📘 CodingMarble Learn

समानता: बराबर मूल्य, उचित अवसर

समानता का अर्थ है हर व्यक्ति का मूल्य बराबर है और जन्म, जाति, लिंग, धर्म या धन के कारण उसके रास्ते में अनुचित रुकावट न हो। इसका मतलब यह नहीं कि सब बिल्कुल एक जैसे हों या सबको बिल्कुल एक जैसा मिले; प्रतिभा और मेहनत के अंतर स्वीकार हैं, पर अनुचित सामाजिक व्यवस्था से बने अंतर हटाने हैं। समानता के तीन आयाम हैं: राजनीतिक (बराबर नागरिकता और वोट), सामाजिक (शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार में बराबर अवसर) और आर्थिक (धन में बहुत बड़ा अंतर न हो)। नारीवाद पितृसत्ता से बनी लैंगिक असमानता से लड़ता है; समाजवाद असमानता को संपत्ति के असमान स्वामित्व से जोड़ता है। समानता औपचारिक समानता, भिन्न बर्ताव और आरक्षण जैसी सकारात्मक कार्रवाई से बढ़ती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. हर इंसान का मूल्य बराबर है। फिर भी जन्म, जाति, लिंग या पैसे के कारण जीवन में मौके बहुत असमान मिलते हैं।
  2. समानता के तीन आयाम: राजनीतिक (सबका एक वोट), सामाजिक (बराबर अवसर) और आर्थिक (धन में बहुत बड़ा अंतर न हो)।
  3. नारीवाद कहता है लैंगिक अंतर समाज ने बनाए, प्रकृति ने नहीं। समाजवाद कहता है संपत्ति के असमान स्वामित्व से असमानता आती है।
  4. समानता तीन तरीकों से बढ़ती है: सबके लिए एक कानून, अलग ज़रूरत पर अलग मदद, और आरक्षण जैसे विशेष कदम।
  5. बराबर बर्ताव हमेशा एक जैसा बर्ताव नहीं। ज़रूरत के हिसाब से मदद से सब एक स्तर तक पहुँचते हैं।
  6. अब आपकी बारी। पीछे रखे गए समूह को मदद दें और अंतर घटता देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर सबका मूल्य बराबर है तो जीवन इतना असमान क्यों?

जाति, लिंग के नियम और धन के अंतर जैसी सामाजिक व्यवस्था के कारण, इसलिए नहीं कि कुछ लोगों का मूल्य कम है।

क्या सबका एक वोट समानता के लिए काफ़ी है?

नहीं। राजनीतिक समानता एक स्तंभ है; सामाजिक और आर्थिक समानता भी चाहिए।

क्या लैंगिक भूमिकाएँ प्राकृतिक हैं?

नारीवादी बताते हैं कि ज़्यादातर अंतर समाज (पितृसत्ता) ने बनाए और बदले जा सकते हैं।

क्या आरक्षण समानता के विरुद्ध है?

नहीं। यह पीछे रखे गए समूहों को उचित मौका देने वाली सकारात्मक कार्रवाई है।

सबको एक जैसी मदद क्यों न दें?

एक जैसी मदद सबसे कमज़ोर को पीछे छोड़ सकती है; ज़रूरत के हिसाब से मदद बराबर मौका देती है।

क्या मदद हमेशा चलती रहे?

मदद का लक्ष्य अंतर मिटाना है; समीक्षा हो ताकि ज़रूरतमंदों तक पहुँचे।

समानता क्यों ज़रूरी है?

समानता का विचार कहता है कि सब इंसानों का मूल्य और गरिमा बराबर है। इसलिए जन्म, जाति, नस्ल, लिंग, धर्म या धन के कारण किसी को नीचा न माना जाए।

समानता एकरूपता नहीं है। लोगों की प्रतिभा, मेहनत और पसंद अलग है, और इनाम में कुछ अंतर उचित हैं। अनुचित वह अंतर है जो सामाजिक व्यवस्था से बने: गरीब या दबाई गई जाति में जन्मा बच्चा जिसे कभी असली मौका न मिले। अवसर की समानता = सबको उचित शुरुआत।

प्राकृतिक बनाम सामाजिक असमानता: प्राकृतिक अंतर जन्म से (कद, क्षमताएँ); सामाजिक असमानता समाज ने बनाई (जाति, वर्ग)। सामाजिक असमानता हटानी है, और प्राकृतिक अंतर को बुरे बर्ताव का बहाना नहीं बनने देना है।

समानता के तीन आयाम

नारीवाद और समाजवाद

नारीवाद स्त्री और पुरुष के बराबर अधिकारों के पक्ष में है। नारीवादी कहते हैं कि स्त्री-पुरुष की शक्ति में ज़्यादातर अंतर समाज ने बनाया है, जिसे पितृसत्ता कहते हैं, प्रकृति ने नहीं। जैसे महिलाओं को कम वेतन, बिना वेतन का घरेलू काम, सार्वजनिक जीवन से दूर रखना। 'लिंग' (जैविक) और 'जेंडर' (सामाजिक भूमिका) का अंतर समझना ज़रूरी है।

