n बार आपस में गुणा करने पर a मिले। इसे ⁿ√a लिखते हैं और यह a^(1/n) के बराबर है। करणियों को गुणा-भाग कर सकते हैं, पूर्ण घात बाहर निकालकर सरल कर सकते हैं, और हर में मूल हो तो परिमेयीकरण से हटा सकते हैं।
- बहुपद फलन और उनके ग्राफ़ – बहुपद फलन y = aₙxⁿ + … + a₁x + a₀ है जिसमें घातें पूर्ण संख्याएँ हैं। घात n और अग्र गुणांक aₙ अंत व्यवहार तय करते हैं। हर वास्तविक शून्यक r से गुणनखंड (x − r) मिलता है; विषम बहुलता वाले शून्यक पर ग्राफ़ x-अक्ष पार करता है, सम बहुलता पर छूकर लौटता है। घात n के बहुपद के अधिकतम n वास्तविक शून्यक और अधिकतम n − 1 घुमाव बिंदु होते हैं; सम्मिश्र गिनें तो ठीक n शून्यक। दो बिंदुओं के बीच औसत परिवर्तन दर छेदक रेखा का ढाल है।
2. Trigonometric functions
Unit circle and radian measure · Modeling periodic phenomena · Pythagorean identity
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
- त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ – सर्वसमिका वह समीकरण है जो हर मान्य कोण के लिए सही हो। कर्ण 1 वाले समकोण त्रिभुज पर पाइथागोरस से: sin²A + cos²A = 1। cos²A से भाग देने पर 1 + tan²A = sec²A (A ≠ 90°)। sin²A से भाग देने पर 1 + cot²A = cosec²A (A ≠ 0°)। इनसे एक अनुपात से दूसरा निकालते हैं और दूसरे कथन सिद्ध करते हैं।
3. Modeling with functions
Creating equations and inequalities · Solving equations and inequalities graphically · Interpreting functions in context · Building functions to model relationships · Building new functions from existing ones · Linear, quadratic and exponential models · Interpreting parameters of models · Logarithms and exponential equations · Geometric series · Inverse functions
- एक चर वाले रैखिक समीकरण – एक चर वाले रैखिक समीकरण में एक ही अज्ञात राशि (जैसे x) होती है और उसकी घात 1 होती है, जैसे 2x + 3 = 11। समीकरण एक तराज़ू जैसा है: दोनों पक्ष बराबर हैं। हल करने के लिए दोनों पक्षों पर एक जैसा काम करो (एक ही संख्या जोड़ो, घटाओ, गुणा करो या शून्य के अलावा किसी संख्या से भाग दो), जब तक x अकेला न रह जाए। आख़िर में उत्तर वापस रखकर जाँच ज़रूर करो।
- एक चर वाली रैखिक असमिकाएँ – असमिका दो व्यंजकों की तुलना <, >, ≤ या ≥ से करती है। एक चर की रैखिक असमिका ax + b < c जैसी होती है। इसका हल आम तौर पर एक संख्या नहीं, बल्कि संख्याओं की पूरी श्रेणी होता है। इसे समीकरण की तरह हल करते हैं: दोनों ओर एक ही संख्या जोड़-घटा सकते हैं, और एक ही धनात्मक संख्या से गुणा-भाग कर सकते हैं। ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग करने पर चिह्न उलट जाता है। हल को संख्या रेखा पर दिखाते हैं: < या > के लिए खोखला गोला (सिरा शामिल नहीं), ≤ या ≥ के लिए भरा गोला (सिरा शामिल), और छायांकित भाग सारे हल दिखाता है। −1 ≤ x < 3 जैसी दोहरी असमिका रेखा का एक टुकड़ा देती है। यदि x प्राकृत या पूर्णांक हो, तो केवल उस श्रेणी की पूर्ण संख्याएँ हल हैं।
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
