राजनीति-वैज्ञानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन कैसे करते हैं
राजनीति-वैज्ञानिक पूछते हैं: किसे क्या, कब और कैसे मिलता है। वे चुनाव आँकड़ों, सर्वेक्षणों, कानूनों और इतिहास से देशों की तुलना करते हैं।
- शक्ति (Power): दूसरों से कुछ करवाने की क्षमता।
- प्राधिकार (Authority): वह शक्ति जिसे लोग सही मानते हैं।
- राजनीतिक व्यवस्था: संस्थाओं, नियमों और लोगों का पूरा समूह जो समाज के लिए बाध्यकारी फ़ैसले लेता है।
राज्य, राष्ट्र, शासन-व्यवस्था और सरकार
- राज्य: स्थायी जनसंख्या, भू-भाग, सरकार और संप्रभुता वाला संगठन।
- राष्ट्र: भाषा, इतिहास या संस्कृति से जुड़ाव महसूस करने वाले लोग। राष्ट्र और राज्य हमेशा एक नहीं होते।
- शासन-व्यवस्था (Regime): खेल के मूल नियम – नेता कैसे चुने जाते हैं, सत्ता कैसे बँटती है, नागरिकों के कौन-से अधिकार हैं।
- सरकार: अभी सत्ता में बैठे लोग। चुनाव के बाद सरकार बदलती है, व्यवस्था वही रहती है।
सत्ता के बँटवारे से: एकात्मक, संघीय और परिसंघीय। कार्यपालिका से: संसदीय, अध्यक्षीय या अर्ध-अध्यक्षीय।
लोकतंत्र बनाम सत्तावाद
लोकतंत्र ("जनता का शासन"): स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, एक से ज़्यादा दल, कानून का शासन, स्वतंत्र न्यायालय, स्वतंत्र मीडिया और सुरक्षित अधिकार। यह प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि हो सकता है।
सत्तावादी व्यवस्था: सत्ता एक व्यक्ति, एक दल, सेना या धार्मिक नेताओं के पास, कमज़ोर सीमाओं के साथ। प्रकार: पूर्ण राजतंत्र, एक-दलीय राज्य, सैन्य शासन, धर्मतंत्र। सर्वसत्तावादी व्यवस्था जीवन के हर हिस्से पर नियंत्रण चाहती है।
कई व्यवस्थाएँ बीच में हैं: संकर (hybrid) व्यवस्था चुनाव कराती है पर मीडिया या विपक्ष को दबाती है। संवैधानिक राजतंत्र में राजा प्रतीक होता है और चुने हुए लोग शासन करते हैं।
शक्ति, प्राधिकार और वैधता
समाजशास्त्री मैक्स वेबर ने प्राधिकार के तीन स्रोत बताए:
- पारंपरिक: "हमेशा से ऐसा ही है" (वंशानुगत शासक, बुज़ुर्ग)।
- करिश्माई: नेता के निजी गुणों के कारण लोग उसके पीछे चलते हैं।
- कानूनी-तर्कसंगत: शक्ति लिखित नियमों और पदों से, जैसे संविधान।
वैधता यह विश्वास है कि शासक को शासन का अधिकार है। यह निष्पक्ष चुनाव, अच्छे काम (रोज़गार, सुरक्षा, सेवाएँ), कानून के सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों से बनी रहती है। वैधता घटे तो शासकों को ज़्यादा बल पर निर्भर होना पड़ता है।
परिवर्तन और स्थिरता
सत्ता बदलती है: चुनाव, उत्तराधिकार, तख्तापलट (अचानक कब्ज़ा, अक्सर सेना द्वारा), क्रांति (पूरी व्यवस्था का जन-परिवर्तन) या सुधार (भीतर से धीरे-धीरे)।
लोकतंत्रीकरण: पुरानी व्यवस्था में दरार → नए नियमों के साथ संक्रमण और पहले स्वतंत्र चुनाव → सुदृढ़ीकरण, जब सब लोकतंत्र को ही एकमात्र रास्ता मानें। शिक्षा, मध्य वर्ग, नागरिक समाज और आर्थिक विकास मदद करते हैं। यह उलट भी सकता है।
राजनीतिक स्थिरता का अर्थ है व्यवस्था टिके और शांति से बदले। यह वैधता, मज़बूत संस्थाओं, आर्थिक प्रदर्शन और सभी समूहों को शामिल करने से आती है।
करके देखें
कोई क्लब, स्कूल परिषद या हाउसिंग सोसाइटी चुनिए। कौन फ़ैसला करता है, नेता कौन चुनता है, क्या सदस्य उन्हें हटा सकते हैं? 3D दृश्य के डायल पर उसे रखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द – राज्य: जनसंख्या + भू-भाग + सरकार + संप्रभुता
- शासन-व्यवस्था: सत्ता के नियम; सरकार: अभी सत्ता में लोग
- शक्ति + स्वीकृति = प्राधिकार; स्वीकृति = वैधता
- वेबर: पारंपरिक, करिश्माई, कानूनी-तर्कसंगत प्राधिकार
- लोकतंत्र: स्वतंत्र चुनाव, कानून का शासन, अधिकार, जवाबदेही
- सत्तावादी प्रकार: पूर्ण राजतंत्र, एक-दलीय, सैन्य, धर्मतंत्र; बीच में संकर व्यवस्थाएँ
हल किए गए उदाहरण
1. सत्ताधारी दल चुनाव हारकर शांति से सत्ता सौंप देता है। शासन-व्यवस्था बदली या सरकार?
केवल सरकार। नियम वही रहे, इसलिए हस्तांतरण शांतिपूर्ण रहा।
2. नेता कहता है, "मेरी बात मानो क्योंकि मेरा परिवार हमेशा से राज करता आया है।" कौन-सा प्राधिकार?
पारंपरिक प्राधिकार।
3. देश में चुनाव होते हैं, पर विपक्षी चैनल बंद हैं और प्रतिद्वंद्वी जेल में हैं। वर्गीकरण?
संकर (प्रतिस्पर्धी सत्तावादी) व्यवस्था: चुनाव हैं पर स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं।
4. लोकतंत्रीकरण के चरण क्रम से बताइए।
पुरानी व्यवस्था का संकट → संक्रमण (नए नियम, पहले स्वतंत्र चुनाव) → सुदृढ़ीकरण।
5. ऊँची वैधता वाली सरकार को पुलिस-सेना पर कम खर्च क्यों करना पड़ सकता है?
लोग अपनी इच्छा से नियम मानते हैं, इसलिए व्यवस्था बनाए रखने में कम बल चाहिए।
आम गलतियाँ
- राज्य, शासन-व्यवस्था और सरकार को एक मानना।
- सोचना कि जहाँ चुनाव हों वह लोकतंत्र है; चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी होने चाहिए।
- शक्ति और प्राधिकार को एक मानना।
- सोचना कि राजतंत्र हमेशा सत्तावादी होता है – संवैधानिक राजतंत्र लोकतंत्र हो सकता है।