Italy Secondaria di secondo grado – classe 3ª Mathematics (liceo scientifico)
अध्याय: 4
1. Arithmetic and algebra
Real numbers, pi and e · Complex numbers
- परिमेय संख्याएँ: संख्या रेखा, सघनता और दशमलव – जिस संख्या को p/q के रूप में लिख सकें, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q शून्य न हो, उसे परिमेय संख्या कहते हैं। जैसे 3/4, −5/3, 7 (= 7/1), 0.25 (= 1/4)। p/q को संख्या रेखा पर दिखाने के लिए हर इकाई को q बराबर टुकड़ों में काटो और 0 से p टुकड़े चलो। किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा एक और परिमेय संख्या होती है (उनका औसत), इसलिए बीच में अनगिनत संख्याएँ हैं। परिमेय संख्या का दशमलव या तो खत्म हो जाता है (सांत) या कोई हिस्सा बार-बार दोहराता है (असांत आवर्ती)।
- सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण – x² + 1 = 0 जैसे समीकरण का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं होता। इसलिए एक नई संख्या i ली गई, जिसमें i² = −1। सम्मिश्र संख्या z = a + ib है: a वास्तविक भाग और b काल्पनिक भाग। जोड़, घटाव, गुणा साधारण बीजगणित जैसे होते हैं, बस i² की जगह −1 लिखें। भाग के लिए ऊपर-नीचे हर के संयुग्मी से गुणा करें। आर्गंड तल पर a + ib बिंदु (a, b) है। संयुग्मी a − ib वास्तविक अक्ष में उसका दर्पण प्रतिबिंब है और मापांक √(a² + b²) मूल बिंदु से दूरी है। जब D = b² − 4ac < 0 हो, तो द्विघात समीकरण के दोनों मूल सम्मिश्र और एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
2. Geometry
Conic sections · Circle and loci · Solid geometry
- शंकु परिच्छेद (कक्षा 11): वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त और अतिपरवलय – द्वि-शंकु को समतल से काटने पर वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय या अतिपरवलय बनता है; शीर्ष से कटे तो बिंदु, रेखा या रेखा-युग्म (अपभ्रष्ट)। वृत्त: (x − h)² + (y − k)² = r²। परवलय y² = 4ax: नाभि (a, 0), नियता x = −a, नाभिलंब 4a, e = 1। दीर्घवृत्त x²/a² + y²/b² = 1: c² = a² − b², e = c/a < 1, नाभिलंब 2b²/a, PF₁ + PF₂ = 2a। अतिपरवलय x²/a² − y²/b² = 1: c² = a² + b², e > 1, |PF₁ − PF₂| = 2a।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
3. Relations and functions
Polynomial equations · Sequences and progressions · Exponential and logarithm · Graphs and rate of change
- बहुपद: शून्यक और गुणांक – ax² + bx + c जैसे बहुपद की एक घात (सबसे बड़ी घात) होती है। शून्यक x का वह मान है जिस पर बहुपद 0 हो जाए। ग्राफ पर शून्यक वे x-निर्देशांक हैं जहाँ वक्र y = p(x), x-अक्ष से मिलता है। घात n वाले बहुपद के अधिक से अधिक n शून्यक होते हैं। ax² + bx + c के शून्यक α, β हों तो α + β = −b/a और αβ = c/a.
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
- लघुगणक (Logarithm) – लघुगणक बताता है कि कौन-सी घात चाहिए। log_b x = y का मतलब b^y = x। जैसे log₂ 8 = 3, क्योंकि 2³ = 8। लघुगणक गुणा को जोड़ में बदल देता है: log(ab) = log a + log b, log(a/b) = log a − log b, log(aⁿ) = n log a। आधार 10 = साधारण लघुगणक, आधार e = प्राकृतिक लघुगणक (ln)। आधार बदल सकते हैं: log_b x = log x ÷ log b।
- अवकलज (कक्षा 11): ढाल, परिवर्तन की दर और नियम – अवकलज बताता है कि कोई चीज़ एक पल में कितनी तेज़ी से बदल रही है। ग्राफ़ पर यह स्पर्श रेखा की ढाल है। इसे सीमा से निकालते हैं: छोटा कदम h लो, औसत बदलाव निकालो, और h को 0 की ओर ले जाओ। फिर xⁿ, sin x, cos x, योग, अंतर, गुणनफल और भागफल के आसान नियम सीखेंगे।
4. Data and prediction
Bivariate statistics · Probability and combinatorics
- सहसंबंध: प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियर्सन गुणांक और स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध – सहसंबंध बताता है कि दो चर साथ-साथ कैसे बदलते हैं। दोनों साथ बढ़ें तो धनात्मक, एक बढ़े और दूसरा घटे तो ऋणात्मक, और कोई सीधा पैटर्न न हो तो शून्य। प्रकीर्ण आरेख इसे चित्र में दिखाता है। कार्ल पियर्सन का गुणांक r दिशा और ताक़त नापता है और हमेशा −1 से +1 के बीच रहता है। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध R कोटियों (रैंक) से चलता है और सुंदरता या ईमानदारी जैसे गुणों पर भी काम करता है; समान कोटियों में छोटा सुधार जोड़ते हैं।
- सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम और स्वतंत्र घटनाएँ – सप्रतिबंध प्रायिकता का मतलब है: जब हमें पहले से पता हो कि घटना B हो चुकी है, तब A का मौका। B के बाहर के सारे परिणाम हटाओ और फिर से गिनो: P(A|B) = P(A ∩ B) ÷ P(B)। इसी से गुणन नियम मिलता है: P(A ∩ B) = P(B)·P(A|B)। अगर B जानकर A का मौका न बदले, तो घटनाएँ स्वतंत्र हैं और P(A ∩ B) = P(A)·P(B)।