शोध नैतिकता क्या है?
नैतिकता यानी सही और गलत की समझ। शोध नैतिकता यानी शोध को सही ढंग से करने के नियम।
शोध में अक्सर लोगों का अध्ययन होता है: उनके उत्तर, आदतें, भावनाएँ। इन्हें प्रतिभागी (participants) कहते हैं। वे शोधकर्ता पर भरोसा करते हैं। नैतिकता उसी भरोसे की रक्षा करती है।
अच्छे शोधकर्ता की अभिवृत्तियाँ:
- वस्तुनिष्ठता (objectivity): अपनी इच्छा नहीं, तथ्य देखो।
- खुला मन: चौंकाने वाले नतीजे भी स्वीकार करो।
- सम्मान: हर व्यक्ति और हर संस्कृति के साथ निष्पक्ष रहो।
- ज़िम्मेदारी: सोचो कि नतीजों का उपयोग कैसे होगा।
शोध में शामिल लोगों की रक्षा
नुकसान न करो
नुकसान शरीर, मन (डर, शर्म, तनाव), पैसे या इज़्ज़त को हो सकता है। अगर थोड़ा जोखिम हो तो उसे बहुत कम रखो और मदद तैयार रखो।
सूचित सहमति (informed consent)
सूचित यानी लोगों को उद्देश्य, काम, समय और जोखिम बताया गया। सहमति यानी फिर वे अपनी मर्ज़ी से हाँ कहें। कोई दबाव, धोखा या इतना बड़ा इनाम नहीं कि मना ही न कर सकें। व्यक्ति कभी भी बिना कारण बताए हट सकता है।
बच्चे और कमज़ोर समूह
बच्चों, बीमार लोगों या किसी के अधिकार में रहने वालों की ज़्यादा देखभाल चाहिए। बच्चों के लिए माता-पिता/अभिभावक की सहमति भी चाहिए और बच्चे की हाँ भी।
गोपनीयता
- अनामता (anonymity): नाम लिए ही नहीं जाते, या कोड (P1, P2) से बदल दिए जाते हैं।
- गोपनीयता (confidentiality): शोधकर्ता जानता है किसने क्या कहा, पर किसी को बताता नहीं और आँकड़े सुरक्षित रखता है।
छल (deception, असली उद्देश्य छिपाना) बहुत कम और बिना नुकसान के ही चलता है, और अंत में सच बताना ज़रूरी है (डीब्रीफ़िंग)।
आँकड़ों में ईमानदारी और विचारों का श्रेय
- गढ़ना (fabrication): ऐसे आँकड़े बनाना जो कभी जुटाए ही नहीं।
- मिथ्याकरण (falsification): असली आँकड़े बदलना या अनचाहे नतीजे छिपाना।
- साहित्यिक चोरी (plagiarism): किसी और के शब्द या विचार अपने बताना।
ये तीनों शोध में गंभीर बेईमानी हैं। सही तरीका: असली नतीजे बताओ, कमियाँ लिखो, और हर स्रोत का संदर्भ दो: लेखक, वर्ष, शीर्षक, कहाँ से।
विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में नैतिकता समिति (ethics committee) होती है जो शोध शुरू होने से पहले योजना जाँचती है। चिकित्सा में ये नियम न्यूरेमबर्ग कोड (1947) और हेलसिंकी घोषणा (1964) से बढ़े, क्योंकि पहले कुछ प्रयोगों ने लोगों को बहुत नुकसान पहुँचाया था।
करके देखो: एक शोध योजना जाँचो
एक छोटा सर्वे बनाओ: "मेरी कक्षा के बच्चे कितने घंटे सोते हैं?"
- दो लाइन में उद्देश्य लिखो।
- जोड़ो: "आप कोई भी प्रश्न छोड़ सकते हैं या कभी भी रुक सकते हैं।"
- नाम मत पूछो। हर फ़ॉर्म को एक नंबर दो।
- असली औसत बताओ, चाहे वह चौंकाए।
- अगर किसी वेबसाइट का नींद-चार्ट लिया, तो उसका नाम नीचे लिखो।
अब 3D के आखिरी कदम में हर नियम टिक करो। क्या बत्ती हरी हुई?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पाँच नियम: नुकसान नहीं · सूचित सहमति · गोपनीयता · ईमानदार आँकड़े · स्रोत का श्रेय
- सूचित सहमति = साफ़ जानकारी + अपनी मर्ज़ी + कभी भी रुकने का अधिकार
- अनामता = कोई भी (शोधकर्ता भी) उत्तर को नाम से नहीं जोड़ सकता
- गोपनीयता = शोधकर्ता जानता है, पर राज़ रखता है
- शोध कदाचार = गढ़ना + मिथ्याकरण + साहित्यिक चोरी
हल किए गए उदाहरण
1. एक छात्र प्रोजेक्ट के लिए दोस्तों की बातें चुपके से रिकॉर्ड करता है। क्या गलत है और कैसे सुधरे?
न सहमति ली, न गोपनीयता रखी। सुधार: प्रोजेक्ट समझाओ, हर व्यक्ति से पूछो, मना करने दो, और नोट्स से नाम हटाओ।
2. सर्वे में 40% ने 'हाँ' कहा, पर शोधकर्ता 60% लिखती है क्योंकि वह उसके विचार से मेल खाता है। कौन सा नियम टूटा?
ईमानदारी। असली आँकड़े बदलना मिथ्याकरण है। उसे 40% लिखकर अंतर समझाना चाहिए।
3. 12 साल के बच्चों से स्क्रीन-टाइम पर बात करनी है। सहमति के कदम बताओ।
आसान सूचना-पत्र दो, माता-पिता/अभिभावक की लिखित सहमति लो, बच्चे से भी हाँ लो, बताओ कि वे कभी भी रुक सकते हैं, और उत्तर बिना नाम रखो।
आम गलतियाँ
- सोचना कि सहमति सिर्फ़ हस्ताक्षर है। व्यक्ति को शोध समझ में आना चाहिए और मना करने की आज़ादी होनी चाहिए।
- अनामता और गोपनीयता को एक समझना। अनाम = नाम ही नहीं; गोपनीय = नाम पता है पर राज़ है।
- सोचना कि 'खराब' नतीजे हटाना ठीक है। नतीजे छिपाना मिथ्याकरण है।
- सोचना कि कुछ शब्द बदल देने से चोरी नहीं होती। स्रोत का श्रेय फिर भी देना है।