मात्रात्मक और गुणात्मक विश्लेषण
आँकड़े जुटाने के बाद उनका विश्लेषण (अर्थ निकालना) होता है।
- मात्रात्मक विश्लेषण: आँकड़े संख्याएँ हैं (अंक, समय, गिनती)। माध्य (औसत), प्रतिशत और ग्राफ़ जैसी सांख्यिकी लगती है। हल किया उदाहरण: अंक 6, 8, 7, 9, 10 → योग 40 → माध्य = 40 ÷ 5 = 8।
- गुणात्मक विश्लेषण: आँकड़े शब्द, चित्र, डायरी और साक्षात्कार हैं। शोधकर्ता बार-बार पढ़कर मुख्य विचारों को कोड करता है और विषयवस्तुओं में बाँटता है, जैसे "अकेलापन" और "सहारा"।
ये प्रतिद्वंद्वी नहीं: कई अध्ययन दोनों अपनाते हैं (मिश्रित विधि), क्योंकि संख्याएँ "कितना" और शब्द "क्या अर्थ" बताते हैं।
मनोवैज्ञानिक अन्वेषण की सीमाएँ
- वास्तविक शून्य बिंदु का अभाव: पैमाने पर 0 सेमी का अर्थ कोई लंबाई नहीं। मनोवैज्ञानिक परीक्षण में 0 अंक का अर्थ शून्य बुद्धि या शून्य चिंता नहीं। इसलिए "दुगना बुद्धिमान" नहीं कह सकते।
- मनोवैज्ञानिक उपकरणों की सापेक्ष प्रकृति: परीक्षण किसी ख़ास संस्कृति और समूह के लिए बनते हैं। एक शहर या देश में बना परीक्षण दूसरी भाषा या जीवनशैली के बच्चों पर ठीक न बैठे; उसे अनुकूलित करना पड़ता है।
- गुणात्मक आँकड़ों की व्यक्तिनिष्ठ व्याख्या: वही शब्द ("मैं ठीक हूँ") अलग शोधकर्ता अलग समझ सकते हैं, इसलिए निष्कर्ष बदल सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक शोध में नैतिक मुद्दे
शोध लोगों के साथ होता है, इसलिए उनके अधिकार और भलाई सबसे पहले।
- स्वैच्छिक सहभागिता: लोग अपनी मर्ज़ी से, बिना दबाव जुड़ें और कभी भी बिना दंड छोड़ सकें।
- सूचित सहमति: अध्ययन से पहले बताया जाए कि क्या करना है और क्या जोखिम है, फिर वे सहमति दें। बच्चों के लिए माता-पिता या अभिभावक सहमति दें।
- डीब्रीफ़िंग: अध्ययन के बाद शोधकर्ता असली उद्देश्य बताए (ख़ासकर यदि कुछ छिपाया गया था) और देखे कि कोई चिंतित न लौटे।
- परिणाम साझा करना: प्रतिभागियों को सरल शब्दों में निष्कर्ष जानने का अधिकार है।
- गोपनीयता: नाम की जगह कोड; आँकड़े सुरक्षित रखें और ऐसे न दिखाएँ कि कोई पहचाना जाए।
करके देखें: नैतिकता जाँच-सूची
किसी भी कक्षा-प्रोजेक्ट सर्वेक्षण से पहले 5 पंक्तियों की सूची लिखें: (1) क्या सबने अपनी मर्ज़ी से हाँ कहा? (2) क्या उन्हें पता था सर्वे किस बारे में है? (3) क्या मैं बाद में उद्देश्य समझाऊँगा? (4) क्या नतीजे बताऊँगा? (5) क्या नाम की जगह कोड लिए? फिर 3D के खुले खेल की छह स्थितियाँ जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माध्य = अंकों का योग ÷ अंकों की संख्या
- मात्रात्मक = संख्याएँ + सांख्यिकी; गुणात्मक = शब्द + विषयवस्तु
- सीमाएँ: असली शून्य नहीं; सापेक्ष उपकरण; व्यक्तिनिष्ठ व्याख्या
- नैतिकता: स्वैच्छिक सहभागिता, सूचित सहमति, डीब्रीफ़िंग, परिणाम साझा, गोपनीयता
हल किए गए उदाहरण
1. पाँच छात्रों के स्मृति परीक्षण में अंक 12, 15, 10, 18 और 20 हैं। माध्य निकालें।
योग = 12 + 15 + 10 + 18 + 20 = 75। माध्य = 75 ÷ 5 = 15।
2. शोधकर्ता छात्रावास के 30 छात्रों की डायरी पढ़ता है और पाता है कि बहुत से घर के खाने की याद और नए दोस्तों की बात करते हैं। यह कौन-सा विश्लेषण है?
गुणात्मक विश्लेषण: शब्दों को कोड करके विषयवस्तुओं ("घर की याद", "नई दोस्ती") में बाँटा गया।
3. चिंता मापनी पर रिया के 60 और अमन के 120 अंक हैं। क्या अमन दुगना चिंतित है?
नहीं। मापनी में असली शून्य नहीं, इसलिए "दुगना" जैसा अनुपात अर्थहीन है। बस इतना कह सकते हैं कि अमन के अंक ज़्यादा हैं।
4. कौन-सा नियम टूटा? पूर्वाग्रह से बचने के लिए उद्देश्य छिपाया गया और अध्ययन बिना कुछ बताए ख़त्म हुआ।
डीब्रीफ़िंग: ऐसे अध्ययन के बाद असली उद्देश्य बताना और चिंता दूर करना ज़रूरी है।
आम गलतियाँ
- गुणात्मक विश्लेषण को "अवैज्ञानिक" मानना। यह क्रमबद्ध है, बस अर्थ पढ़ता है।
- शून्य अंक का अर्थ शून्य योग्यता मानना। परीक्षणों में असली शून्य नहीं।
- सहमति को बस हस्ताक्षर मानना। व्यक्ति को पहले अध्ययन सच में समझना चाहिए।
- गोपनीयता का अर्थ परिणाम छिपाना मानना। परिणाम साझा होते हैं; पहचान छिपाई जाती है।