South 고등학교 2학년 World Citizenship and Geography
अध्याय: 4
1. Global citizens, globalisation and regions
Globalisation at different scales · Regional integration and separation · Geospatial technology for citizens
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- क्षेत्रीय एकीकरण – क्षेत्रीय एकीकरण का मतलब है पड़ोसी देश कदम-दर-कदम एक साथ आते हैं। वे कम कर के साथ व्यापार करते हैं, एक बाज़ार बनाते हैं और कभी-कभी एक मुद्रा और नियम भी साझा करते हैं। उदाहरण: यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), USMCA। इससे सामान सस्ता होता है, पर देशों को कुछ अधिकार छोड़ने पड़ते हैं।
- स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी: जीआईएस (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस) एक कंप्यूटर तंत्र है जो स्थानों के आँकड़ों को संग्रहित करता, जोड़ता, विश्लेषित करता और दिखाता है। यह संसार को परतों में रखता है। इसके लिए हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आँकड़े, लोग और विधियाँ चाहिए। स्थानिक आँकड़े रेखापुंज (कोशिकाओं का जाल) और सदिश (बिंदु, रेखा, बहुभुज) प्रारूपों में होते हैं। आँकड़े अंकीकरण, स्कैनिंग, जीपीएस या उपग्रह चित्रों से डाले जाते हैं और गुण सारणियों से जोड़े जाते हैं। अध्यारोपण परतों को मिलाकर शर्तें पूरी होने की जगह खोजता है; बफ़र किसी वस्तु के चारों ओर तय दूरी का क्षेत्र बनाता है।
2. A mosaic world: natural environments and cultures
World climates and life · Major landforms and human life · World religions and landscapes · Food and festivals geographically
- विश्व के जलवायु प्रदेश – किसी जगह के लगभग 30 साल के मौसम का औसत उसकी जलवायु है। यह मुख्य रूप से अक्षांश (सूरज कितना ऊँचा चढ़ता है), ऊँचाई (हर 1 km पर लगभग 6.5 °C ठंडा), समुद्र से दूरी, पवनों और महासागरीय धाराओं पर निर्भर करती है। कोपेन ने दुनिया को पाँच समूहों में बाँटा: A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C शीतोष्ण, D महाद्वीपीय और E ध्रुवीय, साथ में ऊँचे पहाड़ों पर पर्वतीय (H) जलवायु। मानसून जलवायु में पवनें मौसम के साथ दिशा बदलती हैं।
- प्रमुख भू-आकृतियाँ और उनका बनना – भू-आकृतियाँ ज़मीन के प्राकृतिक रूप हैं: पर्वत, ज्वालामुखी, मैदान, घाटियाँ, डेल्टा, समुद्र तट और गुफाएँ। पृथ्वी के भीतर के बल (प्लेटों की हलचल, ज्वालामुखी) इन्हें बनाते हैं। बाहर के बल (बारिश, नदी, लहरें, हवा, बर्फ़) इन्हें घिसते और टुकड़ों को दूसरी जगह पहुँचाते हैं। लोग इन्हीं के हिसाब से रहने और काम करने की जगह चुनते हैं।
- सांस्कृतिक भूगोल: जगह संस्कृति को और संस्कृति जगह को कैसे गढ़ती है – सांस्कृतिक भूगोल यह पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर संस्कृति कैसे अलग है और कैसे फैलती है. संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीका है: भाषा, धर्म, भोजन, पहनावा, भवन, कला और त्योहार. लोग अपनी संस्कृति के हिसाब से ज़मीन बदलते हैं, जिससे सांस्कृतिक भूदृश्य बनता है. प्राकृतिक पर्यावरण, ख़ासकर जलवायु और समुद्र की नज़दीकी, घर, भोजन और कपड़ों पर असर डालते हैं, पर लोग तकनीक और अपनी पसंद से भी चुनते हैं. मिलते-जुलते गुणों वाले इलाक़े सांस्कृतिक प्रदेश बनाते हैं. संस्कृति किसी केंद्र (हर्थ) से शुरू होकर प्रसार से फैलती है: स्थानांतरण (लोग जाते हैं) या विस्तार (विचार जाता है), जो संक्रामक, पदानुक्रमिक या उद्दीपन प्रकार का होता है. प्रसार से संस्कृति-ग्रहण, आत्मसात्करण, समन्वय और आज वैश्वीकरण होता है.
3. A networked world: population and economy
World population patterns · Food production and consumption · Transnational firms and global economy
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: हर किसी को, हर दिन भोजन – खाद्य सुरक्षा का मतलब है कि हर व्यक्ति को हर समय सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। यह चार स्तंभों पर टिकी है: उपलब्धता (भोजन पैदा हो या आयात हो), पहुँच (लोग उसे ख़रीद या पा सकें), उपयोग (अच्छा पोषण, साफ़ पानी, सुरक्षित पकाना) और स्थिरता (बुरे साल में भी आपूर्ति न टूटे)। दुनिया में भोजन बराबर नहीं बँटा। आबादी, आमदनी और खान-पान बदलने से माँग बढ़ती है, जबकि जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, मिट्टी का कटाव, युद्ध और बर्बादी आपूर्ति घटाते हैं। खाद्य असुरक्षा से भूख, कुपोषण, महँगाई, पलायन और अशांति होती है। सिंचाई, बेहतर बीज, नई तकनीक और बर्बादी घटाकर आपूर्ति बढ़ सकती है, पर लंबे समय के उपाय टिकाऊ और न्यायपूर्ण भी होने चाहिए।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
4. A sustainable world: environment and peace
Energy production and consumption · Global environmental problems · Geopolitical conflicts and peace efforts
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।