नए सवालों की दुनिया
लगभग 1830 से 1920 के बीच भाप की शक्ति, बिजली, रेलें, तार और फ़ोटोग्राफ़ी फैलीं। शहर बढ़े। अख़बार और सस्ती किताबें बहुत ज़्यादा लोगों तक पहुँचीं। पुरानी मान्यताओं को परखा गया, और बहुत से विचारकों ने कहा: "आइए प्रमाण देखें।" इस समय को अक्सर आधुनिक विज्ञान और संस्कृति का युग कहते हैं।
यह पाठ तीन क्षेत्र साथ-साथ दिखाता है: विज्ञान, साहित्य और कला। हर एक में एक सवाल देखिए: जीव कैसे बदलते हैं, लोग कैसे जीते हैं, और हम कैसे देखते हैं?
डार्विन और प्राकृतिक चयन
चार्ल्स डार्विन (1809–1882) ने बीगल जहाज़ पर दुनिया का चक्कर लगाया (1831–1836)। उन्होंने देखा कि द्वीपों के जानवरों, जैसे गैलापागोस की फ़िंच चिड़ियों, की चोंच के आकार अलग हैं और हर द्वीप के खाने के हिसाब से ठीक बैठते हैं।
1859 में उन्होंने ऑन द ऑरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ छापी। उनका मुख्य विचार है प्राकृतिक चयन:
- एक ही प्रकार के सभी जानवर एक जैसे नहीं होते। कुछ में छोटे अंतर होते हैं (लंबी चोंच, गहरा रंग)।
- बहुत से बच्चे पैदा होते हैं, पर सब नहीं बचते।
- जिनके अंतर उन्हें अपनी जगह में बचने में मदद करते हैं, वे ज़्यादा जीते हैं और ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं।
- वे उपयोगी गुण आगे देते हैं, इसलिए कई पीढ़ियों बाद समूह बदल जाता है।
इसका मतलब है कि प्रजातियाँ स्थिर नहीं हैं; वे बहुत लंबे समय में धीरे-धीरे बदलती हैं। शुरू में कई लोगों ने, कुछ धार्मिक नेताओं समेत, असहमति जताई। आज विकास का विचार जीव विज्ञान की नींव है। शब्दों का ध्यान रखिए: प्राकृतिक चयन में जानवर बदलने की 'कोशिश' नहीं करता, प्रकृति उपयोगी गुण 'बचा लेती' है।
और विज्ञान: मेंडल, क्यूरी और आइंस्टीन
- ग्रेगर मेंडल (एक भिक्षु) ने हज़ारों मटर के पौधे उगाए और पाया कि गुण माता-पिता से संतान में निश्चित ढंग से जाते हैं। उन्होंने 1866 में छापा, पर काम को लगभग 1900 में ही पहचाना गया। उन्हें आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
- लुई पाश्चर ने 1860 के दशक में दिखाया कि सूक्ष्म जीव (जीवाणु) कई बीमारियाँ करते हैं। इससे टीके और साफ़ चिकित्सा आई।
- मैरी और पियरे क्यूरी ने रेडियोधर्मिता पर काम किया और तत्व पोलोनियम और रेडियम खोजे (1898)। मैरी क्यूरी ने अलग-अलग विज्ञानों में दो नोबेल पुरस्कार जीते।
- अल्बर्ट आइंस्टीन (1879–1955): 1905 में उन्होंने प्रकाश को ऊर्जा के पैकेटों के रूप में समझाया (प्रकाश-विद्युत प्रभाव), और विशेष सापेक्षता में दिखाया कि प्रकाश की चाल सबके लिए बराबर है और द्रव्यमान और ऊर्जा E = mc² से जुड़े हैं। 1915 में उनकी सामान्य सापेक्षता ने कहा कि बड़े द्रव्यमान स्थान और समय को मोड़ देते हैं, जिसे हम गुरुत्वाकर्षण के रूप में महसूस करते हैं।
E = mc² में c प्रकाश की चाल है, जो बहुत बड़ी संख्या है, और उसका वर्ग होता है। इसीलिए बहुत छोटा द्रव्यमान बहुत सारी ऊर्जा के बराबर हो सकता है। यह विचार समझाने में मदद करता है कि सूर्य कैसे चमकता है और परमाणु ऊर्जा कैसे काम करती है।
साहित्य: असली जीवन की किताबें
पहले कई मशहूर कहानियाँ राजाओं या नायकों की होती थीं। 1800 के दशक में यथार्थवाद नाम की नई शैली ने साधारण लोगों, काम, पैसे और अन्याय को दिखाया।
- चार्ल्स डिकेंस (इंग्लैंड): ऑलिवर ट्विस्ट (1838) ने शहरों के वर्कहाउस में भूखे बच्चों को दिखाया और पाठकों को ग़रीबी की परवाह करवाई।
- विक्टर ह्यूगो (फ़्रांस): ले मिज़ेराबल (1862) न्याय, दया और ग़रीबों के संघर्ष की कहानी है।
- लियो टॉल्स्टॉय (रूस): युद्ध और शांति (1869) बताती है कि युद्ध परिवारों को कैसे छूता है।
- रवींद्रनाथ टैगोर (भारत): कवि, लेखक और गीतकार। उनकी कविताओं गीतांजलि ने उन्हें 1913 का साहित्य का नोबेल दिलाया, जिससे वे पहले एशियाई विजेता बने।
- कई देशों में लेखक सिर्फ़ दरबार और विद्वानों की भाषा में नहीं, रोज़ की भाषाओं में लिखने लगे।
सस्ती छपाई और बढ़ती साक्षरता से मज़दूर और मध्यम वर्ग के पाठक बने, जो अपने जीवन की कहानियाँ चाहते थे।
