दुनिया की नई तस्वीर: भौतिकी
1914 से पहले वैज्ञानिक परमाणु को छोटे सौरमंडल की तरह मानते थे। 1920 के दशक में क्वांटम यांत्रिकी (हाइज़नबर्ग 1925–27, श्रोडिंगर 1926) ने कहा कि सूक्ष्म कण संभावना के नियम मानते हैं: हम केवल यह बता सकते हैं कि इलेक्ट्रॉन कहाँ मिलने की संभावना है।
आइंस्टाइन की सामान्य सापेक्षता (1915) ने कहा कि गुरुत्व पदार्थ द्वारा दिक् और काल का मुड़ना है। 1919 में ग्रहण-अभियान ने सूर्य के पास तारे की रोशनी को अनुमान के मुताबिक़ मुड़ते देखा और आइंस्टाइन विश्व-प्रसिद्ध हो गए। 1922 में रूसी वैज्ञानिक अलेक्ज़ांडर फ्रीडमान ने दिखाया कि समीकरण फैलते ब्रह्मांड की अनुमति देते हैं, और 1929 में एडविन हबल ने पाया कि दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं। 1932 में चैडविक ने न्यूट्रॉन खोजा, और 1938 में हान और स्ट्रासमैन ने यूरेनियम का नाभिक तोड़ा (विखंडन)।
चिकित्सा और प्रौद्योगिकी
- इंसुलिन (1921–22): मधुमेह को इलाज-योग्य बीमारी बनाया।
- पेनिसिलिन (1928 में अलेक्ज़ांडर फ़्लेमिंग ने पहचानी): पहली एंटीबायोटिक; 1940 के दशक में इसे दवा बनाया गया।
- रेडियो, टेलीविज़न और फ़िल्म: पहला नियमित रेडियो प्रसारण 1920 के दशक की शुरुआत में हुआ; टेलीविज़न का प्रदर्शन 1926 में; सवाक् फ़िल्म 1927 में आई।
- यातायात: कुछ देशों में कारें आम हुईं; हवाई जहाज़ों ने महासागर पार किए (लिंडबर्ग, 1927)।
कई देशों ने पढ़ना-लिखना सिखाने के बड़े अभियान भी चलाए। जैसे सोवियत संघ में 1920 के दशक में बड़ा साक्षरता अभियान चला।
जन-संस्कृति: रेडियो, सिनेमा, खेल और जैज़
पहली बार लाखों लोग एक ही पल में एक आवाज़ या संगीत सुन सकते थे (रेडियो) या पर्दे पर एक ही कहानी देख सकते थे (सिनेमा)। इसे जन-संस्कृति कहते हैं। सिनेमा 1927 में मूक से सवाक् हुआ, और चार्ली चैप्लिन जैसे सितारे उभरे। जैज़ संगीत अमेरिका से फैला, और खेल तथा सस्ते अख़बारों ने भी साझा आदतें बनाईं। नेताओं ने भीड़ तक पहुँचने के लिए रेडियो और फ़िल्म का उपयोग सीखा, और कुछ ने प्रचार (एकतरफ़ा संदेश) के लिए भी।
आधुनिक कला और नया लेखन
आधुनिकतावाद यानी पुराने नियम तोड़कर नए रूप आज़माना। युद्ध ने पुरानी व्यवस्था पर भरोसा हिला दिया था, इसलिए बहुत से कलाकार दुनिया की हूबहू नक़ल नहीं करना चाहते थे।
- घनवाद (पिकासो, ब्राक): किसी वस्तु को एक साथ कई ओर से दिखाता है।
- अमूर्त कला (कैंडिंस्की, मालेविच का "काला वर्ग", 1915): केवल आकार और रंग।
- दादा और अतियथार्थवाद (1920 का दशक, दाली): युद्ध और कला के नियमों पर व्यंग्य, फिर सपनों के चित्र।
- बाउहाउस (1919, जर्मनी) और ले कोर्ब्यूज़ियर: आम उपयोग के लिए सादी इमारतें और वस्तुएँ।
- लेखन: जॉयस (यूलिसीज़, 1922) और वुल्फ़ किसी व्यक्ति के विचारों के साथ चलते हैं; काफ़्का उलझी व्यवस्थाओं में खोए लोगों के बारे में लिखते हैं; रेमार्क (1929) युद्ध की एक सैनिक की कहानी सुनाते हैं।
सोवियत संघ और भारत की संस्कृति
