Netherlands VWO 5 Social Sciences
अध्याय: 2
1. Formation
Socialisation · Political socialisation · Paradigms on socialisation · Socialisation in a specific context and government policy
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
- राजनीतिक विचारधारा: राजनीति के बड़े सवालों के अलग-अलग जवाब – राजनीतिक विचारधारा लोगों, समाज और राज्य के बारे में जुड़े हुए विचारों का सेट है, साथ में समाज को बनाए रखने या बदलने की योजना। हम राजनीतिक विचार राजनीतिक समाजीकरण से सीखते हैं (परिवार, स्कूल, दोस्त, मीडिया, घटनाएँ)। “वाम” और “दक्षिण” शब्द 1789 की फ़्रांसीसी सभा में बैठने की जगह से आए। मुख्य विचारधाराएँ हैं उदारवाद (व्यक्ति की आज़ादी और अधिकार), रूढ़िवाद (परंपरा, व्यवस्था, धीमा बदलाव) और समाजवाद (समानता, साझा धन)। इनके अलावा नारीवाद, पर्यावरणवाद, अराजकतावाद, बहुसंस्कृतिवाद और राष्ट्रवाद। दो धुरियों वाला मॉडल (अर्थव्यवस्था और आज़ादी-सत्ता) एक रेखा से बेहतर तस्वीर देता है। विचारधाराएँ दलों के घोषणापत्र और नीतियाँ तय करती हैं, और जनमत सर्वेक्षण से इन्हें नापा जाता है।
- समाजशास्त्रीय सिद्धांत: प्रतिमान, विज्ञान, मूल्य और सामाजिक नीति – प्रतिमान (paradigm) समाज को देखने के विचारों का समूह है। सहमति सिद्धांत (प्रकार्यवाद) समाज को साझा मूल्यों से जुड़ी स्थिर व्यवस्था मानता है; संघर्ष सिद्धांत (मार्क्सवाद, नारीवाद) असमान ताक़त वाले समूह देखते हैं; अंतःक्रियावाद रोज़ की क्रियाओं के अर्थ पढ़ता है। प्रत्यक्षवादी प्राकृतिक विज्ञान की तरह आँकड़े लेते हैं; व्याख्यावादी गुणात्मक तरीकों से अर्थ खोजते हैं। समाजशास्त्री बहस करते हैं कि यह विज्ञान है या नहीं और क्या यह मूल्य-मुक्त हो सकता है; शोध सामाजिक नीति को आकार दे सकता है।
2. Relations in an international context
National and international inequality · Power and authority · International conflict and cooperation · Changing power relations · Dutch foreign policy
- सामाजिक विषमता और बहिष्कार के स्वरूप – सामाजिक विषमता का मतलब है कि कुछ समूहों को पैसा, सम्मान और पहचान ज़्यादा मिलती है, और कुछ को कम। यह योग्यता से नहीं, जन्म वाले समूह से तय होता है। सामाजिक बहिष्कार का मतलब है लोगों को समाज के पूरे जीवन से बाहर रखना। इस पाठ में जाति और अस्पृश्यता, जनजाति और आदिवासी संघर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्त्रियों की समानता की लड़ाई और दिव्यांगों के अधिकार आसान शब्दों में समझेंगे।
- सत्ता: उचित शक्ति कहाँ से आती है? – शक्ति दूसरों से काम करवाने की क्षमता है; सत्ता वह शक्ति है जिसे लोग उचित (वैध) मानते हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और शुक्रनीति जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों ने कहा कि शासक दंड (उचित सज़ा), न्याय और बल (रक्षा की ताक़त) से सत्ता बनाए रखता है। आज भारत में सत्ता संविधान से आती है, जो न्याय और सुरक्षा का वादा करता है और हर पद की सीमा तय करता है। नागरिक चुनाव से संस्थाओं को सत्ता देते हैं, और संस्थाएँ उन्हें जवाब देती हैं। सत्ता पारंपरिक, करिश्माई या कानूनी-तार्किक हो सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।