कला: देखने के नए ढंग
फ़ोटोग्राफ़ी (1839) किसी चेहरे या गली की हूबहू नक़ल कर सकती थी। चित्रकारों ने पूछा: "कैमरा जो नहीं कर सकता, वह रंग क्या कर सकते हैं?" उनके उत्तर:
- इंप्रेशनिज़्म (पेरिस में पहली समूह प्रदर्शनी, 1874): क्लॉड मोने जैसे चित्रकारों ने रोशनी और गुज़रते क्षण को रंगा, तेज़ ब्रश-स्ट्रोक और चटक रंगों के साथ, अक्सर खुले में।
- उत्तर-इंप्रेशनिस्ट जैसे विन्सेंट वान गॉग और पॉल सेज़ान ने भावना और बनावट दिखाने के लिए रंग और आकार इस्तेमाल किए।
- क्यूबिज़्म (लगभग 1907, पाब्लो पिकासो और ज्यॉर्ज ब्राक): वस्तु को एक साथ कई ओर से, टूटे आकारों में दिखाया जाता है।
- भारत में राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों ने यूरोपीय तैल-चित्रण को भारतीय कथाओं से मिलाया; बाद में बंगाल स्कूल के कलाकारों, जैसे अबनींद्रनाथ टैगोर, ने भारतीय शैलियों की ओर लौटकर देखा।
करके देखिए: अपनी तीन पंक्तियाँ
काग़ज़ पर तीन रेखाएँ खींचिए: विज्ञान, साहित्य, कला। उन पर वर्ष 1831, 1859, 1874, 1905, 1913 रखिए। फिर एक छोटा प्रयोग कीजिए: कटोरे में 12 गोटियाँ रखिए, 3 हरी (मज़बूत चोंच) और 9 लाल (कमज़ोर चोंच)। हर दौर में 3 लाल गोटियाँ निकालिए (वे खा नहीं पाईं) और 3 हरी डालिए (मज़बूत चिड़ियों के बच्चे हुए)। 3 दौर बाद कटोरे में 12 हरी गोटियाँ होंगी। यह प्राकृतिक चयन का छोटा नमूना है। एक वाक्य में बताइए कि हरी गोटियाँ क्यों बढ़ीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्राकृतिक चयन: वह प्रक्रिया जिससे उपयोगी गुण पीढ़ियों में ज़्यादा आम हो जाते हैं
- विकास: जीवों का कई पीढ़ियों में धीरे-धीरे बदलना
- आनुवंशिकता: गुणों का माता-पिता से संतान में जाना (मेंडल)
- रेडियोधर्मिता: कुछ परमाणुओं के केंद्र से ऊर्जा का निकलना (क्यूरी)
- E = mc²: ऊर्जा = द्रव्यमान × प्रकाश की चाल का वर्ग (आइंस्टीन, 1905)
- यथार्थवाद: साधारण जीवन को जैसा है वैसा दिखाने वाला लेखन या कला
- इंप्रेशनिज़्म: रोशनी और क्षण के एहसास की चित्रकला (1870 का दशक)
- क्यूबिज़्म: वस्तु को एक साथ कई ओर से दिखाना (लगभग 1907)
हल किए गए उदाहरण
1. चिड़ियों के नमूने में: अगर 12 में से 3 की चोंच मज़बूत है और खाना सख़्त हो जाए, तो मज़बूत चोंच आम क्यों हो जाती है?
मज़बूत चोंच वाली चिड़ियाँ बीज तोड़ पाती हैं और बच जाती हैं, इसलिए उनके ज़्यादा बच्चे होते हैं। बच्चों को मज़बूत चोंच विरासत में मिलती है। कुछ पीढ़ियों बाद समूह में ज़्यादा चिड़ियों की चोंच मज़बूत होती है।
2. फ़ोटोग्राफ़ी ने चित्रकला को क्यों बदला?
तस्वीरें असली चेहरों और जगहों की हूबहू नक़ल कर सकती थीं। इसलिए चित्रकार उन चीज़ों की ओर गए जो कैमरा आसानी से नहीं दिखा सकता, जैसे रोशनी, भावना और आकारों को देखने के नए ढंग।
3. E = mc² में अगर द्रव्यमान दोगुना हो जाए तो ऊर्जा का क्या होगा?
ऊर्जा भी दोगुनी हो जाएगी, क्योंकि E सीधे m के समानुपाती है (c वही रहता है)।
4. रवींद्रनाथ टैगोर का 1913 का पुरस्कार मील का पत्थर क्यों है?
वे साहित्य का नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई थे। इससे दुनिया ने देखा कि महान साहित्य भारतीय भाषाओं में भी लिखा गया (उन्होंने बांग्ला में लिखा)।
5. मेंडल, डार्विन, आइंस्टीन को 'आनुवंशिकता', 'प्राकृतिक चयन', 'सापेक्षता' से मिलाइए।
मेंडल: आनुवंशिकता। डार्विन: प्राकृतिक चयन। आइंस्टीन: सापेक्षता।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि डार्विन ने कहा इंसान बंदर से आया। उन्होंने कहा कि इंसान और वानरों के साझे पूर्वज बहुत पहले रहे थे।
- यह सोचना कि जानवर जानबूझकर बदलते हैं। प्राकृतिक चयन उन उपयोगी गुणों को बचाता है जो पहले से मौजूद हों; वह इच्छा या कोशिश नहीं है।
- E = mc² को न्यूटन के विचारों से मिला देना। यह 1905 में आइंस्टीन की सापेक्षता से आया।
- यह सोचना कि इंप्रेशनिस्ट चित्र कमज़ोर हुनर की वजह से धुँधले हैं। चित्रकारों ने रोशनी पकड़ने के लिए तेज़ स्ट्रोक जानबूझकर चुने।