South 고등학교 1학년 Integrated Social Studies 1
अध्याय: 5
1. Integrated perspectives
Time, space, society and ethics lenses · Why integration is needed
- एकीकृत दृष्टिकोण: एक मुद्दा, चार नज़रिए – एकीकृत दृष्टिकोण का मतलब है एक मुद्दे को चार नज़रियों से साथ-साथ देखना: समय (कैसे बदलता है), स्थान (कहाँ होता और फैलता है), समाज (किसे फ़ायदा या नुकसान) और नैतिकता (क्या उचित और सही है)। चारों मिलाने से किसी एक नज़रिए से ज़्यादा पूरा और निष्पक्ष उत्तर मिलता है।
2. People, society, environment and happiness
Standards of happiness · Conditions for a happy life
- ख़ुशी और अच्छा जीवन – हर कोई ख़ुश रहना चाहता है, पर इस शब्द के कई मतलब हैं: अच्छी क़िस्मत, अच्छा एहसास, या पूरा जीवन जो ठीक चल रहा हो। मज़े जल्दी और थोड़ी देर की ख़ुशी देते हैं जो आदत पड़ने पर उतर जाती है; दोस्ती, हुनर, अच्छा चरित्र और जीवन का अर्थ टिकाऊ ख़ुशी बनाते हैं। सुखवादी सुख को लक्ष्य मानते हैं; एपिक्यूरस ने सादे सुख और शांत मन चुना; अरस्तू ने ख़ुशी (यूडेमोनिया) को सद्गुणों से अच्छा जीना माना; स्टोइक उस पर ध्यान देते हैं जो हमारे बस में है; उपयोगितावादी सबसे ज़्यादा लोगों की सबसे ज़्यादा ख़ुशी चाहते हैं; कांट कहते हैं कर्तव्य करो और ख़ुशी के लायक़ बनो। धर्म दूसरों से प्रेम, कृतज्ञता और जीवन के अर्थ पर भरोसा जोड़ते हैं।
- जीवन की गुणवत्ता और सुखी जीवन की शर्तें – जीवन की गुणवत्ता का मतलब है लोगों का जीवन कुल मिलाकर कितना अच्छा है, सिर्फ़ उनके पास कितना पैसा है यह नहीं। इसमें आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ़ और सुरक्षित पर्यावरण, लोकतंत्र और अधिकार, और भरोसे व ईमानदारी वाला समाज शामिल है। इसे वस्तुनिष्ठ सूचकों (जैसे जीवन प्रत्याशा) और व्यक्तिनिष्ठ सूचकों (लोग कितना संतुष्ट महसूस करते हैं) से मापते हैं। एक जैसी आय वाली जगहों में भी जीवन की गुणवत्ता बहुत अलग हो सकती है।
3. Nature and humans
Environment and human life · Views of nature · Solving environmental problems
- मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र – मानव भूगोल पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर लोग और प्रकृति एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। बहुत पहले प्रकृति लोगों को चलाती थी (मानव का प्राकृतीकरण, यानी पर्यावरणीय निश्चयवाद)। तकनीक आने पर लोग प्रकृति बदलने लगे (प्रकृति का मानवीकरण, यानी संभववाद)। नव-निश्चयवाद कहता है: प्रकृति बदलो, पर उसकी सीमा पर रुक जाओ। समय के साथ यह विषय अन्वेषण से उत्तर-आधुनिकतावाद तक कई उपागमों से गुज़रा। आज इसके कई क्षेत्र हैं, जैसे सामाजिक, नगरीय, राजनीतिक और आर्थिक भूगोल।
- पर्यावरण नीतिशास्त्र: किसकी परवाह करें? – पर्यावरण नीतिशास्त्र पूछता है कि प्रकृति, जानवरों और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है। नैतिक परवाह का एक घेरा सोचिए। मानव-केंद्रित दृष्टि में सिर्फ़ इंसान अंदर हैं; प्रकृति का साधन-मूल्य है। संवेदनवाद (बेंथम, सिंगर) दर्द महसूस करने वाले जानवर जोड़ता है: पशु कल्याण कहता है दुख घटाओ, पशु अधिकार (रीगन) कहता है जानवरों को सिर्फ़ साधन मत बनाओ। जीव-केंद्रित दृष्टि (श्वाइत्ज़र, टेलर) हर जीव को मूल्य देती है। पारिस्थितिकी-केंद्रित दृष्टि (लियोपोल्ड की भूमि नैतिकता, गहन पारिस्थितिकी) पूरे तंत्र को महत्व देती है। कई पूर्वी और आदिवासी परंपराएँ इंसान को प्रकृति का हिस्सा मानती हैं। पीढ़ियों के बीच न्याय और सतत विकास भावी लोगों को जोड़ते हैं।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
