National Year 11 Geography
अध्याय: 5
1. 3.2.1 Urban issues and challenges
Global urban change · City in a lower-income or newly emerging economy · UK cities · Sustainable urban living
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- टिकाऊ शहरी जीवन – शहर तब टिकाऊ (sustainable) है जब वह आज लोगों की ज़रूरतें पूरी करे और आने वाले लोगों के लिए पानी, ऊर्जा, ज़मीन और साफ़ हवा बचाकर रखे। मुख्य उपाय हैं: पानी बचाना (वर्षा जल संचयन, कम पानी वाले नल), ऊर्जा बचाना (सोलर पैनल, इन्सुलेशन), हरियाली बचाना (पार्क, पेड़, हरी छतें), कचरे का सही प्रबंधन (कम करो, दोबारा इस्तेमाल करो, रीसायकल करो, खाद बनाओ) और ट्रैफ़िक का प्रबंधन (बस, मेट्रो, साइकिल लेन, भीड़ शुल्क)। इन सबके पीछे एक बड़ा विचार है: मनुष्य और पर्यावरण हर समय एक-दूसरे पर असर डालते हैं।
2. 3.2.2 The changing economic world
Development gap · Rapid growth in an LIC or NEE · Changing UK economy
- विकास – विकास का मतलब हर किसी के लिए अलग है: ज़्यादा आय, पर बराबरी, आज़ादी, सुरक्षा और सम्मान भी। देशों की तुलना प्रति व्यक्ति आय से होती है, पर औसत असमानता छिपा लेता है, इसलिए स्वास्थ्य और शिक्षा भी देखते हैं। मानव विकास सूचकांक इन्हें जोड़ता है। विकास धारणीय भी होना चाहिए ताकि संसाधन आने वाली पीढ़ियों तक बचें।
- आर्थिक विकास: सिद्धांत, व्यापार और तेज़ वृद्धि – आर्थिक विकास का मतलब है लोगों का जीवन बेहतर होना: ज़्यादा आय, बेहतर सेहत, ज़्यादा पढ़ाई और ज़्यादा विकल्प। देशों को अक्सर उच्च आय (HIC), नई उभरती अर्थव्यवस्था (NEE) और निम्न आय (LIC) में बाँटते हैं। रोस्टो के अनुसार हर देश वही पाँच सीढ़ियाँ चढ़ता है; निर्भरता सिद्धांत कहता है कि अमीर केंद्र देश अनुचित व्यापार से गरीब परिधि देशों को पीछे रखते हैं। व्यापार, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (TNC), सहायता, महिलाओं की शिक्षा और टिकाऊ फ़ैसले तय करते हैं कि देश कितनी तेज़ी से और कितने न्यायपूर्ण ढंग से बढ़ेगा।
- ब्रिटेन की बदलती अर्थव्यवस्था – 1900 में ब्रिटेन के ज़्यादातर मज़दूर खदानों, मिलों और कारख़ानों में सामान बनाते थे। आज लगभग पाँच में से चार नौकरियाँ सेवाओं में हैं, जैसे दुकान, स्वास्थ्य, बैंक और IT। यह बदलाव विऔद्योगीकरण (पुराने उद्योग बंद होना), वैश्वीकरण (सामान दूसरे देशों में सस्ता बनना) और सरकारी फ़ैसलों से आया। नई उत्तर-औद्योगिक अर्थव्यवस्था सेवाओं, शोध और तकनीक पर टिकी है, अक्सर विज्ञान पार्कों में। बदलाव बराबर नहीं रहा: कुछ गाँवों में लोग बढ़े, कुछ में घटे; परिवहन सुधारा जा रहा है; और अमीर दक्षिण-पूर्व व उत्तर के कुछ हिस्सों के बीच आय और स्वास्थ्य का अंतर बना है। ब्रिटेन व्यापार, निवेश, राष्ट्रमंडल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दुनिया से जुड़ा है।
3. 3.2.3 The challenge of resource management
Resource management · Food (option: food, water OR energy) · Water (option) · Energy (option)
- संसाधन एवं विकास – संसाधन प्रकृति की वह चीज़ है जिसे लोग तकनीक की मदद से उपयोग कर सकें। संसाधनों को उत्पत्ति, ख़त्म होने, स्वामित्व और विकास के आधार पर बाँटा जाता है। भारत को संसाधनों का नियोजन करना, ज़मीन की देखभाल करना और मिट्टी को बहने से बचाना ज़रूरी है।
- खाद्य सुरक्षा: हर किसी को, हर दिन भोजन – खाद्य सुरक्षा का मतलब है कि हर व्यक्ति को हर समय सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। यह चार स्तंभों पर टिकी है: उपलब्धता (भोजन पैदा हो या आयात हो), पहुँच (लोग उसे ख़रीद या पा सकें), उपयोग (अच्छा पोषण, साफ़ पानी, सुरक्षित पकाना) और स्थिरता (बुरे साल में भी आपूर्ति न टूटे)। दुनिया में भोजन बराबर नहीं बँटा। आबादी, आमदनी और खान-पान बदलने से माँग बढ़ती है, जबकि जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, मिट्टी का कटाव, युद्ध और बर्बादी आपूर्ति घटाते हैं। खाद्य असुरक्षा से भूख, कुपोषण, महँगाई, पलायन और अशांति होती है। सिंचाई, बेहतर बीज, नई तकनीक और बर्बादी घटाकर आपूर्ति बढ़ सकती है, पर लंबे समय के उपाय टिकाऊ और न्यायपूर्ण भी होने चाहिए।