सोवियत संघ: 1920 के दशक में कलाकार, कवि और फ़िल्मकार खुलकर प्रयोग करते थे (मायाकोव्स्की, मालेविच, आइज़नस्टाइन)। शिक्षा तेज़ी से फैली। 1930 के दशक की शुरुआत से राज्य चाहता था कि कला पार्टी की सेवा करे; 1934 में लेखक कांग्रेस ने समाजवादी यथार्थवाद को एकमात्र आधिकारिक शैली बना दिया: मज़दूरों और निर्माताओं के यथार्थवादी चित्र, आशा भरे संदेश के साथ। बहुत से प्रयोगशील कलाकारों ने आज़ादी खो दी।
भारत: रवींद्रनाथ टैगोर ने साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीता (1913)। एस. एन. बोस (1924) ने प्रकाश-कणों की गिनती का नया तरीक़ा दिया, जो बाद में बोस-आइंस्टाइन सांख्यिकी कहलाया, और सी. वी. रमन ने रमन प्रभाव खोजा (1928) और 1930 में भौतिकी का नोबेल जीता, विज्ञान में नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भौतिकी: सापेक्षता (1915) · क्वांटम यांत्रिकी (1925–27) · फैलता ब्रह्मांड (हबल 1929) · न्यूट्रॉन (1932) · विखंडन (1938)
- चिकित्सा: इंसुलिन (1921) · पेनिसिलिन (1928)
- जन-संस्कृति: रेडियो (1922 से) · सवाक् फ़िल्म (1927) · टेलीविज़न प्रदर्शन (1926)
- कला: घनवाद · अमूर्त कला (कैंडिंस्की, मालेविच 1915) · अतियथार्थवाद (1924) · बाउहाउस (1919); सोवियत संघ: समाजवादी यथार्थवाद (1934)
- भारत: बोस (1924), रमन प्रभाव (1928, नोबेल 1930)
हल किए गए उदाहरण
1. क्वांटम यांत्रिकी ने परमाणु की तस्वीर में क्या बदला?
पहले के मॉडल में इलेक्ट्रॉन ग्रहों की तरह तय पथ पर चलते थे। क्वांटम यांत्रिकी ने कहा कि हम केवल किसी क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन मिलने की संभावना बता सकते हैं, सटीक पथ नहीं।
2. रेडियो और सिनेमा को "जन-माध्यम" क्यों कहते हैं?
एक प्रसारण या एक फ़िल्म एक ही समय में लाखों लोगों तक पहुँच सकती है, इसलिए वे पूरे देश की साझा रुचि और ख़बरें बनाते हैं, और प्रचार के लिए भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
3. 1914 के बाद बहुत से कलाकारों ने यथार्थवादी चित्र बनाना क्यों छोड़ा?
युद्ध और तेज़ बदलाव ने पुराने नियमों पर विश्वास हिला दिया। कलाकारों के पास चीज़ें हूबहू दिखाने के लिए फ़ोटोग्राफ़ी और फ़िल्म भी थी, इसलिए चित्रकला विचारों, आकारों, रंगों और सपनों की ओर मुड़ी (घनवाद, अमूर्त कला, अतियथार्थवाद)।
4. 1934 में सोवियत कला में क्या बदला?
1920 का दशक खुले प्रयोग का था। 1934 में लेखक कांग्रेस ने समाजवादी यथार्थवाद को आधिकारिक शैली बनाया, इसलिए कला को मज़दूरों और निर्माताओं को यथार्थवादी, आशा भरे ढंग से दिखाना और पार्टी की सेवा करनी थी।
आम गलतियाँ
- यह लिखना कि हबल ने 1915 में खोजा कि ब्रह्मांड की शुरुआत है। हबल (1929) ने फैलाव दिखाया; आइंस्टाइन की सापेक्षता 1915 की है।
- यह कहना कि 1928 में पेनिसिलिन दवा बन गई थी। उसे 1928 में पहचाना गया और 1940 के दशक में उपयोगी दवा बनाया गया।
- घनवाद और अमूर्त कला को मिला देना। घनवाद में वस्तु अब भी दिखती है, कई ओर से; अमूर्त कला में केवल आकार और रंग हैं।
- यह मानना कि 1917 से सारी सोवियत कला एक ही शैली की थी। 1920 के दशक में खुले प्रयोग थे; समाजवादी यथार्थवाद 1934 में आधिकारिक हुआ।