4. Culture and diversity
Cultural regions of the world · Cultural change · Cultural relativism · Multicultural society
- सांस्कृतिक भूगोल: जगह संस्कृति को और संस्कृति जगह को कैसे गढ़ती है – सांस्कृतिक भूगोल यह पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर संस्कृति कैसे अलग है और कैसे फैलती है. संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीका है: भाषा, धर्म, भोजन, पहनावा, भवन, कला और त्योहार. लोग अपनी संस्कृति के हिसाब से ज़मीन बदलते हैं, जिससे सांस्कृतिक भूदृश्य बनता है. प्राकृतिक पर्यावरण, ख़ासकर जलवायु और समुद्र की नज़दीकी, घर, भोजन और कपड़ों पर असर डालते हैं, पर लोग तकनीक और अपनी पसंद से भी चुनते हैं. मिलते-जुलते गुणों वाले इलाक़े सांस्कृतिक प्रदेश बनाते हैं. संस्कृति किसी केंद्र (हर्थ) से शुरू होकर प्रसार से फैलती है: स्थानांतरण (लोग जाते हैं) या विस्तार (विचार जाता है), जो संक्रामक, पदानुक्रमिक या उद्दीपन प्रकार का होता है. प्रसार से संस्कृति-ग्रहण, आत्मसात्करण, समन्वय और आज वैश्वीकरण होता है.
- सांस्कृतिक परिवर्तन: संस्कृतियाँ कैसे फैलती, मिलती और बढ़ती हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का तरीका है: खाना, कपड़े, भाषा, विश्वास और औज़ार। यह कभी रुकती नहीं। जब आदतें एक समूह से दूसरे तक फैलती हैं (प्रसार), जब लंबे संपर्क में समूह आदतें मिला लेते हैं (मेल या acculturation), और जब लोग अपने समूह में नए विचार बनाते हैं (आविष्कार), तब सांस्कृतिक परिवर्तन होता है।
- सांस्कृतिक विविधता – सांस्कृतिक विविधता का मतलब है अलग-अलग जीवन-शैली वाले कई समूह साथ रहते हैं। नृजातिकेंद्रितता दूसरों को अपनी संस्कृति से जाँचती है; सांस्कृतिक सापेक्षवाद पहले रिवाज़ को उसके अपने संदर्भ में समझता है। पूर्वाग्रह और रूढ़ छवियाँ सम्मान में रुकावट हैं। समाज में मुख्यधारा, उपसंस्कृतियाँ और प्रतिसंस्कृतियाँ होती हैं। सार्वभौमिक मानव अधिकार सीमा तय करते हैं: फ़र्क का सम्मान हो, इंसान को नुक़सान नहीं।
5. Living space and society
Industrialisation and urbanisation · Transport, ICT and living space · Change in my own region
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- स्थानीय भूगोल: अपने इलाक़े का अध्ययन – स्थानीय भूगोल उस जगह का अध्ययन है जहाँ आप रहते हैं: आपका कस्बा, ज़िला या गृह-क्षेत्र। पूरा विवरण छह सवालों के जवाब देता है: यह कहाँ है (स्थिति), प्रकृति इसे क्या देती है (उच्चावच, जलवायु, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, संरक्षित क्षेत्र), यहाँ कौन और कैसे रहता है (जनसंख्या और बस्तियाँ), लोग कैसे कमाते हैं (अर्थव्यवस्था, रोज़गार, सेवाएँ), पर्यावरण कैसा है और उसकी निगरानी कैसे होती है, और समय के साथ यह सब कैसे बदला। भूगोलवेत्ता ये जवाब क्षेत्र-अध्ययन से ढूँढते हैं: सवाल पूछो, देखकर, नापकर और बातचीत करके आँकड़े जुटाओ, उन्हें नक्शे-चित्र और ग्राफ़ में दिखाओ, और ताक़त, समस्याएँ और सुझाव लिखो।