South 고등학교 2학년 Social Issues Inquiry
अध्याय: 4
1. Understanding and investigating social problems
What a social problem is · Scientific inquiry into social problems · Collecting data · Attitudes in inquiry
- सामाजिक समस्याएँ: ये क्या हैं और इन्हें कैसे हल करें – सामाजिक समस्या ऐसी स्थिति है जो बहुत लोगों को नुकसान पहुँचाती है, जिसे बहुत लोग हानिकारक मानते हैं, जिसके कारण समाज की बनावट में हैं, और जिसे लोग मिलकर बदल सकते हैं। बेरोज़गारी, प्रदूषण, किशोरों में फ़ोन का ज़्यादा उपयोग और बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी इसके उदाहरण हैं। समाजशास्त्री इन्हें अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखते हैं, सबूत से जाँचते हैं, कारण और प्रभाव खोजते हैं और हल आज़माते हैं।
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।
- शोध नैतिकता: शोध सही तरीके से कैसे करें – शोध नैतिकता वे नियम हैं जो शोध को सुरक्षित और निष्पक्ष रखते हैं। पाँच बड़े नियम: नुकसान न करो, सूचित सहमति लो, गोपनीयता रखो, आँकड़ों में ईमानदार रहो, और हर स्रोत को श्रेय दो। अच्छे शोध में अच्छी विधि और अच्छा व्यवहार दोनों चाहिए।
2. Everyday social problems
Gender inequality · Youth media use problems
- लैंगिक समानता: सबके लिए बराबर मौके – लैंगिक समानता का मतलब है कि हर जेंडर के लोगों को बराबर अधिकार, बराबर मौके और बराबर सम्मान मिले, और काम का बोझ ठीक से बँटे। लिंग (sex) शरीर से जुड़ा है; जेंडर वे भूमिकाएँ और नियम हैं जो समाज सिखाता है। रूढ़िवादी धारणाएँ, बिना वेतन के काम का असमान बोझ, वेतन अंतर और नेतृत्व में कम महिलाएँ असमानता के निशान हैं। कानून, शिक्षा, घर का काम बाँटना और रोज़मर्रा में संवेदनशीलता हमें समानता की ओर ले जाते हैं। यही संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य 5 है।
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
3. Social problems in a changing world
Low birth rate and ageing · Problems from AI
- जनसंख्या का वृद्ध होना – जनसंख्या का वृद्ध होना यानी आबादी में बुज़ुर्गों का हिस्सा बढ़ता जाना। इसके दो कारण हैं: कम जन्म (कुल प्रजनन दर लगभग 2.1 से कम) और लंबी उम्र। हर बुज़ुर्ग पर कम कामगार होने से पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और श्रम-आपूर्ति पर दबाव पड़ता है, जबकि स्कूलों में कम सीटें चाहिए। समाज परिवारों की मदद, देर से और लचीले रिटायरमेंट, पेंशन-देखभाल सुधार, तकनीक, आजीवन सीखने और कभी-कभी आप्रवास से जवाब देते हैं।
- AI नैतिकता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निष्पक्ष और सुरक्षित उपयोग – AI डेटा से पैटर्न सीखकर फ़ैसले करता है। AI नैतिकता पूछती है: क्या ये फ़ैसले निष्पक्ष, सुरक्षित और सम्मानजनक हैं? मुख्य मुद्दे: पक्षपात (अनुचित डेटा से अनुचित नतीजे), निजता (निजी डेटा के लिए सहमति और सुरक्षा), पारदर्शिता (AI ने क्यों तय किया, यह पता हो), जवाबदेही (इंसान ज़िम्मेदार रहे), सुरक्षा और दुरुपयोग (डीपफ़ेक, झूठी ख़बरें), और सामाजिक असर (नौकरियाँ, डिजिटल खाई, पर्यावरण)। ज़िम्मेदार AI का मतलब है इन सबकी जाँच उपयोग से पहले और बाद में।
4. Case study
Choosing a problem and planning · Gathering data · Analysing and proposing solutions · Sharing results
- समाजशास्त्रीय शोध विधियाँ – समाजशास्त्री समाज को शोध से समझते हैं, कदम-दर-कदम: विषय चुनो, उद्देश्य या परिकल्पना लिखो, छोटा पायलट अध्ययन करो, नमूना चुनो, आँकड़े जुटाओ, विश्लेषण करो और निष्कर्ष निकालो। नमूना पूरी आबादी में से चुना गया छोटा समूह है; यह प्रतिनिधि होना चाहिए ताकि नतीजे सब पर लागू हों। मात्रात्मक आँकड़े संख्याएँ हैं (प्रश्नावली, संरचित साक्षात्कार, सरकारी आँकड़े); गुणात्मक आँकड़े शब्द और अर्थ हैं (असंरचित साक्षात्कार, अवलोकन, दस्तावेज़)। प्राथमिक आँकड़े शोधकर्ता खुद जुटाता है; द्वितीयक पहले से मौजूद होते हैं। अच्छा शोध विश्वसनीय (दोहराने पर वही नतीजा), वैध (सच्ची तस्वीर) और प्रतिनिधि होता है। विधि का चुनाव व्यावहारिक (समय, पैसा, पहुँच), नैतिक (सहमति, गोपनीयता, नुकसान न हो) और सैद्धांतिक कारणों से होता है: प्रत्यक्षवादी (positivist) संख्याएँ पसंद करते हैं, व्याख्यावादी (interpretivist) लोगों के अर्थ समझना।
- प्रेज़ेंटेशन स्किल्स: श्रोताओं के सामने बोलना – अच्छा प्रेज़ेंटेशन श्रोता और उद्देश्य को सोचकर बनता है। उसमें साफ़ शुरुआत, मुख्य भाग और अंत होता है। स्लाइड सरल होती हैं और बोलने वाले की मदद करती हैं। साफ़ आवाज़, आँखों से संपर्क और सही समय ज़रूरी हैं। अभ्यास से घबराहट आत्मविश्वास बन जाती है।