- फलनों का रूपांतरण – रूपांतरण (transformation) मूल फलन y = f(x) के ग्राफ़ को बदलता है, पर उसका बुनियादी आकार नहीं। फलन के बाहर जोड़ने से ग्राफ़ ऊपर-नीचे जाता है: f(x) + k यानी k ऊपर। कोष्ठक के अंदर का बदलाव क्षैतिज और उलटा होता है: f(x − h) यानी h दाएँ। बाहर गुणा, a·f(x), ऊर्ध्वाधर खिंचाव है (a < 0 हो तो x-अक्ष में पलटता है)। अंदर गुणा, f(bx), क्षैतिज रूप से 1/b गुना दबाता है (b < 0 हो तो y-अक्ष में पलटता है)। सब मिलाकर: y = a·f(b(x − h)) + k, और मूल का बिंदु (0, 0) पहुँचता है (h, k) पर।
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- प्रतिलोम फलन (Inverse Functions) – प्रतिलोम फलन वह काम उलटा कर देता है जो फलन करता है. अगर f, a को b बनाता है, तो f⁻¹, b को वापस a बनाता है. निकालने के लिए y = f(x) लिखो, x और y की जगह बदलो, फिर y के लिए हल करो. f⁻¹ का ग्राफ़, f के ग्राफ़ का रेखा y = x में दर्पण-प्रतिबिंब होता है. सिर्फ़ एकैकी (one-to-one) फलन का प्रतिलोम होता है; नहीं तो पहले डोमेन सीमित करो (जैसे x ≥ 0 के साथ x² का प्रतिलोम √x).
4. Inferences and conclusions from data
Normal distributions and percentages · Random processes and statistical experiments · Inference from surveys, experiments, observational studies · Using probability to make decisions
- प्रसामान्य बंटन (Normal Distribution) – प्रसामान्य बंटन एक सतत, सममित, घंटी जैसा बंटन है जो माध्य μ (केंद्र) और मानक विचलन σ (फैलाव) से तय होता है: X ~ N(μ, σ²)। माध्य = माध्यिका = बहुलक। लगभग 68% मान μ से 1σ के भीतर, 95% 2σ के भीतर और 99.7% 3σ के भीतर होते हैं। किसी भी मान को मानक स्कोर z = (x − μ)/σ में बदलते हैं, जो N(0, 1) का पालन करता है; प्रायिकता वक्र के नीचे का क्षेत्रफल है, जिसे तालिका या कैलकुलेटर से Φ(z) के रूप में पढ़ते हैं।
- सांख्यिकीय अनुमिति – सांख्यिकीय अनुमिति (statistical inference) का मतलब है: एक छोटे नमूने को देखकर पूरी समष्टि (population) के बारे में बात कहना। समष्टि के बारे में संख्या (जैसे असली अनुपात p या माध्य μ) प्राचल (parameter) कहलाती है। नमूने से निकली संख्या (जैसे p̂ या x̄) प्रतिदर्शज (statistic) है, और यही हमारा बिंदु आकलन है। अलग-अलग नमूने अलग उत्तर देते हैं: यह नमूना परिवर्तनशीलता है। बहुत सारे नमूनों के उत्तर मिलकर नमूना वितरण बनाते हैं, जिसका बीच असली मान पर होता है और फैलाव मानक त्रुटि (SE) कहलाता है: अनुपात के लिए √(p(1−p)/n), माध्य के लिए σ/√n। बड़ा नमूना = कम फैलाव। 95% विश्वास्यता अंतराल = आकलन ± 1.96 × SE; ऐसे 100 में से लगभग 95 अंतराल असली मान को पकड़ते हैं। सिमुलेशन से जाँचते हैं कि कोई दावा आँकड़ों से मेल खाता है या नहीं। अच्छी अनुमिति के लिए यादृच्छिक नमूना ज़रूरी है, और साथ-साथ बदलना कारण साबित नहीं करता।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
- यादृच्छिक चर और प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर (random variable) X किसी संयोग वाले प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या देता है। असतत (discrete) यादृच्छिक चर अलग-अलग मान लेता है; उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) बताता है, जिनका जोड़ 1 होता है। माध्य (प्रत्याशित मान) E(X) = Σ x·P(x) है। प्रसरण Var(X) = E(X²) − [E(X)]² फैलाव मापता है, और मानक विचलन इसका वर्गमूल है।