United Grade 12 AP Comparative Government and Politics
अध्याय: 5
1. Political Systems, Regimes, and Governments
The Practice of Political Scientists · Defining Political Organizations · Democracy vs. Authoritarianism · Democratization · Sources of Power and Authority · Change in Power and Authority · Federal and Unitary Systems · Political Legitimacy · Sustaining Legitimacy · Political Stability
- राजनीतिक व्यवस्थाएँ: समाज खुद को कैसे चलाते हैं – राजनीतिक व्यवस्था वह तरीका है जिससे समाज सबके लिए फ़ैसले लेता और लागू करता है। राज्य (जनसंख्या, भू-भाग और संप्रभुता वाला स्थायी संगठन), शासन-व्यवस्था (कौन और कैसे सत्ता रखेगा, इसके नियम) और सरकार (अभी सत्ता में बैठे लोग) अलग चीज़ें हैं। लोकतंत्र में नागरिक नेता चुनते और हटाते हैं; सत्तावादी व्यवस्था में कुछ लोग बिना जवाबदेही सत्ता रखते हैं। जब लोग सत्ता को सही मानते हैं तो वह प्राधिकार बनती है (वैधता) – परंपरा, करिश्मा या कानूनी-तर्कसंगत नियमों से।
- संघवाद – संघवाद का अर्थ है कि शक्ति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में बँटी हो, और दोनों की शक्तियाँ संविधान में लिखी हों। भारत मज़बूत केंद्र वाला संघ है, क्योंकि निर्माता एकता और विकास चाहते थे। इससे राज्यपाल की भूमिका, राष्ट्रपति शासन, स्वायत्तता और राज्यों के आपसी विवादों पर टकराव हुए। कुछ राज्यों को उनके इतिहास, संस्कृति और ज़मीन की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान भी मिले हैं।
2. Political Institutions
Parliamentary, Presidential, and Semi-Presidential Systems · Comparing Parliamentary, Presidential, and SemiPresidential Systems · Executive Systems · Executive Term Limits · Removal of Executives · Legislative Systems · Independent Legislatures · Judicial Systems · Independent Judiciaries
- कार्यपालिका – कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो कानूनों और नीतियों को लागू करता है। देशों में अध्यक्षात्मक, संसदीय या अर्ध-अध्यक्षात्मक कार्यपालिका होती है। भारत में संसदीय कार्यपालिका है: राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख हैं, जबकि असली शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है, जो तभी तक रहते हैं जब तक लोकसभा का समर्थन है। सिविल सेवक (नौकरशाही) स्थायी कार्यपालिका हैं।
- राजनीतिक संस्थाएँ: संसदीय, अध्यक्षीय और अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली – हर लोकतंत्र में सत्ता तीन हिस्सों में बँटी होती है: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका सरकार चलाती है और न्यायपालिका विवाद सुलझाती है। देशों में फ़र्क़ इस बात का है कि सरकार का मुखिया कैसे चुना और हटाया जाता है। संसदीय प्रणाली में लोग संसद चुनते हैं और प्रधानमंत्री को संसद का भरोसा चाहिए, इसलिए संसद उसे हटा सकती है। अध्यक्षीय प्रणाली में लोग राष्ट्रपति और संसद को अलग-अलग चुनते हैं; राष्ट्रपति का कार्यकाल तय होता है और उसे सिर्फ़ महाभियोग से हटाया जा सकता है। अर्ध-अध्यक्षीय प्रणाली दोनों का मेल है। कार्यकाल सीमा किसी एक व्यक्ति को बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहने से रोकती है। स्वतंत्र विधायिका क़ानून, बजट, प्रश्न और समितियों से सरकार पर नज़र रखती है।
- विधायिका – संसद वह जगह है जहाँ चुने हुए प्रतिनिधि कानून बनाते हैं, मुद्दों पर बहस करते हैं, बजट पास करते हैं और सरकार को जवाबदेह रखते हैं। भारत की संसद के दो सदन हैं: जनता द्वारा चुनी लोकसभा और राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा। विधेयक वाचन, समिति की जाँच और दोनों सदनों के मतदान से गुज़रकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून बनता है। समितियाँ बारीक काम करती हैं और दल-बदल विरोधी कानून जैसे नियम संसद में अनुशासन रखते हैं।
- न्यायपालिका – न्यायपालिका विवाद सुलझाती है और संविधान व हमारे अधिकारों की रक्षा करती है। निष्पक्ष रहने के लिए उसे सरकार और संसद से स्वतंत्र होना चाहिए। भारत में एक एकीकृत न्याय व्यवस्था है, जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय है। सर्वोच्च न्यायालय के पास मूल, रिट, अपीलीय और सलाहकारी क्षेत्राधिकार हैं। न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका से अदालतें अधिकार बचाती हैं, पर उन्हें दूसरे अंगों की भूमिका के साथ संतुलन भी रखना होता है।
