मनोवैज्ञानिक अन्वेषण के लक्ष्य
- वर्णन: व्यवहार क्या है, साफ़ बताना और मापना। जैसे: "किशोर रोज़ कितनी देर फ़ोन चलाते हैं?"
- पूर्वकथन: दो चीज़ें साथ कैसे चलती हैं, यह जानकर एक से दूसरी का कुछ सटीक अनुमान।
- व्याख्या: कारण खोजना — व्यवहार क्यों होता है।
- अनुप्रयोग: ज्ञान से असली समस्याएँ सुलझाना और अच्छा बदलाव लाना (जैसे परीक्षा-तनाव घटाना)।
वैज्ञानिक शोध के चरण
वैज्ञानिक शोध वस्तुनिष्ठ (कोई भी जाँचे, वही नतीजा) और क्रमबद्ध (तय चरणों में) होता है।
- समस्या का संप्रत्ययीकरण: विषय चुनें, पुराना शोध पढ़ें, और परिकल्पना लिखें — जाँचने योग्य अस्थायी उत्तर, जैसे "ज़्यादा नींद से ज़्यादा अंक"।
- आँकड़ों का संग्रह: प्रतिभागी (कौन), विधि (प्रयोग, सर्वेक्षण…), उपकरण (परीक्षण, प्रश्नावली) और प्रक्रिया (कैसे, कब) तय करें।
- निष्कर्ष निकालना: ग्राफ़ और सांख्यिकी से आँकड़े व्यवस्थित करें और देखें कि परिकल्पना को समर्थन मिला या नहीं।
- शोध निष्कर्षों का संशोधन: मौजूदा सिद्धांत से तुलना करें; नतीजे अलग हों तो सिद्धांत बदलता है और नए प्रश्न उठते हैं। चक्र दोहराया जाता है।
चर
चर वह है जिसके अलग-अलग मान हो सकें (नींद के घंटे, अंक)। स्वतंत्र चर शोधकर्ता बदलता है; आश्रित चर असर देखने के लिए मापा जाता है।
शोध के वैकल्पिक प्रतिमान
प्रतिमान शोध को देखने और करने का एक तरीक़ा है।
- वैज्ञानिक (प्रत्यक्षवादी) प्रतिमान: दुनिया वस्तुनिष्ठ रूप से मापी जा सकती है; संख्याएँ, प्रयोग और सांख्यिकी; सामान्य नियमों की खोज।
- व्याख्यात्मक (गुणात्मक) प्रतिमान: हर व्यक्ति का अनुभव अनोखा है; शोधकर्ता साक्षात्कार और कहानियों से अर्थ समझता है, जैसे बाढ़ पीड़ित कैसा महसूस करते और कैसे सँभलते हैं।
दोनों उपयोगी हैं; आज कई अध्ययन दोनों को मिलाते हैं।
मनोवैज्ञानिक आँकड़ों की प्रकृति
शोध में जुटाए गए तथ्य आँकड़े हैं। ये हो सकते हैं:
- जनांकिकीय: नाम, आयु, लिंग, शिक्षा, परिवार, धर्म, आय।
- भौतिक: परिवेश के बारे में — कमरे का आकार, शोर, भीड़, आवास।
- शारीरिक (दैहिक): धड़कन, रक्तचाप, नींद, मस्तिष्क गतिविधि, थकान।
- मनोवैज्ञानिक: बुद्धि, व्यक्तित्व, अभिवृत्ति, संवेग, मूल्य।
ज़रूरी विशेषताएँ
- आँकड़े संदर्भ से स्वतंत्र नहीं: समय, स्थान और परिवेश उन पर असर डालते हैं।
- आँकड़े देने वाले लोगों की विशेषताओं (आयु, संस्कृति, मनोदशा) पर निर्भर हैं।
- आँकड़े अपने आप नहीं बोलते: उनकी सावधानी से व्याख्या करनी होती है।
करके देखें: छोटा अध्ययन बनाइए
3D के खुले खेल से एक प्रश्न चुनें। स्वतंत्र चर, आश्रित चर और परिकल्पना लिखें। फिर लिखें कि 10 सहपाठियों से आँकड़े कैसे जुटाएँगे और कौन-सा नतीजा आपकी परिकल्पना का समर्थन करेगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लक्ष्य: वर्णन → पूर्वकथन → व्याख्या → अनुप्रयोग
- चरण: समस्या का संप्रत्ययीकरण → आँकड़े संग्रह → निष्कर्ष → संशोधन
- परिकल्पना = चरों के संबंध पर जाँचने योग्य अस्थायी कथन
- स्वतंत्र चर = शोधकर्ता बदलता है; आश्रित चर = मापा गया असर
- आँकड़ों के प्रकार: जनांकिकीय, भौतिक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक
हल किए गए उदाहरण
1. प्रश्न: "क्या सोने से पहले मोबाइल गेम खेलने से नींद घटती है?" स्वतंत्र चर, आश्रित चर और परिकल्पना बताइए।
स्वतंत्र चर: सोने से पहले गेम खेलना (हाँ/नहीं)। आश्रित चर: नींद के घंटे। परिकल्पना: सोने से पहले गेम खेलने वाले छात्र न खेलने वालों से कम सोते हैं।
2. आँकड़ों का वर्गीकरण करें: (क) परीक्षा के समय धड़कन, (ख) छात्रों की आयु, (ग) कक्षा का शोर, (घ) चिंता मापनी पर अंक।
(क) शारीरिक, (ख) जनांकिकीय, (ग) भौतिक, (घ) मनोवैज्ञानिक।
3. कौन-सा लक्ष्य है? "शोर से पढ़ाई बिगड़ती है, यह जानकर स्कूल ने पुस्तकालय सड़क से दूर किया।"
अनुप्रयोग: ज्ञान से अच्छा बदलाव लाया गया।
4. शोधकर्ता को ऐसे नतीजे मिले जो पुराने सिद्धांत से मेल नहीं खाते। आगे क्या होगा?
चरण 4, निष्कर्षों का संशोधन: सिद्धांत दोबारा जाँचा या बदला जाता है और नई परिकल्पना परखी जाती है। इसी से विज्ञान ख़ुद को सुधारता है।
आम गलतियाँ
- परिकल्पना को प्रश्न के रूप में लिखना। यह जाँचने योग्य कथन है।
- स्वतंत्र और आश्रित चर उलट देना। स्वतंत्र बदला जाता है, आश्रित मापा जाता है।
- यह मानना कि शोध निष्कर्ष पर ख़त्म। संशोधन चौथा चरण है।
- यह मानना कि आँकड़े हर जगह एक से होते हैं। वे संदर्भ और लोगों पर निर्भर हैं।