- जल संसाधन – धरती का लगभग सारा पानी खारा समुद्री पानी है; उपयोग लायक मीठा पानी बहुत थोड़ा है। बढ़ती आबादी, खेती, उद्योग और प्रदूषण से जल दुर्लभता होती है। बहुउद्देशीय बाँध कई कामों के लिए पानी रोकते हैं पर समस्याएँ भी लाते हैं। वर्षा जल संग्रहण पानी बचाने का पुराना और आसान तरीका है।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
4. 3.3 Geographical applications
Issue evaluation (pre-release resource) · Fieldwork
- भौगोलिक जाँच और क्षेत्र कार्य – भौगोलिक जाँच (enquiry) किसी असली जगह के बारे में एक छोटा शोध प्रोजेक्ट है। इसके साफ़ कदम हैं: सवाल पूछो और परिकल्पना लिखो; सही नमूना विधि से प्राथमिक आँकड़े (अपने माप और सर्वे) और द्वितीयक आँकड़े (जनगणना, नक्शे, वेबसाइट) जुटाओ; आँकड़ों को सही ग्राफ़ और नक्शों में दिखाओ; ढाँचा समझो और निष्कर्ष निकालो; फिर जाँचो कि नतीजे कितने भरोसेमंद हैं। यही कौशल फ़ैसले लेने में काम आते हैं: सबूतों से विकल्प तौलो और सबसे अच्छे को कारण सहित चुनो। बड़ी कक्षाओं में छात्र अपने सवाल, प्राथमिक-द्वितीयक आँकड़ों, विश्लेषण और निष्कर्ष के साथ एक लंबी स्वतंत्र जाँच लिखते हैं।
5. 3.4 Geographical skills
Cartographic skills · Graphical skills · Numerical and statistical skills · Using data and writing argument
- स्थलाकृतिक मानचित्र – स्थलाकृतिक मानचित्र बृहत् मापनी के मानचित्र हैं जो छोटे क्षेत्र की प्राकृतिक और मानवीय चीज़ें तय चिह्नों और रंगों से विस्तार में दिखाते हैं। भारत में इन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीटों की एक श्रृंखला में बनाता है (1:10,00,000 → 1:2,50,000 → 1:50,000 → 1:25,000)। उच्चावच समोच्च रेखाओं से दिखता है; उनकी दूरी और आकार ढाल और भू-आकृति बताते हैं, और परिच्छेदिका उन्हें पार्श्व दृश्य में बदलती है।
- डेटा निरूपण: कंप्यूटर संख्या, अक्षर, चित्र और आवाज़ कैसे रखता है – डेटा कच्चे तथ्य हैं; अर्थ मिलने पर वह सूचना (information) बनता है; जिस सूचना से हम काम ले सकें वह ज्ञान है। कंप्यूटर सारा डेटा बिट (0 या 1) में रखता है। 8 बिट = 1 बाइट; 1 kB = 1000 बाइट, 1 MB = 1000 kB, 1 GB = 1000 MB, 1 TB = 1000 GB। संख्याएँ बाइनरी में रहती हैं, जहाँ स्थानीय मान दोगुने होते जाते हैं: 1, 2, 4, 8… अक्षरों के लिए कैरेक्टर सेट होता है: ASCII में 'A' = 65; यूनिकोड में हर लिपि है। बिटमैप चित्र पिक्सेल का जाल है; साइज़ = चौड़ाई × ऊँचाई × कलर डेप्थ। ध्वनि के सैंपल लिए जाते हैं: साइज़ = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × सेकंड। वेक्टर चित्र पिक्सेल की जगह आकृतियाँ रखता है। कम्प्रेशन फ़ाइल छोटी करता है: लॉसलेस हर बिट बचाता है, लॉसी कुछ बारीकी हटा देता है।
- भौगोलिक जाँच और क्षेत्र कार्य – भौगोलिक जाँच (enquiry) किसी असली जगह के बारे में एक छोटा शोध प्रोजेक्ट है। इसके साफ़ कदम हैं: सवाल पूछो और परिकल्पना लिखो; सही नमूना विधि से प्राथमिक आँकड़े (अपने माप और सर्वे) और द्वितीयक आँकड़े (जनगणना, नक्शे, वेबसाइट) जुटाओ; आँकड़ों को सही ग्राफ़ और नक्शों में दिखाओ; ढाँचा समझो और निष्कर्ष निकालो; फिर जाँचो कि नतीजे कितने भरोसेमंद हैं। यही कौशल फ़ैसले लेने में काम आते हैं: सबूतों से विकल्प तौलो और सबसे अच्छे को कारण सहित चुनो। बड़ी कक्षाओं में छात्र अपने सवाल, प्राथमिक-द्वितीयक आँकड़ों, विश्लेषण और निष्कर्ष के साथ एक लंबी स्वतंत्र जाँच लिखते हैं।