1936 का संविधान
5 दिसंबर 1936 को मंज़ूर हुआ और "स्तालिन संविधान" कहलाया। स्तालिन ने कहा कि समाजवाद बन चुका है, इसलिए नियम बदलने चाहिए।
- मतदान: 18 साल और ऊपर के हर वयस्क को गुप्त, सीधा और बराबर वोट (पहले कुछ वर्गों पर रोक थी)।
- सर्वोच्च सोवियत: दो सदन: संघ का सोवियत और राष्ट्रीयताओं का सोवियत।
- अधिकार: काम, आराम, पढ़ाई, बुढ़ापे में देखभाल, महिलाओं और सभी राष्ट्रों-नस्लों को बराबर अधिकार।
- अनुच्छेद 126: कम्युनिस्ट पार्टी सभी राजकीय और सामाजिक संगठनों की "नेतृत्व करने वाली धुरी" है।
असल में सिर्फ़ पार्टी के मंज़ूर किए उम्मीदवार खड़े होते थे, इसलिए लोग सच में चुन नहीं सकते थे। बोलने की आज़ादी जैसे अधिकार असल में सुरक्षित नहीं थे।
दमन: दिखावटी मुक़दमे और महा आतंक
1 दिसंबर 1934 को लेनिनग्राद में पार्टी नेता सेर्गेई किरोव को गोली मारी गई। स्तालिन ने इसे "दुश्मनों" पर हमले का बहाना बनाया।
- दिखावटी मुक़दमे (1936 से 1938): ज़िनोव्येव, कामेनेव और बुख़ारिन जैसे पुराने बोल्शेविकों ने गढ़े हुए अपराध क़बूल किए। नतीजा पहले से तय था।
- महा आतंक (1937 से 1938) गुप्त पुलिस (NKVD) ने येज़ोव के नेतृत्व में चलाया: लगभग 15 लाख लोग गिरफ़्तार और लगभग 6.8 लाख को गोली। हर इलाक़े के लिए "दुश्मनों" के कोटे तय किए गए।
- सेना: मार्शल तुख़ाचेव्स्की जैसे शीर्ष कमांडर गिरफ़्तार हुए, जिससे सेना कमज़ोर हुई।
- गुलाग: श्रम शिविरों की व्यवस्था; लाखों लोग वहाँ रखे गए।
- 1938 के अंत में आतंक धीमा हुआ और येज़ोव हटाए गए।
ज़्यादातर पीड़ित आम लोग थे, पार्टी नेता नहीं। स्तालिन की मृत्यु के बाद कई को निर्दोष माना गया।
संस्कृति और समाज
राज्य चाहता था कि लेखक, चित्रकार और फ़िल्मकार नया समाज बनाने में मदद करें।
- समाजवादी यथार्थवाद: ऐसी कला जो मज़दूरों, खेतों और नेताओं को आशावान, वीर रूप में दिखाए। 1934 में बने लेखक संघ ने नियम तय किए।
- शिक्षा और साक्षरता: स्कूलों, शाम की कक्षाओं और अभियानों से साक्षरता लगभग आधे लोगों (1926) से लगभग 87 प्रतिशत (1939) हुई।
- सिनेमा, संगीत, खेल: लोकप्रिय फ़िल्में, परेडें और खेल क्लब तेज़ी से फैले।
- नियंत्रण: चर्च और मस्जिदें बंद या सीमित हुईं, और जो लेखक लाइन पर नहीं चले उन्हें चुप करा दिया गया।
- स्तालिन का पंथ: चित्र, गीत और मूर्तियों से उन्हें बुद्धिमान "जनता का पिता" दिखाया गया।
1930 के दशक की विदेश नीति
जर्मनी में हिटलर के सत्ता में आने पर सोवियत संघ ने पहले गठबंधन बनाने की कोशिश की:
- 1934: राष्ट्र संघ में शामिल हुआ।
- 1935: फ़्रांस और चेकोस्लोवाकिया से आपसी मदद की संधियाँ।
- 1936 से 1939: स्पेन के गृहयुद्ध में गणराज्य की मदद की।
- 1938: म्यूनिख़ समझौते में ब्रिटेन और फ़्रांस ने हिटलर को चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा दे दिया और सोवियत संघ को बुलाया ही नहीं। स्तालिन ने अकेला महसूस किया।
- अगस्त 1939: नाज़ी-सोवियत समझौता: एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा, और पूर्वी यूरोप की ज़मीन पर गुप्त सौदा। इससे सोवियत संघ को समय मिला, पर कुछ ही हफ़्तों बाद दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ।
करके देखो
चरण 5 का स्लाइडर चलाओ। हर साल के लिए एक शब्द लिखो: 1934 के लिए "संघ", 1936 के लिए "संविधान", 1937 के लिए "आतंक", 1939 के लिए "समझौता"। फिर स्क्रीन ढककर पाँच शब्दों की कड़ी बोलो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1934: किरोव की हत्या; राष्ट्र संघ; लेखक संघ
- 5 दिसंबर 1936: नया संविधान (स्तालिन संविधान)
- 1937 से 1938: महा आतंक, लगभग 15 लाख गिरफ़्तार
- समाजवादी यथार्थवाद = मज़दूरों और राज्य की प्रशंसा वाली कला
- गुलाग = श्रम शिविरों की व्यवस्था
- 1938: म्यूनिख़ समझौता (USSR बाहर)
- 23 अगस्त 1939: नाज़ी-सोवियत समझौता
हल किए गए उदाहरण
1. 1936 के संविधान के दो अधिकार लिखो और बताओ कि असल में वे कमज़ोर क्यों थे।
संविधान ने काम और शिक्षा का अधिकार और 18 साल पर बराबर गुप्त वोट दिया। असल में एक ही पार्टी की सूची दी जाती थी और अनुच्छेद 126 ने पार्टी को नेतृत्व करने वाली ताक़त बनाया, इसलिए वोटर के पास असली चुनाव नहीं था और आज़ादियाँ अनदेखी हो सकती थीं।
2. 1937-38 में लगभग 15 लाख गिरफ़्तार और लगभग 6.8 लाख को गोली लगी। गिरफ़्तार लोगों में से कितने प्रतिशत को गोली लगी?
680,000 ÷ 1,500,000 ≈ 0.45, यानी लगभग 45 प्रतिशत।
3. पहले साथी ढूँढने के बाद 1939 में सोवियत संघ ने जर्मनी से समझौता क्यों किया?
1938 के म्यूनिख़ के बाद पश्चिमी शक्तियों ने सोवियत संघ को बाहर रखा, इसलिए स्तालिन को उनकी मदद पर शक हुआ। समझौते ने कुछ समय शांति का वादा किया और समय तथा अतिरिक्त ज़मीन दी। इसने 1941 में जर्मनी का हमला नहीं रोका।
आम गलतियाँ
- 1936 के संविधान को असली बहुदलीय लोकतंत्र मान लेना। सिर्फ़ पार्टी की सूची खड़ी होती थी।
- दिखावटी मुक़दमों (नेताओं पर सार्वजनिक सजावटी मुक़दमे) और महा आतंक (आम लोगों की बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारी) को उलझाना।
- कहना कि आतंक सिर्फ़ पार्टी नेताओं पर पड़ा। ज़्यादातर पीड़ित आम मज़दूर, किसान और अधिकारी थे।
- यह भूल जाना कि 1939 के समझौते से पहले सोवियत संघ ने 1934-35 में गठबंधन बनाने की कोशिश की थी।