समाजवाद कहता है कि असमानता का मुख्य कारण संपत्ति और ज़मीन, कारख़ानों जैसे मुख्य संसाधनों का असमान स्वामित्व है। समाजवादी चाहते हैं कि ये सबकी भलाई में लगें, सार्वजनिक स्वामित्व या राज्य के नियंत्रण और कल्याण से। कार्ल मार्क्स ने उत्पादन के साधनों पर निजी नियंत्रण ख़त्म करने की बात की। भारत में राम मनोहर लोहिया ने कई असमानताओं की एक साथ बात की: स्त्री-पुरुष, जाति और रंग पर आधारित, अमीर-गरीब देशों के बीच; उन्होंने छोटे पैमाने की तकनीक पर ज़ोर दिया।

उदारवादी अलग सोचते हैं: वे उचित नियमों वाली प्रतियोगिता चाहते हैं, और राज्य की मदद मुख्यतः न्यूनतम सुविधा और बराबर अवसर के लिए।

समानता को कैसे बढ़ाएँ?

  1. औपचारिक समानता: सबके लिए एक जैसे कानून और अधिकार; जन्म से कोई विशेषाधिकार नहीं। संविधान धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव रोकता है।
  2. भिन्न बर्ताव: बराबर मौका देने के लिए अलग बर्ताव, जैसे व्हीलचेयर के लिए रैंप या महिलाओं को मातृत्व अवकाश।
  3. सकारात्मक कार्रवाई: पुराने और आज के अन्याय को ठीक करने के विशेष कदम, जैसे शिक्षा और नौकरी में आरक्षण, छात्रवृत्ति, छात्रावास। इसका लक्ष्य समानता लाना है, और यह सच में ज़रूरतमंद तक पहुँचे।

परीक्षा टिप्स

स्वतंत्रता और समानता मिलकर लगभग 12 अंक। आम सवाल: समानता एकरूपता क्यों नहीं, तीन आयाम उदाहरण सहित, नारीवादी और समाजवादी दृष्टिकोण, 'एक जैसा बर्ताव बनाम भिन्न बर्ताव' वाला प्रसंग। समझाने के लिए बाड़ और डिब्बों वाला चित्र काम आता है।

घर पर करके देखें

अलग-अलग कद के तीन सदस्यों को सोफ़े के पीछे खड़ा करें और सबको एक-एक गद्दी दें। क्या सब ऊपर से देख पाते हैं? अब ज़रूरत के हिसाब से गद्दियाँ दें। दो पंक्ति में लिखें क्या बदला। यही 'एक जैसा बर्ताव' और 'बराबर अवसर' का अंतर है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक कंपनी एक जैसे काम के लिए महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन देती है। कौन सा आयाम टूटा और कौन सा सिद्धांत इस पर बोलता है?

आर्थिक (और सामाजिक) समानता टूटी। नारीवाद इस पर बोलता है: यह अंतर समाज (पितृसत्ता) का बनाया है, क्षमता का नहीं। कानून बराबर काम के लिए बराबर वेतन माँगता है।

2. भारत में हर वयस्क का एक वोट है। क्या इससे भारत पूरी तरह समान हो गया?

नहीं। इससे राजनीतिक समानता मिली। पर सामाजिक और आर्थिक अंतर (जाति, गरीबी) बाकी हैं, इसलिए और कदम चाहिए।

3. व्हीलचेयर वालों के लिए रैंप दूसरों के साथ अन्याय क्यों नहीं?

यह भिन्न बर्ताव है जो इमारत में जाने का बराबर मौका देता है। इससे दूसरों का कुछ नहीं छिनता।

4. बाड़ वाले उदाहरण से समझाइए कि एक जैसा बर्ताव असमान क्यों हो सकता है।

अलग कद के तीन बच्चों को एक-एक डिब्बा दें तो सबसे छोटा फिर भी बाड़ के पार नहीं देख पाता। ज़रूरत के हिसाब से डिब्बे दें तो सब देखते हैं। बराबर मौके के लिए ज़रूरत के अनुसार मदद चाहिए।

5. गरीबी घटाने के लिए समाजवादी और उदारवादी क्या सुझाएँगे?

समाजवादी मुख्य संसाधनों पर सार्वजनिक स्वामित्व या कड़ा नियंत्रण और व्यापक कल्याण चाहेगा। उदारवादी उचित प्रतियोगिता और सुरक्षा जाल चाहेगा: मुफ़्त शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यूनतम आय।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. एक व्यक्ति, एक वोट उदाहरण है:
2. नारीवादियों के अनुसार ज़्यादातर लैंगिक असमानता आती है:
3. कॉलेज में आरक्षण उदाहरण है:
4. समाजवाद असमानता को मुख्यतः जोड़ता है:
5. समानता का अर्थ है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समानता के तीन आयाम कौन से हैं?

राजनीतिक समानता, सामाजिक समानता और आर्थिक समानता।

सकारात्मक कार्रवाई क्या है?

आरक्षण और छात्रवृत्ति जैसे विशेष कदम, जो लंबे अन्याय झेलने वाले समूहों को बराबर मौका दिलाते हैं।

नारीवादी पितृसत्ता से क्या समझते हैं?

वह सामाजिक व्यवस्था जिसमें पुरुषों को ज़्यादा शक्ति मिलती है; नारीवादियों के अनुसार यही, प्रकृति नहीं, ज़्यादातर लैंगिक असमानता का कारण है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11राजनीतिक सिद्धांत

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी राजनीति विज्ञान पाठ