3. Political Culture and Participation
Civil Society · Political Culture · Political Ideologies · Political Values and Beliefs · Nature and Role of Political Participation · Forces that Impact Political Participation · Civil Rights and Civil Liberties · Political and Social Cleavages · Challenges from Political and Social Cleavages
- राजनीतिक संस्कृति और राजनीतिक भागीदारी – राजनीतिक संस्कृति किसी देश के लोगों के राजनीति के बारे में साझा मूल्य और विश्वास हैं: सरकार पर कितना भरोसा, आज़ादी ज़्यादा ज़रूरी या व्यवस्था, और क्या उन्हें लगता है कि वे कुछ बदल सकते हैं। नागरिक समाज नागरिकों और राज्य के बीच स्वैच्छिक समूहों का क्षेत्र है। लोग वोट, प्रचार, याचिका, विरोध और समूहों से भाग लेते हैं; शिक्षा, आय, उम्र, लामबंदी और नियम (जैसे अनिवार्य मतदान) इसे बदलते हैं। नागरिक स्वतंत्रताएँ राज्य से बचाती हैं; नागरिक अधिकार बराबरी का व्यवहार पक्का करते हैं। विभाजन (भाषा, धर्म, वर्ग, क्षेत्र) एक-दूसरे पर चढ़ें तो टकराव गहरा, एक-दूसरे को काटें तो नरम।
4. Party and Electoral Systems and Citizen Organizations
Electoral Systems and Rules · Objectives of Election Rules · Political Party Systems · Role of Political Party Systems · Impact of Social Movements and Interest Groups · Pluralist and Corporatist Interests
- चुनाव और प्रतिनिधित्व – बड़े लोकतंत्र में लोग चुनाव से प्रतिनिधि चुनते हैं। भारत 'सर्वाधिक वोट से जीत' (FPTP) प्रणाली अपनाता है: हर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला जीतता है। कुछ सीटें SC और ST उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। स्वतंत्र चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराता है, और सुधार चुनावों को और साफ़-सुथरा बनाने की कोशिश करते हैं।
- भारत में चुनाव – चुनाव से करोड़ों लोग प्रतिनिधि चुनते हैं और शांति से सरकार बदल सकते हैं। लोकसभा और विधानसभाओं के लिए भारत में सर्वाधिक मत से जीत (FPTP) प्रणाली है, और राज्यसभा व राष्ट्रपति के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व का एक रूप। परिसीमन से निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी लगभग बराबर रखी जाती है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बनाता है और चुनाव कराता है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, गठबंधन सरकारें आम हैं, और दल-बदल विरोधी कानून चुने हुए सदस्यों को पाला बदलने से रोकता है।
- सामाजिक आंदोलन – सामाजिक आंदोलन बहुत-से लोगों का एक साझा लक्ष्य के लिए लंबा और संगठित प्रयास है, जो समाज बदलना चाहता है। जानिए आंदोलन की पहचान, आंदोलन शुरू होने के तीन सिद्धांत, मुख्य प्रकार, और भारत के पर्यावरण, किसान, मज़दूर, दलित व पिछड़ा वर्ग, आदिवासी और महिला आंदोलन।
5. Political and Economic Changes and Development
Impact of Global Economic and Technological Forces · Political Responses to Global Market Forces · Challenges from Globalization · Policies and Economic Liberalization · International and Supranational Organizations · Adaptation of Social Policies · Impact of Industrialization and Economic Development · Causes and Effects of Demographic Change · Impact of Natural Resources
- आर्थिक वृद्धि और विकास: माप, बाधाएँ और रणनीतियाँ – आर्थिक वृद्धि का मतलब है वास्तविक GDP का बढ़ना। आर्थिक विकास का मतलब है लोगों के जीवन का बेहतर होना: लंबी उम्र, ज़्यादा पढ़ाई, ज़्यादा आय और ज़्यादा विकल्प। विकास को हम HDI और दूसरे सूचकों से मापते हैं। कम बचत, कमज़ोर बुनियादी ढाँचा, भ्रष्टाचार, कर्ज़ और एक ही निर्यात पर निर्भरता जैसी बाधाएँ देशों को रोकती हैं। बाज़ार-आधारित और राज्य-आधारित रणनीतियाँ इन्हें हटाने की कोशिश करती हैं, और व्यापार, तकनीक, संसाधन, जनसंख्या बदलाव व अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसी वैश्विक ताकतें बाहर से असर डालती हैं।